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अमेरिका का दावा- निहत्था नहीं था IRIS Dena, जारी किया फैक्टचेक, क्या अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सही था हमला?

अमेरिकी सेना की यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड @INDOPACOM ने अपने एक्स हेंडल पर फैक्टचेक करके लिखा कि ईरान की यह बात सही नहीं है कि यह जहाज उस समय निहत्था था...

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📍नई दिल्ली | 8 Mar, 2026, 1:57 PM

IRIS Dena attack fact check: हिंद महासागर में ईरानी नौसेना के युद्धपोत IRIS Dena के डूबने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। अमेरिका ने इस घटना को लेकर कहा है कि ईरान का यह दावा गलत है कि जहाज निहत्था था। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह एक सैन्य फ्रिगेट था और युद्ध के नियमों यानी लॉ ऑफ आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट (LOAC) के तहत उस पर हमला करना वैध था। अमेरिका ने यह भी कहा कि हमले के बाद नाविकों को बचाने की योजना बनाई गई थी और श्रीलंका ने बचाव अभियान चलाकर कई लोगों की जान बचाई।

लेकिन ईरान, कुछ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और कानूनी विश्लेषकों ने इन दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिस परिस्थिति में देना वॉरशिप को निशाना बनाया गया, वह कई मायनों में विवादित है। इस घटना ने समुद्री युद्ध के नियमों, अंतरराष्ट्रीय कानून और सैन्य कार्रवाई की सीमाओं को लेकर एक नई बहस शुरू कर दी है। (IRIS Dena attack fact check)

IRIS Dena attack fact check: क्या कहा अमेरिका ने…

अमेरिकी सेना की यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड @INDOPACOM ने अपने एक्स हेंडल पर फैक्टचेक करके लिखा कि ईरान की यह बात सही नहीं है कि यह जहाज उस समय निहत्था था। अमेरिका के अनुसार IRIS Dena एक सैन्य युद्धपोत था और उस पर हथियार मौजूद थे, इसलिए उसे पूरी तरह “अनआर्म्ड” यानी निहत्था बताना गलत है।

अमेरिका ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय युद्ध नियमों, जिन्हें लॉ ऑफ आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट (LOAC) कहा जाता है, के तहत किसी वैध सैन्य लक्ष्य पर हमला करना अनुमति प्राप्त कार्रवाई होती है। उनके अनुसार देना एक सैन्य जहाज था और इसलिए उसे वैध सैन्य लक्ष्य माना जा सकता था। अमेरिका का कहना है कि युद्ध के दौरान दुश्मन देश की सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत संभव है, और इसी सिद्धांत के आधार पर कार्रवाई की गई। (IRIS Dena attack fact check)

अमेरिका ने यह भी दावा किया है कि हमले के बाद नाविकों की जान बचाने के लिए जरूरी कदम उठाए गए थे। अमेरिकी पक्ष के अनुसार इस ऑपरेशन की योजना बनाते समय बचाव से जुड़े पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया था। उन्होंने कहा कि हमले के बाद क्षेत्र में मौजूद एजेंसियों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और श्रीलंका की नौसेना ने बचाव अभियान चलाकर कई नाविकों की जान बचाई।

अमेरिका के अनुसार यह पूरा अभियान अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुरूप था। उनका कहना है कि युद्ध के दौरान भी मानवीय नियमों का पालन करना जरूरी होता है और इसी कारण बचाव अभियान को भी प्राथमिकता दी गई। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि श्रीलंका द्वारा चलाए गए सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन ने कई लोगों की जान बचाई और यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप थी। (IRIS Dena attack fact check)

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IRIS Dena को लेकर अलग-अलग दावे

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जिस समय हमला हुआ, उस समय देना किसी युद्ध अभियान में शामिल नहीं था। उनका कहना है कि यह जहाज भारत द्वारा आयोजित बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास मिलन-2026 में हिस्सा लेने के बाद अपने देश लौट रहा था। इस अभ्यास में कई देशों की नौसेनाएं शामिल होती हैं और जहाज आम तौर पर सहयोग और प्रशिक्षण के उद्देश्य से आते हैं।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि यह जहाज भारतीय नौसेना का “मेहमान” था और अभ्यास खत्म होने के बाद वापस जा रहा था। उनके अनुसार जहाज को बिना किसी चेतावनी के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में निशाना बनाया गया।

भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने भी इसी तरह का बयान दिया। उन्होंने कहा कि जहाज उस समय युद्ध के लिए तैयार स्थिति में नहीं था और वह केवल अपने देश लौट रहा था। (IRIS Dena attack fact check)

कई रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि जहाज तकनीकी रूप से एक युद्धपोत था, लेकिन अभ्यास से लौटते समय वह नॉन-ऑपरेशनल या नॉन-कॉम्बैट कॉन्फिगरेशन में था। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि जहाज पर स्थायी रूप से लगे सिस्टम जैसे डेक गन मौजूद हो सकते थे, लेकिन उस समय वह किसी युद्ध के लिए तैयार नहीं था और संभव है कि उसमें ऑपरेशनल एम्यूनिशन भी न हो।

नेवी सूत्रों का भी कहना है कि ऐसा जहाज जब किसी एक्सरसाइज के लिए जाते हैं, तो वे पूरी तरह से अन-आर्म्ड नहीं होते। हालांकि इस दौरान उनमें पूरी तरह से कॉम्बैट रेडी वेपंस नहीं होते, लेकिन अपनी सुरक्षा को देखते हुए जरूरत के लिहाज से कुछ वेपंस जरूर होते हैं। हालांकि देना ने मिलन एक्सरसाइज के सी फेज में हिस्सा लिया था, जिसमें हथियारों का भी इस्तेमाल किया जाता है। (IRIS Dena attack fact check)

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युद्ध के नियमों के तहत हमला कितना सही

अमेरिका का कहना है कि युद्ध के दौरान किसी भी सैन्य जहाज को वैध लक्ष्य माना जा सकता है। यह सिद्धांत अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत आता है, जिसे लॉ ऑफ आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट कहा जाता है।

लेकिन कई विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में परिस्थिति अलग थी। रिपोर्टों के अनुसार जहाज किसी सक्रिय युद्ध क्षेत्र में नहीं था और वह हिंद महासागर में अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में था। इसके अलावा वह एक बहुराष्ट्रीय अभ्यास से लौट रहा था और उस समय किसी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं था। (IRIS Dena attack fact check)

अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून में दो महत्वपूर्ण सिद्धांत होते हैं- मिलिट्री नेसेसिटी और प्रोपोर्शनैलिटी। इन सिद्धांतों के अनुसार किसी सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए और उससे होने वाला नुकसान आवश्यक सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए।

ईरान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत अमीर सईद इरावानी ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है। उन्होंने कहा कि जहाज को अंतरराष्ट्रीय जल में बिना चेतावनी के निशाना बनाया गया और यह समुद्री नेविगेशन की स्वतंत्रता के सिद्धांत के खिलाफ है।

उनका कहना है कि यह घटना उस समय हुई जब जहाज ईरान के तट से लगभग दो हजार मील दूर था। इस वजह से उन्होंने इसे युद्ध अपराध तक बताया है। (IRIS Dena attack fact check)

श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र को लेकर भी चर्चा

कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि यह घटना श्रीलंका के एक्सक्लूसिव इकॉनॉमिक जोन (ईईजेड) के भीतर हुई। यूएन कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (UNCLOS) के तहत किसी देश को अपने ईईजेड में कुछ आर्थिक और प्रशासनिक अधिकार मिलते हैं। हालांकि यह क्षेत्र पूरी तरह उस देश की संप्रभु सीमा नहीं होता, लेकिन वहां होने वाली गतिविधियों से जुड़े कुछ नियम होते हैं।

इसी वजह से कुछ विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि क्या इस क्षेत्र में किसी तीसरे देश द्वारा सैन्य कार्रवाई करना अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप था या नहीं।

कानूनी विशेषज्ञ मार्को मिलानोविक जैसे विद्वानों का कहना है कि सिद्धांत रूप में किसी सैन्य जहाज को लक्ष्य बनाया जा सकता है, लेकिन पूरे सैन्य अभियान की वैधता को लेकर भी चर्चा जारी है। उनके अनुसार संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत बल प्रयोग के नियमों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

बता दें कि ईईजेड यानी विशेष आर्थिक क्षेत्र की रेंज 200 समुद्री मील होती है। (IRIS Dena attack fact check)

क्या है सैन रेमो मैनुअल

समुद्र में युद्ध से जुड़े नियमों पर चर्चा करते समय कई विशेषज्ञ सैन रेमो मैनुअल का भी उल्लेख करते हैं। यह दस्तावेज समुद्री युद्ध में अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों को स्पष्ट करता है।

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इस मैनुअल के अनुसार समुद्र में किसी जहाज को निशाना बनाने से पहले कई बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए। इसमें लक्ष्य की स्पष्ट पहचान, संभावित नुकसान का आकलन और जहां संभव हो चेतावनी देना शामिल है।

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि अगर कोई जहाज अंतरराष्ट्रीय अभ्यास से लौट रहा हो और किसी सक्रिय सैन्य अभियान में शामिल न हो, तो उस पर हमला करने से भविष्य में खतरनाक उदाहरण बन सकता है। (IRIS Dena attack fact check)

बचाव अभियान को लेकर उठे सवाल

अमेरिका ने कहा है कि हमले के बाद नाविकों को बचाने की योजना बनाई गई थी और श्रीलंका ने बचाव अभियान चलाया। वास्तव में श्रीलंका की नौसेना ने बड़े स्तर पर सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

रिपोर्टों के अनुसार इस अभियान में 32 नाविकों को जीवित बचाया गया और 87 शव समुद्र से बरामद किए गए। बचाए गए लोगों को बाद में अस्पतालों में उपचार के लिए ले जाया गया।

लेकिन इस मामले में एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि हमला करने वाली पनडुब्बी ने बचाव कार्य में कितनी भूमिका निभाई।

दूसरा जिनेवा कन्वेंशन कहता है कि समुद्री युद्ध में शामिल पक्षों को जहाज डूबने के बाद नाविकों को बचाने की कोशिश करनी चाहिए, यदि सैन्य परिस्थितियां इसकी अनुमति दें।

कुछ कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्पष्ट नहीं है कि हमले के बाद पनडुब्बी ने सतह पर आकर बचाव कार्य में हिस्सा लिया या नहीं। रिपोर्टों के अनुसार बचाव अभियान मुख्य रूप से श्रीलंका की नौसेना ने ही चलाया। (IRIS Dena attack fact check)

घटना के बाद बढ़ा कूटनीतिक तनाव

ईरान ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और कहा है कि वह इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाएगा। ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतिबजादेह ने भी इस हमले की आलोचना करते हुए कहा कि इसका गंभीर असर हो सकता है।

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में शामिल जहाजों की सुरक्षा पर सवाल उठते हैं, तो इससे भविष्य में बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यासों पर भी असर पड़ सकता है। (IRIS Dena attack fact check)

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