📍नई दिल्ली | 15 Apr, 2026, 6:05 PM
Indian Navy Commanders Conference 2026: भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी का कहना है कि दुनिया तेजी से बदल रही है और युद्ध का स्वरूप पहले जैसा नहीं रहा। उन्होंने कहा कि पिछले पांच सालों में दुनिया में हालात तेजी से बदले हैं और अब देश प्रतिस्पर्धा के दौर से आगे बढ़कर सीधे टकराव के दौर में पहुंच चुके हैं।
14 अप्रैल से नौसेना भवन में भारतीय नौसेना की तीन दिवसीय कमांडर्स कॉन्फ्रेंस 2026 में बोलते हुए नेवी चीफ ने पश्चिम एशिया के हालात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसी एक क्षेत्र का तनाव अब दूर-दराज के समुद्री रास्तों और व्यापार को भी प्रभावित करता है, इसलिए समुद्री सुरक्षा को लगातार मजबूत रखना जरूरी है।
कॉन्फ्रेंस के पहले दिन अलग-अलग ऑपरेशनल मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें जॉइंटनेस, क्षमता बढ़ाने, मेंटेनेंस, ट्रेनिंग, विदेशी सहयोग और नई तकनीकों को अपनाने जैसे विषय शामिल रहे।
Indian Navy Commanders Conference 2026: पश्चिम एशिया के हालात का असर
कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन संबोधन में नौसेना प्रमुख ने दौरान पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि वहां के अस्थिर हालात का असर समुद्री रास्तों और व्यापार पर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि समुद्र के रास्ते चलने वाले जहाजों की सुरक्षा आज ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि किसी एक क्षेत्र में तनाव होने का असर दूर-दूर तक पड़ता है।
Naval Head ने कहा कि आज समुद्री सुरक्षा का माहौल पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है। कई जगह एक साथ युद्ध जैसी स्थितियां बन रही हैं, विरोधी देशों की क्षमताएं बढ़ रही हैं और नॉन स्टेट एक्टर्स भी अब सस्ती तकनीक के जरिए खतरा पैदा कर रहे हैं। इन सभी वजहों से समुद्र का क्षेत्र अब ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है, जहां हर दिन नई स्थिति का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि आज युद्ध केवल मैदान में नहीं लड़ा जा रहा, बल्कि नैरेटिव वॉरफेयर के जरिए लोगों की सोच और धारणा को भी प्रभावित किया जा रहा है। यानी कौन क्या दिखा रहा है और लोगों को क्या समझाया जा रहा है, यह भी उतना ही अहम हो गया है जितना असली ऑपरेशन। (Indian Navy Commanders Conference 2026)
ऑपरेशनल तैयारियों पर जोर
कॉन्फ्रेंस के पहले दिन नौसेना की ऑपरेशनल तैयारियों पर खास ध्यान दिया गया। नौसेना प्रमुख ने बताया कि पिछले पांच से दस सालों में नौसेना की तैनाती में काफी बढ़ोतरी हुई है। समुद्र की सतह, पानी के नीचे और हवा में काम करने वाली क्षमताओं को लगातार मजबूत किया गया है। इसके लिए नए जहाज, Latest News और एयर सिस्टम शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर, मेंटेनेंस और तकनीकी विकास पर भी लगातार काम किया गया है, ताकि ऑपरेशन के दौरान कोई रुकावट न आए। (Indian Navy Commanders Conference 2026)
बजट का पूरा इस्तेमाल
नौसेना प्रमुख ने यह भी बताया कि उपलब्ध बजट का पूरी तरह उपयोग किया गया है और 90 से ज्यादा कैपिटल कॉन्ट्रैक्ट पूरे किए गए हैं। इसके साथ ही स्वदेशी डिजाइन और निर्माण वाले कई प्लेटफॉर्म को शामिल किया गया है और इस साल 15 से ज्यादा नए प्लेटफॉर्म डिलीवर होने वाले हैं।
समुद्र मार्गों की सुरक्षा में भारत की भूमिका
नौसेना ने हाल के समय में समुद्री मार्गों की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाई है। खासकर फारस की खाड़ी से निकलने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने में नौसेना सक्रिय रही है। नौसेना की मौजूदगी से भारतीय नाविकों और जहाजों को भरोसा मिला है कि जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षा मिलेगी।
कॉन्फ्रेंस में उन्होंने नौसेना की कई अहम गतिविधियों का भी जिक्र किया, जिनमें आईएनएसवी कौंडिन्य की पहली यात्रा, मैरिटाइम महाकुंभ, इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू, मिलन अभ्यास और आईओएनएस कॉन्क्लेव जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने बताया कि आईओएस सागर-2 मिशन में 16 मित्र देशों की भागीदारी ने भारत की वैश्विक स्तर पर विश्वसनीयता को और मजबूत किया है। (Indian Navy Commanders Conference 2026)
नई तकनीक और भविष्य की तैयारियों पर चर्चा
तकनीकी क्षेत्र में हो रहे बदलावों पर बात करते हुए नौसेना प्रमुख ने बताया कि Artificial Intelligence और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों को ऑपरेशनल सिस्टम में शामिल किया जा रहा है, ताकि भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहा जा सके। इन तकनीकों के जरिए जानकारी जुटाने, फैसले लेने और ऑपरेशन को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है। (Indian Navy Commanders Conference 2026)
कॉन्फ्रेंस में उन्होंने उन प्राथमिकताओं का भी जिक्र किया, जिन पर नौसेना आगे काम करेगी। इनमें युद्ध क्षमता को सर्वोच्च स्तर पर बनाए रखना, फोर्स लेवल और क्षमता का विकास, मेंटेनेंस और लॉजिस्टिक्स, नई तकनीकों का उपयोग, मानव संसाधन प्रबंधन, संगठनात्मक लचीलापन और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल शामिल हैं।
इस दौरान सीडीएस अनिल चौहान ने भी नौसेना कमांडर्स को संबोधित किया। उन्होंने बदलते वैश्विक माहौल और युद्ध के नए तरीकों पर बात की। उन्होंने नौसेना से कहा कि वह तेजी से बदलते हालात के हिसाब से अपनी योजना तैयार करे, जिसमें आर्थिक और तकनीकी पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाए। (Indian Navy Commanders Conference 2026)
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