📍New Delhi | 15 Apr, 2026, 7:24 PM
Russian Submarine Anti Drone System: How much the drone has increased in the Modern Warfare is the idea of how it can be planted that traditional weapons are going to entangle to deal with cheap small top attack FPV drones and looting positions. The videos of the Anti-Drone Cope Cage on Tanks and Armored Vehicles will definitely be seen on social media. But now the danger has reached the seaside.
Recent Russia Naval Some of the photographs of the front have appeared in their submarines, which have different security results visible. In these photographs drawn at the Kronstat naval base near St. Petersburg, it looks clear that now the submarines are also being prepared to protect against drone attacks.
These photos show that the way the sea war is changing and the drone is now Latest News As strong weapons have also become threats for systems.
Russian Submarine Anti Drone System: NATO also eats cashiers from the submarines
Russian Navy Two Kg Class Photos of submarines have been taken at the Kronstat naval base near St. Petersburg, where new types of anti-drone defense systems are visible on these submarines.
इस तस्वीर में दो अलग-अलग पनडुब्बियां पहचान में आई हैं। पहली है प्रोजेक्ट 06363 इम्प्रूव्ड किलो क्लास की “मोझाईस्क”, जो नई और आधुनिक पनडुब्बी है। दूसरी है पुरानी प्रोजेक्ट 877EKM किलो क्लास की “दिमित्रोव”, जो 1980 के दशक से सेवा में है।
दोनों ही डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां हैं और अपनी कम आवाज के चलते काफी खतरनाक मानी जाती हैं। इन्हें इतना शांत माना जाता है कि नाटो इन्हें “ब्लैक होल” कहता है, क्योंकि ये आसानी से सोनार पर पकड़ में नहीं आती हैं।
क्या दिखा एंटी-ड्रोन सिस्टम में
तस्वीर में जो सबसे खास चीज दिखी, वह है पनडुब्बियों पर लगाए गए Anti-Drone सिस्टम्स। इनमें एक पेडेस्टल पर लगी हेवी मशीन गन दिखाई देती है, जो संभवतः 12.7 एमएम की एनएसवी मशीन गन है। यह हवा और सतह दोनों तरह के लक्ष्यों पर फायर कर सकती है।
इसके साथ ही नेविगेशन ब्रिज पर सर्चलाइट भी लगाई गई है, ताकि रात में आने वाले ड्रोन को आसानी से देखा जा सके। एक पनडुब्बी पर अतिरिक्त गन माउंट भी तैयार दिखता है, जिससे जरूरत पड़ने पर और हथियार लगाए जा सकते हैं।
दूसरी पनडुब्बी पर एक खास “एंटी-ड्रोन केज” भी दिखाई देता है। यह एक तरह की लोहे की जाली होती है, जो ड्रोन को सीधे संवेदनशील हिस्सों (जैसे पेरिस्कोप, सेंसर या टॉरपीडो ट्यूब्स) तक पहुंचने से रोकने के लिए लगाई जाती है।
पनडुब्बी पर क्या है ड्रोन का खतरा
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। यूक्रेन ने समुद्र में चलने वाले ड्रोन और हवा में उड़ने वाले ड्रोन दोनों का इस्तेमाल किया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, दिसंबर 2025 में एक अंडरवॉटर ड्रोन “सब सी बेबी” ने रूसी पनडुब्बी को नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद से रूस को अपनी नौसेना की सुरक्षा को लेकर ज्यादा सतर्क होना पड़ा है।
इससे पहले सी बेबी सरफेस ड्रोन्स ने सेवस्तोपोल में रूसी बेड़े को परेशान किया था। इन हमलों के बाद रूस को ब्लैक सी फ्लीट की कई पनडुब्बियों को पीछे हटाना पड़ा। यूक्रेन के पास लंबी दूरी के यूएवी, यूएसवी और यूयूवी हैं, जो सस्ते लेकिन घातक हैं।
अब यह खतरा सिर्फ ब्लैक सी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बाल्टिक सागर जैसे क्षेत्रों में भी महसूस किया जा रहा है। यही वजह है कि पनडुब्बियों पर ऐसे फील्ड-लेवल बदलाव किए जा रहे हैं।
कितना असरदार है ये जुगाड़
हालांकि ये एंटी-ड्रोन सिस्टम दिखने में उपयोगी लगते हैं, लेकिन इनकी क्षमता पर सवाल भी उठ रहे हैं। पनडुब्बियां जब पानी के अंदर होती हैं, तब वे सुरक्षित रहती हैं, लेकिन सतह पर या बंदरगाह में वे ज्यादा कमजोर होती हैं।
मैनुअल मशीन गन से छोटे और तेज ड्रोन को निशाना बनाना आसान नहीं होता। ड्रोन कम ऊंचाई पर उड़ सकते हैं या पानी के नीचे से भी आ सकते हैं। ऐसे में सिर्फ मशीन गन और सर्चलाइट से पूरी सुरक्षा मिलना मुश्किल माना जा रहा है।
एंटी-ड्रोन केज कुछ हद तक सुरक्षा दे सकता है, लेकिन अगर एक साथ कई ड्रोन हमला करें, तो यह नाकाफी है।
दरअसल समुद्री युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब सिर्फ बड़े युद्धपोत या पनडुब्बियां ही निर्णायक नहीं हैं, बल्कि छोटे और सस्ते ड्रोन भी बड़ी चुनौती बन चुके हैं। जिसके चलते रूस जैसी बड़ी नौसेना को भी अपनी पनडुब्बियों पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लगाने पड़ रहे हैं।
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