📍जोधपुर | 11 Oct, 2026, 12:01 AM
Operation Sindoor Lessons: भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों को साझा करते हुए सैन्य कार्रवाई के उद्देश्यों, एयर पावर के इस्तेमाल और सही समय पर ऑपरेशन रोकने के महत्व पर जोर दिया है। वहीं, अमेरिकी पैसिफिक एयर फोर्सेज के कमांडर ने कहा कि मौजूदा संघर्षों से मिले अनुभवों को समझना और एक-दूसरे से सीखना जरूरी है। उन्होंने खास तौर पर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, हवाई क्षेत्र की निगरानी और युद्ध के दौरान सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान करने की क्षमता का उल्लेख किया।
Operation Sindoor Lessons: ऑपरेशन सिंदूर से मिला सबसे बड़ा सबक क्या है?
Wave strength एक्सरसाइज 2026 में पत्रकारों से बात करते हुए भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के मुताबिक, किसी भी सैन्य अभियान में सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि कार्रवाई किस उद्देश्य से की जा रही है। ऑपरेशन की योजना बनाते समय यह तय करना जरूरी है कि किन लक्ष्यों को हासिल करना है और उन्हें हासिल करने के लिए एयर पावर का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा।
उन्होंने कहा, “जब आपको यह स्पष्ट होता है कि आप किस उद्देश्य के लिए कार्रवाई कर रहे हैं, तभी आप सही तरीके से, सही जगह पर अपनी क्षमता का इस्तेमाल कर सकते हैं और ऑपरेशन को सही समय पर समाप्त कर सकते हैं।”
एयर चीफ मार्शल ने यह भी बताया कि एयर पावर की भूमिका हर सैन्य अभियान में एक जैसी नहीं होती। इसका इस्तेमाल किस स्तर पर और किस उद्देश्य के लिए किया जाएगा, यह अभियान की जरूरतों पर निर्भर करता है।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन में किस क्षमता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, सबसे पहले किसका इस्तेमाल होना चाहिए और क्या किसी खास परिस्थिति में केवल एक ही प्रकार की क्षमता पर्याप्त होगी, ये सभी फैसले तय उद्देश्यों के आधार पर लिए जाते हैं।
उनके अनुसार, “एयर पावर का इस्तेमाल किस तरह किया जाए, यह परिस्थितियों और उद्देश्यों पर निर्भर करता है। हर अभियान में इसकी प्राथमिकताएं अलग हो सकती हैं।” (Operation Sindoor Lessons)
युद्ध रोकना भी सैन्य रणनीति का हिस्सा
Operation Shifter से जुड़े अनुभवों में सैन्य कार्रवाई समाप्त करने का फैसला भी महत्वपूर्ण है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि जब किसी अभियान के निर्धारित उद्देश्य हासिल हो जाते हैं, तो कार्रवाई को अनिश्चित समय तक जारी रखना जरूरी नहीं होता।
उनके मुताबिक, सैन्य अभियान की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होती कि कितने हमले किए गए या कार्रवाई कितने समय तक चली। यह भी महत्वपूर्ण है कि अभियान के लिए जो लक्ष्य निर्धारित किए गए थे, वे पूरे हुए या नहीं।
उन्होंने कहा कि भारत के मामले में उद्देश्य स्पष्ट थे और लक्ष्य पूरे होने के बाद संघर्ष रोकने का अवसर मिलने पर कार्रवाई समाप्त की गई।
एयर चीफ मार्शल ने इस संदर्भ में अहंकार से दूर रहकर फैसले लेने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि सैन्य फैसले भावनाओं के बजाय तय उद्देश्यों और परिस्थितियों के आधार पर होने चाहिए। (Operation Sindoor Lessons)

अमेरिकी कमांडर ने कहा, एक-दूसरे से सीखना जरूरी
अमेरिकी पैसिफिक एयर फोर्सेज के कमांडर जनरल केविन श्नाइडर ने भी ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े अनुभवों और अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग के महत्व पर बात की।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की बगल में बैठे कमांडर श्नाइडर ने बताया कि अप्रैल 2026 में भारत यात्रा के दौरान उन्हें एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और भारतीय वायुसेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समय बिताने और ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा करने का अवसर मिला था।
जनरल श्नाइडर ने कहा कि किसी एक देश द्वारा किए गए सैन्य अभियान और कई देशों के संयुक्त ऑपरेशन, दोनों से सीखने के अवसर मिलते हैं। बदलते सुरक्षा माहौल में सैन्य बलों को अपनी कार्यप्रणाली और क्षमताओं को लगातार बेहतर बनाना पड़ता है।
उन्होंने कहा, “हम सभी एक-दूसरे से सीखते हैं। चाहे कोई अभियान एक देश ने चलाया हो या कई देशों ने मिलकर किया हो, हमें बदलती सुरक्षा परिस्थितियों के अनुसार अपनी क्षमताओं को विकसित करना और खुद को ढालना पड़ता है।” (Operation Sindoor Lessons)
कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम पर क्यों है जोर?
जनरल केविन श्नाइडर ने आधुनिक युद्ध में कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया। इसमें अलग-अलग सेंसर, रडार, कमांड सेंटर और मिलिट्री युनिट्स से मिलने वाली जानकारी को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाता है।
युद्ध के दौरान केवल दुश्मन की गतिविधियों का पता लगाना पर्याप्त नहीं होता। जरूरी यह भी है कि प्राप्त जानकारी सही समय पर सही कमांडर तक पहुंचे, ताकि वह स्थिति के अनुसार फैसला ले सके।
जनरल श्नाइडर ने सवाल उठाया कि वायुसेना हवाई क्षेत्र की निगरानी कैसे करती है, उस क्षेत्र की पूरी तस्वीर अलग-अलग स्तरों के कमांडरों तक कैसे पहुंचाई जाती है और वॉयस या डेटा के जरिए सूचनाओं का आदान-प्रदान किस तरह होता है।
उन्होंने कहा कि सैन्य नेटवर्क में अलग-अलग कमांड सेंटर और नोड्स होते हैं, जिनके माध्यम से जानकारी आगे बढ़ती है। अगर इनमें से कोई हिस्सा काम करना बंद कर दे या उससे संपर्क टूट जाए, तो भी सूचना का प्रवाह जारी रहना चाहिए।
उन्होंने कहा, “अगर नेटवर्क का कोई हिस्सा कट जाता है, तो हमारे पास ऐसा सिस्टम होना चाहिए जो खुद को संभाल सके और फैसला लेने वाले अधिकारियों तक जानकारी पहुंचाता रहे।”
इस तरह की व्यवस्था को मजबूत और भरोसेमंद कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क बनाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेष रूप से ऐसे समय में, जब इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, साइबर हमलों और संचार बाधित करने की तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। (Operation Sindoor Lessons)
एस-400 की तैनाती पर भारतीय अधिकारी ने क्या बताया?
तरंग शक्ति अभ्यास में एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर पूछे सवाल के जवाब में एक्सरसाइज कमांडर एयर वााइस मार्शल ने स्पष्ट किया कि अभ्यास में केवल सिमुलेशन का इस्तेमाल नहीं किया गया था, बल्कि वास्तविक सिस्टम तैनात किए गए थे।
अधिकारी ने कहा, “वहां कोई सिमुलेशन नहीं था। सभी सिस्टम वास्तविक थे और उन्हें अभ्यास की योजना के अनुसार तैनात किया गया था।”
उन्होंने बताया कि सिस्टम की तैनाती अभ्यास की जरूरतों और उसकी निर्धारित रूपरेखा के आधार पर की गई थी। इसका मतलब यह था कि प्रत्येक सिस्टम को अभ्यास में तय भूमिका और दायरे के अनुसार इस्तेमाल किया गया।
अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि तैनाती का आधार किसी रूसी या अमेरिकी मॉडल की नकल करना नहीं था। इसके बजाय अभ्यास के लिए तय परिस्थितियों के मुताबिक यह निर्धारित किया गया कि किस सिस्टम को किस भूमिका में इस्तेमाल करना है। (Operation Sindoor Lessons)
तरंग शक्ति अभ्यास में जर्मनी ने क्यों लिया हिस्सा?
जर्मनी की भागीदारी पर जर्मन प्रतिनिधि ने कहा कि जर्मनी की इंडो-पैसिफिक रणनीति में इस क्षेत्र की शांति और स्थिरता महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
उन्होंने भारत को जर्मनी का एक मजबूत साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देश अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं। उनके मुताबिक, सैन्य सहयोग द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
जर्मन प्रतिनिधि ने कहा कि अभ्यास में भाग लेने का फैसला इस उद्देश्य से जुड़ा था कि दोनों देशों की वायुसेनाएं एक-दूसरे के साथ काम करने की क्षमता बढ़ा सकें।
उन्होंने बताया कि कितने विमान अभ्यास में भेजे जा सकते हैं, यह जर्मनी की घरेलू सैन्य जिम्मेदारियों और अन्य प्रतिबद्धताओं पर भी निर्भर करता है। (Operation Sindoor Lessons)
Author
Harendra Chaudhary is active in defence journalism and is associated with RakshaSamachar.com. They have long been covering strategic news, defence policies and national security related issues involving Indian Army, Navy and Air Force. In his career of journalism, Harendra has written detailed articles on Parliament’s activities, military campaigns, India-Pak and India-China border dispute, defence procurement and ‘Make in India’ defence projects. They are known for deep understanding and analytical approach of defense cases.





