📍Jodhpur | 10 Oct, 2026, 9:49 PM
Tarang Shakti 2026: Defence Minister Rajnath Singh said that important maritime trade routes, maritime paths and sensitive water pressures in the world are now being used to make military pressure. This makes the international security environment more uncertain. He said addressing the military representatives of various countries in the concluding program of multinational air practice wave power on October 10. During this time he also discussed the appearance of the war changing due to the precise weapons of drones, artificial intelligence, electronic warfare and long distance.
According to the Defence Minister, now military strength cannot be assessed only by the number of fighter jets, warships and missiles. The potential of a country will also decide how quickly it detects the activities of the enemy, how to understand the information available and how fast it takes on its basis.
Tarang Shakti 2026
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग, समुद्री रास्ते और संवेदनशील समुद्री क्षेत्र अब रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बन रहे हैं। दुनिया के कई देशों का व्यापार समुद्री रास्तों पर निर्भर है। तेल, गैस, औद्योगिक सामान और दूसरे जरूरी उत्पादों की सप्लाई भी इन्हीं मार्गों से होती है।
ऐसे में किसी महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट का असर केवल संबंधित देशों की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं।
समुद्र में संकरे रास्तों को जलडमरूमध्य कहा जाता है। इन इलाकों का रणनीतिक महत्व इसलिए अधिक होता है क्योंकि कई बार बड़े समुद्री जहाजों को एक सीमित रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। यहां सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी होने पर व्यापारिक जहाजों की आवाजाही और समुद्री सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
रक्षा मंत्री की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब दुनिया के कई हिस्सों में सैन्य प्रतिस्पर्धा और क्षेत्रीय संघर्ष अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए हैं। (Tarang Shakti 2026)
ड्रोन और मानवरहित सिस्टम ने बदला युद्ध का तरीका
राजनाथ सिंह ने कहा कि मानवरहित सिस्टम और ड्रोन ने सैन्य अभियानों की गति, पैमाने और स्वरूप को बदल दिया है। अब ड्रोन का इस्तेमाल केवल निगरानी या तस्वीरें लेने के लिए नहीं होता, बल्कि इन्हें हमला करने, टारगेट की पहचान करने और सैन्य गतिविधियों की जानकारी जुटाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक युद्ध अब केवल जमीन, समुद्र और हवा तक सीमित नहीं है। इसमें अंतरिक्ष, साइबर स्पेस, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम और सूचना से जुड़े क्षेत्र भी शामिल हो चुके हैं। (Tarang Shakti 2026)

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का किया जिक्र
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की बढ़ती भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एआई मिलिट्री फैसले लेने की प्रक्रिया को बदल रहा है। इसके जरिए बड़ी मात्रा में जानकारी का विश्लेषण करने और कम समय में निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।
आधुनिक युद्ध में अलग-अलग सेंसर, रडार, सैटेलाइट और मानवरहित प्लेटफॉर्म से लगातार डेटा मिलता है। इस जानकारी को तेजी से समझना जरूरी होता है, ताकि कमांडर स्थिति का सही आकलन कर सकें।
लंबी दूरी तक मार करने वाले प्रिसिजन वेपन्स यानी सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों ने भी युद्धक्षेत्र का दायरा बढ़ाया है। ऐसे हथियार निर्धारित टारगेट पर हमला करने के लिए विकसित किए जाते हैं और इन्हें इस्तेमाल करने के लिए टारगेट से बहुत कम दूरी पर पहुंचना हमेशा जरूरी नहीं होता।
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर भी इसी बदलते सैन्य माहौल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें दुश्मन के रडार, कम्युनिकेशन और नेविगेशन सिस्टम को प्रभावित करने या उनसे बचाव करने वाली तकनीकें शामिल होती हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि अब सैन्य ताकत का महत्व केवल हथियारों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से तय होगा कि कोई देश कितनी प्रभावी तरीके से जानकारी जुटा सकता है, स्थिति को समझ सकता है और कार्रवाई कर सकता है। (Tarang Shakti 2026)
आत्मनिर्भरता के साथ दूसरे देशों से सहयोग पर जोर
रक्षा मंत्री ने कहा कि लंबे समय तक चलने वाले युद्ध में कोई भी देश अपने हथियारों और महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए पूरी तरह दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रह सकता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश का उद्देश्य अपनी जरूरतों के मुताबिक हथियारों और तकनीकों को डिजाइन, विकसित, तैयार, मेंटेन और अपग्रेड करने की क्षमता हासिल करना है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता का मतलब दुनिया से अलग होना नहीं है। भारत घरेलू रक्षा उत्पादन बढ़ाने के साथ भरोसेमंद साझेदार देशों के साथ तकनीकी सहयोग को भी महत्वपूर्ण मानता है।
राजनाथ सिंह के मुताबिक, रक्षा क्षेत्र में रिसर्च, संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन, मेंटेनेंस, ट्रेनिंग और इनोवेशन के लिए काफी अवसर मौजूद हैं। भविष्य में रक्षा साझेदारी केवल हथियार खरीदने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि तकनीक, डेटा सिस्टम और मजबूत सप्लाई चेन पर भी आधारित होगी। (Tarang Shakti 2026)

एएमसीए और एयरो-इंजन डेवलपमेंट का किया जिक्र
रक्षा मंत्री ने भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। यह भारत का पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान विकसित करने का कार्यक्रम है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का प्रयास केवल विमान बनाने तक सीमित नहीं है। देश एडवांस एयरो-इंजन तकनीक के विकास और संयुक्त उत्पादन की दिशा में भी काम कर रहा है। लड़ाकू विमान के इंजन का विकास विमानन तकनीक के सबसे जटिल क्षेत्रों में गिना जाता है, क्योंकि इसमें उच्च तापमान, तेज गति, मैटेरियल साइंस और विश्वसनीयता से जुड़ी कई चुनौतियां होती हैं। (Tarang Shakti 2026)
तरंग शक्ति में 40 देशों की भागीदारी
बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास तरंग शक्ति 26 सितंबर से 11 अक्टूबर तक आयोजित किया गया। इसमें 40 देशों के सैन्य प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों ने अपने विमान और सैन्य कर्मी भेजे।
भारतीय वायुसेना ने इस अभ्यास में राफेल, तेजस एमके1 और सु-30एमकेआई जैसे लड़ाकू विमान शामिल किए। अमेरिकी वायुसेना का एफ-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान भी पहली बार भारतीय जमीन पर आयोजित किसी हवाई अभ्यास में शामिल हुआ। फ्रांस ने भी अपने राफेल विमानों के साथ हिस्सा लिया।
अभ्यास में बड़े स्तर पर हवाई मुकाबले, एयर मोबिलिटी, ड्रोन ऑपरेशन, एयर डिफेंस, डायनेमिक टारगेटिंग और कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू जैसी गतिविधियां शामिल थीं। डायनेमिक टारगेटिंग में बदलती परिस्थितियों के अनुसार टारगेट्स की पहचान और उन पर कार्रवाई की योजना बनाई जाती है। कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू का उद्देश्य युद्ध के दौरान संकट में फंसे सैन्य कर्मियों का पता लगाकर उन्हें सुरक्षित निकालना होता है।
अभ्यास को वास्तविक सैन्य परिस्थितियों के करीब रखने के लिए भारतीय वायुसेना ने आसपास के पांच एयरबेस सक्रिय किए। हिस्सा लेने वाली वायुसेनाओं को अलग-अलग टीमों में बांटकर अलग ठिकानों से ऑपरेशन करने का अभ्यास कराया गया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि अलग-अलग देशों की वायुसेनाओं के साथ अभ्यास करने से उनके पायलटों और कमांडरों को एक-दूसरे की तकनीक, ऑपरेशनल प्रक्रियाओं और मिशन प्लानिंग को समझने का मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक और तेजी से बदलते सुरक्षा माहौल में सामूहिक सीख अब केवल उपयोगी नहीं, बल्कि जरूरी हो गई है। (Tarang Shakti 2026)
Author
Harendra Chaudhary is active in defence journalism and is associated with RakshaSamachar.com. They have long been covering strategic news, defence policies and national security related issues involving Indian Army, Navy and Air Force. In his career of journalism, Harendra has written detailed articles on Parliament’s activities, military campaigns, India-Pak and India-China border dispute, defence procurement and ‘Make in India’ defence projects. They are known for deep understanding and analytical approach of defense cases.





