Operation Sindoor vs Balakot Strike: India attacked 9 terrorist bases in Pakistan and Pakistan authorized J&K (POK) under "Operation Shift" on Wednesday. The operation was the response of the terror attack in the wrestling on 22nd April 2025, in which 26 people were killed. Also, it was the decisive action of India against Pakistan-sponsored terrorism of the last two decades, such as Parliament Attack (2001), Mumbai Attack (2008), Uri (2016), and Pulwama (2019). But this operation is different from the Balakot Air Strike of 2019 in many ways. Balakot’s learner made operation shifter more effective and accurate. Let’s know what is the difference between both and what India took lessons from Balakot?
Operation Sindoor vs Balakot Strike: Balakot Strike
On 14th February 2019, a suicide attack on CRPF’s confilation in Pulwama had occurred, with 40 young martyrs. On 26th February 2019, Indian Air Force attacked the panic training camp of Jash-e-Mohammed (JeM) of Balakot in Khabar Pakhtunkhwa province of Pakistan. In this operation Mirage-2000 fighter planes used 1000 kilograms of Spice-2000 bombs, devastating the camp of jaish. India claimed that more than 300 terrorists were killed, although Pakistan rejected it.
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— Raksha Samachar | 🇮🇳 (@RakshaSamachar) May 7, 2019
Balakot Strike showed that India holds zero tolerance policy against terrorism. It was the first time the Indian Air Force entered into Pakistan by crossing the OLC. But in this operation, some challenges were also revealed, which India improved the operation space.
Operation Shifter
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने राफेल, मिराज, मिग-29 औऱ जैगुआर लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया। इस हमले में स्कैल्प क्रूज मिसाइलों औऱ हैमर बमों का इस्तेमाल किया। बुधवार तड़के 1:44 बजे नौ आतंकी ठिकानों पर हमले किए गए, जिनमें बहावलपुर (जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय) और मुरीदके (लश्कर-ए-तैयबा का आधार) शामिल थे। बहावलपुर को राफेल ने निशाना बनाया, तो बाकी आतंकी अड्डों को नेस्तानाबूद करने में मिराज, मिग-29 औऱ जैगुआर लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि इन हमलों में 90 से अधिक आतंकी मारे गए और 60 से ज्यादा घायल हुए। हालांकि बालाकोट की तरह इस हमले में भी किसी भी पाकिस्तानी सैन्य ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया।
बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर में क्या है अंतर
बालाकोट में मिराज-2000 विमानों ने एक बड़े आतंकी शिविर को निशाना बनाया, लेकिन हमले के बाद पाकिस्तान ने नुकसान को कम करके दिखाया। जबकि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने 9 ठिकानों को निशाना बनाया। स्कैल्प मिसाइलों ने छोटे-छोटे ठिकानों को भी सटीकता से नष्ट किया। इसके अलावा भारत ने इस बार ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी का भी बेहतर इस्तेमाल किया, जिससे खुफिया जानकारी अधिक विश्वसनीय थी।
बालाकोट स्ट्राइक के बाद भारत ने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों को जानकारी दी, लेकिन कुछ देशों ने इसकी आलोचना की थी। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पहले से ही वैश्विक समुदाय को भरोसे में लिया। हमले के तुरंत बाद अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, चीन और सऊदी अरब को कार्रवाई की जानकारी दी गई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के 25 अप्रैल के बयान, जिसमें आतंकवादियों को जवाबदेह ठहराने की बात थी, को भारत ने अपने पक्ष में इस्तेमाल किया।
इसके अलावा सबसे बड़ी बात यह कि बालाकोट स्ट्राइक का उद्देश्य आतंकियों को चेतावनी देना था, लेकिन इसका दायरा सीमित था। ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल पहलगाम हमले का जवाब दिया, बल्कि दो दशकों के आतंकवाद का हिसाब भी लिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाए गए 1 मिनट 40 सेकंड के वीडियो ने 2001 से 2025 तक के हमलों को सबसे सामने रखा, जिससे भारत ने वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान को बेनकाब किया।
इस बार तुरंत सामने रखे सबूत
बालाकोट के बाद सबूतों की मांग ने सरकार को बैकफुट पर ला दिया था। विपक्ष ने सवाल उठाए, और पाकिस्तान ने प्रचार किया कि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पहले ही सबूत तैयार रखे। हमले के कुछ घंटों बाद ही प्रेस विज्ञप्ति और सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में सैटेलाइट तस्वीरें और वीडियो पेश किए गए। इससे न केवल विपक्ष के सवालों को ऑपरेशन की सफलता पर सवाल उठाने का मौका ही नहीं मिला, साथ ही वीडियो और फोटोग्राफ के जरिए पाकिस्तान के झूठ को भी बेनकाब किया गया।
सटीक खुफिया जानकारी
बालाकोट में खुफिया जानकारी पर कुछ सवाल उठे थे, क्योंकि पाकिस्तान ने नुकसान को कम करके दिखाया था। साथ ही उस समय हमारे पास सीधे विजुअल्स नहीं थे। जिससे पाकिस्तान स्ट्राइक की सफलता पर सवाल उठा रहा था। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (एनटीआरओ), रॉ, और सैन्य खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय किया। सैटेलाइट इमेज और ड्रोन ने ठिकानों की सटीक जानकारी दी, जिससे हमले अधिक प्रभावी हुए।
मीडिया और जनता को विश्वास में लिया
बालाकोट में सबूतों की देरी ने विपक्ष और पाकिस्तान को सवाल उठाने का मौका दिया। बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद भारत सरकार की ओर से आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस 26 फरवरी 2019 को दोपहर में हुई थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश सचिव विजय गोखले ने स्ट्राइक के बारे में जानकारी दी थी, लेकिन सार्वजनिक रूप से कोई ठोस सबूत, जैसे सैटेलाइट तस्वीरें, ड्रोन फुटेज, या वीडियो, नहीं दिखाए थे। गोखले ने बताया था कि भारतीय वायुसेना ने खैबर पख्तूनख्वा के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविर पर सटीक हमला किया, जिसमें “बड़ी संख्या में आतंकी, प्रशिक्षक, और कमांडर” मारे गए। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर की गई थी, जिसके अनुसार जैश भारत में और हमले की योजना बना रहा था। हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में केवल मौखिक बयान दिए गए, और कोई दृश्य सबूत (जैसे तस्वीरें या वीडियो) साझा नहीं किए गए। इसकी वजह से पाकिस्तान और भारत के कुछ विपक्षी दलों ने सबूतों की मांग की थी।
वहीं, ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने तथ्यों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। वीडियो और खुफिया जानकारी साझा करके सरकार ने जनता का भरोसा जीता।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने बालाकोट की कमियों को सुधारकर ऑपरेशन सिंदूर को एक मॉडल ऑपरेशन बनाया। रक्षा विशेषज्ञ राहुल बेदी ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य और कूटनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है। यह दिखाता है कि भारत अब पहले से ज्यादा तैयार और आत्मविश्वास से भरा है।”
Operation Sindoor: A response to 20-year-old landmarks, shake the roots of panic!
ऑपरेशन सिंदूर को देश भर में समर्थन मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारे सैनिकों ने आतंकियों को उनके घर में घुसकर सजा दी। यह भारत की नई ताकत है।” कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने भी सेना की कार्रवाई की सराहना की। खड़गे ने कहा, “आतंकवाद के खिलाफ भारत एकजुट है।”
























