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NavIC Powers Operation Sindoor: How did the navigator work in the operation center? BrahMos Shows Way, Pakistan Gets Roasted

NavIC Powers Operation Sindoor: Guides BrahMos, Devastates Pakistan
NavIC Powers Operation Sindoor: भारत ने हाल ही में पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के जरिए एक ऐसी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसने न केवल पाकिस्तान की सैन्य ताकत को झकझोर दिया। इस ऑपरेशन में भारत की ब्रह्मोस मिसाइल ने इतनी सटीकता के साथ पाकिस्तान के एयरबेसों पर हमला किया कि पूरा पाकिस्तान का हुक्मरान घुटनों के बल आ गया। इस ऑपरेशन में भारत के अपने बनाए नाविक (Navigation with Indian Constellation-Navic) सिस्टम और Integrated Air Command and Control System ने कमाल कर दिखाया। इसने दिखाया कि भारत अब न सिर्फ अपने दम पर दुश्मन को जवाब दे सकता है, बल्कि अपनी टेक्नोलॉजी से दुनिया को चौंका भी सकता है। आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि नाविक ने इसमें क्या रोल निभाया।

NavIC Powers Operation Sindoor : नाविक (Navic) है?

नाविक भारत का अपना नेविगेशन सिस्टम है, जिसे इसरो (Indian Space Research Organisation) ने बनाया है। ये वैसा ही है जैसे अमेरिका का जीपीएस (GPS), रूस का ग्लोनास (GLONASS), या चीन का बेइदोउ (Beidou)। लेकिन नाविक खास है क्योंकि ये पूरी तरह भारत में बना है और भारत के आसपास 1,500 किलोमीटर तक बेहद सटीक लोकेशन बताता है।

के.एल. विलेन, जो एलिना जियो कंपनी के फाउंडर हैं, उन्होंने बताया, “नाविक एक ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम है, जो जीपीएस की तरह काम करता है। लेकिन ये इंडियन सिस्टम है, जिसमें 9 सैटेलाइट्स हैं। ये L5 और S-बैंड सिग्नल देता है, और जल्दी ही L1 बैंड भी देगा। इससे हमें 1 मीटर तक की सटीक लोकेशन मिलती है।”

जीपीएस आमतौर पर 10 मीटर तक सटीक होता है, लेकिन नाविक 1 मीटर या उससे भी कम की सटीकता देता है। यानी अगर आपको किसी चीज का सटीक पता करना है, तो नाविक उसका बिल्कुल सही ठिकाना बता देता है। ये सिस्टम अफ्रीका से ऑस्ट्रेलिया तक और 40 डिग्री उत्तर से 40 डिग्री दक्षिण तक काम करता है। विलेन ने कहा, “हमने पेरिस, लंदन, मॉरिटानिया, और ऑस्ट्रेलिया में भी नाविक की टेस्टिंग की है। हर जगह ये शानदार काम करता है।”

ऑपरेशन सिंदूर में क्या हुआ?

ऑपरेशन सिन्दूर एक छोटा लेकिन बहुत पावरफुल सैन्य ऑपरेशन था, जो सिर्फ 4 दिन यानी 96 घंटे तक चला। इसका मकसद था पाकिस्तान के आतंकवाद को खत्म करना और उसकी परमाणु धमकियों को बेकार करना। पाकिस्तान हमेशा से ये कहता रहा कि अगर भारत ने उसके खिलाफ कुछ किया, तो वह परमाणु हथियार (न्यूक्लियर वेपन्स) इस्तेमाल करेगा। लेकिन इस बार भारत ने उसकी इस धमकी को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।

मेजर जनरल (रि.) राजीव नारायण ने कहा, “पाकिस्तान हमेशा अपनी न्यूक्लियर छतरी के नीचे आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा। वो सोचता था कि दुनिया उसकी न्यूक्लियर धमकी से डर जाएगी। लेकिन इस बार हमने उसकी धमकी को खत्म कर दिया।”

मेजर जनरल (रि.) राजीव नारायण ने कहा, भारत ने पाकिस्तान के दो बड़े न्यूक्लियर वेपंस स्टोरेज वाले ठिकानों किराना हिल्स और चगाई हिल्स पर सटीक हमले किए। इन हमलों के बाद वहां 4.0 और 5.7 रिक्टर स्केल की सिस्मिक गतिविधियां दर्ज हुईं। इसका मतलब है कि वहां न्यूक्लियर मैटेरियल में कुछ रिसाव (रेडियोलॉजिकल लीक) हुआ। मेजर जनरल नारायण ने बताया, “किराना हिल्स में 5-7 टनल्स थीं, जिनमें से हमने 5 को सील कर दिया। चगाई हिल्स में भी हमने स्टोरेज को हिट किया। अब वहां रेडिएशन की वजह से कोई 1000 साल तक नहीं जा सकता।”

भारत ने एक ही रात में पाकिस्तान के 11 बड़े एयरबेस को नष्ट कर दिया। इनमें जैकबाबाद भी शामिल था, जहां पाकिस्तान के F-16 विमान रखे थे। ये विमान न्यूक्लियर वेपंस ले जा सकते हैं। मेजर जनरल नारायण ने कहा, “11 एयरबेस को हमने पूरी तरह बेकार कर दिया। उनकी एयरफोर्स अब कुछ नहीं कर सकती।”

नाविक ने कैसे किया कमाल

नाविक ने इस ऑपरेशन में सबसे बड़ा रोल निभाया। इसकी 1 मीटर की सटीकता की वजह से भारत की ब्रह्मोस मिसाइल, ड्रोन, और तोपखाने ने दुश्मन के ठिकानों को बिल्कुल सटीक निशाना बनाया। केएल विलेन ने बताया, “नाविक की मदद से हम 50 किलोमीटर दूर 3×2 फीट के छोटे से दरवाजे को भी हिट कर सकते हैं। हमारी मिसाइल्स और ड्रोन्स को फ्लाइट में रीयल-टाइम लोकेशन डेटा मिलता है, जिससे वो बिल्कुल सही टारगेट पर जाती हैं।”

आकाशतीर को दी ताकत

इस ऑपरेशन में भारत की स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम आकाशतीर ने भी कमाल किया। ये सिस्टम S-400, MR-SAM (इजरायल के साथ मिलकर बनाया), और स्वदेशी ड्रोन्स के साथ जुड़ा था। आकाशतीर ने दुश्मन के हवाई हमलों को रोका और भारतीय हथियारों को सही टारगेट तक पहुंचाया। मेजर जनरल नारायण ने कहा, “आकाशतीर ने दुनिया को चुप करा दिया। ये दिखाता है कि हमारी पुरानी गन्स को भी अपग्रेड करके मॉडर्न वॉर में इस्तेमाल किया जा सकता है।”

इस ऑपरेशन में इस्तेमाल हुए सारे बड़े उपकरण नाविक, आकाशतीर, ड्रोन, और मिसाइल्स भारत में बने थे। मेजर जनरल नारायण ने गर्व से कहा, “इस पूरे सिस्टम में एक भी चीज विदेशी नहीं थी। ये है ट्रूली आत्मनिर्भर भारत।”

पाकिस्तान की हालत क्यों खराब हुई?

ऑपरेशन सिन्दूर ने पाकिस्तान को हर तरह से तोड़ दिया। मेजर जनरल नारायण ने बताया, “पाकिस्तान के पास अब न फ्यूल बचा है, न गोला-बारूद। उनकी आर्मी पूरी तरह टूट चुकी है।” पाकिस्तान के 11 एयरबेस नष्ट हो गए। उसकी एयरफोर्स अब कुछ नहीं कर सकती। न्यूक्लियर स्टोरेज साइट्स को नुकसान पहुंचा, जिससे उसकी परमाणु ताकत कमजोर हो गई है। उन्होंने कहा, पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। अब उसके पास सैन्य ऑपरेशन्स चलाने के लिए पैसे नहीं हैं। उसने अमेरिका और चीन से मदद मांगी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। मेजर जनरल नारायण ने कहा, “चीन ने साफ मना कर दिया। अमेरिका के प्लेन्स आए, लेकिन वो सिर्फ टोही उड़ान भर रहे थे। कोई मदद नहीं मिली।”

मेजर जनरल नारायण के अनुसार, अमेरिका और चीन के डिफेंस सिस्टम्स को भी नाकामी का सामना करना पड़ा। अमेरिका के प्रोटेक्शन सिस्टम्स चगाई हिल्स में फेल हो गए। चीन के सिस्टम भी कुछ नहीं कर पाए।

नाविक का इस्तेमाल कहां-कहां?

नाविक सिर्फ आर्मी के लिए नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी बहुत काम का है। के.एल. विलेन ने बताया कि इसका इस्तेमाल कई जगह हो सकता है। जैसे ड्रोन से सटीक कीटनाशक छिड़काव, जमीन के नक्शे बनाने और प्रॉपर्टी विवाद सुलझाने में, गाड़ियों की ट्रैकिंग और नेविगेशन के अलावा 5G और 6G नेटवर्क के लिए सटीक टाइम सिग्नल में भी इसका यूज हो सकता है।

विलेन ने कहा, “अगर नाविक को सही से इस्तेमाल करें, तो हम 50 फीसदी तक वेस्टेज बचा सकते हैं और 30 फीसदी से ज्यादा आउटपुट पा सकते हैं।”

ऑपरेशन सिंदूर ने दिए भारत को कई बड़े सबक

के.एल. विलेन के मुताबिक, नाविक में और सैटेलाइट्स जोड़ने की जरूरत है। “हमें 11 सैटेलाइट्स चाहिए, ताकि L1, L5, और S-बैंड मिलकर और बेहतर कवरेज दें।” के.एल. विलेन ने भी जोड़ा, “नाविक आज दुनिया का सबसे बेहतर नेविगेशन सिस्टम है। अगर हम इसे पूरी तरह अपनाएं, तो भारत की ताकत और दोगुनी हो जाएगी।” साथ ही, भारत को अपने डिफेंस इंडस्ट्री में और पैसे लगाने होंगे। मेजर जनरल नारायण ने कहा, “हमारी डिफेंस इंडस्ट्री ने दिखा दिया कि अगर इच्छा हो, तो रास्ता निकल आता है।”

नाविक सिस्टम को करें और मजबूत

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इस साल 29 जनवरी को NVS-02 सैटेलाइट लॉन्च किया था। इसका मकसद पुराने IRNSS-1E सैटेलाइट को रिप्लेस करना और नाविक (Navigation with Indian Constellation) सिस्टम को और मजबूत करना था। लेकिन एक तकनीकी खराबी (पायरो वाल्व में दिक्कत) की वजह से ये सैटेलाइट अपने सही ऑर्बिट (Geostationary Orbit) तक नहीं पहुंच सका और Geostationary Transfer Orbit (GTO) में अटक गया।

2015 से 2018 तक इसरो के पूर्व चेयरमैन रहे ए.एस. किरण कुमार ने इस असफलता, नाविक सिस्टम की मौजूदा स्थिति के बारे में कहा, “हम NVS-02 सैटेलाइट का इस्तेमाल दिन में कुछ घंटों के लिए कर रहे हैं। भले ही ये अपने पूरे मकसद को पूरा नहीं कर पाया, लेकिन अगले 10 साल तक ये काम कर सकता है। हम नाविक को और बेहतर करने के लिए काम कर रहे हैं। जल्द ही NVS-03 और NVS-04 सैटेलाइट्स लॉन्च होंगे।”

उन्होंने बताया कि नाविक का पूरा सिस्टम तैयार करने की जरूरत है, ताकि भारत की नेविगेशन क्षमता और मजबूत हो।

स्मार्टफोन में हो सकता है यूज

क्या नाविक को स्मार्टफोन्स में इस्तेमाल किया जा सकता है? इस सवाल पर किरण कुमार ने जवाब दिया, “आज कई स्मार्टफोन्स में नाविक का सपोर्ट है। भारत ने नए मोबाइल फोन्स में नाविक सिग्नल्स का सपोर्ट अनिवार्य कर दिया है। अगर आप भारत में हैं या इसके 1,500 किलोमीटर के दायरे में, तो आपका फोन नाविक का इस्तेमाल कर सकता है।”

उन्होंने कहा कि नाविक, जीपीएस से अलग है क्योंकि ये भारत का अपना सिस्टम है और खास तौर पर भारत और आसपास के इलाकों के लिए बनाया गया है। ये ज्यादा सटीक है और 24 घंटे कवरेज देता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीटिक में भी कारगर

किरण कुमार ने नाविक की राष्ट्रीय सुरक्षा में अहमियत पर जोर देते हुए कहा, “नाविक भारत को एक स्वतंत्र नेविगेशन सिस्टम देता है, जो विदेशी सिस्टम्स पर निर्भर नहीं है। ये खासकर रणनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से बहुत जरूरी है।” उन्होंने बताया कि नाविक सैटेलाइट्स के सिग्नल्स से जमीन पर मौजूद डिवाइसेज अपनी सटीक लोकेशन पता कर सकती हैं। ये सैन्य ऑपरेशन्स, ड्रोन नेविगेशन, और मिसाइल टारगेटिंग के लिए बहुत काम आता है।

Pakistan Air Defence: Weapons of India’s victory over 2022 of the Pak Air Defense! Why did the operation fail next to the Brahmaos in Sindoor?

क्या नाविक को सार्क देशों के साथ कूटनीति के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है? इस सवाल पर किरण कुमार ने कहा, “नाविक का ‘क्षेत्रीय’ मतलब है भारत की सीमा से 1,500 किलोमीटर का दायरा। इस इलाके में कोई भी नाविक-सपोर्टेड डिवाइस लोकेशन सर्विस दे सकती है। नाविक के सैटेलाइट्स जियोस्टेशनरी हैं, यानी वो हमेशा एक ही जगह रहते हैं। इससे 24/7 कवरेज मिलता है और सटीकता बढ़ती है।” उन्होंने बताया कि भारत इस सिस्टम को अपने पड़ोसी देशों के साथ शेयर कर सकता है, जिससे क्षेत्रीय सहयोग बढ़ेगा।

Operation Sindoor attack: When ‘Dil’ and ‘Dymond’ hurts, Pakistan swayed from the US – Trahi Mam-Trahi Mam

Operation Sindoor attack: IAF Strikes Pindi, Forces Pak to Seek US Help

Operation Sindoor attack: In the morning of May 10, 2025, when Indian Air Force (IAF) attacked 11 large airbases of Pakistan, the entire South Asia Haran remained. In these attacks, the Stratgeic Airbase, such as Chakla (Nur Khan), Sargodha and Jacobabad, near Ravalpindi, was targeted. These attacks shocked Pakistan’s military strength that their Army Chief General Assym Monir had to say ‘Trahi Mam-Trahi Mam’ from US Foreign Minister Marco Rubio. He sought help to reduce stress with India. The action of the Indian Army not only highlighted Pakistan’s air defense system, but also cleaned the difference of the military strength of both countries.

Operation Sindoor Attack: Initiated Attack All

The story started from the terror attack in Jammu and Kashmir’s wrestling on 22nd April 2025. 26 people were killed in the attack, in which most were tourists. India attributed the attack to Laskar-e-Taiba’s Shadeo Organization ‘The Resistance Front’ (TRF) and Pakistan behind it. In response, India launched ‘Operation Centre’ on 7th May. In this operation, 9 terrorist bases were devastated in Pakistan and PoK (Pakistan Occupid Kashmir). These were the large camps of Jash-e-Mohammed and Lashkar-e-Taiba, which were responsible for the folds such as the 2008 Mumbai attack and the 2019 Pulwama attack.

Pakistan responded to the drone and missile attack on India between 8 to 10 May. He targeted places like school and hospital in Srinagar, Avantipur and Udhampur. India told it "Ghatia and Wrong". In response, the Indian Air Force in the morning of May 10 attacked Brahmos missiles and scalp cruise missiles on the 11 airbase of Pakistan. These included Chaklala (Nur Khan), Sargodha, Jacobabad, Bholari, Rafiaki, Murid, Rahim Yaar Khan, Sakkar, Challenges, Sialkot and Skardu.

Heart and Diamond Injury

The sources pointed out that these attacks were not just accountable actions. It was a big plan to show Pakistan as its military strength. Chaklala in Ravalpindi (Nur Khan) Airbase, which is just 10 kilometres away from Islamabad, is extremely important for the Air Force of Pakistan, also known as the heart of Pak Air Force. Plains with large transport planes, refueling planes and radar systems are placed here. The Airbase is the Behaz Stratgeic for Pakistan’s air defense and planning. The Indian attack caused heavy damage to the runways, hangers and trains here. This led to a tremendous blow to Pakistan’s air force.

Sargodha’s Mushaf Airbase, which is the Diamond Air Base of the Pakistani Air Force, was also a major target of Indian attacks. This is why Fighter jets like F-16, JF-17 and Mirage 5 are deployed here. The Airbase is also the Central Command and Training Centre of Pakistan’s Air Force. The satellite photo shows that there were two large pits on the runway here and many hangers left.

राजस्थान के लोंगेवाला से 200 किलोमीटर पश्चिम में स्थित जैकोबाबाद का शाहबाज एयरबेस भी भारतीय मिसाइलों की जद में आ गया। यहां F-16, JF-17 और कुछ हेलीकॉप्टर तैनात थे। ये एयरबेस 2001 में नाटो के अफगानिस्तान मिशन में भी इस्तेमाल किया गया था। भारतीय हमले ने यहां के मुख्य हैंगर को तबाह कर दिया और एयर ट्रैफिक कंट्रोल बिल्डिंग को भी नुकसान पहुंचा।

पाकिस्तान का एयर डिफेंस फेल

भारतीय हमलों ने पाकिस्तान के हवाई डिफेंस को पूरी तरह से बेकार कर दिया। सैन्य सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान के पास इन हमलों का कोई जवाब नहीं था, क्योंकि उनके रडार और डिफेंस सिस्टम काम ही नहीं कर रहे थे। पासरूर और सियालकोट के रडार साइट्स को भी नष्ट किया गया, जिससे उनकी एरियल सर्विलांस की ताकत और कम हो गई। भारतीय वायुसेना के एक सीनियर अफसर औऱ महानिदेशक एयर ऑपरेशंस (डीजीएओ) एयर मार्शल एके भारती ने कहा, “हम चाहते तो पाकिस्तान के हर सैन्य सिस्टम को टारगेट कर सकते थे, लेकिन हमने सिर्फ़ मिलिट्री ठिकानों पर अटैक किया, ताकि आम लोगों को नुकसान न हो।”

मैक्सार और भारत की कावा स्पेस जैसी कंपनियों ने जो सैटेलाइट इमेज शेयर कीं, उन्होंने इन हमलों का असर साफ दिखाया। रहीम यार खान के रनवे पर बड़ा गड्ढा, भोलारी में टूटा हुआ हैंगर और सरगोधा में रनवे पर कई गड्ढे इस बात का सबूत थे कि भारत की टेक्नोलॉजी और मिलिट्री पावर पाकिस्तान से बहुत आगे है।

मार्को रुबियो से लगााई गुहार

एयरबेस पर हुए हमलों के बाद पाकिस्तान में खलबली मच गई। उसी दिन, 10 मई को, पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने नेशनल कमांड अथॉरिटी की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। ये अथॉरिटी उनके न्यूक्लियर हथियारों को मैनेज करती है। चकलाला पर हमला खासतौर पर बेहद खौफनाक था, क्योंकि ये एयरबेस पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों के मैनेजमेंट सेंटर से कुछ ही दूर है। उनके पास 170 से ज़्यादा न्यूक्लियर हथियार हैं। एक विदेशी अखबार ने लिखा, “पाकिस्तान को डर था कि भारत उनकी न्यूक्लियर कमांड को खत्म कर सकता है।”

इसी डर के चलते पाकिस्तान को तुरंत युद्ध रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा। जनरल मुनीर ने मार्को रुबियो से बात की। रुबियो ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी फोन पर बात की। रुबियो ने दोनों देशों से तनाव कम करने और बातचीत शुरू करने को कहा। इसके बाद, पाकिस्तान के मिलिट्री ऑपरेशंस के डायरेक्टर जनरल मेजर जनरल काशिफ अब्दुल्ला ने भारतीय डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई से दोपहर 3:35 बजे बात की और युद्धविराम का सुझाव दिया। भारत ने इसे मान लिया, लेकिन चेतावनी दी कि भविष्य में कोई भी आतंकी हमला, युद्ध माना जाएगा।

यूनाइटेड नेशन में भी भारत ने घेरा

भारत ने सिर्फ़ मिलिट्री एक्शन ही नहीं लिया, बल्कि दुनिया के सामने अपनी बात भी रखी। 16 मई 2025 को, भारतीय टीम ने यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल की सेंक्शंस कमेटी से मुलाकात की। उन्होंने TRF को आतंकी ग्रुप घोषित करने की मांग की और पहलगाम हमले में TRF और पाकिस्तान की भूमिका के सबूत दिए। हालांकि, पाकिस्तान, जो UNSC का टेम्परेरी मेंबर है, और चीन ने इसका विरोध किया। फिर भी, भारत ने अपनी बात मजबूती से रखी।

ऑपरेशन सिंदूर ने बदला मिलिट्री बैलेंस

ऑपरेशन सिंदूर ने भारत-पाकिस्तान के बीच मिलिट्री बैलेंस को पूरी तरह बदल दिया। सूत्रों का कहना है कि ये 1971 के युद्ध के बाद पाकिस्तान पर भारत का सबसे बड़ा मिलिट्री अटैक था। इन हमलों ने पाकिस्तान की 20 फीसदी हवाई ताकत को खत्म कर दिया और ये साफ कर दिया कि भारत अब सिर्फ डिफेंस में नहीं रहेगा। भारत की टेक्नोलॉजी और स्ट्रैटेजी ने पाकिस्तान को दिखा दिया कि वो भारत से मुकाबला नहीं कर सकते।

Operation Sindoor: Why choose India in Pakistan? Scalp Cruise Missiles and Hammer Bombs

ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत ने अपनी मिलिट्री और डिप्लोमैटिक ताकत के जरिए बता दिया कि वह अब सहेगा नहीं, बल्कि जवाब देगा। हालांकि इस सारे मसले की जड़ आतंकवाद है, जो अभी भी जारी है। भारत ने साफ कर दिया कि वो अब कोई आतंकी हमला बर्दाश्त नहीं करेगा। अमेरिका और चीन जैसे देशों की मध्यस्थता के बावजूद, भारत की सख्ती की वजह से ही पाकिस्तान को युद्धविराम के लिए मजबूर होना पड़ा।

Manipur M4 Rifle Recovery: After Kashmir now the M4 Assault Rifle recovered from extremists in Manipur, a large preparation for spreading turbulence in the Northeast

Manipur M4 Rifle Recovery: Militants' Plot to Disrupt Northeast Foiled

Manipur M4 Rifle Recovery: 14 मई 2025 को मणिपुर के चंदेल जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास न्यू समताल गांव में असम राइफल्स ने इस ऑपरेशन में 10 उग्रवादियों को मार गिराया गया। उग्रवादियों के पास से बड़ी मात्रा में हथियारों का जखीरा बरामद किया गया है। खास बात यह है कि जखीरे में उग्रवादियों के पास से पहली बार अमेरिकी M4 राइफल भी बरामद हुई है। यह पहली बार है कि जब पूर्वोत्तर के उग्रवादियों से एम4 असाल्ट राइफल मिली है। पिछले साल अपुष्ट खबरें आईं थी कि यहां के उग्रवादियों के पास एम4 जैसी अत्याधुनिक राइफलें देखी गई हैं। लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई थी। एम4 राइफलें अभी तक जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ के बाद बरामद हुई हैं। जो उन्हें पाकिस्तान सेना की तरफ से उपलब्ध कराई गईं।

Manipur M4 Rifle Recovery: कैसे शुरू हुआ ऑपरेशन?

मणिपुर का चंदेल जिला भारत-म्यांमार सीमा के करीब है, अपनी जटिल भौगोलिक स्थिति और उग्रवादी गतिविधियों के लिए जाना जाता है। खेंगजॉय तहसील में पड़ने वाले न्यू समताल गांव एक पहाड़ी और जंगली इलाका है। यहां 398 किलोमीटर लंबी खुली सीमा हैं, जहां से उग्रवादी हथियारों की तस्करी को अंजाम देते हैं। 14 मई को असम राइफल्स को खुफिया जानकारी मिली कि इस क्षेत्र में कुछ सशस्त्र लोग छिपे हैं।

इस सूचना के आधार पर, असम राइफल्स की एक टुकड़ी ने गश्त शुरू की। जैसे ही जवान न्यू समताल के पास पहुंचे, उन पर सेना की वर्दी पहने उग्रवादियों ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। गोलियों की बौछार के बीच, असम राइफल्स के जवानों ने तुरंत कवर लिया और जवाबी कार्रवाई की। इस गोलीबारी में असम राइफल्स ने 10 उग्रवादियों को ढेर कर दिया। खास बात यह रही कि इस ऑपरेशन में असम राइफल्स का कोई जवान घायल नहीं हुआ।

M4 राइफल बरामद

गोलीबारी खत्म होने के बाद, असम राइफल्स ने इलाके की गहन तलाशी ली। इस दौरान उन्हें हथियारों का एक बड़ा जखीरा मिला, जिसमें सात AK-47 राइफलें, एक RPG लॉन्चर, चार सिंगल-बैरल ब्रीच-लोडिंग (SBBL) राइफलों के अलावा एक M4 राइफल भी बरामद हुई। इसके अलावा, भारी मात्रा में गोला-बारूद, विस्फोटक सामग्री, और सामरिक उपकरण जैसे रेडियो सेट और बैकपैक भी बरामद हुए। अभी तक वहां के उग्रवादियों से AK-47 जैसी राइफलें बरामद होती रही हैं। लेकिन एम4 राइफल का मिलना चौंकाने वाली बात है।

M4 राइफल अमेरिका में कोल्ट द्वारा निर्मित एक अत्याधुनिक असॉल्ट राइफल है। M4 राइफल अमेरिकी सेना का प्रमुख हथियार है और इसे नाइट-विज़न स्कोप या लेजर साइट जैसे उपकरणों के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत के पूर्वोत्तर में इस तरह का अत्याधुनिक हथियार मिलना बेहद चिंताजनक है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह राइफल म्यांमार के रास्ते तस्करी से भारत में लाई गई होगी। म्यांमार में चल रहे गृहयुद्ध ने वहां हथियारों की कालाबाजारी को बढ़ावा दिया है, और वहीं से ये हथियार भारत के उग्रवादी समूहों तक पहुंच रहे हैं। 2024 में मणिपुर पुलिस ने 161 हथियार बरामदगी की घटनाओं की सूचना दी, जिसमें विदेशी मूल के हथियार शामिल थे। सूत्रों का कहना है कि इस बात का पता लगाया जा रहा है कि उग्रवादियों के पास ये एम4 राइफल कहां से आई है। असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस इस राइफल के ऑरिजन और इसके सीरियल नंबर की जांच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मणिपुर के उग्रवादी समूहों ने M4 राइफल को अंतरराष्ट्रीय हथियार डीलरों से खरीदा हो सकता है। यह खरीद म्यांमार के रास्ते हुई हो सकती है, जहां मैतई और कुकी उग्रवादी समूह सक्रिय हैं।

सूत्रों का कहना है, एम4 राइफल मिलने का मतलब यह है कि यहां अब जल्दी शांति नहीं लौटने वाली है। उग्रवादी गुट बड़ी तैयारी कर रहे हैं और यहां अस्थिरता फैलाने की फिराक में हैं। यह इस बाक संकेत हैं कि उग्रवादी समूह अब म्यांमार के जरिए अंतरराष्ट्रीय हथियार बाजारों तक पहुंच बना रहे है। उन्होंने कहा कि अगर यह पहली बार है, तो यह उग्रवादियों की बढ़ती सैन्य क्षमता का संकेत है।

मणिपुर में 2023 में शुरू हुई थी हिंसा

मणिपुर लंबे समय से उग्रवाद और जातीय हिंसा से जूझ रहा है। मई 2023 से मैतई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच हिंसा ने 130 से ज्यादा लोगों की जान ली और 400 से ज्यादा घायल हुए। चंदेल जिला उग्रवादियों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना रहा है। यह इलाका नगा और अन्य आदिवासी समुदायों का गढ़ है। यहां उग्रवादी समूह उगाही, हथियार तस्करी, और सीमा पार हमलों में शामिल रहते हैं।

Opinion: Do I now have access to ‘No Return Point’ Manipur? Or is the new morning expectation of peace and development?

असम राइफल्स ने 2024 में 425 से ज्यादा ऑपरेशन किए, जिनमें 1,000 से अधिक हथियार बरामद हुए। चंदेल और उखरूल जैसे जिलों में अवैध अफीम की खेती को भी नष्ट किया गया। इस साल जनवरी में ही 13 उग्रवादियों को पकड़ा गया और 35 हथियार जब्त किए गए।

Three Brothers Alliance: Why is Pakistan-Turkie-Azarbazan’s growth in India? Read this expert

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Three Brothers Alliance: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान, तुर्किए और अजरबैजान के नापाक गठबंधन का खुलासा हुआ है। जिसके बाद भारत में तुर्किए और अजरबैजान को लेकर विरोध शुरू हो गया है। पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई में तुर्किए का नाम सामने के बाद भारत के कई विश्वविद्यालयों ने वहां की यूनिवर्सिटीज के साथ संबंध तोड़ लिए हैं। इसके अलावा तुर्किए की एविएशन कंपनी सेलेबी से भारत सरकार ने सिक्योरिटी क्लीयरेंस वापस ले लिया है। यह कंपनी दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोचिन, अहमदाबाद, गोवा, और कन्नूर जैसे नौ प्रमुख हवाई अड्डों पर ग्राउंड हैंडलिंग और कार्गो संचालन का काम देखती है। साथ ही कई भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने तुर्किए की यात्रा और वहां के उत्पादों का बहिष्कार करने की अपील की है। मेकमायट्रिप और ईजमायट्रिप जैसी ऑनलाइन ट्रैवल कंपनियों ने बताया कि तुर्किए जाने की बुकिंग्स में भारी गिरावट आई है। वहीं अजरबैजान की बुकिंग्स भी रद्द की गई हैं। तीनों देशों का यह गठबंधन भारत के लिए बड़ी चिंता का विषय है।

Three Brothers Alliance: क्या है और कैसे बना?

थ्री ब्रदर्स अलायंस (Three Brothers Alliance) की शुरुआत 2021 में हुई, जब पाकिस्तान, तुर्किए और अजरबैजान के नेताओं ने अजरबैजान की राजधानी बाकू में एक अहम शिखर सम्मेलन आयोजित किया। इस बैठक में तीनों देशों ने फैसला लिया कि वे अपने राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य रिश्तों को मजबूत करेंगे। इस गठजोड़ का नाम “थ्री ब्रदर्स अलायंस” पड़ा, क्योंकि ये तीनों देश एक-दूसरे को भाई की तरह देखते हैं। इनके बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्ते भी हैं। तुर्किए और अजरबैजान की जड़ें तुर्किक संस्कृति से जुड़ी हैं, वहीं तीनों देश इस्लामिक बहुल हैं।

इस गठबंधन (Three Brothers Alliance) का मुख्य मकसद है कि ये तीनों देश एक-दूसरे के हितों को बढ़ावा दें। मसलन, अगर पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे पर समर्थन चाहिए, तो तुर्किए और अजरबैजान उसकी मदद करेंगे। इसी तरह, अगर अजरबैजान को नागोर्नो-कराबाख विवाद में समर्थन चाहिए, तो पाकिस्तान और तुर्किए उसका साथ देंगे। तुर्किए भी उत्तरी साइप्रस के अपने विवाद में इन दोनों देशों का समर्थन लेता है।

भारत के लिए क्यों बन गया है खतरा?

हाल ही में पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव फिर से बढ़ गया। पिछले महीने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक बड़ा आतंकी हमला हुआ, जिसमें 36 लोग मारे गए और 57 घायल हो गए। भारत ने इसका जवाब ऑपरेशन सिंदूर से दिया औऱ पाकिस्तान को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दियाा। इस दौरान तुर्किए और अजरबैजान ने खुलकर पाकिस्तान (Three Brothers Alliance) का समर्थन किया। तुर्किए ने तो पाकिस्तान को ड्रोन तक दिए, जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया गया। इन ड्रोनों में तुर्किए का मशहूर बायकर बायरक्तर, और एसिसगार्ड सॉन्गर ड्रोन भी शामिल था।

1971 के बाद यह पहली बार था जब भारत और पाकिस्तान (Three Brothers Alliance) के इतने जबरदस्त हमले देखे गए। भारत ने कहा कि पाकिस्तानी गोलाबारी में उसके 16 नागरिक मारे गए, वहीं भारत ने इन हमलों को पहलगाम आतंकी हमले का जवाब बताया। लेकिन पाकिस्तान ने आतंकी हमले में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया। इस तनाव के बीच थ्री ब्रदर्स अलायंस ने भारत के खिलाफ एकजुटता दिखाई, जिससे भारत को चिंतित होना लाजिमी था।

यह गठबंधन (Three Brothers Alliance) भारत के लिए एक बड़ी टेंशन के तौर पर उभर रहा है। खासकर 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने पर तुर्किए ने संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर बार-बार इस मसले को उठाया, औऱ पाकिस्तान का साथ दिया। जिससे भारत की नाराजगी बढ़ी। वहीं, अजरबैजान ने भी पाकिस्तान के कश्मीर रुख का समर्थन किया। इसके अलावा, तुर्किए और अजरबैजान ने पाकिस्तान को सैन्य मदद दी, जैसे ड्रोन, क्रूज मिसाइल और अन्य हथियार, जिससे भारत की सुरक्षा को खतरा बढ़ गया।

इस गठबंधन के पीछे तुर्किए की क्या भूमिका है?

इस गठबंधन की शुरुआत तुर्किए ने की ही थी। तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन अपने देश का प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं। वे इस्लामिक और तुर्किक देशों के साथ गठजोड़ (Three Brothers Alliance) करके अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं। तुर्किए और अजरबैजान के बीच तुर्किक सांस्कृतिक रिश्ते बहुत पुराने हैं। 2020 में जब अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच नागोर्नो-कराबाख को लेकर युद्ध हुआ, तब तुर्किए ने अजरबैजान को सैन्य मदद दी। इस मदद की वजह से अजरबैजान ने आर्मेनिया को हरा दिया। पाकिस्तान ने भी इस युद्ध में अजरबैजान का साथ दिया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ पाकिस्तानी भाड़े के सैनिकों ने अजरबैजान की तरफ से लड़ाई भी लड़ी। इस जीत के बाद इन तीनों देशों ने अपने रिश्तों को और मजबूत किया और थ्री ब्रदर्स अलायंस बनाया।

भारत ने तेज की अपनी कूटनीति

भारत ने इस गठबंधन (Three Brothers Alliance) का मुकाबला करने के लिए अपनी कूटनीति को तेज कर दिया है। भारत ने उन देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत किए हैं, जो इस गठबंधन से परेशान हैं। इनमें आर्मेनिया, ईरान, साइप्रस और ग्रीस जैसे देश शामिल हैं। आर्मेनिया के साथ भारत ने सैन्य सहयोग बढ़ाया है। भारत ने आर्मेनिया को हथियार-स्थान रडार, तोपखाने और रॉकेट लांचर जैसे उपकरण बेचे हैं। जेम्सटाउन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में भारत और आर्मेनिया के बीच 2 बिलियन डॉलर का रक्षा समझौता हुआ था, जिसके बाद आर्मेनिया भारत से सबसे ज्यादा हथियार खरीदने वाला देश बन गया।

लेकिन इससे अजरबैजान नाराज हो गया। अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने पिछले साल भारत से आर्मेनिया को हथियार देना बंद करने की मांग की थी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब भारत में अजरबैजान का विरोध शुरू हुआ तो गुरुवार सुबह 10 बजे, अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर भारत से आर्मेनिया को हथियारों की आपूर्ति बंद करने की मांग की। हालांकि यह पहली बार नहीं हुआ है, पिछले साल अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने भी भारत से ऐसा ही अनुरोध किया था, लेकिन भारत ने इसे ठुकरा दिया था।

वहीं गुरुवार को भी अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच तनाव की खबरें आईं। नागोर्नो-कराबाख क्षेत्र में आज सुबह दोनों देशों की सेनाओं के बीच हल्की झड़प हुई, जिसमें किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। अजरबैजान ने आर्मेनिया पर सीमा उल्लंघन का आरोप लगाया था, वहीं, आर्मेनिया ने इसे खारिज कर दिया।

ईरान भी इस गठबंधन से चिंतित

थ्री ब्रदर्स अलायंस (Three Brothers Alliance) से केवल भारत ही नहीं ईरान भी इस गठबंधन से चिंतित है। ईरान में लाखों अजरी लोग रहते हैं, जो सांस्कृतिक रूप से अजरबैजान से जुड़े हैं। ईरान को डर है कि अजरबैजान इन रिश्तों का इस्तेमाल अलगाववादी आंदोलनों को बढ़ावा देने के लिए कर सकता है। भारत ने ईरान के साथ मिलकर इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर बनाने की बात कही है, जो भारत को ईरान और आर्मेनिया के रास्ते यूरोप से जोड़ता है। इससे भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत हुई है।

भारत ने साइप्रस और ग्रीस के साथ भी अपने कूटनीतिक रिश्ते मजबूत किए हैं। साइप्रस का तुर्किए के साथ उत्तरी साइप्रस को लेकर पुराना विवाद है। भारत ने साइप्रस का समर्थन किया, और बदले में साइप्रस ने भारत के कूटनीतिक मुद्दों का साथ दिया है।

तुर्किए-अजरबैजान का बॉयकॉट

हाल के दिनों में भारत के तुर्किए और अजरबैजान (Three Brothers Alliance) के साथ रिश्ते और खराब हुए हैं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने एक तुर्किए विश्वविद्यालय के साथ अपना शैक्षणिक समझौता भी रद्द कर दिया है। वहीं, जामिया यूनिवर्सिटी ने भी ऐसा ही कदम उठाया है। भारतीय पर्यटक भी तुर्किए और अजरबैजान का बहिष्कार कर रहे हैं।

पश्चिमी एशिया (मिडिल ईस्ट) मामलों के जानकार और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) में डिप्टी डायरेक्टर और फैलो कबीर तनेजा का कहना है, “यह गठबंधन (Three Brothers Alliance) भारत के लिए बहुत बड़ा खतरा नहीं है। यह भारत के लिए एक स्थानीय समस्या तो है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह ज्यादा प्रभावशाली नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि तुर्किए और अजरबैजान ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में ज्यादा निवेश नहीं किया है, जिससे इस गठबंधन की ताकत सीमित है।”

Pakistan Air Defence: Weapons of India’s victory over 2022 of the Pak Air Defense! Why did the operation fail next to the Brahmaos in Sindoor?

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर थ्री ब्रदर्स अलायंस अपने सैन्य और कूटनीतिक सहयोग को और बढ़ाता है, तो यह भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। वहीं, भारत इसके लिए पहले से ही तैयारियों में जुटा हुआ है। वह अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ा रहा है और नए गठबंधनों को मजबूत कर रहा है। रूस का इस क्षेत्र में प्रभाव कम होना भी भारत के लिए एक मौका है, क्योंकि आर्मेनिया जैसे देश अब रूस की जगह भारत की ओर देख रहे हैं।

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Pakistan Air Defence: 2022 Blunder Powers India's Operation Sindoor Triumph
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Pakistan Air Defence: A book in Indian forces must be studied, "The Art of War" of Sun Tzu. Sun Tzu was an ancient Chinese military strategist, philosopher and writer. He wrote in his book, "Let people show what they expect. You can wait for the moment they cannot imagine. "Therefore, they have written a place, "The highest art of the war is that the enemy is defeated without fighting. "Sometimes happened with Pakistan. In 2022, an event that Pakistan had been ignored in a very normal way, his alchemy today had to suffer as an exact missile strike on his 11 airbases in Operation Siamre, and without fighting.

Pakistan Air Defence: What happened on March 9, 2022?

On March 9, 2022, there was a report that the Brahmaos missile has fallen into the Pakistani terrain (Pakistan Air Defence). During that the Director General of the Inter-Services Public Relations (ISPR) of Pakistan, Major General Báber Effticher had claimed in a press conference on 10 March 2022 that the Air Defense Operations Centre of Pakistan Air Force (PAF) had tracked a "high-speed flying object" inside the Indian region at 6:43 pm on March 2022. The missile was launched from Sirsa, Haryana. According to them, the missile suddenly moved to the Pakistani region from its fixed direction and crashed at 6:50 pm at Chinnu, Khanwal District, Punjab. Pakistan said that the missile had fled 3 minutes to 44 seconds in the Pakistani region by 124 km.

On 11th March 2022, about 48 hours after the incident, the Ministry of Defence of India issued a brief statement. "On 9 March 2022, a missile accidentally launched due to a technical malfunction during regular maintenance. This missile fell in an area of Pakistan. India suffered the incident and said that it was a respite that it didn’t know anyone. ""

The Ministry also reported that the Government has taken this matter seriously and constituted a High-Level Investigation Committee (Court of Enquiry). However, the type of missile was not mentioned in this statement, but later the sources confirmed that it was the Brahmaos cruise missile jointly developed by India-Russia. On 15th March 2022, Defence Minister Rajnath Singh said on the issue in the Indian Parliament, "It was an unfortunate event to be launched in unconsciously of a missile during routine maintenance and inspection. We later found that missiles fell into the area of Pakistan (Pakistan Air Defence). "He reiterated that this event was "farming" and the government has started reviewing the procedures to prevent it.

Even though the Pakistani Air Defence system had failed

While Pakistan claimed that he had tracked the missile, the sources say that Pakistan’s Air Defense System (Pakistan Air Defence) had failed at that time. At that time, Pakistan included the HQ-9 and HQ-16 (LY-80) system of Chinese origin and was unable to effectively track or prevent this supersonic missile. The sources pointed out that Pakistan’s Chinese radar system did not detect the missile at any stage, and only after its crash, the Pakistani army reported it.

सूत्रों ने बताया कि अगर पाकिस्तान ने मिसाइल को ट्रैक किया था, तो उसने इसे इंटरसेप्ट क्यों नहीं किया, खासकर जब यह न्यूक्लियर-कैपेबल मिसाइल थी। उस समय भी पाकिस्तान टुडे की एक रिपोर्ट में इस ओर इशारा किया गया था और पाकिस्तान के एय़र डिफेंस सिस्टम (Pakistan Air Defence) पर सवाल उठाए गए थे कि मियां चन्नू में दुर्घटनाग्रस्त होने से पहले ही मिसाइल को क्यों नहीं रोका गया था।

भारतीय सैन्य सूत्रों ने बताया कि समझदार के लिए इशारा ही काफी है। उस समय दोनों देशों के बीच कोई जंग तो छिड़ी नहीं थी। ऐसे में मिसाइल की स्टेल्थ कैपेबिलिटी को टेस्ट करने का इससे बेहतर तरीका क्या हो सकता था। गलती मान ली और बात रफादफा हो गई। उन्होंने दावा किया कि मिसाइल का लॉन्च “आकस्मिक” नहीं, बल्कि जानबूझकर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया समय और रक्षा क्षमताओं का टेस्टिंग करने के लिए किया गया था।

ब्रह्मोस की रफ्तार और रेंज के आगे हुए फेल

पाकिस्तान के पास उस समय HQ-9 और HQ-16 (जिसे LY-80 भी कहा जाता है) जैसे एय़र डिफेंस सिस्टम (Pakistan Air Defence) थे। लेकिन ये ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइलों को रोकने में नाकामयाब रहे। HQ-9 की क्रूज मिसाइलों के खिलाफ प्रभावी रेंज केवल 25 किमी के आसपास है, जो ब्रह्मोस की रफ्तार और रेंज (290-500 किमी) के सामने बेकार है। हालांकि 2022 की घटना के बाद पाकिस्तान ने अपने LY-80 सिस्टम में 388 तकनीकी दिक्कतों की एक सूची चीन को सौंपी थी, जिनमें से 255 में तत्काल सुधार की जरूरत थी। हालांकि 2024 में पाकिस्तान ने HQ-16FE जैसे एयर डिफेंस सिस्टम को शामिल करने की पहल की थी।

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ऑपरेशन सिंदूर में मिला ‘गलती’ का फायदा

सूत्रों ने बताया कि ‘गलती’ से ब्रह्मोस मिसाइल गिरने से भारत ने बहुत कुछ सीखा और ऑपरेशन सिंदूर में इसका जबरदस्त फायदा मिला। भारतीय वायुसेना ने 7 से 10 मई के बीच पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी और सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए। ये हमले तब किए गए जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के एयर डिफेंस (AD) सिस्टम (Pakistan Air Defence) को जाम कर दिया।

सरकारी बयान के मुताबिक, भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान की एयर डिफेंस (Pakistan Air Defence) को जाम कर 23 मिनट के भीतर मिशन पूरा किया। इन हमलों में नौ आतंकवादी शिविरों को नष्ट किया गया। रात 9-10 मई को, IAF ने रफीकी, मुरिद, चकलाला, रहीम यार खान, सियालकोट, सक्कर, स्कार्दू, सर्गोधा, जैकोबाबाद, कराची के भोलारी और मलिर कैंट सहित 13 एयरबेस पर हमले किए। खास बात यह रही कि इन हमलों में ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। यह 1971 के युद्ध के बाद पाकिस्तान पर सबसे बड़ा हमला था।

भारतीय वायुसेना ने चीनी HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम (Pakistan Air Defence) को जाम कर दिया, जिससे पाकिस्तान के रडार को सिग्नल नहीं मिला, और भारतीय विमानों को टारगेट करने में फेल हो गए। यही नहीं, भारत ने पहली बार इतने व्यापक स्तर पर लोइटरिंग म्यूनिशन (आत्मघाती ड्रोन) का इस्तेमाल किया, जिससे दुश्मन के हाई-वैल्यू टारगेट जैसे रडार और मिसाइल यूनिट तबाह कर दिए गए। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने इलैक्ट्रॉनिक वॉरफेयर स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल किया और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीकों, जैसे डिकॉय, सिग्नल ब्लॉकिंग और रडार जैमिंग का इस्तेमाल किया। SEAD (Suppression of Enemy Air Defenses) रणनीति के तहत हार्पी ड्रोन ने पाकिस्तानी रडार और मिसाइल सिस्टम को नष्ट किया। लाहौर, सियालकोट और कराची में तैनात रडार यूनिट्स पूरी तरह बेकार हो गईं।

23 मिनट में पूरा किया मिशन

वायुसेना सूत्रों का कहना है, भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के चीनी एय़र डिफेंस सिस्टम (Pakistan Air Defence) को नाकाम और जाम कर दिया, मात्र 23 मिनट में मिशन पूरा किया। जामिंग के चलते दुश्मन के रडार कन्फ्यूज हो गए और मिसाइलों को डिटेक्ट नहीं कर पाए। सूत्रों ने बताया कि 2022 तो छोड़िए 2019 में भी पुलवामा आतंकी हमले के बाद जब भारतीय फाइटर जेट बालाकोट में घुसे थे, तो भी पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम उन्हें ट्रैक नहीं कर पाया था।

ऑपरेशन सिंदूर की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार ने बताया था कि मिशन के दौरान हमले में स्कैल्प क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया था। ये मिसाइलें राफेल लड़ाकू विमानों में लगाई गई थीं। ये फ्रांसीसी मूल की मिसाइलें चुपचाप हमला करने के लिए जानी जाती हैं और 500 किलोमीटर से अधिक की रेंज और जमीन के करीब उड़ान भरने की खबियों के लिए जानी जाती हैं। इन मिसाइलों ने पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में बिना रडार की पकड़ में आए निशाने पर सटीक वार किया। एक भी मिसाइल को रडार डिटेक्ट नहीं कर पाए।

सूत्रों का कहना है कि कई सालों की खरीद और अपग्रेड के बावजूद, पाकिस्तान का इंटीग्रेटेड एय़र डिफेंस नेटवर्क (Pakistan Air Defence) उस समय पूरी तरह विफल हो गया जब उसकी असली परीक्षा थी। HQ-9 स्कैल्प मिसाइलों को ट्रैक ही नहीं कर पाया। पाकिस्तान को समझना चाहिए कि जिस बीजिंग के हथियारों के भरोसे वह जंग के मैदान में उतरा है, वह कितने कारगर हैं।

एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकती है ब्रह्मोस

सूत्रों ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के एयर डिफेंस (Pakistan Air Defence) के जाम होने का फायदा ब्रह्मोस को मिला और वे उसे डिटेक्ट नहीं कर पाए। बता दें कि ब्रह्मोस की रफ्तार लगभग 2.8 से 3.5 मैक है, जो दुनिया की सबसे तेज़ क्रूज मिसाइलों में से एक है। इस तेज रफ्तार के कारण दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है। 290 किमी की रेंज वाली ब्रह्मोस कुछ ही मिनटों में लक्ष्य तक पहुंच सकती है, जिससे इंटरसेप्शन मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा ब्रह्मोस समुद्र की सतह से 3-10 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भर सकती है (सी-स्किमिंग) और जमीनी लक्ष्यों के लिए इलाके के करीब (टेरेन-हगिंग) उड़ान भरती है। इससे रडार इसका पता नहीं पाते क्योंकि क्योंकि कम ऊंचाई पर रडार की लाइन-ऑफ-साइट सीमित होती है।

Air Defense: Russia had given India a huge offer of S-500 during operation shifts! Indigenous S-400 will beat the sleep of China-Pakistan

इसके अलावा ब्रह्मोस विभिन्न फ्लाइट पाथ, जैसे कि ऊंची उड़ान, सीधी गोता (Steep Dive), और समुद्र-स्तर की उड़ान, का उपयोग कर सकती है। इस ट्रैजेक्टरी के चलते एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे ट्रैक करना और इंटरसेप्ट करना मुश्किल हो जाता है। साथ ही, ब्रह्मोस में भी स्टील्थ खूबियां हैं, जो इसके रडार क्रॉस-सेक्शन को कम करती हैं। इससे यह रडार द्वारा आसानी से डिटेक्ट नहीं होती। ब्रह्मोस-एनजी (नेक्स्ट जेनरेशन) में यह खूबी और एडवांस होगी, जिससे इसे डिटेक्ट करना और मुश्किल होगा। ब्रह्मोस में इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS), जीपीएस/ग्लोनास, और एक्टिव/पैसिव रडार सीकर का कॉन्बिनेशन है। जो इसे इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेज़र्स (ECCM) के खिलाफ ताकतवर बनाता है, क्योंकि यह दुश्मन के जैमिंग प्रयासों को नजरअंदाज कर लक्ष्य को भेद सकता है।

Trump Meets Al-Shara: U.S. and Trump’s Douglasan, met with the former Wanted Terrorist, placed a reward of 85 crores

Trump Meets Al-Shara: U.S. Hypocrisy Exposed, $10M Bounty to Ally

Trump Meets Al-Shara: US President Donald Trump met Syria’s Interim President Ahmed Al-Shara in Riyad, the capital of Saudi Arabia. The meeting is also in the headlines as Al-Shara is the same as Shekhs on which a few years ago the U.S. had a reward of $ 10 million (approximately Rs 85 crore) and declared terrorists. The meeting has not only shocked the whole world, but also led to a repeat face of the US and Trump.

Trump Meets Al-Shara: Who is Al-Shara?

Ahmed Al-Shara (Trump Meets Al-Shara) was first known as Abu Mohammed Al-Julani. Those who were connected to Al-Qaida at a time. After the attack on Iraq led by the US in 2003 they had joined the rebels fighting against the US military there. Later, he established the Nasura front in Syria, which was the Syrian branch of Al-Qaida. This organization was subsequently reorganized as Hayat Tehrier al-Sham (HTS), which has declared terrorist organizations by many countries and international organizations.

The U.S. had included Al-Shara (Trump Meets Al-Shara) in the MOST Wanted list for their terrorist activities and had a reward of $10 million on their head. He was also arrested in Iraq, but later he was released and became a major face in the Syrian Civil War. In December 2024, the rebel groups led by HTS captured Damascus and ended the 54-year-old regime of Bashar Al-Assad. In January 2025, Al-Shara was declared the Interim President of Syria.

Trump's U-Turn

U.S. President Donald Trump (Trump Meets Al-Shara) announced removal of all restrictions on Syria, addressing an investment Summit in Saudi Arabia on Tuesday, 13 May 2025. The announcement was a major diplomatic move in itself, as these sanctions were imposed during the rule of Bashar Al-Assad to create economic and diplomatic pressure on the Syrian government. "There is a new government in Syria, and we want to give them a chance of peace and reconstruction. I order to delete all restrictions. Syria, show us some special. ""

Just a day after this announcement, Trump met Al-Shara. It was the first meeting of an American President and the Syrian leader in 25 years. Earlier in 2000, then the Syrian President Hafiz Al-Assad met the US President Bill Clinton in Geneva. This visit to Tramp and Al-Shara took place in the presence of Crown Prince Mohammed bin Salman of Saudi Arabia, and Turkish President Recepta Taiep Erdogan also joined the discussion through phone calls.

What is the visit of diplomatic importance

यह मुलाकात कई मायनों में महत्वपूर्ण है। सबसे पहले, यह अमेरिका की सीरिया नीति में एक बड़े बदलाव का प्रतीक है। जहां एक समय अल-शरा को अमेरिका आतंकवादी (Trump Meets Al-Shara) मानता था, वहीं अब ट्रंप प्रशासन ने उनके साथ संबंध सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। ट्रंप ने इस मुलाकात को क्षेत्रीय स्थिरता और ईरान के प्रभाव को कम करने की रणनीति का हिस्सा बताया। सऊदी अरब और तुर्की जैसे क्षेत्रीय शक्तियों ने भी अल-शरा की सरकार को समर्थन दिया है, क्योंकि उनका मानना है कि इससे सीरिया में ईरान का प्रभाव कम होगा, जिसने असद शासन के दौरान वहां अपनी पकड़ मजबूत की थी।

दूसरा, इस मुलाकात ने सीरिया के लिए आर्थिक और कूटनीतिक राहत की संभावनाएं खोली हैं। प्रतिबंधों के हटने से सीरिया को पुनर्निर्माण और आर्थिक सुधार के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता मिलने की उम्मीद है। सीरिया के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के इस फैसले को “सीरियाई लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण” बताया और कहा कि यह देश को युद्ध के दर्दनाक दौर से बाहर निकालने में मदद करेगा।

सीरिया में जश्न का माहौल

ट्रंप की प्रतिबंध हटाने की घोषणा के बाद सीरिया (Trump Meets Al-Shara) की राजधानी दमिश्क में जश्न का माहौल देखा गया। सरकारी समाचार एजेंसी ‘सना’ ने वीडियो और तस्वीरें जारी कीं, जिनमें उमय्यद स्कवायर पर लोग आतिशबाजी करते और नया सीरियाई झंडा लहराते नजर आए। कई लोगों ने अपनी कारों के हॉर्न बजाकर खुशी जाहिर की। यह जश्न इस बात का प्रतीक था कि सीरियाई जनता, जो पिछले 14 वर्षों से गृहयुद्ध और आर्थिक संकट से जूझ रही थी, अब एक नई शुरुआत की उम्मीद कर रही है।

हालांकि, ट्रंप की इस मुलाकात (Trump Meets Al-Shara) और प्रतिबंध हटाने के फैसले पर विवाद भी खड़ा हुआ है। कई आलोचकों का कहना है कि यह मुलाकात अमेरिका की आतंकवाद विरोधी नीति के खिलाफ है। अल-शरा का संगठन HTS अभी भी अमेरिका और अन्य देशों की आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात सऊदी अरब के दबाव और व्यापारिक हितों के कारण हुई। सऊदी अरब ने हाल ही में अमेरिका में 600 बिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की है, और माना जा रहा है कि ट्रंप ने यह कदम क्षेत्रीय सहयोगियों को खुश करने के लिए उठाया।

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठनों ने अभी तक इस पर कोई ठोस बयान नहीं दिया है, लेकिन कुछ यूरोपीय नेता स्थिरता और प्रवास की नई लहरों को रोकने के लिए सीरिया के साथ आर्थिक जुड़ाव की वकालत कर रहे हैं।

वहीं कुछ विशेषज्ञों ने ट्रंप की इस मुलाकात (Trump Meets Al-Shara) को क्षेत्रीय स्थिरता और ईरान के प्रभाव को कम करने की रणनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, “सीरिया में एक नई सरकार है। हमें उनके साथ काम करने का मौका लेना चाहिए।” यह मुलाकात सऊदी अरब और तुर्की जैसे क्षेत्रीय सहयोगियों के समर्थन से संभव हुई, जो मानते हैं कि अल-शरा की सरकार सीरिया में ईरान की पकड़ को ढीला कर सकती है।

अल-शरा का नया चेहरा

अल-शरा ने हाल के महीनों में खुद को एक उदारवादी नेता के रूप में पेश करने की कोशिश की है। वे पश्चिमी शैली के सूट पहनते हैं और सीरिया के विकास के लिए प्रतिबंध हटाने की वकालत करते हैं। उन्होंने अल-कायदा से अपने संबंध तोड़ लिए हैं और अल्पसंख्यकों व महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की बात की है। हालांकि, कई विश्लेषकों को संदेह है कि क्या वे इन वादों पर लंबे समय तक अमल कर पाएंगे।

सऊदी अरब में भव्य स्वागत

ट्रंप का सऊदी अरब में शाही अंदाज में स्वागत किया गया। जैसे ही एयर फोर्स वन रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा, सऊदी पायलटों द्वारा उड़ाए गए छह अमेरिकी निर्मित F-15 लड़ाकू विमानों ने उन्हें एस्कॉर्ट किया। ट्रंप ने बैंगनी रंग के कालीन पर कदम रखा, जो सऊदी अरब में रेगिस्तानी जंगली फूलों और आतिथ्य का प्रतीक है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सैकड़ों सैन्य, सरकारी और व्यावसायिक अधिकारियों के साथ उनकी अगवानी की। अमेरिकी और सऊदी झंडों के साथ सफेद अरबी घोड़ों पर सवार सैनिकों ने ट्रंप के काफिले को शाही टर्मिनल तक पहुंचाया, जहां पारंपरिक कॉफी समारोह का आयोजन हुआ। यह भव्य स्वागत 2022 में जो बाइडन के दौरे के विपरीत था, जब खशोगी हत्याकांड के बाद तनावपूर्ण संबंधों के बीच बाइडन का स्वागत बेहद सादा रहा था।

आर्थिक और रक्षा समझौते

ट्रंप की यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना था। यूएस-सऊदी निवेश मंच में 600 बिलियन डॉलर के समझौतों की घोषणा की गई, हालांकि दस्तावेजों से पता चला कि केवल 283 बिलियन डॉलर के समझौते ही पक्के हुए हैं। इनमें सबसे बड़ा था 142 बिलियन डॉलर का रक्षा सौदा, जिसे “इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा बिक्री समझौता” बताया गया। इस सौदे के तहत सऊदी अरब को उन्नत अमेरिकी सैन्य उपकरण, प्रशिक्षण और सहायता मिलेगी।

Syria clashes: Why are minority sia, alavy and Christians in Syria scared? Why Mocke Kohram after the collapse of the Government of Asad? Read Explainer

सऊदी टेक कंपनी डाटावोल्ट ने अमेरिका में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ऊर्जा बुनियादी ढांचे में 20 बिलियन डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई। एनवीडिया ने सऊदी कंपनी ह्यूमैन को 18,000 से अधिक ब्लैकवेल एआई चिप्स बेचने का समझौता किया। अमेरिकी कंपनियां जैसे जैकब्स और AECOM सऊदी अरब में किंग सलमान अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, किंग सलमान पार्क और किद्दिया सिटी जैसे बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में शामिल हैं।

Air Defense: During the operation shift, Russia gave India a huge offer of S-500! ‘Sweddy S-400’ will beat China-Pakistan’s sleep

Air Defense: Russia offers India S-500 production; India trusts Project Kusha

Air Defense: India recently demonstrated its air defense and its military strength during the operation shifter, which not only fled the enemy country to Pakistan’s sense, but also found China as the Tagda Sarprise. In this campaign, the Indian armed forces completely demolished nine terrorist bases within Pakistan. In response, Pakistan attacked missiles and drones on Indian military bases in Jammu and Kashmir, Punjab, Rajasthan and Gujarat, but India’s unmistakable air defense system failed all these threats. The operation made India’s multi-layer defense system in front of the world, with S-400 trimphs from Russia, Barack-8 developed with Israel, Indigenous sky missiles, and DRDO’s advanced technology played an important role.

Air Defense: Russia offers S-500

इस सफलता के बाद रूस ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ही भारत को एडवांस S-500 प्रोमेथियस एय़र डिफेंस सिस्टम के संयुक्त उत्पादन का भी प्रस्ताव दिया है। इससे पहले जुलाई 2024 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा के दौरान, रूस ने S-500 के संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव दिया था। दिसंबर 2021 में, रूसी उपप्रधानमंत्री यूरी बोरिसोव ने कहा था कि भारत S-500 सिस्टम का पहला विदेशी खरीदार हो सकता है। S-500 प्रोमेथियस (Prometheus), जिसे 55R6M त्रिउम्फ़टोर-M भी कहा जाता है, यह रूस का सबसे एडवांस सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम है, जो S-400 का उत्तराधिकारी है। एस-500 की रेंज 600 किमी (बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए) और 500 किमी (वायु रक्षा के लिए) है। यह हाइपरसोनिक मिसाइलों, स्टील्थ विमानों, इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM), और निम्न-कक्षा उपग्रहों को भी निशाना बना सकती है। इसका AESA रडार 2,000 किलोमीटर की दूरी पर लक्ष्य का पता लगा सकता है, और इसका प्रतिक्रिया समय केवल 4 सेकंड है, जो S-400 के 10 सेकंड से कहीं तेज है।

हालांकि भारत ने रूस के इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक तौर पर कोई बयान जारी नहीं किया है। रक्षा सूत्रों का कहना है कि दीर्घकालिक स्वदेशी समाधानों पर ध्यान दे रहा है। क्योंकि भारत को अमेरिका, इजरायल, और अन्य पश्चिमी देशों के साथ रक्षा सहयोग को भी बनाए रखना है। उन्होंने बताया कि S-400 सौदे के बाद CAATSA प्रतिबंधों का खतरा था। S-500 के लिए भी यही जोखिम है। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते पहले ही बाकी बची दो S-400 की डिलीवरी में देरी हुई है, जो S-500 के लिए भी हो सकती है। ऐसे में भारत स्वदेश में ही निर्मित एयर डिफेंस टेक्नोलॉजी पर फोकस कर रहा है।

Air Defense: Project Kusha
Project Kusha

भारत का स्वदेशी S-400!

रक्षा सूत्रों के मुताबिक भारत अपने स्वदेशी S-400 को बनाने में जुटा है। डीआरडीओ का प्रोजेक्ट कुशा, यह लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (LRSAM) है, जो S-400 के समकक्ष है, जिसका पहला परीक्षण 2026 में होने की उम्मीद है। यह सिस्टम भारतीय वायुसेना (IAF) और नौसेना को हवाई खतरों जैसे स्टील्थ फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल, ड्रोन, और बैलिस्टिक मिसाइलों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। अप्रैल 2024 में कुशा का डिजाइन फेज पूरा हुआ, और अब डुअल-पल्स रॉकेट मोटर और नए प्रोपेलेंट फ्यूल-1 की टेस्टिंग जल्द होने वाली है। प्रोजेक्ट कुशा को रूस के S-400 ट्रायम्फ और इज़राइल के आयरन डोम के समकक्ष माना जा रहा है। यह भारत के एयर डिफेंस हवाई को मजबूत करने के साथ-साथ विदेशी हथियार प्रणालियों पर निर्भरता को कम करेगा। हाल ही में फरवरी में हुए एयरो इंडिया 2025 में प्रोजेक्ट कुशा का स्केल मॉडल भी शोकेस किया गया था, जिसमें तीन अलग-अलग SAM (120-350 किमी रेंज) और उनकी टेक्नोलॉजी को दिखाया गया था।

सूत्हरों का कहना है, हमें चीनी हाइपरसोनिक क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइल खतरों का मुकाबला करने के लिए S-500 जैसी स्वदेशी प्रणाली की जरूरत है। S-500 मैक-20 की गति वाली मिसाइलों को रोक सकता है, जबकि प्रोजेक्ट कुशा मैक-7+ की मिसाइलों को रोकने में सक्षम है, जो पर्याप्त नहीं है।

350-400 किलोमीटर होगी रेंज

अगस्त 2024 तक, डीआरडीओ ने M1 मिसाइल (150 किमी रेंज) के लिए पांच यूनिट्स का निर्माण शुरू कर दिया था। इसके लिए 20 सेट एयरफ्रेम, 20 सेट रॉकेट मोटर, और 50 किल व्हीकल (वॉरहेड) का ऑर्डर दिया गया। इस सिस्टम में तीन तरह की इंटरसेप्टर मिसाइलें होंगी, जिनकी रेंज 150, 250, और 350-400 किलोमीटर होगी। मिसाइल की रफ्तार मैक 5.5 होगी, और यह IR+RF सीकर से लैस होगी। इसमें लंबी दूरी का सर्विलांस और फायर कंट्रोल रडार शामिल होगा, जिसमें LRBMR (लॉन्ग रेंज बैटल मैनेजमेंट रडार) S-बैंड रडार 500 किमी से अधिक की दूरी तक खतरों का पता लगा सकता है। खास बात यह होगी कि यह सिस्टम भारतीय वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) के साथ पूरी तरह इंटीग्रेट होगा, जो विभिन्न रडारों और वेपन सिस्टम को जोड़ता है।

वहीं, अगर भारत में ही सिस्टम तैयार होता है, तो भारत को एस-400 की मिसाइलों की तरह इसके लिए मिसाइलें खरीदने के लिए विदेश की तरफ नहीं ताकना होगा। भारतीय नौसेना इसे अपने अगली पीढ़ी के युद्धपोतों पर तैनात करने की योजना बना रही है। 2022 में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने इस परियोजना को मंजूरी दी थी, और 2023 में रक्षा मंत्रालय ने 21,700 करोड़ रुपये की लागत से पांच स्क्वाड्रन की खरीद को हरी झंडी दिखाई। इसे 2028-29 तक वायुसेना और नौसेना में तैनात किया जाएगा। भारतीय वायुसेना कुल 10 स्क्वाड्रन शामिल करने की योजना बना रही है, जिससे भारत का एय़र डिफेंस मजबूत होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रोजेक्ट कुशा की सफलता के बाद भारत इसे ASEAN देशों को निर्यात कर सकता है, जिससे चीन के क्षेत्रीय प्रभाव को संतुलित करने में मदद मिलेगी।

मोदी सरकार ने मजबूत किया एयर डिफेंस सिस्टम

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता रातोंरात नहीं मिली। यह पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की रक्षा नीति और रणनीतिक तैयारी का नतीजा है। 2014 के बाद से, भारत ने अपनी हवाई रक्षा को मजबूत करने के लिए कई बड़े और ठोस कदम उठाए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है रूस के साथ 2018 में हुआ 35,000 करोड़ रुपये का सौदा, जिसमें भारत ने पांच S-400 ट्रायम्फ स्क्वाड्रन खरीदे। इनमें से तीन स्क्वाड्रन अब चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर तैनात हैं। यह प्रणाली 400 किलोमीटर की दूरी तक हवाई खतरों को नष्ट करने में सक्षम है और ऑपरेशन सिंदूर में इसने पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोन को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके अलावा, भारत ने 2017 में इजरायल के साथ 2.5 बिलियन डॉलर का सौदा किया, जिसके तहत बराक-8 मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम खरीदा था। यह सिस्टम अब बठिंडा जैसे अग्रिम सैन्य अड्डों की सुरक्षा में तैनात है। डीआरडीओ के स्वदेशी आकाश मिसाइल सिस्टम ने भी छोटी और मध्यम दूरी के खतरों को नष्ट करने में अपनी क्षमता साबित की। साथ ही, डीआरडीओ की एंटी-ड्रोन तकनीक और मैन पोर्टेबल काउंटर ड्रोन सिस्टम (MPCDS) ने पाकिस्तानी ड्रोन को जाम कर उन्हें मार गिराया।

एलओसी पार किए बिना सर्जिकल स्ट्राइक

2021 में भारत ने स्वदेशी लॉइटरिंग म्यूनिशन्स का ऑर्डर दिया था, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में पहली बार युद्ध में हिस्सा लिया। ये आत्मघाती ड्रोन एक साथ कई लक्ष्यों पर सटीक हमले करने में सक्षम हैं। इसके अलावा, इजरायल के हारोप ड्रोन, जो अब भारत में ही बनाए जा रहे हैं, ने पाकिस्तानी हवाई रक्षा इकाइयों को नष्ट करने में अहम भूमिका निभाई। राफेल विमानों ने SCALP और HAMMER मिसाइलों के साथ जमकर कहर बरपाया, जिससे साबित हुआ कि भारत एलओसी पार किए बिना ही पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक करने की ताकत रखता है। इन सभी सिस्टम को इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) के साथ जोड़ा गया है। यह सिस्टम विभिन्न रडारों और वेपन सिस्टम को एकजुट करता है, जिससे भारत को एक ऐसी हवाई रक्षा छतरी मिली है, जो खतरों का पता लगाने के साथ-साथ उन्हें तुरंत नष्ट कर सकती है। यह सिस्टम ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का आधार बना।

Operation Sindoor: India’s responsive action, stacked China bought Pakistan’s air defense system, killing from drone to lahore!

ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पूरी दुनिया ने भारत की डिफेंस कैपेबिलिटी को देखा है। जिसने यह दिखा दिया कि खुद को बेहद एडवांस कहने वाली पाकिस्तानी सेना भी घुटने टेकने को मजबूर हो गई। साथ ही ये भी बता दिया कि बिना सीमा लांघे भारत न केवल दुश्मन के इलाके में भी निर्णायक कार्रवाई कर सकता है, बल्कि अपने आसमान और अपनी सीमाओं की भी सुरक्षा कर सकता है।

Nur Khan Airbase: When ‘Dil’ hurts, why panic Pakistan? So forced to come to the knee, China also happened expose

Nur Khan Airbase Strike: Why Pakistan Buckled and China Got Exposed

Nur Khan Airbase: The night of 10 May 2025 was like a nightmare for Pakistan when India devastated Nur Khan Airbase or Chaklalala Airbase located near Ravalpindi. The attack was not only injured on Pakistan’s ‘Dil’, but its biggest partners faced China as embarrassment. Pakistan came to the knee due to this heart injury and was forced to cease. The attack was not limited to Nur Khan, but India also targeted several other airbases of Pakistan within 90 minutes.

The military sources say that this airbase is considered a large centre of Pakistan’s nuclear strategy. India shackled the military strength of Pakistan not only through the attack, but also questioned the safety of its nuclear weapons. India has cleaned that he will now respond to Pakistan’s movements strictly. The attack has shaken Pakistan and forced him to think again on his defence policies.

While India clarified two things from the attack, the first that India will destroy every base of the panic by entering into its stronghold, and secondly, Pakistan’s ‘permanu threat’ will no longer work.

Nur Khan Airbase Attack: What happened?

May 10, India executed an accurate military action. In this attack, Ravalpindi’s Nour Khan Airbase was targeted. This base is extremely close to Islamabad and is said that Pakistan has kept its nuclear flyer here. The attack was so precise that many Ahmad structures of Nur Khan Airbase were devastated in minutes. According to intelligence sources, India used the Brahmos missile in the attack, known for its accuracy and does not take hold of any radar system.

But India’s attack was not limited to Nur Khan. India targeted a number of military bases after one. These included rough airbase (Shorkot), Murid Airbase (Panjab), Sukkur Airbase (Sind), Sialkot Airbase, Sargdha Airbase, Skardu Airbase, Bolari Airbase (Near Karachi), Jakobabad Airbase and Pasore Airbar. All these attacks were carried out within 90 minutes, which fully shaked Pakistan’s air force.

India not only responded to Pakistan’s attacks in the action taken under the operation shift, but 8 missiles stained on Pakistan’s behalf were killed in air. After this, India also took account in Lahore and Islamabad.

Why is Nur Khan Airbase so important?

Nur Khan Airbase is a major centre of Pakistan’s military and nuclear strategy. This base is in Ravalpindi, which is not far from Islamabad. It is unique that it is close to the headquarters of the Army of Pakistan. This is why it plays an important role in creating a rapport between the Base Army and the Air Force.

खुफिया सूत्रों के मुताबिक, नूर खान एयरबेस पर कई अहम सैन्य उपकरण रखे गए थे। यहां पर साब एरियाई जैसे हवाई चेतावनी सिस्टम, C-130 ट्रांसपोर्टर विमान और IL-78 रिफ्यूलिंग विमान मौजूद थे। ये सिस्टम पाकिस्तान की वायु सेना के लिए बहुत जरूरी हैं, क्योंकि ये निगरानी, सामान ढोने और विमानों को हवा में ईंधन भरने का काम करते हैं। यह बेस न सिर्फ वीआईपी ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स का मुख्य अड्डा है, बल्कि यहां से एयर मोबिलिटी कमांड और ड्रोन ऑपरेशंस का संचालन भी होता है। यही वह स्थान है जहां से शाहपर-I और तुर्की निर्मित बैरक्तार TB2 ड्रोन उड़ाए जाते थे, जो हाल ही में भारत के खिलाफ हमलों में इस्तेमाल हुए।

Nur Khan Airbase Strike: Why Pakistan Buckled and China Got Exposed

नूर खान बेस का सबसे बड़ा महत्व यह है कि यह पाकिस्तान के परमाणु हथियारों से जुड़ा हुआ है। यहां पर परमाणु हथियार रखे जाते हैं। इस बेस पर परमाणु हथियारों से लैस विमानों को तैनात किया जाता है, जो भारत के खिलाफ पाकिस्तान की परमाणु रणनीति का हिस्सा हैं। इसके अलावा, यह बेस इस्लामाबाद और रावलपिंडी के करीब होने की वजह से पाकिस्तान की त्वरित प्रतिक्रिया रणनीति में अहम भूमिका निभाता है।

सूत्रों ने बताया कि नूर खान बेस का इस्तेमाल बड़े नेताओं और वीआईपी लोगों को ले जाने वाले विमानों के लिए भी होता था। यहाँ पर खास पायलटों को ट्रेनिंग दी जाती थी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जैसे लोग इस बेस से अपने विमानों का इस्तेमाल करते थे। इतना ही नहीं, यह बेस सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने में भी शामिल था।

पाकिस्तान आया घुटनों पर

इस हमले ने पाकिस्तान को कई तरह से नुकसान पहुंचाया। सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ कि नूर खान एयरबेस के नष्ट होने से पाकिस्तान की वायु सेना और सेना के बीच का संपर्क टूट गया। यह बेस पाकिस्तान की वायु सेना की रीढ़ की हड्डी माना जाता था। इसके तबाह होने से पाकिस्तान के एयर डिफेंस और जवाबी हमले करने की क्षमता पर बड़ा असर पड़ा। नूर खान एयर बेस पर परमाणु हथियारों से लैस मिराज-5 विमानों को तैनात करने की क्षमता है, जो भारत के खिलाफ पाकिस्तान की परमाणु प्रतिरोधक रणनीति का हिस्सा हैं।

दूसरा, इस हमले ने पाकिस्तान के डिफेंस सिस्टम को तार-तार कर दिया। नूर खान एयरबेस की सुरक्षा में चीनी रडार तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन भारतीय हमले ने स्पष्ट कर दिया कि HQ-9 जैसे चीनी सिस्टम भारतीय मिसाइलों के सामने बेकार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि “यह हमला चीन के लिए भी शर्मनाक है क्योंकि उसकी टेक्नोलॉजी पाकिस्तान के लिए ढाल नहीं बन सकी।”

तीसरा, इस हमले ने पाकिस्तान की सैन्य छवि को बड़ा नुकसान पहुंचाया। पाकिस्तान हमेशा से खुद को भारत के बराबर की सैन्य ताकत बताता रहा है, लेकिन इस हमले ने उसकी इस छवि को तोड़ दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों में नूर खान एयरबेस के जलते ढांचे साफ दिख रहे थे। पाकिस्तान की सेना ने दावा किया कि उसने भारत के हमले को रोक लिया, लेकिन इन तस्वीरों ने उसके दावों की पोल खोल दी।

पाकिस्तान में आम लोगों ने भी अपनी सेना का मजाक उड़ाया। सोशल मीडिया पर लोग मीम्स और वीडियो शेयर कर रहे थे, जिनमें वे सेना के झूठे दावों की हंसी उड़ा रहे थे। इससे पाकिस्तान की सेना को अपने ही देश में शर्मिंदगी झेलनी पड़ी।

पाकिस्तान के अन्य सैन्य ठिकानों का हाल

पाकिस्तान के पास कई ऐसे सैन्य ठिकाने हैं, जो परमाणु हथियारों से जुड़े हैं। नूर खान एयरबेस के अलावा भारत ने कई अन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। वाह कैंट में पाकिस्तानी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री को भी निशान बनाया गया, जो परमाणु हथियार बनाने का एक बड़ा केंद्र है। यहां पर परमाणु हथियारों के लिए जरूरी सामान तैयार किया जाता है। वहीं, हरिपुर में तरनावा मिसाइल कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाया, यह जगह मिसाइलों और परमाणु हथियारों को बनाने और उनकी टेस्टिंग के लिए जानी जाती है।

Op Sindoor: Which are the Kashmiri Muslim Air Vice Marshal Shawl Ahmed? Who bombed Pakistan in operation shifter!
जबकि इस्लामाबाद के निलोर रीप्रोसेसिंग प्लांट में परमाणु हथियारों के लिए प्लूटोनियम बनाया जाता है, इसे भी निशाना बनाया गया। इसके अलावा फतेह जंग के नेशनल डेवलपमेंट कॉम्प्लेक्स, जहां परमाणु हथियारों और मिसाइलों को बनाया जाता है, वहां भी भारतीय मिसाइलों ने चोट पहुंचाई। इसके अलावा काहुता एनरिचमेंट प्लांट (काहुता), जहां परमाणु हथियारों के लिए यूरेनियम को तैयार किया जाता है, वहां भी भारतीय मिसाइलों के हमले हुए। इन सभी ठिकानों का नूर खान एयरबेस के साथ सीधा कनेक्शन है।

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Operation Sindoor: India Retaliation, Pakistan Air Defense System Destroyed

Operation Sindoor: पाकिस्तान में आतंक के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है। सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के तहत लाहौर में हुए एक Careers Drone हमले में पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचा है। पाकिस्तानी सेना की HQ-9 के एयर डिफेंस मिसाइल लॉन्चर यूनिट्स को गंभीर क्षति पहुंची है। वहीं, इस हमले में लाहौर के वाल्टन इलाके में 4 एयर डिफेंस रेजिमेंट (4 AD Regt) की अल्फा बैटरी के डिप्टी बैटरी कमांडर सहित पांच सैनिक मारे गए हैं। इसके अलावा, 4 AD रेजिमेंट की HQ-16 बैटरी पर एक ड्रोन हमले (UAV) ने बड़ा नुकसान पहुंचाया। सूत्रों के के अनुसार, भारतीय सेना ने दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाने के लिए हरपी ड्रोनों का इस्तेमाल किया।

भारत ने 7 मई 2025 की रात शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। इस ऑपरेशन की प्रेस ब्रीफिंग में भारत ने अपनी कार्रवाई को केंद्रित, संयमित और गैर-उत्तेजक बताया था। भारत ने साफ किया था कि पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना नहीं बनाया गया है। साथ ही यह भी दोहराया गया कि भारत में सैन्य ठिकानों पर किसी भी हमले का उचित जवाब दिया जाएगा। लेकिन इसके बाद पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया, जिसके जवाब में भारत को सख्त कार्रवाई करनी पड़ी।

Operation Sindoor: पाकिस्तान ने किया ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल

7-8 मई 2025 की रात को पाकिस्तान ने उत्तरी और पश्चिमी भारत में कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की। इन ठिकानों में अवंतीपुरा, श्रीनगर, जम्मू, पठानकोट, अमृतसर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, आदमपुर, भटिंडा, चंडीगढ़, नाल, फलोदी, उत्तरलाई, और भुज शामिल थे। पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया। वहीं पुंछ में इन हमलों में जानमाल का गंभीर नुकसान हुआ है। वहां 13 लोग मारे गए और 44 जख्मी हो गए।

लेकिन भारत की इंटीग्रेटेड काउंटर UAS ग्रिड और एयर डिफेंस सिस्टम्स ने इन हमलों को नाकाम कर दिया। इन हमलों का मलबा कई जगहों से बरामद किया गया है।

भारत ने लाहौर में की जवाबी कार्रवाई

पाकिस्तान के हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने 8 मई 2025 की सुबह पाकिस्तान में कई जगहों पर एयर डिफेंस रडार और सिस्टम को निशाना बनाया। भारत ने अपनी कार्रवाई को उसी तरह और उसी तीव्रता के साथ अंजाम दिया, जैसा पाकिस्तान ने किया था। सूत्रों से पक्की जानकारी मिली है कि लाहौर में एक एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। यह सिस्टम लाहौर जैसे बड़े शहर की हवाई रक्षा के लिए तैनात था।

पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम: HQ-9 और HQ-16

पाकिस्तान ने अपनी हवाई रक्षा को मजबूत करने के लिए चीन से HQ-9 और HQ-16 जैसी एडवांस मिसाइल सिस्टम खरीदे हैं। HQ-9 एक लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम है, जो 200 किलोमीटर तक विमानों, ड्रोनों, और मिसाइलों को नष्ट कर सकता है। इसे “चाइनीज पैट्रियट” भी कहा जाता है, क्योंकि यह अमेरिका की पैट्रियट मिसाइल प्रणाली की तरह काम करती है। HQ-9 का रडार 300 किलोमीटर तक लक्ष्य का पता लगा सकता है और एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बना सकता है।

वहीं, HQ-16 एक मध्यम दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम है, जो 40 किलोमीटर तक विमानों और मिसाइलों को रोक सकता है। यह सिस्टम क्रूज मिसाइलों और ड्रोनों जैसे छोटे लक्ष्यों को नष्ट करने में माहिर है। पाकिस्तान ने इन प्रणालियों को अपनी सीमाओं, खासकर भारत से लगते इलाकों में तैनात किया था, ताकि भारतीय विमानों और मिसाइलों से अपनी रक्षा कर सके।

लाहौर में हमला: अल्फा बैटरी पर निशाना

सूत्रों के अनुसार, लाहौर के वाल्टन इलाके में 4 एयर डिफेंस रेजिमेंट (4 AD Regt) की अल्फा बैटरी पर बड़ा हमला हुआ। इस हमले में अल्फा बैटरी के डिप्टी बैटरी कमांडर सहित पांच सैनिक मारे गए। अल्फा बैटरी HQ-9 मिसाइल लॉन्चरों से लैस थी, जो लाहौर जैसे बड़े शहर की हवाई रक्षा के लिए तैनात थी। इस हमले में HQ-9 सिस्टम के रडार और लॉन्चर को भी भारी नुकसान पहुंचा है। सूत्रों का कहना है कि कई लॉन्चर पूरी तरह नष्ट हो गए। इससे लाहौर और आसपास के इलाकों का एयर डिफेंस कमजोर हो गया है।

HQ-16 बैटरी पर ड्रोन हमला

4 AD रेजिमेंट की एक दूसरी बैटरी, जो HQ-16 मिसाइलों से लैस थी, उस पर भी कामीकाजा ड्रोन (UAV) ने हमला किया। यह बैटरी भी लाहौर के पास तैनात थी। यह कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोनों और क्रूज मिसाइलों के खिलाफ कारगार है। लेकिन भारतीय ड्रोन हमले में यह बैटरी भी ढेर हो गई। सूत्रों के अनुसार, ड्रोन ने बैटरी के रडार और कमांड सेंटर को निशाना बनाया।

हरपी ड्रोन क्या हैं?

हरपी ड्रोन एक खास तरह का मानवरहित हवाई वाहन (UAV) है, जिसे इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) ने बनाया है। इसे “लॉइटरिंग मुनिशन” कहा जाता है, यानी यह ऐसा ड्रोन है जो दुश्मन के इलाके में मंडराता रहता है और सही समय पर हमला करता है। हरपी ड्रोन को खास तौर पर दुश्मन की हवाई रक्षा प्रणालियों, जैसे रडार सिस्टम, को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह ड्रोन 32 किलोग्राम का विस्फोटक ले जा सकता है और इसमें एक खास “एंटी-रेडिएशन सीकर” होता है, जो रडार से निकलने वाली रेडियो तरंगों को ट्रैक करके हमला करता है।

हरपी ड्रोन की खासियत यह है कि यह पूरी तरह स्वचालित मोड में काम कर सकता है या फिर “मैन-इन-द-लूप” मोड में, जिसमें एक ऑपरेटर इसे कंट्रोल करता है। यह 6 घंटे तक हवा में रह सकता है और 500 किलोमीटर की दूरी तक हमला कर सकता है। इसका छोटा आकार और कम रडार सिग्नेचर इसे दुश्मन के रडार से बचने में मदद करते हैं। भारत ने 2000 के दशक की शुरुआत से हरपी ड्रोनों का इस्तेमाल शुरू किया था, और 2009 में भारतीय वायुसेना ने 100 मिलियन डॉलर में 10 हरपी ड्रोन खरीदे थे।

हरपी ड्रोन का इस्तेमाल भारत की रणनीति का एक अहम हिस्सा है। ये ड्रोन दुश्मन के डिफेंस सिस्टम को कमजोर करने में माहिर हैं। इन्हें “सप्रेशन ऑफ एनिमी एयर डिफेंस” (SEAD) के लिए डिज़ाइन किया गया है, यानी दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट करना ताकि भारतीय वायुसेना के विमान सुरक्षित रूप से ऑपरेशन कर सकें। हरपी ड्रोन ऑटोमैटिकली रडार सिग्नल्स को पकड़कर हमला करते हैं, जिससे वे बड़े रडार सिस्टम को आसानी से नष्ट कर सकते हैं।

Why did the Court rush to Operation Sindoor to capture Reliance, Ex-Afsar of Air Force and Delhi’s Nami lawyer, Military operation!

पाकिस्तान ने इस घटना पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, वह इस नुकसान को छिपाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन सिंदूर को “युद्ध की घोषणा” करार दिया था और जवाबी कार्रवाई की धमकी दी थी।

Operation Sindoor: Why choose India in Pakistan? Scalp Cruise Missiles and Hammer Bombs

Operation Sindoor: Why India Chose These 9 Specific Sites in Pakistan

Operation Sindoor: India attacked nine terrorist bases in Pakistan and Pakistan authorized J&K (POK) on 7th May 2025 under "Operation Shifter". These attacks were in response to the terror attack in the wrestling on 22nd April 2025, which killed 26 people. At the same time, the action was against Pakistan-sponsored terrorist acts such as the Parliament attack of 2001, the 2008 Mumbai attack, the 2016 Uri attack, and the 2019 Pulwama attack. The Indian Army and Air Force gave these attacks unsurpassed within 25 minutes. India carefully selected these nine bases which were the major centres of terror organizations. Let’s understand why these bases were selected and how this operation was part of India’s anti-terrorism strategy.

Operation Sindoor: Scalp Cruise Missiles and Hammer Bombs

The Indian Air Force used Rafael fighter jets and scalp cruise missiles in operation shifter. 24 missiles fell on nine bases within 25 minutes (1:05 pm to 1:30 pm). These four bases were in the Punjab province of Pakistan (Bahwalpur, Muridke, Sialkot, and Ravalpindi) and five POKs (Mujfurabad, Kotli, Tiger, Bhimber, and Chaswari). Foreign Secretary Vikram Egyptian told the press conference that more than 70 terrorists were killed in these attacks and wounded more than 60. India immediately released satellite photos, drone footage, and a 1 minute 40 seconds video showing the impact of the activities and attacks of these bases.

Speaking of Scalp (SCALP) cruise missiles, they are also known as Storm Shadow. Its range is over 250 kilometres, and it is able to attack accurate at night and at any season. It was used to destroy terror bases such as Bahwalpur and Muridke.

While Hammer (HAMMER) is the Precision-Guide Smart Bomb, the range of which is 50-70 km. Hammer (Highly Agile Modular Munition Extended Range) was used to target terror training centers and multi-storey buildings, where Jash-e-Mohammed (JeM) and Lashkar-e-Thaiba (LeT) leaders were present.

Marks Subhan Allah, Bahwalpur (Panjab, Pakistan)

India chose these terrorist bases based on their terror activities, intelligence, and strategic importance. Each base was playing a key role in the network of terrorism. If you talk about Allah, this is the headquarters of Jesh-e-Mohammed (JeM), which was built by Maulana Masud Azhar in 2000. It is 100 kilometres away from the international border. It is a robust campus spread across 10 acres, including training facilities, weapon depots, and residential areas. The plan of the 2019 Pulwama attack (40 CRPF Youth Martyr) and the 2016 Uri attack (19 Young Martyr) was the same. According to intelligence, the terrorists had received directives and weapons from the same. It is the largest training and command center of Jaish. Destroying it will cause a deep loss of organization’s ability to recruit and plan the attack. The attack here was at 01:12 pm.

Markaj Taiba, Muridke (Panjab, Pakistan)

लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का यह प्रमुख केंद्र 200 एकड़ में फैला है, जिसमें स्कूल, मस्जिद, और प्रशिक्षण शिविर शामिल हैं। यह लाहौर से 30 किलोमीटर दूर है। 2008 के मुंबई हमले (166 मारे गए) के आतंकी यहीं प्रशिक्षित हुए थे। यह केंद्र आत्मघाती हमलावरों को प्रशिक्षण, हथियार निर्माण, और भारत में घुसपैठ की योजना बनाता है। पहलगाम हमले में इसकी भूमिका की जांच चल रही थी। यह लश्कर का सबसे महत्वपूर्ण ठिकाना है, जो भारत के खिलाफ लंबे समय से आतंकी गतिविधियों का केंद्र रहा है। यहां पर हमला रात 01:06 से 01:10 के बीच किया गया।

महमूना जोया कैंप, सियालकोट (पंजाब, पाकिस्तान)

हिजबुल मुजाहिदीन का यह कैंप अंतरराष्ट्रीय सीमा से केवल 12 किलोमीटर दूर है। यह छोटा लेकिन सक्रिय प्रशिक्षण केंद्र है, जो जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देता है। 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले और मार्च 2025 में चार सैनिकों की हत्या की योजना यहीं बनी थी। यह घुसपैठ और हमलों के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट देता है। इसकी सीमा से निकटता और जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को फिर से आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के चलते इसे निशाना बनाना जरूरी समझा गया। यहां पर हमला रात 01:15 बजे बजे किया गया।

सय्यदना बिलाल कैंप, मुजफ्फराबाद (पीओके)

जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा यह कैंप नियंत्रण रेखा (एलओसी) से 10 किलोमीटर की दूरी पर है। यह आत्मघाती हमलावरों और स्नाइपर्स को प्रशिक्षण देता है। पहलगाम हमले के लिए आतंकियों को यहीं प्रशिक्षित किया गया था। यह भारत के खिलाफ सशस्त्र हमलों की योजना बनाता है। इसकी रणनीतिक स्थिति और पहलगाम हमले में प्रत्यक्ष भूमिका ने इसे प्राथमिक लक्ष्य बनाया। यहां पर हमला रात 01:17 बजे किया गया।

अब्बास आतंकी कैंप, कोटली (पीओके)

लश्कर-ए-तैयबा का यह प्रशिक्षण केंद्र 50 से अधिक आतंकियों को प्रशिक्षण देता है। यह पहाड़ी इलाके में स्थित है, जिसके चलते आतंकियों को यहां छिपने की जगह मिलती है। यह आत्मघाती हमलावरों और बम विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करता है। पहलगाम हमले के बाद इसकी गतिविधियां बढ़ी थीं। इसकी आतंकी प्रशिक्षण क्षमता और एलओसी से 13 किलोमीटर की निकटता ने इसे खतरा बनाया। यहां पर हमला रात 01:04 बजे किया गया।

बाघ (पीओके)

हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर का संयुक्त केंद्र, जो घुसपैठ और हथियार तस्करी का अड्डा है। यह एक गुप्त परिसर है, जिसमें भूमिगत बंकर हैं। यह भारत में आतंकी हमलों के लिए लॉजिस्टिक और हथियार सप्लाई करता है। पहलगाम हमले से पहले इसकी गतिविधियां नोट की गई थीं। इसकी भूमिगत सुविधाएं और घुसपैठ में भूमिका के चलते इसे निशाना बनाना जरूरी समझा गया।

भिंबर (पीओके)

जैश और लश्कर का यह संयुक्त केंद्र साइबर युद्ध और प्रचार अभियान चलाता है। यह प्रशिक्षण और कमांड सेंटर के रूप में काम करता है। पहलगाम हमले से पहले यहां से सोशल मीडिया के जरिए प्रचार और निर्देश दिए गए थे। इसकी साइबर युद्ध क्षमता और आतंकी गतिविधियों को समन्वय करने की भूमिका के चलते यह भारतीय मिसाइलों का का निशाना बना। यहां पर हमला रात 01:19 बजे किया गया।

चकस्वारी (पीओके)

यह आतंकियों के लिए हथियार डिपो और लॉजिस्टिक हब है, जो पहाड़ी इलाके में छिपा है। पहलगाम हमले के लिए विस्फोटक और हथियार यहीं से सप्लाई हुए थे। यह भारत में हमलों के लिए सप्लाई चेन का हिस्सा था। भारत में भविष्य में आतंकी हमले न हों, इसके लिए सप्लाई चेन को तोड़ना आतंकी नेटवर्क को कमजोर करने के लिए यहां हमला करना जरूरी था। यहां पर हमला रात 01:22 बजे हुआ।

Operation Sindoor vs Balakot Strike: What learned from Balakot India took care of these things in operation, got the benefit

गुलपुर (पीओके)

लश्कर-ए-तैयबा का यह कमांड सेंटर भारत में हमलों की योजना बनाता है। यह एक गुप्त सुविधा है, जिसमें संचार और प्रशिक्षण केंद्र हैं। पहलगाम हमले में इसकी संभावित भूमिका की जांच चल रही थी। यह भारत के खिलाफ दीर्घकालिक योजनाओं का हिस्सा था। इसकी कमांड और नियंत्रण क्षमता ने इसे भारत के लिए खतरा बनाया। यहां पर हमला रात 01:25 बजे किया गया।