📍नई दिल्ली | 31 Jan, 2026, 2:12 PM
Pralay Missile Upgrade: डीआरडीओ अब अपनी स्वदेशी प्रलय मिसाइल को और ज्यादा एडवांस करने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक प्रलय मिसाइल के यूजर ट्रायल्स आखिरी चरण में पहुंच चुके हैं और इसी साल इसे भारतीय सेनाओं में शामिल किया जा सकता है। प्रलय एक कन्वेंशनल यानी नॉन-न्यूक्लियर मिसाइल है, लेकिन इसकी मारक क्षमता आज के मॉडर्न वॉरफेयर में भी जबरदस्त है। (Pralay Missile Upgrade)
Pralay Missile Upgrade: क्या है प्रलय मिसाइल
प्रलय एक स्वदेशी क्वासी-बैलिस्टिक सरफेस-टू-सरफेस मिसाइल है। इसे खास तौर पर टैक्टिकल यानी सीमित लेकिन बेहद सटीक हमलों के लिए तैयार किया गया है। इस मिसाइल को हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत के नेतृत्व में डीआरडीओ की कई प्रयोगशालाओं ने मिलकर डेवलप किया है। इसमें पृथ्वी और अग्नि मिसाइल सीरीज से मिली सीखों को भी इस्तेमाल किया गया है, लेकिन इसका इस्तेमाल पूरी तरह पारंपरिक युद्ध के लिए किया जाता है।
प्रलय मिसाइल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन के एयरबेस, कमांड सेंटर, रडार स्टेशन, बंकर और लॉजिस्टिक हब जैसे अहम ठिकानों को बेहद कम समय में निशाना बना सके। (Pralay Missile Upgrade)
चौंका देगी रेंज और स्पीड
प्रलय मिसाइल की रेंज करीब 150 किलोमीटर से लेकर 500 किलोमीटर तक मानी जाती है। वहीं, भविष्य में इसके एक्सटेंडेड रेंज वर्जन पर भी काम हो सकता है। स्पीड की बात करें तो यह मिसाइल मिड-कोर्स में मैक-5 से ज्यादा की रफ्तार पकड़ सकती है और टर्मिनल फेज में तेज और सीधी डाइव करती है, जिससे इसे इंटरसेप्ट करना दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है।
इसकी सबसे बड़ी ताकत इसका मैन्यूवरेबल ट्रैजेक्टरी है। यानी यह उड़ान के दौरान रास्ता बदल सकती है। यही वजह है कि दुश्मन के आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी इसे आसानी से रोक नहीं पाते। (Pralay Missile Upgrade)
ले जा सकती है इतना वॉरहेड
प्रलय मिसाइल में 350 से 1000 किलोग्राम तक का मॉड्यूलर वारहेड लगाया जा सकता है। इसमें कई तरह के वारहेड ऑप्शन मौजूद हैं। कुछ वारहेड्स खास तौर पर बंकर और मजबूत स्ट्रक्चर को भेदने के लिए बनाए गए हैं, जबकि कुछ रनवे डिनायल यानी एयरफील्ड को लंबे समय तक बेकार करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।
गाइडेंस सिस्टम की बात करें तो प्रलय में एडवांस्ड इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम के साथ रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर लगाया गया है। इससे इसकी सटीकता बेहद ज्यादा बढ़ जाती है। इसका सीईपी यानी सर्कुलर एरर प्रोबेबिलिटी टारगेट से चूक की संभावना 10 मीटर से भी कम है, जो किसी भी टैक्टिकल मिसाइल के लिए ये बहुत बड़ी बात है। (Pralay Missile Upgrade)
हालिया ट्रायल्स से बढ़ा भरोसा
दिसंबर 2025 के आखिर में ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से प्रलय मिसाइल का एक अहम यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल किया गया। इस दौरान एक ही मोबाइल लॉन्चर से बेहद कम समय के अंतर पर दो मिसाइलें दागी गईं। दोनों मिसाइलों ने अपने तय किए गए टारगेट्स को सटीकता से हिट किया।
इस ट्रायल ने साबित किया कि प्रलय मिसाइल न सिर्फ सटीक है, बल्कि सैल्वो लॉन्च, यानी एक के बाद एक कई मिसाइलें दागने की क्षमता भी रखती है। युद्ध के हालात में यह क्षमता बेहद अहम मानी जाती है। (Pralay Missile Upgrade)
2026 में इंडक्शन की तैयारी
डीआरडीओ चीफ डॉक्टर समीर वी कामत के मुताबिक, प्रलय मिसाइल के यूजर ट्रायल्स 2026 में पूरे हो जाएंगे। इसके बाद इसे भारतीय सेना में शामिल किया जाएगा। शुरुआती चरण में इसे ब्रिगेड-लेवल फॉर्मेशन में तैनात किया जा सकता है, ताकि सीमित समय में दुश्मन पर तेज और सटीक हमला किया जा सके।
सेना में शामिल होने के बाद प्रलय, ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और पिनाका मल्टी-बैरेल रॉकेट सिस्टम के साथ मिलकर भारत की टैक्टिकल स्ट्राइक क्षमता को बड़ी मजबूती मिलेगी। (Pralay Missile Upgrade)
30 मिनट से भी कम समय में लॉन्च
प्रलय मिसाइल को मोबाइल, कैनिस्टराइज्ड लॉन्चर से दागा जाता है। इसका मतलब यह है कि लॉन्च की तैयारी में 30 मिनट से भी कम समय लगता है। यह मिसाइल “शूट-एंड-स्कूट” रणनीति के तहत काम करती है, यानी हमला करने के तुरंत बाद लॉन्चर अपनी जगह बदल सकता है। इससे दुश्मन के काउंटर अटैक की संभावना काफी कम हो जाती है।
प्रलय मिसाइल के प्रोडक्शन में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के साथ-साथ निजी क्षेत्र की कंपनियों जैसे टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और एलएंडटी को भी शामिल किया गया है। इससे देश में एक मजबूत डिफेंस इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम तैयार हो रहा है। (Pralay Missile Upgrade)
क्यों खास है प्रलय मिसाइल
आज के दौर में युद्ध सिर्फ न्यूक्लियर हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है। सीमित लेकिन सटीक पारंपरिक हमले रणनीतिक रूप से ज्यादा अहम हो गए हैं। प्रलय मिसाइल इसी जरूरत को पूरा करती है। यह भारत को यह क्षमता देती है कि वह बिना न्यूक्लियर हथियारों का इस्तेमाल किए, दुश्मन के अहम सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा सके।
रूस के मिलिटरी एक्सपर्ट ने भी पढ़े प्रलय के कसीदे
रूस के जाने-माने मिलिटरी एक्सपर्ट एवगेनी दामांत्सेव ने भी प्रलय मिसाइल की तारीफ की है। उन्होंने प्रलय के हाइपरसोनिक मैन्युवर, एडवांस्ड गाइडेंस सिस्टम और टर्मिनल फेज डाइव को मॉडर्न एयर डिफेंस सिस्टम्स के लिए गंभीर खतरा बताया है।
अपने विश्लेषण में दामांत्सेव ने कहा है कि प्रलय मिसाइल पारंपरिक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल और पूरी तरह मैन्युवरिंग हाइपरसोनिक हथियारों के बीच की एक खास श्रेणी में आती है। उन्होंने तकनीकी रूप से प्रलय मिसाइल को एक टू-स्टेज हथियार बताया, जिसमें सॉलिड प्रोपेलेंट रॉकेट मोटर्स का इस्तेमाल किया गया है। इसमें एक डिटैचेबल वारहेड होता है, जिसे स्वतंत्र रूप से टारगेट किया जा सकता है। इसका नेविगेशन सिस्टम इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम पर बेस्ड है, जिसे जीपीएस अपडेट्स से सपोर्ट मिलता है।
रूसी एक्सपर्ट के मुताबिक, इस गाइडेंस सिस्टम को भविष्य में और भी एडवांस किया जा सकता है। इसमें एक्टिव-पैसिव होमिंग हेड जोड़ने की संभावना है, जिससे यह मिसाइल रेडियो-कॉन्ट्रास्ट और रडार से उत्सर्जन करने वाले टारगेट्स को खुद पहचान कर ट्रैक कर सकेगी। इसका मतलब यह है कि प्रलय सिर्फ स्टैटिक टारगेट्स के अलावा मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम और हाई-वैल्यू टारगेट्स को भी निशाना बना सकेगी।
वहीं, इसका टर्मिनल कंट्रोल मैकेनिज्म भी काफी घातक है। दामांत्सेव ने बताया कि मिसाइल में फोल्डिंग लैटिस एयरोडायनामिक फिन्स लगाए गए हैं। ये फिन्स टर्मिनल फेज में एक्टिव मैन्युवरिंग की क्षमता देते हैं, जिससे मिसाइल अपनी दिशा अचानक बदल सकती है। (Pralay Missile Upgrade)
रफ्तार पहुंत जाती है 6,480 किलोमीटर प्रति घंटा
दामांत्सेव के मुताबिक बूस्ट फेज के दौरान प्रलय की रफ्तार लगभग 6,480 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच जाती है। इसके बाद जब वारहेड अलग होता है, तब भी यह 1,300 से 850 मीटर प्रति सेकंड की स्पीड बनाए रखता है और इसी दौरान कॉम्प्लैक्स मैन्युवर करता है। यही मैन्युवर लेटेस्ट इंटरसेप्टर मिसाइलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाते हैं।
रूसी विश्लेषक का कहना है कि प्रलय मिसाइल एक खास तरह की हाइपरसोनिक ट्रैजेक्टरी पर उड़ान भरती है, जहां इसकी स्पीड मैक-5 से ज्यादा हो जाती है। यह मिसाइल किसी पारंपरिक बैलिस्टिक आर्क पर नहीं चलती, बल्कि वायुमंडल के भीतर मिड-कोर्स मैन्युवर करती है। इस तरह की एटमॉस्फेरिक हाइपरसोनिक फ्लाइट में मिसाइल का पूरा रास्ता कई हिस्सों में बंट जाता है। हर हिस्से में मिसाइल नियंत्रित ढंग से दिशा बदलती है, जिससे दुश्मन के रडार सिस्टम भ्रमित हो जाते हैं और एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर्स के लिए सटीक गणना करना बेहद मुश्किल हो जाता है। (Pralay Missile Upgrade)
टर्मिनल फेज में प्रलय का फ्लाइट प्रोफाइल और भी आक्रामक हो जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, मिसाइल पहले अपेक्षाकृत कम ऊंचाई तक उतरती है और फिर अचानक एक तेज “पुल-अप” मैन्युवर करती है। इसके बाद यह लगभग 90 डिग्री के कोण पर सीधी और खड़ी डाइव करते हुए टारगेट पर गिरती है। (Pralay Missile Upgrade)


