📍नई दिल्ली | 2 Dec, 2025, 9:57 PM
DRDO Rocket Sled Test: डीआरडीओ ने फाइटर एयरक्राफ्ट के एस्केप सिस्टम का हाई-स्पीड डायनामिक टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया है। यह टेस्ट चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) के रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड फैसिलिटी में किया गया। यह वही जगह है जहां बेहद तेज रफ्तार पर असली उड़ान जैसी स्थितियों को कंट्रोल तरीके से सिम्युलेट किया जाता है।
टेस्ट का मुख्य उद्देश्य यह जांचना था कि किसी आपातकाल में फाइटर जेट की कैनोपी सेवरेंस यानी कॉकपिट के शीशे का कटना, इजेक्शन सीक्वेंसिंग यानी सीट के बाहर निकलने का समय, और एयरक्रू रिकवरी यानी पायलट की सुरक्षित निकासी सबकुछ सही ढंग से काम करता है या नहीं। (DRDO Rocket Sled Test)
इस हाई-स्पीड टेस्ट में एलसीए तेजस के फोरबॉडी को एक ड्यूल-स्लेड सिस्टम पर फिट किया गया। इसके नीचे कई सॉलिड प्रोपेलेंट रॉकेट मोटर्स लगाई गईं, जिनकी फेज्ड फायरिंग से स्लेड को तेज रफ्तार दी गई। इस दौरान एक इंस्ट्रूमेंटेड एंथ्रोपोमॉर्फिक टेस्ट डमी का इस्तेमाल किया गया, जो असली पायलट के शरीर पर लगने वाले झटके, दबाव और स्पीड को रिकॉर्ड करती है। पूरा परीक्षण ऑनबोर्ड कैमरों और ग्राउंड बेस्ड सिस्टम से रिकॉर्ड किया गया। (DRDO Rocket Sled Test)
🇮🇳🚀 DRDO Successfully Tests High-Speed Rocket-Sled Escape System for Fighter Aircraft
DRDO has achieved a major breakthrough with a successful high-speed rocket-sled test of a fighter aircraft escape system at the Rail Track Rocket Sled facility (TBRL Chandigarh). #DRDO… pic.twitter.com/fZvsRVcbdq— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) December 2, 2025
डीआरडीओ ने यह टेस्ट एडीए, एचएएल और इंडियन एयर फोर्स के साथ मिलकर किया। यह टेस्ट इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि डायनामिक इजेक्शन टेस्ट दुनिया के सिर्फ कुछ देशों में किया जाता है। इस तरह के टेस्ट असली उड़ान जैसी मुश्किल परिस्थितियों में सिस्टम की क्षमता को प्रमाणित करते हैं। (DRDO Rocket Sled Test)
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता पर डीआरडीओ और सभी सहयोगी संगठनों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक की बड़ी छलांग है। डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत ने भी टीम की सराहना की और कहा कि यह उपलब्धि पायलट सुरक्षा सिस्टम की मजबूती को साबित करती है। (DRDO Rocket Sled Test)
वहीं, इस टेस्ट ने एक बार फिर दिखा दिया कि भारत अब फाइटर एयरक्राफ्ट से जुड़ी कॉम्प्लेक्स टेक्नीक्स की टेस्टिंग भी खुद करने में सक्षम है। इससे भारतीय लड़ाकू विमानों खासकर तेजस और आने वाले नए फाइटर प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा क्षमता और मजबूत होगी। (DRDO Rocket Sled Test)


