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Astra BVRAAM: एस्ट्रा मिसाइल में लगाया स्वदेशी सीकर, DRDO और वायुसेना ने Su-30 MKI से किया सफल परीक्षण

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📍नई दिल्ली/भुवनेश्वर | 11 Jul, 2025, 9:09 PM

Astra BVRAAM: भारत ने डिफेंस सेक्टर में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय वायुसेना ने 11 जुलाई 2025 को ओडिशा के तट पर सुखोई-30 एमके-आई विमान से स्वदेशी बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (BVRAAM) ‘एस्ट्रा’ का सफल उड़ान परीक्षण किया। खास बात यह थी कि इस मिसाइल में स्वदेशी रेडियो फ्रीक्वेंसी (Radio Frequency – RF) सीकर लगाया गया था। परीक्षण के दौरान दो मिसाइलें दागी गईं, और दोनों ही मामलों में मिसाइलों ने लक्ष्यों को सटीकता के साथ नष्ट कर दिया।

Astra BVRAAM: क्या है ‘अस्त्र’ मिसाइल?

‘अस्त्र’ का मतलब होता है ‘हथियार’। यह एक बीवीआरएएएम (Beyond Visual Range Air-to-Air Missile) है यानी ऐसी मिसाइल जो आंखों से न दिखने वाली दूरी से भी दुश्मन के विमान को निशाना बना सकती है। इसकी मारक क्षमता 100 किलोमीटर से अधिक है और यह अत्याधुनिक मार्गदर्शन और नेविगेशन सिस्टम से लैस है। । यानी दुश्मन के विमान को इतने फासले से भी गिराया जा सकता है कि वो आपको देख तक नहीं सकता। इसकी रफ्तार 4.5 मैक (लगभग हाइपरसोनिक) है, और यह इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स (ईसीएम) के खिलाफ भी प्रभावी है।

कैसे हुआ परीक्षण?

मिसाइल को भारतीय वायुसेना के Su-30 MKI विमान से लॉन्च किया गया। इस परीक्षण के दौरान डीआरडीओ और भारतीय वाायुसेना की टीम ने दो बार मिसाइल को दागा। दोनों बार यह बिना किसी चूक के लक्ष्य को बिल्कुल सटीकता से भेदने में सफल रही। ये दोनों लक्ष्य हाई-स्पीड, यानी बहुत तेज उड़ान भरने वाले बिना पायलट वाले हवाई टारगेट (unmanned aerial targets) थे। इनका उपयोग इसीलिए किया गया ताकि असली युद्ध जैसे हालात बनाए जा सकें।

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रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर: क्या है इसकी अहमियत?

परीक्षण के दौरान सभी सबसिस्टम ने उम्मीद के मुताबिक काम किया, जिसमें डीआरडीओ द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया स्वदेशी आरएफ सीकर भी शामिल है। सीकर (Seeker) मिसाइल का वह हिस्सा होता है जो टारगेट को ट्रैक करता है और अंत तक उसका पीछा करता है। आमतौर पर हाईटेक मिसाइलों में यह हिस्सा विदेशी तकनीक पर आधारित होता है, लेकिन DRDO ने इसे भी अब पूरी तरह से स्वदेश में ही डेवलप किया है। यह रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) सीकर हवा में उड़ते लक्ष्य से निकलने वाले रेडियो सिग्नल को पकड़ता है और उसी दिशा में मिसाइल को गाइड करता है। ताकि मिसाइल अपने टारगेट से बिल्कुल न चूके। यह तकनीक अब तक केवल कुछ चुनिंदा देशों के पास ही थी।

परफॉर्मेंस रही शानदार

परीक्षण के बाद मिले आंकड़ों (फ्लाइट डेटा) से यह साबित हो गया कि मिसाइल के सभी हिस्सों यानी गाइडेंस सिस्टम, नेविगेशन, इंजन, सीकर और एक्सप्लोसिव सिस्टम ने उम्मीद के मुताबिक काम किया। डीआरडीओ के चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में लगे मॉनिटरिंग सिस्टम ने हर सेकंड की जानकारी को रिकॉर्ड किया।

एस्ट्रा बीवीआरएएएम की रेंज 100 किलोमीटर से अधिक है और यह लेटेस्ट गाइडेंस और नेविगेशन सिस्टम से लैस है। इस विपन सिस्टम को डेवलप करने में डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं के अलावा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) समेत 50 से अधिक सार्वजनिक और निजी उद्योगों ने योगदान दिया है।

रक्षा मंत्री और डीआरडीओ चेयरमैन ने दी बधाई

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि के लिए डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना और देश की रक्षा इंडस्ट्री को बधाई दी। उन्होंने कहा कि “स्वदेशी सीकर के साथ ‘अस्त्र’ मिसाइल का सफल परीक्षण भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मील का पत्थर है।”

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वहीं, रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के सचिव और DRDO के चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत ने इस पूरी टीम को बधाई दी और कहा कि यह परीक्षण भारत की तकनीकी शक्ति और वैज्ञानिकों की मेहनत का प्रतिफल है।

बता दें कि अस्त्र मिसाइल का पहला परीक्षण साल 2014 में हुआ था, लेकिन उस समय इसका सीकर विदेशी था। 2019 में इसे भारतीय वायुसेना में शामिल कर लिया गया, लेकिन फिर भी इसकी कुछ तकनीकी प्रणाली आयातित थी। अब 2025 में इसे पूरी तरह स्वदेशी बना दिया गया है। इससे पहले ‘एस्ट्रा’ को सुखोई, मिराज-2000, तेजस और मिग-29 जैसे लड़ाकू विमानों के साथ इंटीग्रेट किया जा चुकी है, ताकि यह हर मिशन में इस्तेमाल की जा सके।

इससे पहले इसी साल 12 मार्च 2025 को, ओडिशा के चांदीपुर तट पर स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस एलसीए एमके-1ए से बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (बीवीआरएएएम) ‘एस्ट्रा’ का सफल उड़ान परीक्षण किया गया था। इस परीक्षण में मिसाइल ने हाई-स्पीड हवाई लक्ष्य को सटीकता के साथ नष्ट किया।

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2022-23 में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने भारत डायनामिक्स लिमिटेड को 200 एस्ट्रा मार्क-1 मिसाइलों के उत्पादन के लिए मंजूरी दी थी, जिसकी लागत 2,900 करोड़ रुपये से अधिक है। यह मिसाइल रूसी मूल की आर-77 मिसाइल का बेहतर विकल्प मानी जा रही है, जो भारतीय वायुसेना की हवाई युद्ध क्षमता को और मजबूत करेगी।

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