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Indian Navy LPD Project: आत्मनिर्भर भारत के तहत भारतीय नौसेना के लिए युद्धपोत बनाएंगे मझगांव डॉक और स्वॉन डिफेंस

समझौते के तहत एमडीएल अपनी विशेषज्ञता डिजाइन, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और सिस्टम इंटीग्रेशन में देगी, जबकि स्वान डिफेंस अपने शिपबिल्डिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करेगी। यह परियोजना गुजरात के पिपावाव शिपयार्ड में पूरी की जाएगी, जहां वॉरशिप्स का निर्माण और रिसर्च दोनों एक साथ हों...

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📍नई दिल्ली | 29 Oct, 2025, 11:00 AM

Indian Navy LPD Project: लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक (एलपीडी) बनाने को लेकर मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और स्वान डिफेंस एंड हेवी इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने साझेदारी की है। दोनों कंपनियों ने यह साझेदारी “आत्मनिर्भर भारत” योजना के तहत की है।

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यह समझौता मुंबई में आयोजित इंडिया मैरीटाइम वीक 2025 के दौरान हुआ। यह करार भारतीय नौसेना के लिए बेहद अहम है क्योंकि इससे देश में पहली बार इतने बड़े स्तर पर एम्फीबियस वॉरशिप का निर्माण किया जाएगा।

समझौते के तहत एमडीएल अपनी विशेषज्ञता डिजाइन, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और सिस्टम इंटीग्रेशन में देगी, जबकि स्वान डिफेंस अपने शिपबिल्डिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करेगी। यह परियोजना गुजरात के पिपावाव शिपयार्ड में पूरी की जाएगी, जहां वॉरशिप्स का निर्माण और रिसर्च दोनों एक साथ होंगे।

एमडीएल ने कहा कि यह साझेदारी दोनों कंपनियों की तकनीकी और वित्तीय क्षमता को एकजुट कर भारतीय नौसेना के लिए बेहतरीन समाधान देने के उद्देश्य से की गई है। इस सहयोग से सरकार की पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप नीति को मजबूती मिलेगी।

एमडीएल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कैप्टन जगमोहन ने कहा, “यह साझेदारी भारतीय शिपबिल्डिंग उद्योग के लिए एक नया अध्याय है। लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक्स भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को और बढ़ाएंगे। हमारा लक्ष्य है भारत में बने, भारत के लिए विश्वस्तरीय जहाज तैयार करना।”

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वहीं स्वॉन डिफेंस के डायरेक्टर विवेक मर्चेंट ने कहा कि एमडीएल के अनुभव के साथ हम तकनीकी रूप से एडवांस और ग्लोबल लेवल के वॉरशिप्स बनाने के लिए तैयार हैं। यह साझेदारी आत्मनिर्भर भारत की भावना को मजबूत करेगी और भारत को एक ग्लोबल शिपबिल्डिंग हब बनाने की दिशा में आगे बढ़ाएगी।”

बता दें कि हाल ही में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने नौसेना के लिए चार लैंडिंग डॉक शिप के अधिग्रहण को मंजूरी दी थी। इन जहाजों की कुल लागत करीब 33,000 करोड़ रुपयेबताई गई है। इनका इस्तेमाल भारत की समुद्री सीमा की सुरक्षा, एम्फीबियस ऑपरेशन (समुद्र और तट दोनों पर अभियान) और मानवीय सहायता व आपदा राहत मिशनों के लिए किया जाएगा।

इन जहाजों के बन जाने से भारतीय नौसेना की “ब्लू-वॉटर कैपेबिलिटी” यानी गहरे समुद्र में ताकत दिखाने की क्षमता और बढ़ेगी। इससे भारत अपने तटीय इलाकों से बाहर भी राहत और रक्षा अभियान चला सकेगा।

समझौते के बाद स्वॉन डिफेंस के शेयर में तेजी देखने को मिली और यह 5 फीसदी के अपर सर्किट पर पहुंच गया। वहीं, एमडीएल के शेयर में मामूली गिरावट दर्ज की गई, लेकिन कंपनी की ऑर्डर बुक मजबूत बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह करार दोनों कंपनियों के लिए लंबी अवधि में फायदेमंद साबित हो सकता है क्योंकि भारत में रक्षा उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है।

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