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S-400 Air Defence System: भारत को रूस से मिलने वाले बाकी दो एयर डिफेंस सिस्टम के लिए करना होगा लंबा इंतजार, इन विकल्प पर हो रहा है विचार

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📍नई दिल्ली | 12 Nov, 2024, 5:18 PM

S-400 air defence system: भारत को रूस से मिलने वाले अत्याधुनिक S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की आखिरी दो यूनिट्स के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है। इस बहुप्रतीक्षित सिस्टम की डिलीवरी 2025 तक होने की उम्मीद थी, लेकिन अब संभावना है कि ये यूनिट्स 2026 की शुरुआत में मिलेंगी।

S-400 Air Defence System: India Faces Long Wait for Remaining Two Russian Units, Exploring Alternative

भारत और रूस के बीच 2018 में 5.43 अरब डॉलर की लागत से पांच S-400 यूनिट्स का सौदा हुआ था। यह एयर डिफेंस सिस्टम दुनिया की सबसे एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम में से एक है, जो 400 किलोमीटर तक की दूरी तक कई हवाई खतरों को ट्रैक करने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम है।

S-400 प्रणाली की तैनाती और चुनौतियां

भारत में पहली S-400 यूनिट दिसंबर 2021 में पहुंची थी, जिसे तुरंत वेस्टर्न सेक्टर क्षेत्र में तैनात कर दिया गया था। इसके बाद, अगले दो वर्षों में दूसरी और तीसरी यूनिट्स भी तैनात कर दी गईं थीं, जिससे भारत की पश्चिमी और पूर्वी सीमा पर रक्षा व्यवस्था मजबूत हुई। इन यूनिट्स की तैनाती के बाद पाकिस्तान और चीन से होने वाले हवाई खतरों के खिलाफ भारत के डिफेंस सिस्टम को मजबूती मिली है।

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हालांकि, पूरी तैनाती के रास्ते में कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। COVID-19 महामारी के कारण सप्लाई चेन में बाधा आई, जिससे शुरुआती डिलीवरी में देरी हुई। इसके अलावा, यूक्रेन संकट ने रूस की डिफेंस इंडस्ट्री को भी प्रभावित किया, जिससे डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स को पूरा करने की क्षमता पर असर पड़ा है।

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देरी से टेंशन में आई भारतीय वायु सेना!

इन अंतिम दो S-400 यूनिट्स की देरी ने भारतीय वायु सेना (IAF) में चिंताएं बढ़ा दी हैं। IAF और रक्षा मंत्रालय ने इस देरी को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक समाधान तलाशने शुरू कर दिए हैं, जिनमें अतिरिक्त एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद पर विचार किया जा रहा है। इसके जरिए सीमाओं पर उच्च तैयारियों को बनाए रखा जा सकेगा, विशेषकर तब जब चीन के साथ संबंधों में 2020 के बाद से तनाव बना हुआ है।

वर्तमान में तैनात S-400 प्रणाली की तीन यूनिट्स ने भारत की हवाई सुरक्षा क्षमताओं को पहले ही मजबूती प्रदान की है। इनके जरिए उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में निगरानी और खतरे का सामना करने की क्षमता बढ़ गई है। हालांकि, पूरी प्रणाली की तैनाती रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, खासकर क्षेत्रीय सुरक्षा में हो रहे बदलाव और चीन की सैन्य प्रगति को देखते हुए।

भारत को चाहिए एस-400 का पूरा सेट

भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चल रहे तनाव ने एक मजबूत एयर डिफेंस नेटवर्क बनाए रखने की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। S-400 की देरी भारत के लिए एक चुनौती है, जो अपनी प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करना चाहता है।

चीन के एडवांस मिसाइल सिस्टम और पाँचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स में निवेश के बीच भारत के लिए S-400 सिस्टम का पूरा सेट होना जरूरी है, ताकि भारत अपनी रक्षा में एक महत्वपूर्ण बढ़त बनाए रख सके।

S-400 सिस्टम की खरीद 2018 में भारत के रक्षा बलों को आधुनिक बनाने और उनकी कमजोरियों को कम करने के प्रयास का हिस्सा था। लेकिन 2026 तक इस सिस्टम की डिलीवरी में संभावित विस्तार ने भारत की रक्षा रणनीति को एक नाजुक मोड़ पर ला कर खड़ा किया है।

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इस देरी के बीच, भारत के लिए महत्वपूर्ण होगा कि वह सीमाओं को सुरक्षित बनाए रखने के लिए वैकल्पिक एयर डिफेंस सॉल्यूशंस की खरीद करें, ताकि किसी भी संभावित सुरक्षा सेंध का मजबूती से सामना कर सके। भारत इस चुनौती के बावजूद अपने राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में प्रतिबद्ध है।

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  • S-400 Air Defence System: भारत को रूस से मिलने वाले बाकी दो एयर डिफेंस सिस्टम के लिए करना होगा लंबा इंतजार, इन विकल्प पर हो रहा है विचार

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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