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गणतंत्र दिवस परेड 2026 में VIP एन्क्लोजर खत्म! नदियों के नाम से पहचानी जाएंगी दर्शक दीर्घाएं

कर्तव्य पथ पर बनी दर्शक दीर्घाओं के नाम अब यमुना, ब्यास, ब्रह्मपुत्र, गंगा, तीस्ता, चंबल, सतलुज, सोन, रावी, वैगई, पेरियार, गंडक, पेनार, नर्मदा, घाघरा, गोदावरी, कृष्णा, महानदी, सिंधु, कोसी, झेलम और कावेरी जैसे नामों पर रखे गए हैं...

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📍नई दिल्ली | 16 Jan, 2026, 6:11 PM

Republic Day Parade 2026: गणतंत्र दिवस परेड 2026 इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रही है। देश की आजादी के बाद पहली बार गणतंत्र दिवस परेड के दौरान कर्तव्य पथ पर बने दर्शक दीर्घाओं यानी व्यूइंग गैलरीज को सिर्फ नंबरों से नहीं, बल्कि भारत की प्रमुख नदियों के नाम से पहचाना जाएगा।

अब तक गणतंत्र दिवस परेड में दर्शकों के बैठने की जगहों को ब्लॉक नंबर या वीआईपी एन्क्लोजर के नाम से जाना जाता था। लेकिन 2026 में इस परंपरा को तोड़ते हुए सरकार ने इन सभी दीर्घाओं को भारत की जीवनरेखाओं कही जाने वाली नदियों के नाम पर रखा है। इसका मकसद देश की सांस्कृतिक विरासत, सभ्यता और आम नागरिकों से जुड़े प्रतीकों को सामने लाना है। (Republic Day Parade 2026)

Republic Day Parade 2026: नदियों के नाम पर रखी गईं दर्शक दीर्घाएं

सूत्रों के मुताबिक, कर्तव्य पथ पर बनी दर्शक दीर्घाओं के नाम अब यमुना, ब्यास, ब्रह्मपुत्र, गंगा, तीस्ता, चंबल, सतलुज, सोन, रावी, वैगई, पेरियार, गंडक, पेनार, नर्मदा, घाघरा, गोदावरी, कृष्णा, महानदी, सिंधु, कोसी, झेलम और कावेरी जैसे नामों पर रखे गए हैं। ये नदियां देश के अलग-अलग हिस्सों से होकर बहती हैं और सदियों से वहां के लोगों की जीवनरेखा बनी हुई हैं।

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन नदियों ने न सिर्फ भारत की भौगोलिक संरचना को आकार दिया है, बल्कि देश की सभ्यता, संस्कृति, कृषि, व्यापार और अर्थव्यवस्था को भी मजबूत आधार दिया है। इसी सोच के तहत गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर नदियों को सम्मान देने का फैसला लिया गया है। (Republic Day Parade 2026)

राष्ट्रपति के पास गंगा और घाघरा गैलरी

कर्तव्य पथ पर जिस स्थान से राष्ट्रपति और भारतीय सेनाओं की सुप्रीम कमांडर द्रौपदी मुर्मू परेड की सलामी लेंगी, उसके पास बनी दर्शक दीर्घाओं को गंगा और घाघरा नाम दिया गया है। गंगा को भारत में आस्था और संस्कृति की सबसे पवित्र नदी माना जाता है, जबकि घाघरा उत्तर भारत के बड़े हिस्से को जीवन देती है। (Republic Day Parade 2026)

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ज्यादा दर्शकों के लिए बड़ी गैलरी

सूत्रों के मुताबिक, सभी दीर्घाएं एक जैसी नहीं हैं। तीस्ता और चंबल नाम की दर्शक दीर्घाएं आकार में बड़ी हैं, ताकि ज्यादा संख्या में लोग परेड को देख सकें। इससे आम नागरिकों को बेहतर सुविधा मिलेगी और गणतंत्र दिवस को जनभागीदारी का उत्सव बनाने की सोच को बल मिलेगा।

पहले इन जगहों को सिर्फ “ब्लॉक” या “वीआईपी एन्क्लोजर” कहा जाता था, जिससे आम और खास के बीच फर्क साफ दिखाई देता था। अब नदियों के नाम रखने से यह दूरी खत्म करने की कोशिश की गई है। (Republic Day Parade 2026)

वीआईपी संस्कृति खत्म करने का संदेश

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने साफ शब्दों में कहा है कि इस बार गणतंत्र दिवस समारोह के जरिए वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने का संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि न सिर्फ परेड के दौरान दर्शक दीर्घाओं को नदियों के नाम पर रखा गया है, बल्कि बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के दौरान एन्क्लोजर्स को भारतीय संगीत वाद्य यंत्रों के नाम पर रखा जाएगा।

उनका कहना है कि गणतंत्र दिवस सिर्फ किसी खास वर्ग का नहीं, बल्कि पूरे देश का पर्व है, और इसे आम नागरिकों से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। (Republic Day Parade 2026)

परेड की अवधि 90 मिनट

रक्षा सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि परेड की अवधि में कोई बदलाव नहीं किया गया है। गणतंत्र दिवस परेड करीब 90 मिनट की ही होगी, जैसा कि पिछले वर्षों में होती रही है। हालांकि इस दौरान दर्शकों को नए अनुभव और नए दृश्य देखने को मिलेंगे।

2,000 कलाकार करेंगे प्रस्तुति

इस बार गणतंत्र दिवस परेड में करीब 2,000 कलाकार हिस्सा लेंगे। ये कलाकार देश के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों से आए होंगे और कर्तव्य पथ पर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। इनके जरिए भारत की विविध संस्कृति, लोक परंपराएं और कलात्मक विरासत को दिखाया जाएगा।

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पिछले साल यानी 2025 में गणतंत्र दिवस समारोह में करीब 5,000 कलाकारों ने हिस्सा लिया था, जिसे इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया था। इस बार संख्या थोड़ी कम जरूर है, लेकिन प्रस्तुति का स्तर और विविधता बनाए रखने पर जोर दिया गया है। (Republic Day Parade 2026)

वीर गाथा पुरस्कार विजेता बच्चे भी होंगे शामिल

पिछले वर्षों की तरह इस बार भी सरकार ने विशेष मेहमानों और वीर गाथा पुरस्कार से सम्मानित बच्चों को गणतंत्र दिवस परेड देखने के लिए आमंत्रित किया है। ये बच्चे देश के अलग-अलग हिस्सों से आते हैं और इन्होंने छोटी उम्र में साहस और बहादुरी की मिसाल पेश की है।

77वें गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि

भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के लिए इस बार यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेताओं को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इनमें यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंतोनियो लुईस सांतोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डर लेयेन शामिल हैं।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच 2004 से रणनीतिक साझेदारी है। दोनों पक्षों के बीच सहयोग समय के साथ और मजबूत हुआ है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, फरवरी 2025 में यूरोपीय संघ के कमिश्नरों के भारत दौरे के बाद द्विपक्षीय संबंधों को नई गति मिली है। (Republic Day Parade 2026)

वंदे मातरम के 150 साल पर थीम

इस साल गणतंत्र दिवस समारोह की थीम “वंदे मातरम के 150 वर्ष” रखी गई है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि इस थीम को पूरे आयोजन में खास तौर पर दिखाया जाएगा। परेड के समापन पर वंदे मातरम बैनर के साथ गुब्बारे छोड़े जाएंगे।

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गणतंत्र दिवस के निमंत्रण पत्र और टिकट भी इसी देशभक्ति थीम पर आधारित होंगे। इसके अलावा, कर्तव्य पथ पर 30 झांकियां निकाली जाएंगी, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता, इतिहास और परंपराओं को दर्शाएंगी। (Republic Day Parade 2026)

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  • गणतंत्र दिवस परेड 2026 में VIP एन्क्लोजर खत्म! नदियों के नाम से पहचानी जाएंगी दर्शक दीर्घाएं

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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