📍नई दिल्ली | 7 Oct, 2025, 7:33 PM
Raksha Navachar Samvaad: भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि आज का युद्धक्षेत्र पूरी तरह बदल चुका है और भविष्य के युद्ध एल्गोरिद्म, ऑटोनॉमस सिस्टम्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और क्वांटम कम्प्यूटिंग से तय होंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स जैसे हाई-टेक हथियार भी युद्ध की दिशा तय करेंगे। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमने इसका डेमो भी देखा।
विज्ञान भवन में आयोजित ‘रक्षा नवाचार संवाद: इंटरेक्शन विद आईडीईएक्स स्टार्टअप्स’ (Raksha Navachar Samvaad) कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने आईडीईएक्स (इनोवेशन्स फोर डिफेंस एक्सलेंस) स्टार्टअप्स से बातचीत में कहा कि “युद्धक्षेत्र पूरी तरह बदल चुका है… अब युद्ध पारंपरिक हथियारों से नहीं, तकनीक से जीते जाएंगे।” उन्होंने इनोवेटर्स से अपील की कि वे मौजूदा समाधानों से आगे बढ़कर ऐसी तकनीकें विकसित करें जो युद्ध की परिभाषा ही बदल दें।
Raksha Navachar Samvaad के बारे में रक्षा मंत्री दिया बयान
उन्होंने कहा कि भारत को केवल फॉलोअर या नकलची नहीं, बल्कि नई तकनीक का क्रिएटर और ग्लोबल स्टैंडर्ड सेट करने वाला बनना होगा। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इन तकनीकों के प्रभावी प्रदर्शन का उदाहरण भी दिया।
राजनाथ सिंह ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण की दिशा में बड़ी छलांग लगाई है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में घरेलू स्रोतों से पूंजीगत खरीद यानी (कैपिटल एक्विजिशन) 2021-22 में 74,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 1.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसे उन्होंने सिर्फ एक सांख्यिकीय बदलाव नहीं, बल्कि “निर्भरता से आत्मविश्वास” की मानसिकता में परिवर्तन बताया।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार की पब्लिक प्रोक्योरमेंट पॉलिसी के तहत सालाना खरीद में कम से कम 25 फीसदी हिस्सा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए आरक्षित है और 350 से अधिक सामान खासतौर पर इन्हीं के लिए चिन्हित की गई हैं। उन्होंने कहा कि “रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अब नारा नहीं रहा, यह एक आंदोलन बन चुका है। पॉलिसी से लेकर प्रैक्टिस तक और इनोवेशन से लेकर इम्पैक्ट तक, यह परिवर्तन हमारे इनोवेटर्स और युवाओं की बदौलत संभव हुआ है।”
रक्षा मंत्री ने कहा कि आज भारत में 100 से अधिक यूनिकॉर्न कंपनियां हैं, लेकिन डिफेंस सेक्टर में एक भी यूनिकॉर्न नहीं है। उन्होंने स्टार्टअप्स से आह्वान किया कि वे भारत का पहला डिफेंस यूनिकॉर्न बनाएं। उन्होंने कहा कि “यह सिर्फ एक कंपनी नहीं होगी, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय होगी।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इनोवेटर्स और स्टार्टअप्स के साथ खड़ी है और “विचार से कार्यान्वयन” तक हर कदम पर उनका साथ देगी।
राजनाथ सिंह ने बताया कि रक्षा उत्पादन में भारत ने बीते वित्त वर्ष में 1.5 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन किया और 23,000 करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात किया। उन्होंने कहा, “आप उस नए भारत के निर्माता हैं जो अपने लिए डिजाइन करता है, डेवलप करता है और प्रोड्यूस करता है। आपकी ऊर्जा और इनोवेशन ही आत्मनिर्भर भारत की तकनीकी दृष्टि को साकार कर रहे हैं।”

उन्होंने 2018 में शुरू हुए आईडेक्स कार्यक्रम को एक क्रांतिकारी पहल बताया जिसने भारत में डिफेंस इनोवेशन को लोकतांत्रिक बनाया। उन्होंने कहा कि जब आईडेक्स लॉन्च हुआ था तो इसका आइडिया था भारत के युवाओं की प्रतिभा को सशस्त्र बलों की तकनीकी जरूरतों से जोड़ना। “आज, सिर्फ सात वर्षों में 650 से अधिक आईडेक्स विजेता उभरे हैं और 3,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के प्रोटोटाइप प्रोक्योरमेंट्स सुनिश्चित किए गए हैं। यह भारत के डिफेंस इनोवेशन में एक क्रांति है।”
रक्षा मंत्री ने कहा कि आईडेक्स से पहले भारत का टैलेंट विश्व स्तर पर आईटी, टेलीकॉम और स्पेस में तो योगदान दे रहा था, लेकिन रक्षा क्षेत्र में उसका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा था। उन्होंने कहा, “आईडेक्स के जरिए हमने सुनिश्चित किया कि भारत की प्रतिभा भारत की सुरक्षा के लिए काम करे। आज यह पहल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन बन चुकी है जो भारतीय रक्षा निर्माण के भविष्य को गढ़ रही है।”
उन्होंने बताया कि सरकार ने स्टार्टअप्स और एमएसएमई को सपोर्ट देने के लिए रक्षा खरीद, उत्पादन और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में कई अहम सुधार किए हैं। नया डिफेंस प्रोक्योरमेंट मैनुअल- 2025 पांच साल की गारंटीड ऑर्डर का वक्त देता है, जिसे पांच साल और बढ़ाया जा सकता है। डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर में भी सुधार किए जा रहे हैं ताकि ट्रायल्स को तेज किया जा सके और इनोवेटिव सॉल्यूशंस के लिए सुनिश्चित प्रोक्योरमेंट हो सके।
Raksha Navachar Samvaad के बारे में कहा कि आईडेक्स, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड, डिफेंस टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम और सेल्फ-सर्टिफिकेशन प्रावधानों के जरिए एक व्यापक इकोसिस्टम बनाया जा रहा है जहां इनोवेशन को प्रोत्साहित, समर्थित और स्केल किया जा सके।
राजनाथ सिंह ने उन स्टार्टअप्स की भी सराहना की, जिन्हें ऑपरेशन सिंदूर में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इनमें रेफी एम फाइबर और ग्रेविटी सिस्टम्स जैसी कंपनियां शामिल थीं। उन्होंने कहा कि भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा विकसित तकनीकें अब दुबई एयरशो 2025 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सराही जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि रक्षा मंत्रालय, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, डीपीआईआईटी और वित्तीय संस्थानों के साथ रणनीतिक साझेदारी कर रहा है Raksha Navachar Samvaad ताकि स्टार्टअप्स को एंड-टू-एंड सपोर्ट मिल सके। उद्देश्य ऐसा इकोसिस्टम बनाना है जहां हर आइडिया प्रोडक्ट बन सके, हर प्रोटोटाइप स्केल हो सके और हर इनोवेशन भारत की डिफेंस प्रिपेयर्डनेस में योगदान दे सके।

