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रूस की खुफिया जानकारी से खुले थे ‘म्यामांर ड्रोन केस’ के राज, जिसके बाद हत्थे चढ़े एक अमेरिकी और 6 यूक्रेनी

इन सातों विदेशी नागरिकों की गतिविधियां साल 2024 से ही निगरानी में थीं। बताया गया है कि यह ग्रुप कई बार म्यांमार गया और वहां के एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स को ड्रोन वारफेयर, ड्रोन असेंबली और सिग्नल जैमिंग जैसी तकनीकों की ट्रेनिंग देता था...

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📍नई दिल्ली | 19 Mar, 2026, 11:30 AM

Myanmar Drone Case: हाल ही में म्यामांर ड्रोन केस में बड़ा खुलासा हुआ है। पकड़े गए एक अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिकों की खुफिया जानकारी रूस की तरफ से मिली थी। इस जानकारी के आधार पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने 6 यूक्रेनी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया। इन सभी पर आरोप है कि वे म्यांमार में सक्रिय एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स को ड्रोन से जुड़ी ट्रेनिंग दे रहे थे और इस गतिविधि का असर भारत की आंतरिक सुरक्षा पर भी पड़ सकता था।

मामले से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, रूस की एजेंसियों ने भारतीय एजेंसियों को इन लोगों की गतिविधियों के बारे में इनपुट साझा किया था। हालांकि इस खुफिया जानकारी का पूरी डिटेल सामने नहीं आई है। (Myanmar Drone Case)

Myanmar Drone Case: म्यांमार से जुड़ी गतिविधियों पर नजर

रिपोर्ट के अनुसार, इन सातों विदेशी नागरिकों की गतिविधियां साल 2024 से ही निगरानी में थीं। बताया गया है कि यह ग्रुप कई बार म्यांमार गया और वहां के एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स को ड्रोन वारफेयर, ड्रोन असेंबली और सिग्नल जैमिंग जैसी तकनीकों की ट्रेनिंग देता था।

इसके साथ ही यह भी सामने आया कि यूरोप से बड़ी मात्रा में ड्रोन और संबंधित उपकरण भारत के रास्ते म्यांमार पहुंचाए गए। यह मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जिन ग्रुप्स को ट्रेनिंग दी जा रही थी, उनके भारत के उत्तर-पूर्व में सक्रिय उग्रवादी संगठनों से संपर्क होने की आशंका जताई गई है। (Myanmar Drone Case)

तीन महीने से चल रही थी ट्रैकिंग

सूत्रों के अनुसार, एनआईए और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पिछले लगभग तीन महीने से इस पूरे नेटवर्क पर नजर रख रही थीं। खास तौर पर मिजोरम, मणिपुर और नागालैंड जैसे सीमावर्ती इलाकों में गतिविधियों को ट्रैक किया जा रहा था।

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रूस से मिली जानकारी ने इस जांच को निर्णायक मोड़ मिला। इसके बाद 13 मार्च को एक कॉर्डिनेटेड ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता एयरपोर्ट पर एक साथ कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। (Myanmar Drone Case)

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

गिरफ्तार किए गए लोगों में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। इन सभी ने भारत में वैध टूरिस्ट वीजा पर प्रवेश किया था, लेकिन बाद में आवश्यक परमिट के बिना मिजोरम जैसे प्रतिबंधित क्षेत्रों में पहुंच गए।

जांच एजेंसियों का कहना है कि यह समूह भारत को एक ट्रांजिट रूट की तरह इस्तेमाल कर म्यांमार में प्रवेश करता था, जहां पहले से तय ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे। (Myanmar Drone Case)

ड्रोन ट्रेनिंग और सप्लाई के आरोप

एनआईए के अनुसार, यह समूह केवल ट्रेनिंग ही नहीं दे रहा था, बल्कि ड्रोन और उससे जुड़े उपकरणों की सप्लाई में भी शामिल था। आरोप है कि ये लोग ड्रोन ऑपरेशन, असेंबली और सिग्नल जैमिंग जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी की जानकारी दे रहे थे।

जांच के दौरान यह भी बताया गया कि इन गतिविधियों का सीधा असर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है, क्योंकि इससे देश के भीतर सक्रिय प्रतिबंधित संगठनों को तकनीकी सहायता मिल सकती थी। (Myanmar Drone Case)

गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को विशेष एनआईए कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें 11 दिनों की एनआईए कस्टडी में भेज दिया है, जहां उनसे आगे पूछताछ की जा रही है। एनआईए ने कोर्ट को बताया कि आरोपियों के मोबाइल फोन और लैपटॉप को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि उनके नेटवर्क और संपर्कों के बारे में और जानकारी जुटाई जा सके।

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अधिकारियों का कहना है कि रूस ने केवल इन लोगों की गतिविधियों से जुड़ी सामान्य जानकारी साझा की थी, जिससे जांच एजेंसियों को दिशा मिली। सूत्रों का कहना है कि रूस म्यांमार की मिलिट्री जुंटा का समर्थक है, इसलिए वह उन एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स पर नजर रखता है जो जुंटा के खिलाफ लड़ रहे हैं। ये ग्रुप्स खासकर यूक्रेन युद्ध से जुड़े वेटरन्स की ट्रेनिंग पर रूस लगाताार नजर रख रहा था। इसके अलावा, गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैन डाइक के सोशल मीडिया पोस्ट्स में “Russia, we are coming for you” जैसी बातें भी सामने आई थीं, जिसके बाद से वह पहले से ही रूस की नजर में था। (Myanmar Drone Case)

अन्य संदिग्धों की तलाश जारी

जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि यह समूह 14 लोगों के एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। फिलहाल बाकी लोगों के बारे में पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वे अभी म्यांमार में हैं या कहीं और चले गए हैं।

इसके अलावा भारतीय एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि इन विदेशी नागरिकों को भारत के भीतर किसने मदद की और किस तरह से उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में प्रवेश किया। (Myanmar Drone Case)

इस मामले के सामने आने के बाद यूक्रेन ने अपने नागरिकों की गिरफ्तारी पर औपचारिक आपत्ति जताई है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं अमेरिका ने भी मामले की जानकारी होने की बात कही है, लेकिन ज्यादा टिप्पणी करने से इनकार किया है।

भारत की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, क्योंकि जांच जारी है। (Myanmar Drone Case)

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