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Ladakh fourth Axis Road: लद्दाख को चौथे सड़क मार्ग से जोड़ने की BRO की तैयारी, अब हर मौसम में लेह पहुंचना होगा आसान

बीआरओ ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत जो मुख्य सड़क बनाई जा रही है, उसका नाम कियाटो–करजोक रोड है। यह सड़क स्पीति घाटी के कियाटो (साउथ लाहौल) इलाके से शुरू होकर तकलिंग ला पास क्रास करेगी और लद्दाख के करजोक क्षेत्र तक पहुंचेगी...

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📍नई दिल्ली | 16 Dec, 2025, 5:10 PM

Ladakh fourth Axis Road: लद्दाख की कनेक्टिविटी को लेकर एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। सीमा सड़क संगठन यानी बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) लद्दाख को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने के लिए चौथे रणनीतिक रोड एक्सिस की तैयारी कर रहा है। यह नया रास्ता तकलिंग ला पास से होकर हिमाचल प्रदेश की ओर जाएगा, जिसके लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार की जा रही है। इसके पूरा होने के बाद लद्दाख और खासकर लेह तक साल के बारहों महीने पहुंचना संभव हो सकेगा।

Ladakh fourth Axis Road: अभी तक लद्दाख पहुंचने के लिए तीन रास्ते

बीआरओ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन ने रक्षा समाचार को बताया, लद्दाख भारत के लिए सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि पहले लद्दाख तक पहुंचने के लिए केवल एक ही मुख्य रास्ता था, जो श्रीनगर से जोजिला पास के जरिए लेह को जोड़ता था। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहता था, जिससे लद्दाख का संपर्क देश से कट जाता था। (Ladakh fourth Axis Road)

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इसके बाद दूसरा मार्ग मनाली से लेह तक तैयार किया गया, जो उपशी के रास्ते लद्दाख पहुंचता है। इस रास्ते में तंगला ला, बारालाचा ला, नाकी ला और लाचुंग ला जैसे ऊंचे पहाड़ी दर्रे आते हैं। हालांकि यह मार्ग भी सर्दियों में बर्फ से ढक जाता है और आवाजाही बंद हो जाती है। अटल टनल बनने के बाद मनाली की तरफ समस्या कुछ हद तक कम हुई, लेकिन ऊंचे पास अब भी चुनौती बने हुए हैं। (Ladakh fourth Axis Road)

Ladakh fourth Axis Road: नीमू-पदम-दारचा रोड पर काम जारी

तीसरे विकल्प के तौर पर नीमू-पदम-दारचा रोड पर काम किया जा रहा है। यह सड़क करीब 298 किलोमीटर लंबी है और लद्दाख के लिए सबसे छोटा मार्ग माना जा रहा है। इस रोड पर शिंकु ला टनल का निर्माण चल रहा है, जिसका पहला ब्लास्ट पिछले साल कारगिल विजय दिवस के मौके पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। बीआरओ के मुताबिक, शिंकु ला टनल बन जाने के बाद यह मार्ग ऑल-वेदर हो जाएगा और साल भर लेह तक पहुंचा जा सकेगा। (Ladakh fourth Axis Road)

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तकलिंग ला पास से दक्षिण हिमाचल तक

बीआरओ डीजी लेफ्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन के मुताबिक, अब लद्दाख को चौथे सड़क मार्ग से जोड़ने की तैयारी है। उन्होंने बताया कि यह नया मार्ग तकलिंग ला पास से होकर लद्दाख को हिमाचल प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों से जोड़ेगा। बीआरओ के मुताबिक इस रूट के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्य यह है कि यदि किसी वजह से एक या दो मार्ग बंद हो जाएं, तब भी लद्दाख की सप्लाई लाइन और आवाजाही प्रभावित न हो। (Ladakh fourth Axis Road)

शिमला की तरफ से नया एक्सिस

लद्दाख को मिलने वाला चौथा रणनीतिक सड़क मार्ग शिमला की तरफ से तैयार किया जा रहा है, जिसके जरिए दक्षिणी हिमाचर प्रदेश की तरफ से लद्दाख को जोड़ने की तैयारी की जा रही है। यह नया रास्ता शिमला डिवीजन के मौजूदा सड़क नेटवर्क से निकलकर आगे बढ़ेगा। शिमला से ठियोग और रामपुर बुशहर होते हुए सड़क पहले ही किन्नौर जिले के रिकांग पिओ तक पहुंचती है। यह हिस्सा ऑल-वेदर रोड है और साल भर खुला रहता है। इसी मौजूदा नेटवर्क को आगे बढ़ाकर लद्दाख की ओर नया एक्सिस तैयार किया जा रहा है। (Ladakh fourth Axis Road)

रिकांग पिओ के बाद यह रास्ता अपर किन्नौर की तरफ बढ़ेगा और फिर स्पीति घाटी में प्रवेश करेगा। यहां से सड़क कियाटो क्षेत्र तक पहुंचेगी, जिसे स्पीति और लद्दाख के बीच का अहम जंक्शन माना जाता है। इसके बाद यह रास्ता तकलिंग ला पास की ओर जाएगा।

17,700 फीट पर है तकलिंग ला पास

तकलिंग ला पास लगभग 17,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और यह इलाका पहले पुराने ट्रेड रूट के तौर पर इस्तेमाल होता रहा है। अब इसे आधुनिक सड़क नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। इस रूट के जरिए लद्दाख को हिमाचल प्रदेश के अंदरूनी इलाकों से सीधी और वैकल्पिक कनेक्टिविटी मिलेगी। यह मार्ग मिलिट्री मूवमेंट के साथ-साथ आम नागरिकों के लिए भी फायदेमंद होगा। (Ladakh fourth Axis Road)

तकलिंग ला पास पर बनेगी टनल

बीआरओ ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत जो मुख्य सड़क बनाई जा रही है, उसका नाम कियाटो-करजोक रोड है। यह सड़क स्पीति घाटी के कियाटो (साउथ लाहौल) इलाके से शुरू होकर तकलिंग ला पास क्रास करेगी और लद्दाख के करजोक क्षेत्र तक पहुंचेगी। तकलिंग ला पार करने के बाद यह सड़क लद्दाख के करजोक (नॉर्थ लद्दाख) इलाके में प्रवेश करेगी, जो त्सो मोरीरी झील के पास स्थित है। इसके लिए तकलिंग ला पास पर एक टनल बनाने की भी योजना है। इस सड़क की कुल लंबाई करीब 125 किलोमीटर होगी। यही सड़क आगे चलकर सादन और मोरे प्लेंस इलाके से जुड़ जाएगी। (Ladakh fourth Axis Road)

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तकलिंग ला से सादन तक का हिस्सा इस पूरे प्रोजेक्ट का अहम भाग है। तकलिंग ला पास पार करने के बाद सड़क मोरे प्लेन्स के रास्ते सादन तक पहुंचेगी। यह दूरी करीब 50 से 60 किलोमीटर की होगी। यह मार्ग भविष्य में मनाली–लेह हाईवे का एक वैकल्पिक रास्ता बनेगा। अभी इस हिस्से का सर्वे पूरा हो चुका है और डीपीआर अंतिम चरण में है। निर्माण शुरू होने के बाद यह सड़क लद्दाख को हिमाचल प्रदेश से और तेजी से जोड़ सकेगी। (Ladakh fourth Axis Road)

वहीं, तकलिंग ला से सादन पहुंचने के बाद, हिमाचल प्रदेश की ओर एक और सड़क की योजना पर काम चल रहा है। यह रास्ता दारचा से शुरू होकर शिंकु ला पास होते हुए पदम और फिर निमू तक जाएगा। इस पूरे मार्ग को दारचा–शिंकु ला–पदम–निमू रोड कहा जाता है। इसकी कुल लंबाई करीब 220 किलोमीटर से ज्यादा होगी। इस परियोजना के तहत शिंकु ला पर करीब 4.1 किलोमीटर लंबी टनल बनाई जाएगी, जिससे यह रास्ता पूरे साल खुला रह सकेगा। (Ladakh fourth Axis Road)

इस सड़क और टनल की डीपीआर नेशनल हाइवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन तैयार कर रहा है। सर्वे का काम पूरा हो चुका है और डीपीआर को अंतिम रूप दिया जा रहा है। योजना के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया 2026 में और निर्माण कार्य 2027 में शुरू होने की संभावना है। इसके पूरा होने पर यह लद्दाख के लिए एक और वैकल्पिक रास्ता बन जाएगा।

टनल पूरा होने में करीब चार साल

इस पूरे प्रोजेक्ट को लेकर सीमा सड़क संगठन के महानिदेशक रघु श्रीनिवासन ने बताया कि तकलिंग ला पास पर बनने वाली टनल को पूरा होने में करीब चार साल लगेंगे, जबकि सड़क का निर्माण लगभग दो-तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बीआरओ डीजी के अनुसार, सड़क पहले तैयार कर ली जाएगी ताकि सीमित समय में भी लद्दाख तक वैकल्पिक आवाजाही शुरू की जा सके, जबकि टनल बनने के बाद यह मार्ग पूरी तरह ऑल-वेदर बन जाएगा। (Ladakh fourth Axis Road)

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इन सभी प्रोजेक्ट्स का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि लद्दाख तक पहुंच अब केवल एक-दो रास्तों पर निर्भर नहीं रहेगी। सेना को सीमाई इलाकों तक तेजी से पहुंचने में मदद मिलेगी और जरूरी सामान की सप्लाई भी आसान होगी। इसके अलावा, पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा।

हालांकि, इन सड़कों को बनाना आसान नहीं है। ऊंचाई, भारी बर्फबारी और कठिन मौसम बड़ी चुनौती हैं। इसके बावजूद बीआरओ इन परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहा है और टिकाऊ निर्माण पर जोर दिया जा रहा है।

बीआरओ अधिकारियों के मुताबिक, पहले जहां लद्दाख तक पहुंचने के लिए सिर्फ एक मुख्य रास्ता था, अब चार प्रमुख एक्सिस पर काम किया जा रहा है। ये सभी रास्ते मिलकर लद्दाख की ऑल-वेदर कनेक्टिविटी को मजबूत करेंगे। इससे न सिर्फ सेना को फायदा होगा, बल्कि स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी आसान होगी।

बीआरओ का कहना है कि इन सभी प्रोजेक्ट्स में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, अत्यधिक ठंड और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए काम किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और अनुभव के आधार पर इन सड़कों को तैयार किया जा रहा है ताकि वे लंबे समय तक टिकाऊ रहें। (Ladakh fourth Axis Road)

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  • Ladakh fourth Axis Road: लद्दाख को चौथे सड़क मार्ग से जोड़ने की BRO की तैयारी, अब हर मौसम में लेह पहुंचना होगा आसान

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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