📍नई दिल्ली | 25 Mar, 2026, 10:03 PM
DPG Meeting 2026: ईरान में चल रही भीषण जंग के बीच भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए नई दिल्ली में 18वें डिफेंस पॉलिसी ग्रुप (डीपीजी) बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और अमेरिका के अंडर सेक्रेटरी फॉर पॉलिसी एल्ब्रिज कोल्बी ने संयुक्त रूप से की। बैठक में दोनों देशों ने मौजूदा रक्षा सहयोग की समीक्षा की और आगे के सहयोग के लिए अहम क्षेत्रों पर सहमति जताई।
डिफेंस पॉलिसी ग्रुप भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में सबसे अहम संवाद मंच माना जाता है। इसके जरिए दोनों देश रक्षा, सुरक्षा, सैन्य सहयोग और रणनीतिक मामलों पर नियमित बातचीत करते हैं। इस बैठक में भी दोनों पक्षों ने उन पहलुओं पर ध्यान दिया जो दोनों देशों की सुरक्षा और सैन्य तैयारियों से सीधे जुड़े हैं।
बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच पहले से चल रही रक्षा योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। इसमें रक्षा उपकरणों की खरीद, तकनीकी सहयोग और सैन्य साझेदारी से जुड़े मुद्दे शामिल रहे। दोनों पक्षों ने माना कि इन योजनाओं को और बेहतर तरीके से लागू करने की जरूरत है, ताकि इसका फायदा जमीन पर भी दिखाई दे।
DPG Meeting 2026: को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन पर जोर
इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रक्षा उपकरणों के को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन को लेकर चर्चा रहा। दोनों देशों ने ऐसे क्षेत्रों की पहचान की, जहां मिलकर आधुनिक हथियार और तकनीक विकसित की जा सकती है।
इसका उद्देश्य यह है कि भारत और अमेरिका केवल खरीदार और विक्रेता के रूप में नहीं, बल्कि साझेदार के रूप में काम करें। इससे भारत को नई तकनीक तक पहुंच मिलेगी और देश के अंदर रक्षा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
The 18th India–US Defence Policy Group meeting was held in New Delhi today. Defence Secretary Shri Rajesh Kumar Singh and US Under Secretary of War for Policy Mr. Elbridge Colby co-chaired the talks.
Both sides reviewed ongoing initiatives, identified priority areas for… pic.twitter.com/phfnFrFS1a
— Ministry of Defence, Government of India (@SpokespersonMoD) March 25, 2026
बता दें कि जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल और स्ट्राइकर इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स के को-प्रोडक्शन की योजनाएं पहले से ही आगे बढ़ रही हैं। इसके साथ ही ऑटोनॉमस सिस्टम्स इंडस्ट्री अलायंस (एशिया) जैसी नई पहल पर भी चर्चा हुई, जिसके तहत एंडुरिल-महिंद्रा और एल3 हैरिस-भारत इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे पाटर्नरशिप मॉडल उभरकर सामने आ रहे हैं।
सैन्य सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति
बैठक में दोनों देशों ने अपनी सेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। इसके तहत संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रम और अधिकारियों के बीच रणनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। इस तरह के सहयोग से दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बेहतर होता है और किसी भी स्थिति में साथ मिलकर काम करने की क्षमता बढ़ती है।
बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर भी चर्चा हुई। यह क्षेत्र दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि इस क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए सहयोग जारी रखना जरूरी है।
बैठक में आधुनिक सैन्य तकनीकों पर भी विशेष जोर दिया गया। इसमें एडवांस सिस्टम, निगरानी क्षमता और नई पीढ़ी के हथियारों के विकास जैसे विषय शामिल रहे। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तकनीकी सहयोग को और बढ़ाया जाएगा।
वहीं, बैठक में दोनों देशों के बीच चल रही योजनाओं और समझौतों की समीक्षा की गई। इसमें लेमोआ (2016), कॉमकासा (2018), बीईसीए (2020) और इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी एग्रीमेंट जैसे समझौते शामिल रहे।
इन समझौतों की वजह से अमेरिका के कई रक्षा उपकरण जैसे सी-17, सी-130जे, पी-8आई, अपाचे, चिनूक हेलीकॉप्टर और एमक्यू-9बी ड्रोन भारतीय सेना में शामिल किए जा चुके हैं।
इस समय भारत अमेरिका से 20 अरब डॉलर से ज्यादा के रक्षा उपकरण ले चुका है। बैठक में इन उपकरणों की देखभाल, स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और भारत में ही उनकी मरम्मत की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर खास ध्यान दिया गया।

