📍नई दिल्ली | 16 Dec, 2025, 9:39 PM
India-Russia Defence Cooperation: भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग से जुड़ी एक हालिया मीडिया रिपोर्ट को लेकर रक्षा मंत्रालय ने सफाई दी है। रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा प्रकाशित खबरें तथ्यहीन और गलत हैं। इन रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अक्टूबर 2025 में रूस गए सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ प्राइवेट डिफेंस इंडस्ट्री के प्रतिनिधि भी शामिल थे और उन्होंने रूसी पक्ष से बैठकें की थीं।
रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अक्टूबर 2025 में हुआ यह दौरा पूरी तरह आधिकारिक था और इसमें केवल सरकारी अधिकारी तथा रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के प्रतिनिधि ही शामिल थे। किसी भी निजी कंपनी या निजी उद्योग के प्रतिनिधि को इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं किया गया था।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा इंडिया-रूस इंटर-गवर्नमेंटल कमीशन ऑन मिलिट्री एंड मिलिट्री टेक्निकल कोऑपरेशन (IRIGC-M&MTC) के तहत आयोजित किया गया था। इसका उद्देश्य भारत और रूस के बीच तीनों सेनाओं थलसेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़े ट्रेडिशनल मिलिट्री को-ऑपरेशन को सिस्टमैटिक फ्रेमवर्क में आगे बढ़ाना है।
इस फ्रेमवर्क के अंतर्गत वर्किंग ग्रुप ऑन मिलिट्री टेक्निकल कोऑपरेशन एंड डिफेंस इंडस्ट्री (IRWG-MTC&DI) का गठन किया गया है। यह वर्किंग ग्रुप हर साल भारत और रूस में बारी-बारी से बैठक करता है। वर्ष 2024 में इसकी 22वीं बैठक भारत में आयोजित हुई थी।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस वर्किंग ग्रुप की 23वीं बैठक इस साल 25 से 29 अक्टूबर के बीच मॉस्को में आयोजित की गई थी। इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से डिफेंस प्रोडक्शन सेक्रेटरी संजीव कुमार और रूस की ओर से फेडरल सर्विस फॉर मिलिट्री टेक्निकल को-ऑपरेशन के फर्स्ट डिप्टी डायरेक्टर आंद्रे ए बोयत्सोव ने की थी।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल में रक्षा मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन, डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस, तीनों सेनाओं के अधिकारी और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के प्रतिनिधि शामिल थे। इनमें आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड, भारत डायनामिक्स लिमिटेड, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां शामिल थीं।
रक्षा मंत्रालय ने साफ कहा है कि किसी भी निजी रक्षा कंपनी का कोई प्रतिनिधि इस आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा नहीं था। मंत्रालय ने मीडिया रिपोर्ट में किए गए दावे को पूरी तरह खारिज किया है।
मंत्रालय ने इस बात पर भी स्पष्टीकरण दिया कि मीडिया का यह कहना कि रक्षा मंत्रालय ने इस खबर पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, सही नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि संवेदनशील और रणनीतिक विषयों पर तुरंत प्रतिक्रिया देना हमेशा संभव नहीं होता, खासकर तब जब रिपोर्ट प्रकाशित होने से ठीक पहले टिप्पणी मांगी जाए।
रक्षा मंत्रालय ने मीडिया से अपील की है कि भविष्य में ऐसी खबरें प्रकाशित करने से पहले कड़े फैक्ट-चेकिंग प्रोटोकॉल अपनाए जाएं, ताकि गलत और भ्रामक जानकारी फैलने से रोकी जा सके।
यह दौरा भारत-रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग का हिस्सा था, जिसमें सैन्य तकनीकी सहयोग, रक्षा उद्योग से जुड़े मुद्दों और दोनों देशों के बीच आपसी कॉर्डिनेशन पर चर्चा की गई। यह सहयोग गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट के स्तर पर तय किए गए सिस्टमैटिक फ्रेमवर्क के तहत हुआ।
रक्षा मंत्रालय ने दोहराया है कि भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग पूरी तरह संस्थागत प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाता है और इसमें पारदर्शिता तथा निर्धारित नियमों का पालन किया जाता है।


