📍नई दिल्ली | 9 Mar, 2026, 3:32 PM
India arms importer SIPRI report: दुनिया में हथियारों के व्यापार और सैन्य खरीद को लेकर जारी की गई नई सिपरी रिपोर्ट में भारत की स्थिति को लेकर कई अहम बातें सामने आई हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत 2021 से 2025 के बीच दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक बना हुआ है। इस सूची में पहला स्थान यूक्रेन का है, जो इस समय रूस के साथ चल रहे युद्ध के कारण बड़े पैमाने पर सैन्य सहायता और हथियार ले रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल आर्म्स इंपोर्ट्स में भारत की हिस्सेदारी करीब 8.3 फीसदी रही। इसके बावजूद पिछले पांच सालों की तुलना में भारत के कुल हथियार आयात में हल्की गिरावट भी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट भारत के बढ़ते स्वदेशी रक्षा उत्पादन की वजह से आई है, हालांकि कई घरेलू रक्षा परियोजनाओं में देरी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। (India arms importer SIPRI report)
India arms importer SIPRI report: रूस, फ्रांस और इजराइल भारत के प्रमुख आर्म्स सप्लायर
सिपरी की रिपोर्ट के अनुसार भारत के लिए तीन प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता देश हैं, जिनमें रूस, फ्रांस और इजराइल शामिल हैं। रिपोर्ट बताती है कि 2021 से 2025 के बीच भारत के कुल हथियार आयात में रूस की हिस्सेदारी लगभग 40 फीसदी रही। इसके बाद फ्रांस का हिस्सा करीब 29 फीसदी और इजराइल का लगभग 15 फीसदी रहा।
रूस लंबे समय से भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार रहा है। भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में इस्तेमाल होने वाले कई प्रमुख प्लेटफॉर्म जैसे फाइटर जेट, टैंक, मिसाइल सिस्टम और पनडुब्बियां रूसी तकनीक पर आधारित हैं।
हालांकि पिछले एक दशक में भारत ने अपनी रक्षा खरीद को विविध बनाने की नीति अपनाई है। इसके तहत भारत ने फ्रांस, इजराइल और अमेरिका जैसे देशों से भी बड़ी मात्रा में सैन्य उपकरण खरीदने शुरू किए हैं। (India arms importer SIPRI report)
हथियार आयात में थोड़ी कमी, लेकिन बनी हुई निर्भरता
सिपरी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2016-2020 और 2021-2025 के बीच भारत के हथियार आयात में करीब 4 फीसदी की कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार यह गिरावट भारत की बढ़ती डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता की वजह से हुई है। भारत अब कई वेपन सिस्टम्स को खुद डिजाइन और विकसित करने की कोशिश कर रहा है।
उदाहरण के तौर पर भारत ने तेजस फाइटर जेट, अर्जुन टैंक, कई तरह की मिसाइल सिस्टम्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी डेवलप करने की दिशा में काम किया है। इसके अलावा “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में निजी कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ाई जा रही है।
हालांकि सिपरी ने यह भी कहा है कि भारत की कई घरेलू रक्षा परियोजनाएं अक्सर देरी का शिकार हो जाती हैं। ऐसे में कई महत्वपूर्ण सैन्य प्लेटफॉर्म के लिए भारत को अभी भी विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहना पड़ता है। (India arms importer SIPRI report)
भविष्य में विदेशी हथियारों पर निर्भरता जारी रहने के संकेत
रिपोर्ट में भारत के कुछ बड़े रक्षा सौदों का भी जिक्र किया गया है। सिपरी के अनुसार भारत ने हाल के वर्षों में कई बड़े सैन्य सौदों की योजना बनाई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि विदेशी हथियारों पर निर्भरता पूरी तरह खत्म नहीं होने वाली है। उदाहरण के तौर पर भारत फ्रांस से करीब 140 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट खरीदने की योजना बना रहा है। इसके अलावा जर्मनी से छह पनडुब्बियां खरीदने की प्रक्रिया भी चल रही है।
ये सौदे बताते हैं कि भारत अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए अभी भी विदेशी तकनीक और प्लेटफॉर्म पर भरोसा कर रहा है। (India arms importer SIPRI report)
रूस पर निर्भरता कम करने की कोशिश
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले दस वर्षों में भारत ने धीरे-धीरे रूस पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश की है। 2011 से 2015 के बीच भारत के कुल हथियार आयात में रूस की हिस्सेदारी लगभग 70 फीसदी थी। इसके बाद 2016 से 2020 के बीच यह घटकर 51 फीसदी रह गई और 2021 से 2025 के बीच यह और घटकर करीब 40 फीसदी पर आ गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे कई कारण हैं। इनमें रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंध, रूस-यूक्रेन युद्ध और भारत की नई रक्षा साझेदारियों का विस्तार शामिल है।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में फ्रांस, अमेरिका और इजराइल के साथ रक्षा सहयोग को काफी मजबूत किया है। इससे भारत को नई तकनीक और आधुनिक हथियार प्रणालियां प्राप्त करने में मदद मिली है। (India arms importer SIPRI report)
चीन और पाकिस्तान से तनाव भी एक बड़ा कारण
सिपरी की रिपोर्ट के अनुसार भारत द्वारा बड़े पैमाने पर हथियार खरीदने के पीछे एक प्रमुख कारण चीन और पाकिस्तान के साथ सुरक्षा तनाव है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से जारी है, जबकि पाकिस्तान के साथ भी कई बार सैन्य टकराव की स्थिति बन चुकी है। रिपोर्ट में 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सीमित सैन्य झड़प का भी जिक्र किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार ऐसे तनावपूर्ण माहौल में देशों को अपनी रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए हथियार खरीदने पड़ते हैं। यही कारण है कि भारत लगातार अपने सैन्य प्लेटफॉर्म को आधुनिक बनाने पर जोर दे रहा है। (India arms importer SIPRI report)
पाकिस्तान भी तेजी से कर रहा हथियार आयात
SIPRI की रिपोर्ट में पाकिस्तान की स्थिति का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार 2021 से 2025 के बीच पाकिस्तान दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा हथियार आयातक बन गया है।
2016-2020 के दौरान पाकिस्तान इस सूची में दसवें स्थान पर था, लेकिन पिछले पांच वर्षों में उसके हथियार आयात में 66 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के कुल हथियार आयात में चीन की हिस्सेदारी लगभग 80 प्रतिशत है। इससे साफ है कि पाकिस्तान की रक्षा खरीद का अधिकांश हिस्सा चीन से आता है।
दिलचस्प बात यह भी है कि चीन ने 2021-2025 के दौरान 47 देशों को हथियार बेचे, लेकिन उसके कुल निर्यात का लगभग 61 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ पाकिस्तान को गया। (India arms importer SIPRI report)
वैश्विक हथियार व्यापार में अमेरिका का दबदबा
सिपरी की रिपोर्ट में वैश्विक हथियार निर्यात की स्थिति पर भी प्रकाश डाला गया है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक बना हुआ है।
2021 से 2025 के बीच वैश्विक हथियार निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 42 प्रतिशत रही। इसके बाद फ्रांस दूसरे स्थान पर रहा, जबकि रूस तीसरे स्थान पर रहा।
हालांकि रूस के हथियार निर्यात में पिछले कुछ वर्षों में बड़ी गिरावट देखी गई है। 2016-2020 के दौरान रूस का वैश्विक हथियार निर्यात में हिस्सा करीब 21 प्रतिशत था, जो 2021-2025 के दौरान घटकर लगभग 6.8 प्रतिशत रह गया। (India arms importer SIPRI report)
यूरोप में हथियार आयात में बड़ी बढ़ोतरी
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 1960 के दशक के बाद पहली बार यूरोप वैश्विक हथियार आयात में सबसे आगे निकल आया है।
2021 से 2025 के दौरान वैश्विक हथियार आयात में यूरोप की हिस्सेदारी करीब 33 प्रतिशत रही। इसके पीछे मुख्य कारण रूस-यूक्रेन युद्ध और यूरोपीय देशों की बढ़ती सुरक्षा चिंताएं हैं।
एशिया और ओशिनिया क्षेत्र का हिस्सा लगभग 31 प्रतिशत रहा, जबकि पश्चिम एशिया का हिस्सा करीब 26 प्रतिशत रहा। (India arms importer SIPRI report)

