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भारत के फिफ्थ-जेनरेशन फाइटर AMCA के लिए तीन कंसोर्टियम शॉर्टलिस्ट, जल्द जारी होगी RFP

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, शॉर्टलिस्ट किए गए तीनों कंसोर्टियम को आरएफपी यानी रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल अगले 2 से 3 महीनों में जारी किया जाएगा। इसका मतलब है कि मार्च-अप्रैल 2026 तक यह प्रक्रिया शुरू हो सकती है...

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📍नई दिल्ली | 3 Feb, 2026, 10:53 PM

AMCA fighter jet: भारत के सबसे महत्वाकांक्षी रक्षा प्रोजेक्ट्स में शामिल एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। स्वदेशी फिफ्थ-जेनरेशन स्टेल्थ फाइटर जेट को भारतीय वायुसेना की आने वाली पीढ़ियों की रीढ़ माना जा रहा है। हाल ही में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के मुताबिक एएमसीए के लिए सामने आए 7 इंडस्ट्री कंसोर्टियम में से 3 को शॉर्टलिस्ट कर लिया गया है। इस प्री-क्वालिफिकेशन प्रोसेस में कंपनियों को टेक्निकल क्षमता, फाइनेंशियल स्ट्रेंथ और हाई-एंड एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग को ध्यान में रखा कर चुना गया है।

हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर शॉर्टलिस्टेड कंपनियों के नामों का खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन डिफेंस इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों और हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें एलएंडटी, टाटा ग्रुप, अदाणी डिफेंस, और कल्याणी ग्रुप (भारत फोर्ज) जैसे बड़े नाम शामिल हो सकते हैं। यह साफ है कि इस बार सरकार ने सिर्फ सरकारी कंपनियों तक सीमित रहने के बजाय निजी क्षेत्र को भी बराबरी से मैदान में उतारा है। (AMCA fighter jet)

AMCA fighter jet: जल्द जारी होगी आरएफपी

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, शॉर्टलिस्ट किए गए तीनों कंसोर्टियम को आरएफपी यानी रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल अगले 2 से 3 महीनों में जारी किया जाएगा। इसका मतलब है कि मार्च-अप्रैल 2026 तक यह प्रक्रिया शुरू हो सकती है। आरएफपी के जरिए इन कंपनियों से एएमसीए के डेवलपमेंट, प्रोटोटाइप बिल्डिंग और शुरुआती प्रोडक्शन के लिए फाइनेंशियल और टेक्निकल बिड मांगी जाएगी।

इसके बाद इन तीनों में से एल1 यानी सबसे कम लागत और योग्य प्रस्ताव देने वाले कंसोर्टियम को चुना जाएगा। रक्षा सचिव के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया लगभग तीन महीनों में फाइनल हो सकती है।

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एएमसीए प्रोजेक्ट के लिए कुल सात इंडस्ट्री कंसोर्टियम ने अपनी बिड्स सबमिट की थीं। यह प्रक्रिया अक्टूबर 2025 में पूरी हुई थी। अगर कंपनियों की बात करें, तो इस प्रोजेक्ट में भारत की लगभग सभी बड़ी डिफेंस और एयरोस्पेस कंपनियां किसी न किसी रूप में शामिल रही हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड इस प्रोग्राम की रीढ़ मानी जा रही है और वह कई कंसोर्टियम में लीड या पार्टनर के तौर पर मौजूद है। (AMCA fighter jet)

लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) भी एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरी है, जिसने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और डायनामैटिक टेक्नोलॉजीज के साथ मिलकर कंसोर्टियम बनाया है। इसी तरह टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, जो टाटा ग्रुप की डिफेंस शाखा है, एयरोस्पेस सेक्टर में अपने अनुभव के चलते इस रेस में अहम खिलाड़ी मानी जा रही है।

अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भी इस प्रोजेक्ट के लिए गंभीर दावेदारी पेश की है। उसने हैदराबाद की एमटीएआर टेक्नोलॉजीज के साथ मिलकर कंसोर्टियम बनाया है। वहीं कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स, यानी भारत फोर्ज के नेतृत्व वाला समूह, डेटा पैटर्न्स और बीईएमएल के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट में शामिल हुआ है। इसके अलावा ब्रह्मोस एयरोस्पेस तिरुवनंतपुरम लिमिटेड, एक्सिसकेड्स टेक्नोलॉजीज और कुछ अन्य कंपनियों के कंसोर्टियम भी शुरुआती दौर में मुकाबले में थे। (AMCA fighter jet)

दिलचस्प बात यह है कि एएमसीए प्रोजेक्ट के शुरुआती ईओआई फेज में 28 से ज्यादा प्राइवेट कंपनियों ने एचएएल के साथ काम करने में रुचि दिखाई थी, लेकिन कड़ी जांच और मूल्यांकन के बाद अंतिम बिड्स सिर्फ सात कंसोर्टियम तक सीमित रहीं। इससे साफ है कि सरकार इस प्रोजेक्ट में सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि गुणवत्ता और क्षमता को प्राथमिकता दे रही है।

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पूरे प्रोग्राम में डीआरडीओ और एडीए डिजाइन और टेक्नोलॉजी की कमान संभाल रहे हैं, जबकि चुनी गई इंडस्ट्री कंपनियां प्रोटोटाइप निर्माण, ग्राउंड और फ्लाइट टेस्टिंग, और आगे चलकर सीरियल प्रोडक्शन में योगदान देंगी। यह मॉडल तेजस प्रोजेक्ट से अलग और कहीं ज्यादा व्यापक माना जा रहा है। (AMCA fighter jet)

पांच प्रोटोटाइप बनाए जाएंगे

एएमसीए प्रोग्राम के मौजूदा प्लान के मुताबिक, चुनी गई इंडस्ट्री पार्टनरशिप के तहत 5 प्रोटोटाइप एयरक्राफ्ट बनाए जाएंगे। इनमें से पहला प्रोटोटाइप 3 से 4 साल में तैयार होने की उम्मीद है। यानी अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चलता है, तो 2029 के आसपास एएमसीए की पहली उड़ान देखने को मिल सकती है। इस प्रोटोटाइप फेज के लिए सरकार ने 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की फंडिंग तय की है।

रक्षा सचिव ने साफ कहा है कि प्रोटोटाइप फेज अपेक्षाकृत छोटा होगा, लेकिन फुल-स्केल प्रोडक्शन तक पहुंचने में करीब 10 साल का समय लग सकता है। यह टाइमलाइन किसी भी फिफ्थ-जेनरेशन फाइटर प्रोग्राम के लिए सामान्य मानी जाती है। (AMCA fighter jet)

शुरुआत में जीई एफ-414 इंजन

एएमसीए के शुरुआती वर्जन यानी पहले दो स्क्वाड्रन में जीई एफ-414 इंजन का इस्तेमाल किया जाएगा। यह इंजन अमेरिका की कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक का है और इसे फिलहाल इंपोर्ट किया जाएगा। यही इंजन तेजस मार्क-2 के लिए भी चुना गया है।

रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती चरण में विदेशी इंजन का इस्तेमाल इसलिए जरूरी है ताकि प्रोग्राम में देरी न हो और एयरफोर्स को समय पर फाइटर मिल सके। हालांकि, यह व्यवस्था स्थायी नहीं होगी। (AMCA fighter jet)

स्वदेशी हाई-थ्रस्ट इंजन पर भी काम

लॉन्ग-टर्म प्लान में एएमसीए को 120 किलो न्यूटन क्लास के स्वदेशी इंजन से लैस करने की योजना है। इस इंजन का डेवलपमेंट 2036–37 के आसपास पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके लिए भारत फ्रांस की सफरान जैसी कंपनियों के साथ को-डेवलपमेंट मॉडल पर काम कर रहा है। भविष्य में भारत की योजना है कि सबसे क्रिटिकल टेक्नोलॉजी यानी इंजन भी पूरी तरह भारत के नियंत्रण में हो। (AMCA fighter jet)

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एएमसीए में क्या होगा खास

एएमसीए को शुरू से ही एक नेटिव स्टेल्थ प्लेटफॉर्म के तौर पर डिजाइन किया जा रहा है। इसमें लो ऑब्जर्वेबल शेप, इंटरनल वेपन बे, एडवांस्ड सेंसर फ्यूजन, एआई-इनेबल्ड एवियोनिक्स, और सुपरक्रूज क्षमता जैसे फीचर्स शामिल होंगे।

इसका मतलब यह है कि एएमसीए बिना आफ्टरबर्नर के भी सुपरसोनिक स्पीड बनाए रख सकेगा और दुश्मन के रडार से बचते हुए अंदर तक जा कर हमला कर सकेगा।

भारतीय वायुसेना को अगले दो दशकों में बड़ी संख्या में पुराने मिराज, मिग-29 और जगुआर जैसे विमानों को रिटायर करना है। ऐसे में एएमसीए वह प्लेटफॉर्म है, जो 2035 के बाद एयरफोर्स की एयर सुपीरियॉरिटी बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा। योजना के मुताबिक, वायुसेना कम से कम 125 एएमसीए फाइटर जेट्स शामिल कर सकती है, जिन्हें 7 स्क्वाड्रन में तैनात किया जाएगा। यह संख्या भविष्य में बढ़ भी सकती है। (AMCA fighter jet)

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