📍नई दिल्ली | 18 Nov, 2025, 11:33 AM
ECHS Home Delivery: पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को और आसान बनाने के लिए केंद्रीय संगठन ईसीएचएस ने घर पर दवाइयां पहुंचाने की नई सुविधा शुरू की है। यह पायलट प्रोजेक्ट 16 अक्टूबर को जारी आदेश के बाद शुरू हुआ है और पहले चरण में इसे देशभर के 38 ईसीएचएस पॉलिक्लिनिक में लागू किया जा रहा है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन पूर्व सैनिकों तक दवा पहुंचाना है, जिन्हें पॉलिक्लिनिक तक आने में कठिनाई होती है। इसमें 70 वर्ष से अधिक आयु के लाभार्थी, व्हाइट कार्ड धारक और युद्ध विकलांग शामिल किए गए हैं।
ECHS Home Delivery: कैसे चलेगी नई होम डिलीवरी सेवा?
यह पूरी योजना कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) स्कीम के माध्यम से लागू होगी। प्रत्येक पॉलिक्लिनिक के लिए एक विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर यानी वीएलई नियुक्त होगा। कोशिश की जाएगी कि अधिक से अधिक पूर्व सैनिक वीएलई के रूप में चुने जाएं।
पॉलिक्लिनिक की फार्मेसी दवाइयां तैयार कर वीएलई को सौंपेगी। इसके बाद भारतीय डाक विभाग दवाइयों को लाभार्थियों के घर तक पहुंचाएगा। हर चरण की जानकारी मोबाइल एप पर दर्ज की जाएगी ताकि दवा कहां पहुंची है, ताकि इसका सही रिकॉर्ड बना रहे।
ECHS Home Delivery: केंद्र और कमांड मुख्यालयों की जिम्मेदारियां
केंद्रीय संगठन ईसीएचएस पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी करेगा और हर तिमाही यह पुष्टि करेगा कि प्रत्येक पॉलिक्लिनिक कितनी डिलीवरी कर रहा है। इसी के आधार पर सीएससी, डाक विभाग और तकनीकी सेवा प्रदाता सोर्स डॉट कॉम प्रा. लिमिटेड (एसडीसीपीएल) को भुगतान किया जाएगा।
कमांड मुख्यालय यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी पॉलिक्लिनिक द्वारा तय सीमा से अधिक डिलीवरी न हो। स्टेशन मुख्यालय हर महीने डिलीवरी का रिकॉर्ड भेजेंगे और पूरी प्रक्रिया को मॉनिटर करेंगे।
ECHS Home Delivery: पॉलिक्लिनिक में पैकिंग और वितरण की व्यवस्था
ईसीएचएस पॉलिक्लिनिक के लिए जरूरी है कि दवाइयों की पैकिंग सुरक्षित तरीके से की जाए। इसके लिए अलग से स्थान और फर्नीचर उपलब्ध कराया गया है। फार्मेसी यह सुनिश्चित करेगी कि दवाइयां ठीक तरह से पैक हों और उन्हें समय पर वीएलई को सौंपा जाए।

होम डिलीवरी का लाभ केवल उन्हीं लाभार्थियों को दिया जाएगा जो योजना की शर्तों में आते हैं। यदि लाभार्थी चाहें तो पॉलिक्लिनिक जाकर भी दवा ले सकते हैं।
सीएससी की जिम्मेदारी वीएलई को ट्रेनिंग देने, पैकिंग सामग्री उपलब्ध कराने और रिकॉर्ड तैयार रखने की है। वीएलई मोबाइल ऐप के माध्यम से हर पैकेज की स्थिति “रेडी फॉर डिस्पेच” के रूप में अपडेट करेगा और दवाइयां डाक विभाग को सौंपेगा।
वीएलई यह भी सुनिश्चित करेगा कि दवाइयां सुरक्षित और सही तरीके से पैक हों, ताकि रास्ते में कोई नुकसान न हो।
भारतीय डाक विभाग प्रत्येक डिलीवरी के लिए पोस्टल लेबल जारी करेगा। डिलीवरी पूरी होने पर लाभार्थी से ओटीपी वेरिफिकेशन लेकर इसकी पुष्टि की जाएगी।
डाक विभाग सोर्स डॉट कॉम प्रा. लिमिटेड (एसडीसीपीएल) मोबाइल ऐप पर हर स्टेटस अपडेट करेगा, जिससे लाभार्थी अपने पैकेज को ट्रैक कर सकेंगे।
टेक्नोलॉजी सपोर्ट देगी एसडीसीपीएल
सोर्स डॉट कॉम प्रा. लिमिटेड (एसडीसीपीएल) इस प्रोजेक्ट के लिए एंड-टू-एंड टेक्नोलॉजी उपलब्ध करा रही है। कंपनी एंड्रॉइड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर मोबाइल ऐप देगी, जिसके जरिए लाभार्थी दवाओं की स्थिति देख सकेंगे।
एसडीसीपीएल पूरे सिस्टम को 96% क्वार्टरली अपटाइम एसएलए के तहत चलाएगी और सभी स्टेकहोल्डर्स को तकनीकी सहायता देगी।
कौन-सी दवाइयां नहीं भेजी जाएंगी?
इस पायलट प्रोजेक्ट में कुछ दवाइयों को शामिल नहीं किया गया है। इनमें शामिल हैं: कोल्ड चेन वाली दवाइयां, शेड्यूल H1 और शेड्यूल X की दवाइयां, इंजेक्शन, हाई-वैल्यू मेडिसिन समेत कुल 491 दवाइयों की सूची जो होम डिलीवरी में शामिल नहीं होगी।
अगर कोई पैकेज डिलीवर नहीं हो पाता है, तो लाभार्थी को 30 दिनों के भीतर पॉलिक्लिनिक से दवा लेनी होगी।
ईसीएचएस ने सभी कमांडरों से अनुरोध किया है कि वे अधिक से अधिक पूर्व सैनिकों को वीएलई के रूप में नामांकित होने के लिए प्रेरित करें। इस पहल का लक्ष्य है कि दवाइयों की सुविधा सीधे घर तक जाए और वृद्ध व बीमार पूर्व सैनिकों को पॉलिक्लिनिक आने की परेशानी न झेलनी पड़े।


