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रक्षा मंत्री बोले- रूस-यूक्रेन और ईरान-इजरायल युद्ध से लें सीख, भारत में बनें ड्रोन के सभी पार्ट्स

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को केवल ड्रोन बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके हर हिस्से में आत्मनिर्भर बनना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ड्रोन के मोल्ड, सॉफ्टवेयर, इंजन और बैटरी तक सब कुछ भारत में ही बनना चाहिए...

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📍नई दिल्ली | 19 Mar, 2026, 2:43 PM

Drone Manufacturing India: बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि भविष्य की लड़ाइयों में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन टेक्नोलॉजी की भूमिका बेहद अहम होने वाली है। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव से यह साफ हो गया है कि युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है और अब ड्रोन टेक्नोलॉजी एक प्रमुख हथियार बनती जा रही है।

रक्षा मंत्री नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में एमएसएमई, स्टार्ट-अप, रक्षा कंपनियां, वैज्ञानिक, नीति निर्माता और सेना से जुड़े अधिकारी शामिल हुए। (Drone Manufacturing India)

Drone Manufacturing India: ड्रोन निर्माण में आत्मनिर्भरता पर जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को केवल ड्रोन बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके हर हिस्से में आत्मनिर्भर बनना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ड्रोन के मोल्ड, सॉफ्टवेयर, इंजन और बैटरी तक सब कुछ भारत में ही बनना चाहिए।

उन्होंने बताया कि दुनिया के कई देशों में ड्रोन बनाए जाते हैं, लेकिन उनके कई जरूरी पुर्जे अब भी चीन से आयात किए जाते हैं। ऐसे में भारत को इस निर्भरता से बाहर निकलना होगा और अपने स्तर पर पूरी सप्लाई चेन तैयार करनी होगी। (Drone Manufacturing India)

ग्लोबल ड्रोन हब बनने का लक्ष्य

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत को मिशन मोड में काम करते हुए आने वाले कुछ सालों में ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनना चाहिए। इसके लिए एक मजबूत ड्रोन प्रोडक्शन इकोसिस्टम तैयार करना जरूरी है, जिससे देश की सुरक्षा मजबूत होगी और रणनीतिक स्वतंत्रता भी बढ़ेगी।

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उन्होंने निजी क्षेत्र, स्टार्ट-अप और एमएसएमई को इस दिशा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया और सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का भरोसा दिया। (Drone Manufacturing India)

Drone Manufacturing India

iDEX और ADITI जैसे प्रोग्राम लॉन्च

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने डिफेंस इंडिया स्टार्टअप चैलेंज (DISC-14) और ADITI चैलेंज के नए संस्करण लॉन्च किए। इसके तहत कुल 107 प्रोब्लेम डिस्क्रिप्शन जारी किए गए, जिनमें रक्षा बलों, कोस्ट गार्ड और डिफेंस स्पेस एजेंसी की जरूरतों को शामिल किया गया है।

इसके अलावा रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की ओर से 101 नए इनोवेशन चैलेंज भी शुरू किए गए हैं, ताकि स्टार्ट-अप और एमएसएमई नई तकनीकों पर काम कर सकें। इन प्रोजेक्ट्स में कंपनियों को मेंटरशिप, टेस्टिंग सुविधाएं और सप्लाई चेन में शामिल होने के अवसर दिए जाएंगे। (Drone Manufacturing India)

डिफेंस इनोवेशन में तेजी

रक्षा मंत्री ने बताया कि आईडेक्स प्रोग्राम के जरिए अब तक सैकड़ों स्टार्ट-अप और इनोवेटर्स डिफेंस सेक्टर से जुड़े हैं। फरवरी 2026 तक करीब 676 स्टार्ट-अप और एमएसएमई इस इकोसिस्टम का हिस्सा बन चुके हैं। 548 कॉन्ट्रैक्ट साइन हुए हैं और 566 चैलेंज लॉन्च किए गए हैं।

इनमें से कई प्रोटोटाइप को सेना के लिए खरीद की मंजूरी भी मिल चुकी है और हजारों करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट साइन किए जा चुके हैं। इससे यह साफ होता है कि इनोवेशन अब धीरे-धीरे वास्तविक उत्पाद और तकनीक में बदल रहा है।

नई तकनीकों को अपनाने पर जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसी तकनीकें तेजी से विकसित हो रही हैं। ऐसे में एमएसएमई और स्टार्ट-अप को इन तकनीकों को अपनाना होगा।

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उन्होंने ‘डिजिटल ट्विन’ जैसी तकनीक का भी जिक्र किया, जिसमें किसी असली सिस्टम का वर्चुअल मॉडल तैयार किया जाता है। इससे जटिल सिस्टम को समझने और बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलती है। (Drone Manufacturing India)

इंटीग्रेशन से बनेगा मजबूत इकोसिस्टम

रक्षा मंत्री ने कहा कि एमएसएमई को आगे बढ़ाने के लिए इंटीग्रेशन बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि यह दो तरह से हो सकता है, हॉरिजॉन्टल और वर्टिकल इंटीग्रेशन। हॉरिजॉन्टल इंटीग्रेशन में अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियां एक-दूसरे के साथ जुड़कर काम करती हैं, जबकि वर्टिकल इंटीग्रेशन में छोटी कंपनियां बड़ी कंपनियों के साथ मिलकर काम करती हैं और नई तकनीकों में विशेषज्ञता हासिल करती हैं। (Drone Manufacturing India)

सरकार की ओर से पूरा सहयोग

रक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार एमएसएमई को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठा रही है। इस साल के बजट में तीन स्तरों- इक्विटी, लिक्विडिटी और प्रोफेशनल सपोर्ट- पर काम किया जा रहा है, ताकि छोटे उद्योग तेजी से आगे बढ़ सकें।

उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से सरकार ने इस सेक्टर को लगातार प्राथमिकता दी है। उद्यम पोर्टल और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए छोटे उद्योगों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। (Drone Manufacturing India)

एमएसएमई सेक्टर में तेजी से बढ़ोतरी

रक्षा मंत्री ने बताया कि देश में एमएसएमई की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2012-13 में जहां इनकी संख्या करीब 4.67 करोड़ थी, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 8 करोड़ हो गई है। उन्होंने कहा कि स्टार्ट-अप नए विचारों के साथ समाज में बदलाव ला रहे हैं और कई कंपनियां कम समय में यूनिकॉर्न बन रही हैं। (Drone Manufacturing India)

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डिफेंस इंडस्ट्री में सुधार के प्रयास

कार्यक्रम में रक्षा उत्पादन विभाग के सचिव संजीव कुमार ने बताया कि डिफेंस सेक्टर में सुधार के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इसमें प्रक्रियाओं को आसान बनाना, गुणवत्ता सुधारना और टेस्टिंग सुविधाओं को मजबूत करना शामिल है। इसके साथ ही ‘सृजन दीप’ नाम का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है, जिसमें 40 हजार से ज्यादा कंपनियों को जोड़ा गया है, ताकि रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ावा मिल सके। (Drone Manufacturing India)

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