📍नई दिल्ली | 30 Dec, 2025, 5:29 PM
Defence Year Ender 2025: भारतीय सेना ने गोला-बारूद के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अपने कुल एम्यूनिशन इन्वेंट्री का 91 फीसदी स्वदेशीकरण पूरा कर लिया है। सेना के पास मौजूद 175 प्रकार के गोला-बारूद में से 159 प्रकार अब देश में ही बनाए जा रहे हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब दुनिया के कई हिस्सों में अलग-अलग वजहों से ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित हो रही है और आयात पर निर्भर होना मुश्किल होता जा रहा है।
भारतीय सेना का यह प्रयास न केवल आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देता है, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले किसी भी संघर्ष के लिए सेना की फायरपावर को लगातार बनाए रखने में भी मदद करेगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद तीनों सेनाएं हाई लेवल ऑपरेशनल रेडीनेस पर हैं और ऐसे में गोला-बारूद की घरेलू उपलब्धता रणनीतिक रूप से बेहद अहम हो गई है।
Defence Year Ender 2025: एम्यूनिशन में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
पिछले साल तक भारतीय सेना 175 में से 154 एम्यूनिशन वैरिएंट्स का स्वदेशीकरण कर चुकी थी, जो लगभग 88 फीसदी था। वर्ष 2025 में इसमें और बढ़ोतरी हुई और अब यह आंकड़ा 91 फीसदी तक पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी चरणबद्ध तरीके से की गई, जिसमें पब्लिक सेक्टर और प्राइवेट सेक्टर दोनों को शामिल किया गया।
रक्षा मंत्रालय ने इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड और सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड जैसी कंपनियों को प्रोडक्शन से जोड़ा। इससे न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ी, बल्कि सेना की जरूरतों के मुताबिक समय पर सप्लाई सुनिश्चित करने में भी मदद मिली। (Defence Year Ender 2025)
Defence Year Ender 2025: बचे हुए वैरिएंट्स पर भी काम तेज
सेना के पास अब भी 16 ऐसे एम्यूनिशन वैरिएंट्स हैं, जिनका स्वदेशीकरण पूरी तरह नहीं हो पाया है। रक्षा मंत्रालय ने इनमें से चार से सात प्रकार के बुलेट्स, रॉकेट्स और मिसाइल्स को देश में ही बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इनमें रूस से जुड़ा आर्मर-पियर्सिंग फिन-स्टेबलाइज्ड डिस्कार्डिंग सैबोट यानी एपीएफएसडीएस एंटी-टैंक एम्यूनिशन और स्वीडन से डिजाइन किया गया 84 एमएम एम्यूनिशन शामिल है। ये दोनों ही आधुनिक युद्ध में टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ बेहद असरदार माने जाते हैं। (Defence Year Ender 2025)
Defence Year Ender 2025: टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से प्रोडक्शन
रक्षा मंत्रालय ने एपीएफएसडीएस एम्यूनिशन के लिए वर्ष 2015-16 में ही टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की मांग की गई थी। अब पुणे स्थित म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड के मुख्यालय में इसके प्रोडक्शन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
इसी तरह 84 एमएम एम्यूनिशन के लिए स्वीडन से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर मिल चुका है और इसका प्रोडक्शन प्लांट भी तैयार किया जा रहा है। इन दोनों एम्यूनिशन के देश में बनने से सेना को आयात पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और इमरजेंसी में सप्लाई बाधित होने का खतरा भी कम होगा। (Defence Year Ender 2025)
Defence Year Ender 2025: इकनॉमिक ऑर्डर क्वांटिटी का फैसला
रक्षा मंत्रालय और सेना ने मिलकर पांच एम्यूनिशन वैरिएंट्स को इकनॉमिक ऑर्डर क्वांटिटी के तहत रखने का फैसला किया है। इन वैरिएंट्स की कुल जरूरत सीमित है और मौजूदा स्टॉक पर्याप्त माना गया है। इसी कारण इनका घरेलू उत्पादन फिलहाल नहीं किया जा रहा है।
यह फैसला संसाधनों के बेहतर उपयोग और उन एम्यूनिशन पर फोकस करने के लिए लिया गया है, जिनकी मांग ज्यादा है और जो भविष्य के युद्ध में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। (Defence Year Ender 2025)
Defence Year Ender 2025: स्मार्ट एम्यूनिशन पर बढ़ता जोर
भारतीय सेना भविष्य के युद्ध को देखते हुए स्मार्ट एम्यूनिशन पर विशेष ध्यान दे रही है। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार आने वाले समय में युद्ध ज्यादा तेज, जटिल और टेक्नोलॉजी आधारित होंगे। ऐसे में सटीक निशाना लगाने वाले, लंबी दूरी तक मार करने वाले और कम कोलैटरल डैमेज वाले एम्यूनिशन की जरूरत बढ़ेगी।
सेना अब आर्टिलरी के साथ-साथ कॉम्बैट यूएवी यानी ड्रोन के लिए भी स्मार्ट एम्यूनिशन हासिल करने की दिशा में काम कर रही है। इससे निगरानी के साथ-साथ सटीक स्ट्राइक करना आसान होगा। (Defence Year Ender 2025)
Defence Year Ender 2025: इमरजेंसी प्रॉक्योरमेंट से फायरपावर मजबूत
साल 2025 में भारतीय सेना ने इमरजेंसी प्रॉक्योरमेंट-6 के तहत लगभग 6,000 करोड़ रुपये का गोला-बारूद खरीदा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी स्थिति में सेना की ऑपरेशनल तैयारी और फायरपावर पर असर न पड़े।
इस प्रक्रिया के तहत कई अहम एम्यूनिशन और हथियार सिस्टम्स को तेजी से सेना में शामिल किया गया, ताकि सीमाओं पर तैनात यूनिट्स को समय पर जरूरी संसाधन मिल सकें। (Defence Year Ender 2025)
डिफेंस रिफॉर्म्स के साल में बड़ा बदलाव
सरकार ने वर्ष 2025 को डिफेंस रिफॉर्म्स का साल घोषित किया था। इस दौरान इंडिजिनाइजेशन, रिकॉर्ड डिफेंस एक्सपोर्ट, जॉइंट मिलिटरी स्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी अपनाने पर खास जोर दिया गया।
पॉजिटिव इंडिजिनाइजेशन लिस्ट के जरिए हजारों आइटम्स के आयात पर रोक लगाई गई और घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता दी गई। इससे एमएसएमई और स्टार्ट-अप्स को भी रक्षा क्षेत्र में आगे आने का मौका मिला। (Defence Year Ender 2025)
Defence Year Ender 2025: डिफेंस एक्सपोर्ट में भी बढ़त
जहां एक ओर सेना के लिए गोला-बारूद का स्वदेशीकरण किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर रक्षा मंत्रालय पीस टाइम में प्रोडक्शन लाइनों को चालू रखने के लिए एक्सपोर्ट पर भी ध्यान दे रहा है।
भारत अब अमेरिका और यूरोप सहित कई देशों को स्मॉल, मीडियम और लार्ज कैलिबर एम्यूनिशन, आर्टिलरी शेल्स, रॉकेट्स और टीएनटी, आरडीएक्स, एचएमएक्स जैसे एक्सप्लोसिव्स निर्यात कर रहा है। इससे न केवल उद्योग को मजबूती मिली है, बल्कि भारत की विश्वसनीय रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में पहचान भी बनी है। (Defence Year Ender 2025)

