HomeDefence NewsDefence Self-Reliance: डिफेंस प्रोडक्शन में रिकॉर्ड 174 फीसदी की बढ़ोतरी, 193 डिफेंस...

Defence Self-Reliance: डिफेंस प्रोडक्शन में रिकॉर्ड 174 फीसदी की बढ़ोतरी, 193 डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स में से 177 भारतीय कंपनियों को

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, करीब 16,000 एमएसएमई अब डिफेंस इंड्स्ट्री को सपोर्ट कर रहे हैं। यही नहीं, अब तक 462 कंपनियों को 788 औद्योगिक लाइसेंस मिल चुके हैं...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली | 20 Nov, 2025, 10:05 PM

Defence Self-Reliance: भारत ने डिफेंस प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट के क्षेत्र में इस साल कई ऐसे नए रिकॉर्ड बनाए हैं, जिन्हें देश की आत्मनिर्भरता की यात्रा में बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए आत्मनिर्भर भारत अभियान और पिछले एक दशक में किए गए नीतिगत सुधारों के चलते भारत का डिफेंस सेक्टर अब लगातार मजबूत हो रहा है। सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि भारत अब न सिर्फ अपने लिए अत्याधुनिक डिफेंस इक्विपमेंट बना रहा है, बल्कि 100 से ज्यादा देशों को इन्हें निर्यात भी कर रहा है।

Defence Self-Reliance: रक्षा उत्पादन में 174 फीसदी की बढ़ोतरी

पीआईबी की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष में भारत का कुल रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो भारत के इतिहास में अब तक सर्वाधिक है। इससे पहले वित्त वर्ष 2023-24 में स्वदेशी रक्षा उत्पादन 1,27,434 करोड़ रुपये था। दस साल पहले यानी 2014-15 में यह आंकड़ा सिर्फ 46,429 करोड़ रुपये था। भारत ने पिछले दस साल में रक्षा उत्पादन में 174 फीसदी की बढ़ोतरी हासिल की है। सरकार का कहना है कि इस साल 1.75 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन लक्ष्य लिया गया है और 2029 तक इसे तीन लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का इरादा है।

Defence Production: भारत का रक्षा उत्पादन 1.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा, रक्षा निर्यात में भी रिकॉर्ड जंप

Defence Self-Reliance: डिफेंस इंड्स्ट्री को सपोर्ट कर रहे 16,000 एमएसएमई

रक्षा उत्पादन में छोटे और मंझोले उद्योगों यानी एमएसएमई की भूमिका भी इस साल काफी बढ़ी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, करीब 16,000 एमएसएमई अब डिफेंस इंड्स्ट्री को सपोर्ट कर रहे हैं। यही नहीं, अब तक 462 कंपनियों को 788 औद्योगिक लाइसेंस मिल चुके हैं। निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी भी लगातार बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2023-24 में यह हिस्सेदारी 21 फीसदी थी, जबकि 2024-25 में यह बढ़कर 23 फीसदी हो गई है। इससे साफ है कि रक्षा उत्पादन में अब निजी उद्योग भी आगे बढ़ रहे हैं।

यह भी पढ़ें:  Delhi Defence Dialogue 2025: रक्षा मंत्री बोले- साझेदारी से मिलेगी आत्मनिर्भरता, डिफेंस डील में लाइफ साइकिल कॉस्ट जरूरी

Defence Self-Reliance: 193 डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स में से 177 भारतीय कंपनियों को

इसके अलावा डिफेंस प्रोक्योरमेंट में भी सरकार ने घरेलू कंपनियों को प्राथमिकता दी। इसी वजह से 2024-25 में किए गए कुल 193 डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स में से 177 कॉन्ट्रैक्ट्स भारतीय कंपनियों को दिए गए। इनकी कीमत 1,68,922 करोड़ रुपये से ज्यादा है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह अब तक का सबसे बड़ा घरेलू कॉन्ट्रैक्ट सेटअप है और इससे देश की सैन्य तैयारियों के साथ-साथ देश के उद्योगों को भी मजबूती मिल रही है।

Defence Self-Reliance: निर्यात में 20 गुना से ज्यादा बढ़ोतरी

वहीं, निर्यात के मामले में भी भारत ने नया रिकॉर्ड बनाया है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 23,622 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। 2014 में यह आंकड़ा 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था। भारत ने दस साल में निर्यात में 20 गुना से ज्यादा बढ़ोतरी की। भारत अब दुनिया के 100 से ज्यादा देशों को हथियार, मिसाइल पार्ट्स, बुलेटप्रूफ जैकेट, पेट्रोलिंग बोट्स, रडार, हेलीकॉप्टर और लाइट टॉरपीडो जैसे प्रोडक्ट्स सप्लाई कर रहा है। केवल 2024-25 में ही 1,762 निर्यात मंजूरियां दी गईं, जो पिछले साल से करीब 17 फीसदी ज्यादा हैं।

Defence Self-Reliance: डिफेंस कॉरिडोर्स में 9,145 करोड़ रुपये का निवेश

भारत में दो बड़े डिफेंस कॉरिडोर्स उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और तमिलनाडु डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर ने अब तक 9,145 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आकर्षित किया है। इन दोनों गलियारों में 289 एमओयू साइन किए गए हैं। इन गलियारों ने स्थानीय उद्योग, नए निवेश, रोजगार और तकनीक को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

यह भी पढ़ें:  India-South Korea Maritime Exercise: भारत और दक्षिण कोरिया की नौसेनाएं पहली बार इंचियोन में करेंगी संयुक्त समुद्री युद्धाभ्यास

डीआरडीओ को 500 करोड़ रुपये का विशेष कोष

रक्षा अनुसंधान में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) की भूमिका भी काफी बढ़ी है। सरकार ने डीआरडीओ को 500 करोड़ रुपये का विशेष कोष दिया है, जिससे वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर तकनीक, क्वांटम, रोबोटिक्स और मिसाइल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नई खोज कर सके। डीआरडीओ देशभर में 15 डिफेंस इंडस्ट्री-एकेडेमिया सेंटर भी चला रहा है, जहां छात्र, उद्योग और वैज्ञानिक मिलकर नई तकनीक पर काम कर रहे हैं।

डीएपी-डीपीएम में बदलाव

इसके अलावा सरकार ने डिफेंस प्रोडक्शन को रफ्तार देने के लिए भारत सरकार ने रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डिफेंस एक्विजिशन प्रोसेस 2020) और रक्षा प्रोक्योरमेंट मैनुअल (डीपीएम 2025) में भी बड़े बदलाव किए हैं। डीएपी 2020 में बॉय इंडियन वाली कैटेगरी को सबसे टॉप प्रायोरिटी दी गई है। इसमें साफ कहा गया है कि भारत वही हथियार खरीदेगा जो भारत में डिजाइन और निर्मित हों। यही नहीं, खरीद प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है ताकि समय पर फैसले लिए जा सकें। इसमें एआई, साइबर, स्पेस, रोबोटिक्स और एडवांस्ड वारफेयर टेक्नोलॉजी जैसी नई जरूरतों को ध्यान में रखा गया है।

नए डीपीएम 2025 खरीद प्रक्रिया को और भी आसान, तेज और पारदर्शी बनाता है। इसमें सभी सेनाओं और मंत्रालय में एक जैसी प्रक्रियाएं लागू की गई हैं ताकि देरी न हो। स्वदेशी कंपनियों को पांच साल तक के लिए गारंटीड ऑर्डर देने का प्रावधान भी शामिल है। पुराने अनापत्ति प्रमाण पत्र जैसे नियमों को हटाया गया है। डिजिटल सिस्टम के साथ खरीद की पूरी प्रक्रिया अब पारदर्शी है।

इन सभी प्रयासों का नतीजा यह है कि भारत ने रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में ऐसे परिणाम हासिल किए हैं जो पहले कभी संभव नहीं थे। भारत आज न केवल अपनी जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि दुनिया के कई देशों का भरोसेमंद पार्टनर भी बन रहा है

यह भी पढ़ें:  Rajnath Singh at CCC 2025: कंबाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस बोले रक्षा मंत्री- अदृश्य खतरों के लिए तैयार रहें सेना, युद्ध में जीत के लिए JAI है जरूरी

Author

  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
News Desk
News Desk
रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

Most Popular