📍नई दिल्ली | 19 Mar, 2026, 4:19 PM
Defence Reserch Budget India: देश की रक्षा तैयारियों को और मजबूत बनाने के लिए संसदीय समिति ने एक अहम सिफारिश की है। समिति ने कहा है कि आने वाले पांच सालों में रक्षा अनुसंधान और विकास यानी डिफेंस आर एंड डी बजट को धीरे-धीरे बढ़ाया जाना चाहिए। समिति का मानना है कि आधुनिक और एडवांस तकनीकों में निवेश बढ़ाने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अगर भारत को आत्मनिर्भर बनना है और दुनिया के बड़े देशों के साथ तकनीकी स्तर पर प्रतिस्पर्धा करनी है, तो डिफेंस आर एंड डी पर खर्च बढ़ाना होगा। (Defence Reserch Budget India)
Defence Reserch Budget India: ऑपरेशन सिंदूर के बाद बजट में बढ़ोतरी
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मौजूदा वर्ष में डिफेंस कैपिटल बजट में विशेष बढ़ोतरी की गई है। यह बढ़ोतरी ऑपरेशन सिंदूर के बाद की गई जरूरतों को ध्यान में रखते हुए की गई है। समिति का कहना है कि केवल एक साल की बढ़ोतरी काफी नहीं है, बल्कि लगातार कई सालों तक निवेश बढ़ाने की जरूरत है। (Defence Reserch Budget India)
नई और एडवांस तकनीकों पर जोर
समिति ने कहा कि बढ़ा हुआ बजट खास तौर पर एडवांस और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी में निवेश के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसमें नए तरह के हथियार, बेहतर डिजाइन और अधिक प्रभावी डिफेंस सिस्टम डेपलप करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, पर्याप्त और स्थिर फंडिंग से देश में स्वदेशी तकनीकों का विकास तेज होगा और विदेशी आयात पर निर्भरता कम की जा सकेगी। (Defence Reserch Budget India)
डीआरडीओ का बढ़ाएं बजट
डीआरडीओ ने भी समिति को बताया कि पिछले कुछ वर्षों में आर एंड डी बजट में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसे और बढ़ाने की जरूरत है। खासकर कुल रक्षा बजट के प्रतिशत के रूप में इसे बढ़ाना जरूरी बताया गया है।
डीआरडीओ के प्रतिनिधियों ने कहा कि कई बड़े प्रोजेक्ट ऐसे हैं, जिनमें सेना का बजट भी शामिल होता है। उदाहरण के तौर पर एईडब्ल्यू एंड सी मार्क-2 प्रोजेक्ट, जिसकी लागत करीब 19,000 करोड़ रुपये है, उसमें से बड़ा हिस्सा वायुसेना के बजट से आता है।
समिति के अनुसार, डीआरडीओ अब भविष्य की एडवांस टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है, जिसमें हाइपरसोनिक मिसाइल और नई पीढ़ी के फाइटर विमान शामिल हैं। अभी भारत पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) पर काम कर रहा है, लेकिन इसके साथ ही छठवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के लिए भी तकनीक विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। ये नए फाइटर जेट नेटवर्क आधारित होंगे और दूसरे सिस्टम व ग्राउंड प्लेटफॉर्म के साथ जुड़े रहेंगे। (Defence Reserch Budget India)
समिति का कहना है कि इस तरह की पहल जरूरी है ताकि भारत दुनिया में तेजी से बदल रही रक्षा तकनीकों के साथ कदम मिलाकर चल सके। इसके लिए समिति ने सुझाव दिया है कि नई और महत्वपूर्ण तकनीकों के रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए अलग से बजट तय किया जाए, ताकि इन प्रोजेक्ट्स को समय पर और बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके और पैसों की कमी बीच में रुकावट न बने।
समिति ने यह भी कहा कि सुपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल जैसी तकनीकों पर खास ध्यान देना चाहिए। यह मिसाइल बहुत तेज गति से चलती है और लॉन्च होने के बाद हवा में दिशा बदल सकती है, जिससे इसे पकड़ना और रोकना दुश्मन के लिए मुश्किल हो जाता है। यह भविष्य की लड़ाई में भारत की ताकत को बढ़ाने में मदद कर सकती है। (Defence Reserch Budget India)
समिति का मानना है कि आधुनिक युद्ध तेजी से बदल रहा है और अब नेटवर्क आधारित और क्लाउड सिस्टम पर आधारित ऑपरेशन बढ़ रहे हैं। ऐसे में ग्लाइड मिसाइल जैसी स्वदेशी तकनीक विकसित करना जरूरी है, ताकि भारत की सैन्य तैयारी मजबूत हो।
इसके लिए समिति ने कहा है कि पर्याप्त फंडिंग, तय समयसीमा और बेहतर टेस्टिंग सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि इन प्रोजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। साथ ही, यह तकनीक भविष्य के फाइटर जेट और ड्रोन जैसे सिस्टम के साथ मिलकर काम करेगी और देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी। (Defence Reserch Budget India)
अगले पांच साल में बड़ा लक्ष्य
समिति को यह भी जानकारी दी गई कि आने वाले वर्षों में रक्षा अनुसंधान बजट को कुल रक्षा बजट का लगभग 10 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा जा सकता है। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से निवेश बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।
समिति ने यह भी सुझाव दिया कि आर एंड डी प्रोजेक्ट्स की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि संसाधनों का सही उपयोग हो सके और परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकें। (Defence Reserch Budget India)
रक्षा बजट 2026-27
रिपोर्ट में रक्षा बजट 2026-27 के आंकड़े भी सामने आए हैं। इस वर्ष रक्षा मंत्रालय को कुल लगभग 7.84 लाख करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। यह देश के कुल बजट का एक बड़ा हिस्सा है और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस बजट में रक्षा सेवाओं के लिए सबसे बड़ा हिस्सा रखा गया है। इसके अलावा पेंशन, पूंजीगत खर्च और अन्य प्रशासनिक खर्चों के लिए भी अलग-अलग राशि निर्धारित की गई है। (Defence Reserch Budget India)
कैपिटल और रेवेन्यू खर्च में बढ़ोतरी
रक्षा सेवाओं के लिए पूंजीगत खर्च यानी कैपिटल आउटले में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। यह पिछले साल की तुलना में करीब 25 फीसदी से अधिक है। इस खर्च का उपयोग नए हथियार, उपकरण और सैन्य प्लेटफॉर्म खरीदने के लिए किया जाता है।
वहीं राजस्व खर्च यानी रेवेन्यू एक्सपेंडिचर में भी बड़ी राशि निर्धारित की गई है, जिससे सेना के रोजमर्रा के संचालन और रखरखाव की जरूरतें पूरी की जाती हैं। (Defence Reserch Budget India)
एमएसएमई और आत्मनिर्भरता पर असर
समिति ने कहा कि बढ़ा हुआ आर एंड डी बजट देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देगा। इससे एमएसएमई और स्टार्ट-अप को भी नई तकनीकों पर काम करने का मौका मिलेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सरकार की नीति आत्मनिर्भर भारत को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है, जिससे देश में ही रक्षा उपकरणों का निर्माण बढ़े।
समिति ने यह स्पष्ट किया कि भविष्य के युद्धों में तकनीक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। ऐसे में अनुसंधान और नवाचार पर ध्यान देना जरूरी है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर समय पर निवेश किया गया और नई तकनीकों को अपनाया गया, तो देश की रक्षा क्षमता को और मजबूत किया जा सकता है। (Defence Reserch Budget India)

