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Defence Budget 2026: 7.85 लाख करोड़ का डिफेंस बजट: रक्षा मंत्री और डिफेंस सचिव दोनों ने बताया क्यों है यह जरूरी

रक्षा मंत्री ने बताया कि इस बार बजट का सबसे अहम हिस्सा तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि सेनाओं के लिए कुल 2.19 लाख करोड़ रुपये का कैपिटल एक्सपेंडिचर रखा गया है...

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📍नई दिल्ली | 1 Feb, 2026, 3:48 PM

Defence Budget 2026: देश और दुनिया में बदलते सुरक्षा हालात के बीच केंद्र सरकार ने यूनियन बजट 2026 में डिफेंस सेक्टर को बड़ी राहत दी है। इस बार रक्षा मंत्रालय को 7.85 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 14.68 फीसदी ज्यादा है। यह पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के 6.81 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले अब तक की सबसे बड़ी छलांग मानी जा रही है।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब सीमा पर हालात संवेदनशील बने हुए हैं और आधुनिक युद्ध में लगातार बदलाव हो रहे हैं। ड्रोन, साइबर हमले, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और हाई-टेक हथियारों के दौर में भारत अपनी सेनाओं को तकनीकी रूप से और ज्यादा सक्षम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। (Defence Budget 2026)

Defence Budget 2026: राजनाथ सिंह बोले – यह बजट सुरक्षा और विकास की मजबूत नींव

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बजट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह बजट देशवासियों की उम्मीदों पर खरा उतरने वाला है और विकसित भारत @2047 के संकल्प को मजबूत आधार देता है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि इस बजट में समाज के हर वर्ग के विकास की विस्तृत योजना बनाई गई है। उन्होंने खास तौर पर इस बात पर जोर दिया कि 7.85 लाख करोड़ रुपये का रक्षा आवंटन देश की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता के बाद यह बजट भारत की सुरक्षा प्रणाली को और सशक्त बनाने के संकल्प को मजबूत करता है। (Defence Budget 2026)

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आधुनिकीकरण पर सबसे ज्यादा जोर

रक्षा मंत्री ने बताया कि इस बार बजट का सबसे अहम हिस्सा तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि सेनाओं के लिए कुल 2.19 लाख करोड़ रुपये का कैपिटल एक्सपेंडिचर रखा गया है। इसमें से करीब 1.85 लाख करोड़ रुपये सीधे आधुनिकीकरण के लिए हैं, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 24 फीसदी ज्यादा है।

इस फंड से नई टेक्नोलॉजी, आधुनिक हथियार, बेहतर प्लेटफॉर्म और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक सिस्टम्स खरीदे जाएंगे। इससे सेना की ऑपरेशनल क्षमता और युद्ध की तैयारी दोनों को मजबूती मिलेगी। (Defence Budget 2026)

पूर्व सैनिकों के कल्याण पर भी ध्यान

राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि इस बजट में पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण को भी प्राथमिकता दी गई है। एक्स-सर्विसमेन कॉन्ट्रिब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) के तहत इस साल करीब 12,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो मौजूदा साल के मुकाबले लगभग 45 फीसदी ज्यादा है। इससे पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।

सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि मौजूदा वैश्विक अस्थिरता, सीमा पर तनाव और नई तरह की चुनौतियों को देखते हुए भारत अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत करना चाहता है। (Defence Budget 2026)

रक्षा सचिव ने बताया क्यों जरूरी थी बढ़ोतरी

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बजट को लेकर संतोष जताया है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री द्वारा घोषित बजटीय प्रावधानों से रक्षा मंत्रालय काफी संतुष्ट है। उन्होंने बताया कि कुल मिलाकर रक्षा मंत्रालय का बजट करीब 7.85 लाख करोड़ रुपये का होगा, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 15 फीसदी ज्यादा है। सबसे अहम बात यह है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स), यानी हथियारों और आधुनिक तकनीक पर होने वाला खर्च, इसमें करीब 21 फीसदी बढ़ाया गया है, जो बढ़ कर 2.9 लाख करोड़ रुपये हो गया है। (Defence Budget 2026)

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सेना की वास्तविक जरूरतों पर होगा खर्च

रक्षा सचिव के मुताबिक, इस बजट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आधुनिकीकरण से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि अब बजट सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे आधुनिक हथियारों, नई तकनीक और सेना की वास्तविक जरूरतों पर खर्च किया जाएगा। उनका कहना है कि इससे थलसेना, वायुसेना और नौसेना की क्षमताओं में तेजी से सुधार किया जा सकेगा। (Defence Budget 2026)

यूनियन बजट में सबसे बड़ा हिस्सा रक्षा का

इस बार यूनियन बजट में रक्षा मंत्रालय को सबसे ज्यादा हिस्सा मिला है। कुल बजट का करीब 14.68 फीसदी सिर्फ रक्षा क्षेत्र के लिए रखा गया है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह आवंटन देश की सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करेगा, इनोवेशन को बढ़ावा देगा और राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत आधार देगा।

रक्षा सचिव आरके सिंह ने यह भी बताया कि रक्षा मंत्रालय ने 20 फीसदी की बढ़ोतरी की मांग इसलिए की थी क्योंकि अब मंत्रालय में बजट खर्च करने की क्षमता बेहतर हुई है और रणनीतिक चुनौतियां भी बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय ने इन तथ्यों को समझते हुए रक्षा मंत्रालय की मांग को मंजूरी दी है। (Defence Budget 2026)

बजट में क्या है पूरा गणित

डिफेंस बजट में कुल कैपिटल एक्सपेंडिचर करीब 2.31 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जबकि रेवेन्यू एक्सपेंडिचर यानी सैलरी, मेंटेनेंस और अन्य खर्चों के लिए 5.54 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान है। कुल केंद्रीय बजट में रक्षा मंत्रालय का हिस्सा करीब 14.68 फीसदी है, जो सभी मंत्रालयों में सबसे ज्यादा है।

रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि यह आवंटन सैन्य तैयारियों को मजबूत करने, इनोवेशन को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती देने में मदद करेगा। (Defence Budget 2026)

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एमआरओ सेक्टर को राहत, लेकिन बाजार रहा निराश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण में किसी खास रक्षा परियोजना का नाम नहीं लिया गया, जिससे सुबह के सत्र में भारतीय रक्षा कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। हालांकि उन्होंने सिविल और डिफेंस एयरक्राफ्ट के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट्स और पार्ट्स पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी से छूट का प्रस्ताव रखा।

इसका मकसद देश में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) इंडस्ट्री को बढ़ावा देना है। सरकार भारत को एक ग्लोबल एमआरओ हब के तौर पर विकसित करना चाहती है। पहले ही एमआरओ सेवाओं पर जीएसटी को 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी किया जा चुका है, जिससे इस सेक्टर को बड़ी राहत मिली है।

पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा मंत्रालय के लिए 1.80 लाख करोड़ रुपये का कैपिटल आउटले रखा गया था, जिसे संशोधित अनुमान में बढ़ाकर 1.86 लाख करोड़ रुपये किया गया। अब 2026-27 में इसमें और बड़ी छलांग लगाई गई है। इससे साफ है कि सरकार अब सिर्फ मौजूदा जरूरतों पर नहीं, बल्कि भविष्य की जंग के लिए भी तैयारी कर रही है। (Defence Budget 2026)

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