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10 पॉइंट्स में समझिए Defence Budget 2026-27, क्यों कहा जा रहा है इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा बजट

वित्त वर्ष 2026-27 में कैपिटल हेड के तहत 2.19 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं, जो पिछले साल के 1.80 लाख करोड़ रुपये से करीब 21.84 फीसदी ज्यादा हैं...

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📍नई दिल्ली | 1 Feb, 2026, 9:23 PM

Defence Budget 2026-27: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पेश किए गए यूनियन बजट 2026-27 में रक्षा मंत्रालय को 7.85 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक आवंटन मिला है। यह पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के मुकाबले करीब 15.19 फीसदी ज्यादा है। वहीं, रक्षा बजट केंद्र सरकार के खर्च का 14.67 फीसदी है और यह सभी मंत्रालयों में सबसे ज्यादा है। खास बात यह है कि इस बजट में सिर्फ खर्च बढ़ाने पर नहीं, बल्कि आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता, बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर, रिसर्च और सैनिकों व पूर्व सैनिकों के कल्याण पर भी बड़ा जोर दिया गया है। आइए 10 पॉइंट्स में समझते हैं कि इस डिफेंस बजट में क्या खास है…

Defence Budget 2026-27 

1. अब तक का सबसे बड़ा रक्षा बजट: 7.85 लाख करोड़ रुपये

डिफेंस बजट 2026-27 में रक्षा मंत्रालय को 7.85 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं। यह न सिर्फ पिछले साल से ज्यादा है, बल्कि सभी मंत्रालयों में सबसे बड़ा आवंटन भी है। यह बजट अनुमानित जीडीपी का करीब 2 फीसदी है और कुल केंद्रीय बजट का लगभग 14.7 प्रतिशत हिस्सा रक्षा के लिए रखा गया है। सरकार का साफ मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात, सीमा पर चुनौतियां और आधुनिक युद्ध की जरूरतों को देखते हुए यह बढ़ोतरी जरूरी थी। (Defence Budget 2026-27)

2. कैपिटल बजट में रिकॉर्ड उछाल: आधुनिकीकरण पर फोकस

इस बजट की सबसे बड़ी ताकत है कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी पूंजीगत खर्च। वित्त वर्ष 2026-27 में कैपिटल हेड के तहत 2.19 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं, जो पिछले साल के 1.80 लाख करोड़ रुपये से करीब 21.84 फीसदी ज्यादा हैं। इसका मतलब साफ है – अब पैसा सिर्फ सैलरी या मेंटेनेंस पर नहीं, बल्कि नए हथियार, प्लेटफॉर्म और टेक्नोलॉजी पर ज्यादा खर्च होगा। (Defence Budget 2026-27)

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3. मॉडर्नाइजेशन बजट में 24% की छलांग

कैपिटल बजट के भीतर जो हिस्सा सीधे तौर पर मॉडर्नाइजेशन के लिए होता है, उसे कैपिटल एक्विजिशन बजट कहा जाता है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बजट करीब 1.48 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है। जो वित्त वर्ष 2025-26 के कैपिटल एक्विजिशन बजट से लगभग 24 फीसदी ज्यादा है। मौजूदा वैश्विक हालात में, आधुनिकीकरण बजट में इतनी बड़ी बढ़ोतरी एक रणनीतिक जरूरत है।

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, तीसरी तिमाही तक यानी दिसंबर 2025 तक, रक्षा मंत्रालय ने 2.10 लाख करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट पूरे किए हैं और अब तक 3.50 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा के लिए ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ मंजूरी दी है। कैपिटल एक्विजिशन के तहत आने वाले प्रोजेक्ट्स से सेनाओं को अगली पीढ़ी के फाइटर एयरक्राफ्ट, स्मार्ट और घातक हथियार, जहाज/पनडुब्बी, मानवरहित हवाई वाहन, ड्रोन, स्पेशलिस्ट वाहन आदि मिलेंगे। (Defence Budget 2026-27)

4. ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी तैयारी

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामने आई जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस बजट में इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के लिए भी पर्याप्त जगह बनाई गई है। चाहे गोला-बारूद हो, हथियार हों या जरूरी उपकरण, सरकार ने साफ कर दिया है कि सेनाओं की तैयारी में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी जाएगी। कैपिटल और रेवेन्यू, दोनों हेड्स में बढ़ा हुआ बजट इसी सोच को दिखाता है। (Defence Budget 2026-27)

5. आत्मनिर्भर भारत पर बड़ा दांव: 1.39 लाख करोड़ स्वदेशी उद्योगों के लिए

इस बजट का एक और मजबूत पहलू है आत्मनिर्भर भारत। कैपिटल एक्विजिशन बजट का 75 फीसदी, यानी करीब 1.39 लाख करोड़ रुपये, घरेलू उद्योगों से खरीद के लिए तय किया गया है। इसमें सरकारी डिफेंस कंपनियों के साथ-साथ प्राइवेट सेक्टर को भी बड़ी भूमिका मिलेगी। इससे न सिर्फ विदेशी निर्भरता घटेगी, बल्कि देश में रोजगार, स्टार्टअप्स और सप्लाई चेन को भी मजबूती मिलेगी। (Defence Budget 2026-27)

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6. ऑपरेशनल रेडीनेस के लिए ज्यादा पैसा

डिफेंस बजट में रेवेन्यू एक्सपेंडिचर के तहत करीब 3.65 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस पैसे से सैनिकों की सैलरी, अलाउंस, ईंधन, राशन, स्पेयर पार्ट्स और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होंगी। सरकार ने यह भी साफ किया है कि बॉर्डर पर अतिरिक्त तैनाती, ज्यादा फ्लाइंग आवर्स और लंबे नेवल डिप्लॉयमेंट को ध्यान में रखकर यह आवंटन किया गया है। (Defence Budget 2026-27)

7. बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती

सीमाओं पर सड़क, सुरंग और पुल जितने मजबूत होंगे, उतनी ही मजबूत सेना होगी। इसी सोच के तहत बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) के लिए कैपिटल हेड में 7,394 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में टनल्स, ब्रिज और एयरफील्ड्स बनेंगे। साथ ही, इससे सीमावर्ती इलाकों में पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। (Defence Budget 2026-27)

8. पूर्व सैनिकों के लिए हेल्थकेयर पर खास ध्यान

सरकार ने साफ किया है कि देश की सेवा करने वाले सैनिकों और उनके परिवारों की जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम है। इसीलिए एक्स-सर्विसमेन कॉन्ट्रिब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) के लिए 12,100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह पिछले साल की तुलना में करीब 45 फीसदी ज्यादा है। पिछले पांच सालों में ईसीएचएस का बजट तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ चुका है, जो पूर्व सैनिकों के कल्याण को लेकर सरकार की गंभीरता दिखाता है। (Defence Budget 2026-27)

9. रिसर्च और डेवलपमेंट को नई ताकत

आधुनिक युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और इनोवेशन से जीता जाता है। इसीलिए डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) को इस साल 29,100 करोड़ रुपये मिले हैं। इसमें से करीब 17,250 करोड़ रुपये कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए हैं, जिससे नई मिसाइल्स, एडवांस्ड सिस्टम्स और डीप टेक्नोलॉजी पर काम तेज होगा। (Defence Budget 2026-27)

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10. पेंशन और सुरक्षा-विकास-आत्मनिर्भरता का संतुलन

डिफेंस पेंशन के लिए इस बजट में 1.71 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह पैसा करीब 34 लाख पेंशनर्स को समय पर पेंशन देने के लिए इस्तेमाल होगा। रक्षा मंत्री ने साफ कहा है कि यह बजट सिक्योरिटी, डेवलपमेंट और सेल्फ-रिलायंस के बीच संतुलन बनाता है और देश के हित में है। (Defence Budget 2026-27)

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  • 10 पॉइंट्स में समझिए Defence Budget 2026-27, क्यों कहा जा रहा है इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा बजट

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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