📍नई दिल्ली | 5 Aug, 2025, 9:26 PM
Defence Acquisition Council: भारत की रक्षा तैयारियों को और मजबूत करने के लिए मंगलवार को डिफेंस एक्विजेशन काउंसिल (डीएसी) ने लगभग 67,000 करोड़ रुपये की लागत वाले कई अहम रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इस बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। इन प्रस्तावों का उद्देश्य थलसेना, नौसेना और वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमता को आधुनिक तकनीक और एडवांस वीपेन सिस्टम से लैस करना है।
Defence Acquisition Council: थल सेना के लिए नाइट विजन सिस्टम
भारतीय सेना की मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री (Mechanised Infantry) के लिए एक बेहद अहम स्वीकृति दी गई है। डीएसी ने बीएमपी (BMP – इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल) के लिए थर्मल इमेजर आधारित ड्राइवर नाइट साइट की खरीद को मंजूरी दी है। यह तकनीक बीएमपी जैसे बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों को रात के समय भी तेजी से और सुरक्षित तरीके से चलाने में सक्षम बनाएगी। इससे सीमावर्ती और मुश्किल इलाकों में सेना की मोबिलिटी बढ़ेगी और ऑपरेशनल एडवांटेज में फायदा मिलेगा।
🚨 Big Boost for Armed Forces! 🇮🇳
Defence Acquisition Council chaired by RM Rajnath Singh clears Rs 67,000 Cr proposals to enhance Army, Navy & Air Force capabilities.
✅ Army: Thermal Imager Night Sights for BMPs
✅ Navy: Compact Autonomous Surface Craft, BrahMos FCS &…— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) August 5, 2025
भारतीय नौसेना के लिए नए हथियार और सिस्टम
भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए डीएसी ने तीन बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इनमें कॉम्पैक्ट ऑटोनोमस सरफेस क्राफ्ट (Compact Autonomous Surface Craft) की खरीद भी है, जो मानव रहित है और पानी में पेट्रोलिंग और मिशन को अंजाम दे सकेगी। यह सरफेस एयरक्राफ्ट एंटी-सबमरीन वॉरफेयर मिशनों में खतरे का पता लगाने, पहचान करने और उन्हें निष्क्रिय भी करेगा।
इसके अलावा ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर (BrahMos Fire Control System & Launchers) की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। यह लॉन्चर नौसेना के जहाजों पर ब्रहमोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की तैनाती और सटीक निशाना लगाने में मदद मिलेगी। इस सिस्टम के आने के बाद नौसेना की मारक क्षमता में और बढ़ोतरी होगी।
डीएसी ने बराक-1 पॉइंट डिफेंस मिसाइल सिस्टम को अपग्रेडेशन करने का भी फैसला किया है। यह सिस्टम जहाजों के करीब आने वाले हवाई खतरों जैसे एंटी-शिप मिसाइल, ड्रोन और विमानों जैसे हवाई खतरों से मुकाबला करेगा।
इन फैसलों से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते समुद्री खतरों के मद्देनजर भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा और एंटी-सबमरीन क्षमता में जबरदस्त इजाफा होगा।
वायुसेना के लिए माउंटेन रडार और SAKSHAM/SPYDER सिस्टम
भारतीय वायुसेना के लिए दो अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। पहाड़ी इलाकों में वायु निगरानी क्षमता को बढ़ाने के लिए माउंटेन रडार (Mountain Radars) की खरीद को मंजूरी दी गई है। ये रडार सीमा के दोनों ओर उड़ने वाले विमानों, ड्रोन और मिसाइलों की समय रहते पहचान करने में मदद करेंगे।
इसके साथ ही, SAKSHAM/SPYDER वेपन सिस्टम को इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) से जोड़ा जाएगा, जिससे हवाई रक्षा और मजबूत होगी।
तीनों सेनाओं के लिए MALE ड्रोन
बैठक में तीनों सेनाओं के लिए मीडियम ऑल्टिट्यूड लॉन्ग एंड्यूरेंस (MALE) रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम की खरीद को भी मंजूरी दी गई। MALE RPAs यानी Remotely Piloted Aircrafts ऐसा ड्रोन सिस्टम है जो मध्यम ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ान भर सकते हैं। ये कई प्रकार के पेलोड और हथियारों को ले जाने में सक्षम होते हैं और इनका इस्तेमाल 24×7 निगरानी (surveillance), सटीक हमलों (precision strike), और गुप्त अभियानों (covert operations) में किया जा सकता है। ये ड्रोन आधुनिक युद्ध में “आई इन द स्काई” की भूमिका निभाएंगे, जो जमीनी और समुद्री ऑपरेशनों के लिए रियल-टाइम खुफिया और स्ट्राइक सपोर्ट प्रदान करेंगे। इन ड्रोन की तैनाती से भारत की सीमाओं पर निगरानी क्षमता में भारी बढ़ोतरी होगी, साथ ही ये भविष्य के नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
S-400, C-17 और C-130J बेड़े का मेंटेनेंस
डीएसी ने कुछ अहम मौजूदा सिस्टम के मेंटेनेंस और अपग्रेडन की भी मंजूरी दी है। इनमें C-17 ग्लोबमास्टर और C-130J सुपर हरक्यूलिस परिवहन विमानों का सस्टेनेंस शामिल है। ये विमान भारतीय वायुसेना के लिए रसद और परिवहन के महत्वपूर्ण साधन हैं। इनके रखरखाव से ये विमान लंबे समय तक सेवा में रह सकेंगे। इसके अलावा रूस से खरीदे गए S-400 लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम के लिए कॉम्प्रिहेन्सिव एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट को भी मंजूरी दी गई है।