📍नई दिल्ली | 15 Dec, 2025, 8:00 AM
Chinese HQ-9B: ऑपरेशन सिंदूर में चीन ने पर्दे के पीछे रह कर पाकिस्तान का साथ दिया था। चीन ने न केवल सैटेलाइट इंटेल दिया बल्कि वेपंस भी मुहैया कराए। हालांकि ऑपरेशन सिंदूर में चीन की एयर डिफेंस तकनीक को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए। अमेरिका के प्रतिष्ठित डिफेंस एक्सपर्ट और द नेशनल इंटरेस्ट के सीनियर नेशनल सिक्योरिटी एडिटर ब्रैंडन जे. वाइशर्ट ने दावा किया है कि पाकिस्तान में तैनात चीन का एचक्यू-9बी लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह विफल रहा। उनके मुताबिक, रूस से खरीदे एस-400 ट्रायम्फ सिस्टम और ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलों के सामने एचक्यू-9बी टिक नहीं पाया।
वाइशर्ट के मुताबिक, जंग से पहले चीन ने पाकिस्तान को कई एचक्यू-9बी एयर डिफेंस सिस्टम सप्लाई किए थे। चीन ने इस सिस्टम को अपेक्षाकृत सस्ते लेकिन प्रभावी विकल्प के तौर पर पेश किया था, और रूस के एस-400 जैसा बताया था। हालांकि, लेकिन जब असली युद्ध का मौका आया तो इसकी क्षमताएं कागजों तक ही सीमित रह गईं। (Chinese HQ-9B)
अमेरिकी विश्लेषक के मुताबिक, एचक्यू-9बी को रूस के एस-300 सिस्टम से प्रेरित माना जाता है, जिसे चीन ने रिवर्स इंजीनियरिंग के जरिए डेवलप किया। बाद में इसमें एस-400 जैसे कुछ फीचर्स और अमेरिकी व इजराइली तकनीक से जुड़े एलिमेंट्स भी शामिल किए गए। इसके बावजूद, वाइशर्ट ने एचक्यू-9बी को “फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर” जैसा सिस्टम बताया, जिसमें अलग-अलग तकनीकों का मिश्रण तो है, लेकिन युद्ध में भरोसेमंद प्रदर्शन नहीं रहा। (Chinese HQ-9B)
उनका कहना है कि एचक्यू-9बी न तो एस-300 के स्तर का है और न ही एस-400 की बराबरी कर सकता है। यह फर्क उस समय साफ दिखा, जब भारतीय एयर डिफेंस नेटवर्क ने पाकिस्तान के अहम इलाकों में तैनात एचक्यू-9बी को आसानी से डिएक्टिवेट कर दिया।
भारत के एस-400 ट्रायम्फ सिस्टम को वाइशर्ट ने निर्णायक हथियार बताया। उनके अनुसार, यह सिस्टम पहले से कॉम्बैट-प्रूवन है और इसी वजह से युद्ध में बेहतर साबित हुआ। रूसी सैन्य विशेषज्ञ आंद्रेई मार्त्यानोव ने भी इस आकलन का समर्थन करते हुए कहा कि एचक्यू-9बी सुपरसोनिक खतरों को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहा। (Chinese HQ-9B)
मार्त्यानोव ने दावा किया कि भारतीय ब्रह्मोस मिसाइलों ने पाकिस्तान के एचक्यू-9बी एयर डिफेंस सिस्टम को “उड़ा दिया।” ब्रह्मोस की तेज रफ्तार और सटीकता के आगे एचक्यू-9बी की इंटरसेप्शन क्षमता कमजोर साबित हुई। यहां तक कि यह सिस्टम सबसोनिक टारगेट्स और ड्रोन के खिलाफ भी प्रभावी नहीं रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने 2021 में एचक्यू-9बी सिस्टम खरीदे थे और 2024 तक इनमें अपग्रेड भी किए गए। इन्हें लाहौर और सियालकोट जैसे हाई-वैल्यू इलाकों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था। इसके बावजूद, एचक्यू-9बी कथित तौर पर एक भी भारतीय मिसाइल, ड्रोन या लोइटरिंग म्यूनिशन को इंटरसेप्ट नहीं कर सका। (Chinese HQ-9B)
वाइशर्ट के मुताबिक, एचक्यू-9बी के एचटी-233 रडार को भारतीय इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और जैमिंग तकनीकों ने निष्क्रिय कर दिया। रडार के ब्लाइंड होते ही लॉन्चर और कमांड यूनिट्स भी भारतीय हमलों की चपेट में आ गईं। इससे सिस्टम की सर्वाइवेबिलिटी और नेटवर्क इंटीग्रेशन की कमजोरियां दुनिया के सामने उजागर हो गईं।
एक और बड़ी कमी एचक्यू-9बी की सीमित संख्या रही। अनुमान के मुताबिक, पाकिस्तान के पास सिर्फ 12 से 18 एचक्यू-9बी लॉन्चर थे। इसके मुकाबले भारत के पास 40 से ज्यादा एस-400 ट्रायम्फ लॉन्चर हैं, जो लेयर्ड और डेंस एयर डिफेंस नेटवर्क का हिस्सा हैं। इसी अंतर ने युद्ध के दौरान भारत को रणनीतिक बढ़त दिलाई। (Chinese HQ-9B)
पाकिस्तानी आकलन में यह भी सामने आया कि एचक्यू-9बी का सेमी-एक्टिव रडार होमिंग सिस्टम उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गया। इससे बैटरियों की लोकेशन आसानी से ट्रैक हो गई और भारतीय वायुसेना को स्पष्ट टारगेट मिलते चले गए।
संघर्ष के बाद पाकिस्तान में एचक्यू-9बी को लेकर अंदरूनी समीक्षा की बात सामने आई है। जहां चीन ने खराब ट्रेनिंग को असफलता की वजह बताया, वहीं पाकिस्तानी और दूसरे विश्लेषकों का मानना है कि सिस्टम खुद तकनीकी रूप से कमजोर साबित हुआ। (Chinese HQ-9B)
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान अब तुर्किये के सिपर एयर डिफेंस सिस्टम ब्लॉक-1 और ब्लॉक-2 जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है। साथ ही, चीन के एचक्यू-19 सिस्टम पर भी नजर है, हालांकि इसे बीजिंग को संतुष्ट रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
तुर्की का सिपर एयर डिफेंस सिस्टम एक स्वदेशी लंबी दूरी का एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम है, जो स्टील डोम मल्टी-लेयर्ड डिफेंस स्ट्रक्चर का हिस्सा है। यह लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइल, एयर-टू-ग्राउंड म्यूनिशन और यूएवी जैसे खतरों के खिलाफ कारगर है। सिपर ब्लॉक-1 की रेंज 100+ किमी है और यह 2024 से तुर्की सेना में शामिल है, जबकि ब्लॉक-2 की रेंज 150+ किमी है और इसका परीक्षण जारी है। यह सिस्टम 360 डिग्री कवरेज, हाई मोबिलिटी और ऑल-वेदर क्षमता देता है। (Chinese HQ-9B)
वाइशर्ट के अनुसार, एचक्यू-9बी की नाकामी ने न सिर्फ पाकिस्तान के एयर डिफेंस को कमजोर किया, बल्कि चीन के एयर डिफेंस एक्सपोर्ट्स की साख को भी झटका दिया है। इसके उलट, यह भारत ने जिस तरह से एस-400 और ब्रह्मोस जैसे सिस्टम्स में निवेश किया, इसका फायदा ऑपरेशन सिंदूर में स्पष्ट तौर पर देखने को मिला। (Chinese HQ-9B)



