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चीन की AI-पावर्ड ड्रोन स्वार्म टेक्नोलॉजी; एक सैनिक कंट्रोल करेगा 200 से ज्यादा UAV, भारत भी तैयार

इन ड्रोन की सबसे बड़ी ताकत यह है कि ये अकेले-अकेले नहीं, बल्कि झुंड की तरह काम करते हैं। हर ड्रोन में एआई-आधारित इंटेलिजेंट एल्गोरिदम लगा होता है...

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📍नई दिल्ली | 24 Jan, 2026, 9:54 PM

China AI Drone Swarm: आधुनिक युद्ध की तस्वीर तेजी से बदल रही है। अब लड़ाई सिर्फ बंदूकों, टैंक और फाइटर जेट्स तक सीमित नहीं रह गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और ऑटोनॉमस सिस्टम्स ने युद्ध के मैदान को पूरी तरह बदल दिया है। हाल ही में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी पीएलए ने एआई-पावर्ड ड्रोन स्वार्म टेक्नोलॉजी दिखाकर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। चीन का दावा है कि उसकी नई तकनीक के जरिए एक ही सैनिक 200 से ज्यादा ड्रोन को एक साथ लॉन्च और कंट्रोल कर सकता है।

यह खबर ऐसे समय सामने आई है, जब भारत भी तेजी से काउंटर-यूएवी यानी एंटी-ड्रोन सिस्टम्स पर काम कर रहा है। खास बात यह है कि भारत की रणनीति सिर्फ जवाब देने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है। (China AI Drone Swarm)

China AI Drone Swarm: हर ड्रोन में एआई-आधारित इंटेलिजेंट एल्गोरिदम

चीन के सरकारी चैनल सीसीटीवी पर दिखाए गए एक डिफेंस प्रोग्राम में बताया गया कि यह ड्रोन स्वार्म टेस्ट पीएलए से जुड़ी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी ने किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में फिक्स्ड-विंग ड्रोन कुछ ही सेकंड में अलग-अलग वाहनों से लॉन्च किए गए और आसमान में फैल गए।

इन ड्रोन की सबसे बड़ी ताकत यह है कि ये अकेले-अकेले नहीं, बल्कि झुंड की तरह काम करते हैं। हर ड्रोन में एआई-आधारित इंटेलिजेंट एल्गोरिदम लगा होता है, जिससे वे आपस में बात कर सकते हैं और खुद तय कर सकते हैं कि कौन निगरानी करेगा, कौन दुश्मन का ध्यान भटकाएगा और कौन हमला करेगा।

इसे “ऑटोनॉमस नेगोशिएशन” कहा जा रहा है। इसका मतलब यह है कि अगर किसी ड्रोन को नुकसान पहुंचता है या वह गिर जाता है, तो बाकी ड्रोन तुरंत अपनी रणनीति बदल लेते हैं। वे यह तय कर लेते हैं कि खाली जगह कौन भरेगा और मिशन कैसे पूरा होगा। (China AI Drone Swarm)

क्या होते हैं ड्रोन स्वार्म?

ड्रोन स्वार्म का मतलब होता है बड़ी संख्या में छोटे-छोटे ड्रोन, जो अकेले-अकेले नहीं बल्कि एक समूह यानी झुंड की तरह काम करते हैं। ये ड्रोन आपस में जुड़े रहते हैं और एआई एल्गोरिदम की मदद से खुद तय करते हैं कि किसे क्या काम करना है। कोई ड्रोन निगरानी करता है, कोई दुश्मन का ध्यान भटकाता है और कोई हमला करता है। इस पूरे प्रोसेस में इंसानी दखल बहुत कम होता है। (China AI Drone Swarm)

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सिग्नल कटने पर भी मिशन जारी

ड्रोन युद्ध में सबसे बड़ी चुनौती होती है इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग, यानी दुश्मन द्वारा सिग्नल को जाम कर देना। चीन का दावा है कि उसके ड्रोन स्वार्म में एंटी-जैमिंग एल्गोरिदम लगाए गए हैं।

टेस्ट के दौरान जब जानबूझकर सिग्नल में रुकावट डाली गई, तब भी ड्रोन स्वार्म ने उड़ान जारी रखी और अपने टास्क पूरे किए। यानी अगर ऑपरेटर से संपर्क टूट भी जाए, तब भी ड्रोन आपस में तालमेल बनाकर मिशन को आगे बढ़ाते रहते हैं। (China AI Drone Swarm)

एक सैनिक, 200 से ज्यादा ड्रोन

सीसीटीवी की रिपोर्ट में बताया गया कि इस टेक्नोलॉजी के जरिए एक ही सैनिक 200 से ज्यादा फिक्स्ड-विंग ड्रोन को एक साथ कंट्रोल कर सकता है। ये ड्रोन अलग-अलग वाहनों से एक साथ लॉन्च किए जाते हैं और कुछ ही सेकंड में आसमान में फैल जाते हैं।

ड्रोन स्वार्म को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे खुद-ब-खुद फॉर्मेशन बना लेते हैं और इलाके को कवर करते हैं। जरूरत पड़ने पर ये ड्रोन आपस में काम बांट लेते हैं और कई टारगेट्स पर एक साथ नजर रख सकते हैं या हमला कर सकते हैं। (China AI Drone Swarm)

पहले भी दिखा चुका है चीन ड्रोन स्वार्म

चीन ने पहली बार 2021 में झुहाई एयर शो में अपने ड्रोन स्वार्म सिस्टम को दुनिया के सामने दिखाया था। उस वक्त “स्वार्म-1” सिस्टम की चर्चा हुई थी। इसके बाद 2024 में एक और एडवांस वर्जन दिखाया गया, जिसमें ज्यादा रफ्तार, लंबी उड़ान क्षमता और अलग-अलग पेलोड ले जाने की सुविधा थी।

अब 2026 की शुरुआत में सामने आई यह नई जानकारी बताती है कि चीन इस टेक्नोलॉजी को लगातार आगे बढ़ा रहा है और इसे वास्तविक युद्ध की जरूरतों के हिसाब से तैयार कर रहा है। (China AI Drone Swarm)

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क्यों चिंता का विषय है यह तकनीक

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ड्रोन स्वार्म तकनीक भविष्य की लड़ाइयों में बड़ा रोल निभा सकती है। ताइवान स्ट्रेट, साउथ चाइना सी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अगर कभी हालात बिगड़ते हैं, तो ऐसे ड्रोन स्वार्म बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

ड्रोन स्वार्म का फायदा यह है कि इन्हें पूरी तरह रोकना बेहद मुश्किल होता है। अगर कुछ ड्रोन गिर भी जाएं, तब भी सैकड़ों ड्रोन टारगेट की ओर बढ़ते रहते हैं। यही वजह है कि दुनिया की बड़ी सेनाएं अब काउंटर-ड्रोन सिस्टम्स पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। (China AI Drone Swarm)

भारत की रणनीति: जवाब से आगे की सोच

चीन की इस क्षमता के सामने भारत भी हाथ पर हाथ रखकर बैठा नहीं है। सीमा पर ड्रोन के जरिए जासूसी, हथियार और ड्रग्स की तस्करी जैसी घटनाओं के बाद भारत ने काउंटर-यूएवी टेक्नोलॉजी को प्राथमिकता दी है।

डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना, थल सेना और निजी कंपनियां मिलकर ऐसे सिस्टम्स विकसित कर रही हैं, जो दुश्मन के ड्रोन को पहचानने, जाम करने और जरूरत पड़ने पर नष्ट करने में सक्षम हों। (China AI Drone Swarm)

डीआरडीओ का इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम

डीआरडीओ द्वारा विकसित इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम मार्क-2 भारत के काउंटर-यूएवी प्रयासों की रीढ़ माना जा रहा है। इस सिस्टम में रडार, रेडियो फ्रीक्वेंसी सेंसर्स, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकर्स और लेजर हथियार शामिल हैं।

यह सिस्टम 360 डिग्री कवरेज देता है और कई किलोमीटर की दूरी पर मौजूद ड्रोन को पहचानकर उन्हें जाम या नष्ट कर सकता है। खास बात यह है कि यह पूरी तरह स्वदेशी है और एक साथ कई ड्रोन से निपटने की क्षमता रखता है। (China AI Drone Swarm)

मोबाइल काउंटर-ड्रोन सिस्टम की ताकत

भारत ने स्टेबल सिस्टम्स के साथ-साथ मोबाइल काउंटर-ड्रोन प्लेटफॉर्म पर भी काम किया है। डीआरडीओ और निजी क्षेत्र की साझेदारी से तैयार किए गए व्हीकल बेस्ड काउंटर-ड्रोन सिस्टम को जरूरत के मुताबिक कहीं भी तैनात किया जा सकता है।

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इसमें सॉफ्ट किल यानी जैमिंग और हार्ड किल यानी लेजर या काइनेटिक हथियार, दोनों ऑप्शन मौजूद हैं। इससे बॉर्डर इलाकों में तेजी से जवाब देना संभव हो जाता है। (China AI Drone Swarm)

इंद्रजाल: ड्रोन रोकने को डिजिटल कवच तैयार 

भारत में बना इंद्रजाल ऑटोनॉमस ड्रोन डिफेंस डोम को भी काफी अहम माना जा रहा है। यह एक तरह का डिजिटल सुरक्षा कवच है, जो बड़े इलाके को ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन से बचाने में सक्षम है।

इस सिस्टम में एआई-आधारित सेंसर्स और ऑटोमेटेड डिसीजन मेकिंग का इस्तेमाल होता है, जिससे यह बिना इंसानी दखल के भी काम कर सकता है। एयरबेस, संवेदनशील ठिकानों और शहरों की सुरक्षा में इसे बेहद उपयोगी माना जा रहा है। (China AI Drone Swarm)

मल्टी-लेयर डिफेंस पर फोकस

भारतीय वायुसेना और थल सेना अब मल्टी-लेयर काउंटर-यूएएस सिस्टम्स पर जोर दे रही हैं। इसका मतलब है कि ड्रोन को पहले दूर से पहचाना जाए, फिर जाम किया जाए और आखिरी जरूरत पड़ने पर उसे नष्ट किया जाए। हाल के सालों में बॉर्डर इलाकों में ड्रोन घुसपैठ के मामलों में इन सिस्टम्स की उपयोगिता भी सामने आई है। (China AI Drone Swarm)

पूरी दुनिया में बढ़ रही ड्रोन रेस

चीन अकेला देश नहीं है जो इस दिशा में काम कर रहा है। अमेरिका, रूस और यूरोप के कई देश भी ड्रोन स्वार्म और लेजर-आधारित एंटी-ड्रोन सिस्टम पर काम कर रहे हैं। अमेरिका माइक्रोवेव और लेजर हथियारों से एक साथ कई ड्रोन गिराने के प्रयोग कर रहा है। (China AI Drone Swarm)

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