📍नई दिल्ली | 22 Dec, 2025, 11:26 AM
CAG Report: नेशनल कैडेट कोर (NCC) और सैनिक स्कूलों को हमेशा से भारतीय सेना के लिए अफसर तैयार करने की नर्सरी कहा गया है। लेकिन अब इन दोनों की असलियत पर सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में संसद में पेश हुई कैग (CAG) की रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि जितनी उम्मीद थी, उतने अफसर इन संस्थानों से सेना को नहीं मिल रहे हैं।
CAG Report: आंकड़े चौंकाने वाले हैं
कैग कहता है, एनसीसी और सैनिक स्कूलों में छात्रों की भीड़ है, फिर भी इनसे सेना के लिए अफसर बनने वालों की संख्या काफी कम है। मार्च 2023 तक रिपोर्ट में यही तस्वीर सामने आई कि उम्मीदवार आते तो हैं, लेकिन उनमें से बहुत कम का चयन हो पाता है।
CAG Report: पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत की हालत खराब
सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक खासकर पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में स्थिति और भी खराब है। रिपोर्ट में साफ बताया गया कि इन इलाकों से सेना को अपेक्षा के मुकाबले काफी कम अधिकारी मिल पा रहे हैं। सीएजी ने इस पर भी चिंता जताई है और सिफारिश की है कि यहां व्यवस्था और संसाधनों में तुरंत सुधार होना चाहिए। (CAG Report)
10 हजार करोड़ रुपये खर्च, फिर भी नतीजा ढाक के तीन पात
सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में इन सस्थानों को मिलने वाली फंडिंग को लेकर भी चिंता जताई है। सीएजी का कहना है कि पिछले पांच साल में एनसीसी और सैनिक स्कूलों पर पूरे 10,043.66 करोड़ रुपये खर्च हुए। फिर भी, नतीजे कुछ खास नहीं निकले। रिपोर्ट कहती है कि इतना पैसा बहाने के बाद भी ट्रेनिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और सिलेक्शन सवालों के घेरे में है। (CAG Report)
राज्यों ने बजट देने में भी ढिलाई की
रिपोर्ट में राज्य सरकारों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि कई राज्यों ने के लिए तय बजट के मुताबिक फंड ही नहीं दिया। नतीजा ये हुआ कि पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 43 फीसदी से ज्यादा एनसीसी कैंप रद्द करने पड़े। वहीं, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और उत्तर प्रदेश में एनसीसी अधिकारियों और कैडेट्स को मानदेय और भत्ते भी समय पर नहीं मिले। (CAG Report)
CAG Report: स्कॉलरशिप भी छात्रों को नहीं मिली
सीएजी रिपोर्ट में बताया गया है कि सैनिक स्कूलों की हालत भी बहुत अच्छी नहीं है। कई राज्यों ने रेगुलर फंडिंग नहीं की, जिससे स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टाफ की पेंशन और रिटायरमेंट बेनिफिट्स पर असर पड़ा। स्कॉलरशिप की रकम भी हर राज्य में अलग-अलग है, और यहां तक कि कुछ राज्यों ने तो अपने बच्चों को दूसरे राज्यों में पढ़ने पर स्कॉलरशिप तक नहीं दी। (CAG Report)
ट्रेनिंग की जगह और सुविधाएं भी कम
यहां तक कि ट्रेनिंग और रहने की सुविधाएं भी काफी कम हैं। 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एनसीसी के लिए स्थायी ट्रेनिंग एरिया ही नहीं है। इसकी वजह से फायरिंग ट्रेनिंग भी प्रभावित हुई। सैनिक स्कूलों में 11 जगहों पर या तो छात्रों के हॉस्टल हैं या फिर जर्जर हालत में हैं। 14 स्कूलों में स्टाफ क्वार्टर कम हैं और 7 स्कूलों में स्टाफ का रहना मुश्किल है। (CAG Report)
सेना में अफसर बनने का रास्ता तो एनसीसी और सैनिक स्कूलों से ही जाता है, चाहे वो स्पेशल एंट्री स्कीम हो या एनडीए। लेकिन, कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर, फंड की कमी और ट्रेनिंग की दिक्कतों के चलते फौज में जाने का छात्रों का सपना टूट रहा है। ये रिपोर्ट ऐसे वक्त आई है जब सेना को लगातार युवा और ट्रेंड अफसरों की जरूरत है। (CAG Report)
क्या है एनसीसी स्पेशल एंट्री स्कीम
एनसीसी कैडेट्स के लिए भारतीय सेना में सीधी भर्ती का रास्ता है एनसीसी स्पेशल एंट्री स्कीम। इसमें बिना लिखित परीक्षा के भी अफसर बना जा सकता है, बस कुछ शर्तें पूरी करनी होती हैं। उम्मीदवार का ग्रेजुएट होना जरूरी है, कम से कम 50% अंक होने चाहिए। एनसीसी की सीनियर डिवीजन या सीनियर विंग में दो से तीन साल की सेवा जरूरी है, और ‘सी’ सर्टिफिकेट में कम से कम ‘बी’ ग्रेड चाहिए। उम्र 19 से 25 साल के बीच हो और उम्मीदवार अविवाहित हो, ये भी जरूरी है। (CAG Report)



