📍नई दिल्ली | 19 Sep, 2025, 5:48 PM
1965 War Diamond Jubilee: भारत-पाक युद्ध 1965 की 60वीं वर्षगांठ (डायमंड जुबली) के अवसर पर 19 सितंबर 2025 को रक्षा मंत्रालय की ओर से विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने 1965 युद्ध के वीर वेटरंस और शहीद सैनिकों के परिजनों से मुलाकात की। साउथ ब्लॉक में आयोजित इस समारोह में रक्षामंत्री ने देश की रक्षा में बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी और युद्ध में अदम्य साहस दिखाने वाले वीरों को नमन किया।
रक्षामंत्री ने कहा कि पाकिस्तान ने उस समय घुसपैठ और गुरिल्ला हमलों से भारत को डराने की कोशिश की थी, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि हर भारतीय सैनिक इस भावना से लड़ता है कि राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि भारत के सैनिकों ने उस कठिन समय में जिस बहादुरी और देशभक्ति का परिचय दिया, वह इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
राजनाथ सिंह ने इस दौरान युद्ध के प्रमुख मोर्चों खेमकरण में असल उत्तर की लड़ाई, सियालकोट में चविंडा और फिल्लोरा की भीषण लड़ाई का भी जिक्र किया। उन्होंने खासतौर पर परम वीर चक्र से सम्मानित कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद की बहादुरी को याद किया। असल उत्तर की लड़ाई में अब्दुल हमीद ने अपनी जान की परवाह किए बिना कई दुश्मन टैंकों को नष्ट कर दिया था। रक्षामंत्री ने कहा, “अब्दुल हमीद ने साबित किया कि बहादुरी हथियार के साइज से नहीं, बल्कि दिल के आकार से तय होती है।”
“Saluting the Brave: Veterans Who Shaped History.”
The Indian Army commemorated the 60th Anniversary of the 1965 India-Pakistan War at a solemn ceremony held at #SouthBlock, #NewDelhi. The event was graced by Shri Rajnath Singh, Hon’ble Raksha Mantri, as the Chief Guest. The… https://t.co/AhPB2XlsGT pic.twitter.com/Ihj3kDW6kT
— ADG PI – INDIAN ARMY (@adgpi) September 19, 2025
अपने संबोधन में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की निर्णायक नेतृत्व क्षमता को भी याद किया। उन्होंने कहा, “कोई भी युद्ध सिर्फ रणभूमि में नहीं जीता जाता। जीत पूरे राष्ट्र की सामूहिक इच्छाशक्ति का परिणाम होती है। 1965 में शास्त्री जी ने न केवल राजनीतिक नेतृत्व दिया, बल्कि पूरे देश का मनोबल ऊंचा किया।”

कार्यक्रम में रक्षामंत्री ने हाल के ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने भारत को झकझोर दिया था, लेकिन हमारी सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए दुश्मनों को सख्त संदेश दिया कि भारत को तोड़ा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने दिखा दिया कि अब जीत हमारे लिए अपवाद नहीं, बल्कि आदत बन चुकी है।”
राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि सैनिकों, वेटरंस, आश्रित परिवारों और शहीदों के परिजनों का कल्याण सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “हमारे सैनिकों को कभी संसाधनों की कमी न झेलनी पड़े, इसके लिए डिफेंस मॉर्डेनाइजेशन, बेहतर ट्रेनिंग और आधुनिक हथियारों पर लगातार काम किया जा रहा है।”
इस कार्यक्रम में थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वेस्टर्न के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार, दिल्ली एरिया के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल भवनिश कुमार, कई वरिष्ठ अधिकारी, युद्ध के वेटरंस, गैलंट्री अवॉर्ड विजेता और शहीदों के परिजन मौजूद थे।
कार्यक्रम के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने वेस्टर्न कमांड की भूमिका और 1965 युद्ध की चुनौतियों पर बोलते हुए कहा कि कैसे भारतीय सेना ने अख्नूर, खेमकरण और असल उत्तर जैसे मोर्चों पर निर्णायक जीत हासिल की।
इस मौके पर एक विशेष डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई, जिसमें 1965 युद्ध की महत्वपूर्ण झलकियाँ और सैनिकों की वीरता की कहानियां भी दिखाई गईं। वेटरंस ने अपने अनुभव साझा किए, लेफ्टिनेंट जनरल सतीश के. नाम्बियार (सेवानिवृत्त) ने युद्ध के रणनीतिक पहलुओं पर विचार रखे, जबकि वीर चक्र विजेता मेजर आरएस बेदी ने युद्धभूमि की अपनी दिल दहला देने वाली कहानी सुनाई।

