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Indian Army Vidyut Rakshak: भारतीय सेना को ‘विद्युत रक्षक’ को मिला पेटेंट, भारतीय सेना के मेजर राजप्रसाद ने किया है डेवलप

Indian Army Vidyut Rakshak: Army Secures Patent for Indigenous Generator Monitoring and Control System
Major Rajprasad RS with Indian Army Chief General Upendra Dwivedi

Indian Army Vidyut Rakshak: भारतीय सेना के इन-हाउस डेवलप सिस्टम ‘विद्युत रक्षक’ के लिए भारत सरकार के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस की ओर से पेटेंट मिला है। यह पेटेंट 2023 में फाइल किया गया था। विद्युत रक्षक को भारतीय सेना के ही एक मेजर राजप्रसाद आर.एस. ने बनाया है, वे इससे पहले भी सेना के लिए कई इनोवेटिव प्रोडक्ट्स बना चुके हैं।

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‘विद्युत रक्षक’ एक इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित इंटीग्रेटेड जनरेटर मॉनिटरिंग, प्रोटेक्शन और कंट्रोल सिस्टम है, जिसे भारतीय सेना के 7 इंजीनियर रेजिमेंट के मेजर राजप्रसाद आर.एस. ने डेवलप किया है। इस इनोवेशन का उद्देश्य सेना में इस्तेमाल किए जा रहे सभी प्रकार के जनरेटरों की मॉनिटरिंग, सिक्युरिटी और ऑपरेशंस को ऑटोमेटेड और कुशल बनाना है।

Indian Army Vidyut Rakshak: स्वदेशी तकनीक से बढ़ी सेना की ताकत

‘विद्युत रक्षक’ प्रणाली सभी प्रकार के जनरेटरों के साथ कंपेटिबल है, चाहे उनका टाइप, मेक, रेटिंग या विंटेज कोई भी हो। यह सिस्टम जनरेटर के सभी ऑपरेशन को इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म पर लाता है और जनरेटर की हेल्थ, वोल्टेज, करंट और परफॉर्मेंस को रियल टाइम में मॉनिटर करता है।

इस तकनीक की सबसे खास बात यह है कि इसमें फॉल्ट प्रेडिक्शन और प्रिवेंटिव मेंटेनेंस का फीचर है, जिससे किसी भी संभावित खराबी की पहले से पहचान हो जाती है। इसके चलते मैनुअल ऑपरेशन की जरूरत कम हो जाती है और समय तथा मैनपावर दोनों की बचत होती है।

Indian Army Vidyut Rakshak: Army Secures Patent for Indigenous Generator Monitoring and Control System

भारतीय सेना के मुताबिक, यह प्रणाली रिमोट और हाई-एल्टीट्यूड इलाकों में विशेष रूप से उपयोगी साबित हुई है, जहां बिजली की उपलब्धता सीमित होती है और जनरेटरों पर अत्यधिक निर्भरता रहती है।

भारतीय सेना के थलसेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने इस इनोवेशन को भारतीय सेना की तकनीकी यात्रा में एक “ऐतिहासिक उपलब्धि” बताया था। “विद्युत रक्षक” पहले से ही कई मिलिट्री यूनिट्स में इस्तेमाल में है और इसने ऑपरेशनल एफिशिएंसी में महत्वपूर्ण सुधार किया है। यह सेना के डेकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन विजन के अनुरूप है, तकनीक को परिवर्तन का माध्यम बनाया जा रहा है।

मेजर राजप्रसाद के बनाए ‘विद्युत रक्षक’ ने भारतीय सेना में इनोवेशन से लेकर इम्प्लीमेंटेशन तक का पूरा सफर तय किया। इस इनोवेशन को इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस ऑफ इंडिया ने 09 अक्टूबर 2025 को आधिकारिक पेटेंट प्रदान किया। पेटेंट प्रमाणपत्र में यह दर्ज है कि ‘विद्युत रक्षक’ का इनोवेशन 13 जून 2023 को दायर किया गया था और यह पेटेंट 20 वर्षों के लिए मान्य रहेगा।

‘विद्युत रक्षक’ को पहली बार एक्स भारत शक्ति में शोकेस किया गया था, जिसकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देखा था। इसके प्रदर्शन के दौरान इसकी कार्यप्रणाली और इसकी स्वदेशी तकनीक की रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने सराहना की थी।

Indian Army Vidyut Rakshak: Army Secures Patent for Indigenous Generator Monitoring and Control System

मेजर राजप्रसाद आर.एस. ने पिछले एक वर्ष में तीन महत्वपूर्ण डिफेंस टेक्नोलॉजी इनोवेशन बनाए हैं, जिन्हें भारतीय सेना ने अपनाया है। इनमें विद्युत रक्षक, मल्टी-टार्गेट पोर्टेबल डेटोनेशन सिस्टम- अग्नास्त्र और “रूम इंटरवेंशन, कमीकाजे एंड ऐईडी डिस्पोजल आरओवी- एक्सप्लोडर शामिल हैं। इसके अलावा, मेजर राजप्रसाद को “पोर्टेबल मल्टी-टारगेट डिटोनेशन डिवाइस” के लिए भी पेटेंट मिल चुका है।

भारतीय सेना का आर्मी डिजाइन ब्यूरो ऐसे इनोवेशंस को बढ़ावा देता है। इसका उद्देश्य है कि सेना के भीतर से आने वाले विचारों को तकनीकी रूप से विकसित कर उन्हें जमीनी स्तर पर लागू किया जाए।

Defence Shares in India: इस शेयर में पिछले पांच साल में 1,194 फीसदी का उछाल, एक लाख की वैल्यू हुई 13 लाख रुपये

Defence Shares in India: Solar Industries Stock Jumps 1,194% in 5 Years, Turning Rs 1 Lakh into Rs 12.94 Lakh

Defence Shares in India: देश के डिफेंस सेक्टर में तेजी से बढ़ती कंपनियों में शामिल सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड ने पिछले पांच सालों में निवेशकों को हैरान कर देने वाले रिटर्न दिए हैं। कंपनी के शेयर की कीमत जहां अक्टूबर 2019 में 1,090 रुपये थी, वहीं अब यह बढ़कर 14,120 रुपये प्रति शेयर हो गई है। यानी, जिसने पांच साल पहले कंपनी में 1 लाख रुपये का निवेश किया था, उसकी वैल्यू आज 12.94 लाख रुपये हो चुकी है।

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सोलर इंडस्ट्रीज ने पांच वर्षों में 1,194.82% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। इस दौरान कंपनी ने न केवल मार्केट बेंचमार्क को पीछे छोड़ा बल्कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में खुद को एक अग्रणी खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है। शुक्रवार को कंपनी का मार्केट कैप 1.27 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया।

Defence Shares in India: सोलर इंडस्ट्रीज की सफलता की कहानी

सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड देश की अग्रणी इंडस्ट्रियल एक्सप्लोसिव और स्पेशलिटी केमिकल्स बनाने वाली कंपनी है। यह कंपनी माइनिंग, इन्फ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस सेक्टर के लिए काम करती है। कंपनी की शानदार वृद्धि उसके मजबूत ऑपरेशनल प्रदर्शन और रणनीतिक निवेशों की वजह से संभव हुई है। हाल के वर्षों में कंपनी ने कई बड़े डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल किए हैं, जिससे उसकी ऑर्डर बुक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।

डिफेंस सेक्टर से मजबूत ऑर्डर बुक

कंपनी की ऑर्डर बुक 17,000 करोड़ रुपये से अधिक की है, जिसमें से लगभग 90 फीसदी ऑर्डर डिफेंस सेक्टर से जुड़े हैं। हाल में सोलर इंडस्ट्रीज को दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड से 483 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला है, जो बल्क एक्सप्लोसिव्स सप्लाई से जुड़ा है। इसके अलावा कोल इंडिया से 402 करोड़ रुपये का ऑर्डर भी कंपनी को मिला है।

सबसे बड़ा कॉन्ट्रैक्ट कंपनी को पिनाका रॉकेट सिस्टम के लिए मिला, जिसकी कुल वैल्यू 6,084 करोड़ रुपये है। यह भारत के इतिहास में किसी निजी कंपनी को मिली सबसे बड़ी आर्टिलरी डील है और इससे सोलर इंडस्ट्रीज का डिफेंस सेक्टर में दबदबा और मजबूत हुआ है।

एयरोस्पेस और डिफेंस में विस्तार

सोलर इंडस्ट्रीज अब पारंपरिक विस्फोटक निर्माण से आगे बढ़कर डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर में भी विस्तार कर रही है। कंपनी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के साथ साझेदारी की है और स्कायरूट एयरोस्पेस में निवेश किया है, ताकि स्पेस प्रोपल्शन सिस्टम के विकास में भागीदारी की जा सके।

इसके साथ ही कंपनी ने भार्गवास्त्र नामक एंटी-ड्रोन सिस्टम भी डेवलप कर रही है, जो आधुनिक युद्ध में ड्रोन खतरों से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है। यह तकनीक भारतीय सेना के लिए रणनीतिक रूप से अहम साबित हो सकती है।

कंपनी ने महाराष्ट्र सरकार के साथ 12,700 रुपये करोड़ का एमओयू साइन किया है, जिसके तहत एक मेगा डिफेंस एंड एयरोस्पेस फैसिलिटी बनाई जाएगी। यह प्रोजेक्ट भारत को ड्रोन्स, यूएवी, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और एडवांस्ड एक्सप्लोसिव्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

वित्तीय मोर्चे पर भी सोलर इंडस्ट्रीज ने शानदार प्रदर्शन किया है। वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का कुल राजस्व 7,540 करोड़ रुपये रहा, जो 24 फीसदी अधिक है। वहीं, नेट प्रॉफिट 47% बढ़कर 1,288 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

वित्तवर्ष की पहली तिमाही में कंपनी ने 2,154 करोड़ का राजस्व दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 28 फीसदी अधिक है। इस अवधि में नेट प्रॉफिट भी बढ़कर 353 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में ऑपरेटिंग प्रॉफिट 537 करोड़ से घटकर 535 करोड़ रुपये रहा।

कंपनी का रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉइड 38.1% और रिटर्न ऑन इक्विटी 32.6% है। पिछले पांच वर्षों में सोलर इंडस्ट्रीज ने 36.2% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट दर्ज किया है।

भारतीय रक्षा उत्पादन में बढ़ रही भूमिका

सोलर इंडस्ट्रीज का योगदान अब भारत के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में अहम हो चुका है। कंपनी ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत उन्नत गोला-बारूद, मिसाइल सिस्टम और विस्फोटक तकनीक विकसित कर रही है।

कंपनी की उपलब्धियों में यह भी शामिल है कि वह भारतीय सशस्त्र बलों को 155एमएम आर्टिलरी शेल्स और विभिन्न डिफेंस मैटेरियल्स की सप्लाई कर रही है। इसने भारत को गोला-बारूद के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ी बढ़त दी है।

सोलर इंडस्ट्रीज के शेयरों में बीते कुछ वर्षों में जबरदस्त उछाल आया है। निवेशकों का विश्वास कंपनी के प्रदर्शन और डिफेंस सेक्टर में उसकी मजबूत स्थिति पर आधारित है। मार्केट विश्लेषकों के अनुसार, सोलर इंडस्ट्रीज ने जिस स्थिरता और निरंतर ग्रोथ का प्रदर्शन किया है, उसने इसे डिफेंस सेक्टर के सबसे भरोसेमंद शेयरों में शामिल कर दिया है।

डिस्क्लेमर: शेयरों में निवेश करने से वित्तीय नुकसान का जोखिम होता है। इसलिए, निवेशकों को शेयरों में निवेश या ट्रेडिंग करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। निवेश करने से पहले कृपया अपने निवेश सलाहकार से सलाह लें।

Rolls Royce Indian Navy: भारतीय नौसेना के साथ मिलकर देश का पहला इलेक्ट्रिक वॉरशिप बना चाहती है रोल्स-रॉयस, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए भी तैयार

Rolls Royce Indian Navy Partnership
HMS Prince of Wales

Rolls Royce Indian Navy: ब्रिटिश इंजीनियरिंग कंपनी रोल्स-रॉयस ने भारत के साथ अपने रक्षा संबंधों को और मजबूत करने के लिए भारतीय नौसेना के साथ मिलकर देश का पहला इलेक्ट्रिक वॉरशिप बनाने की इच्छा जताई है। कंपनी का कहना है कि वह भारतीय नौसेना को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक और फुल-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम उपलब्ध कराएगी, जिससे जहाज एनर्जी-एफिशिएंट, ड्यूरेबल और लंबी दूरी तक ऑपरेशन कर सकेंगे।

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रोल्स-रॉयस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अभिषेक सिंह ने बताया कि कंपनी के पास भारतीय नौसेना के लिए आधुनिक हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक और फुल-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम तैयार हैं, जो ईंधन की खपत को कम करते हुए जहाजों की ऑपरेशनल रेंज को बढ़ाने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा, “हम भारत को अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रिक वॉरशिप विकसित करने में तकनीकी सहयोग देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”

यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब यूनाइटेड किंगडम का कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, जिसमें एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स एक्सरसाइज कोंकण में हिस्सा लेने के लिए मुंबई पहुंचा हुआ था। इस जहाज में रोल्स-रॉयस का एमटी30 गैस टर्बाइन इंजन लगा है। यह इंजन आज की तारीख में दुनिया के सबसे एडवांस नौसैनिक पावर सिस्टम्स में से एक माना जाता है।

रोल्स-रॉयस के डायरेक्टर एलेक्स जीनो ने कहा कि ब्रिटिश जहाज का भारत दौरा भारतीय रक्षा अधिकारियों के लिए कंपनी की अत्याधुनिक तकनीक को करीब से समझने का एक अनोखा अवसर था। उन्होंने कहा कि रोल्स-रॉयस की यह टेक्नोलॉजी भारतीय नौसेना की क्षमता ऑपरेशनल रीच को कई गुना बढ़ा सकती है।

रोल्स-रॉयस का एमटी30 इंजन बेहद ताकतवर और कॉम्पैक्ट डिजाइन वाला है। एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स में लगे दो एमटी30 गैस टर्बाइन अल्टरनेटर चार डीजल जनरेटरों के साथ मिलकर करीब 109 मेगावाट बिजली पैदा करते हैं, जो किसी छोटे शहर को एनर्जी देने के लिए पर्याप्त है। इस कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में एचएमएस रिचमंड और एक सबमरीन भी शामिल हैं, जो रॉल्स-रॉयस के स्पे मरीन गैस टर्बाइन और न्यूक्लियर सिस्टम्स से ऑपरेट होती हैं।

रोल्स-रॉयस ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य भारतीय नौसेना को ‘ग्रीन डिफेंस’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करना है। इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम्स से जहाजों का ऑपरेशन न केवल अधिक एफिशियंट होगा, बल्कि शोर और प्रदूषण में भी कमी आएगी। यह भारतीय नौसेना की “फ्लीट ऑफ द फ्यूचर” योजना का हिस्सा है, जिसमें आने वाले दशक में अधिक सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी पर जोर दिया जा रहा है।

कंपनी ने कहा कि उसकी यह पहल केवल तकनीकी सहायता तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भारत में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, लोकल प्रोडक्शन और जॉब क्रिएशन के नए अवसर भी पैदा करेगी। रोल्स-रॉयस पहले ही भारत में अपने इंजीनियरिंग और सप्लाई चेन नेटवर्क को मजबूत कर चुकी है, और अगले कुछ वर्षों में इस नेटवर्क को दोगुना करने की योजना बना रही है।

रोल्स-रॉयस का भारत के साथ संबंध कोई नया नहीं है। कंपनी पिछले 90 वर्षों से भारत में काम कर रही है। वर्तमान में भारतीय सेनाओं के 1,400 से अधिक प्लेटफॉर्म्स पर रोल्स-रॉयस के इंजन लगे हैं। इनमें भारतीय वायुसेना के हॉक जेट ट्रेनर, भारतीय नौसेना के डीजल इंजन वाले जहाज और सेना के कुछ विशेष प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अभिषेक सिंह ने बताया कि भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच रक्षा सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। 2021 में रोल्स-रॉयस ने भारतीय नौसेना के लिए इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी डेवलप करने की इच्छा जताई थी। 2023 में दोनों देशों ने इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन कैपेबिलिटी पार्टनरशिप (ईपीसीपी) के तहत सहयोग शुरू किया, जिसमें इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम (आईईपीएस) को भारत में डेवलप करने की दिशा में काम हुआ। इसके अलावा, 2024 में रोल्स-रॉयस ने भारत की ट्रिवेणी इंजीनियरिंग के साथ MT30 इंजन के लिए ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी को लेकर समझौता किया।

रोल्स-रॉयस ने कहा कि उसकी इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन तकनीक पहले से ही ब्रिटिश नेवी के जहाजों में इस्तेमाल हो रही है। एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ और एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स में लगा एमटी30 इंजन 36 मेगावाट की पॉवर जनरेट करता है। इस इंजन की खूबी है कि यह अधिक पावर के साथ कम ईंधन खर्च करता है और मैरीटाइम ऑपरेशन में शिप को ज्यादा स्टैबिलिटी मिलती है।

कंपनी के डायरेक्टर एलेक्स जीनो ने कहा, “हम मानते हैं कि भारतीय नौसेना विश्व के सबसे सक्षम और आधुनिक बेड़ों में से एक बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। रोल्स-रॉयस उसके साथ इस सफर का हिस्सा बनकर गर्व महसूस करता है।”

बता दें कि भारतीय नौसेना ने ‘फ्लीट ऑफ द फ्यूचर’ और सस्टेनेबल डिफेंस की रणनीति के तहत इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक युद्धपोतों की दिशा में रुचि दिखाई है। नौसेना पहली ही कह चुकी है कि वह भविष्य के वॉरशिप्स अब भारत में ही बनाए जाएंगे। नौसेना की ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान और ग्रीन डिफेंस पहल के तहत, इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजी को अगली पीढ़ी के डिस्ट्रॉयर्स, फ्रिगेट्स, और संभावित रूप से अगले स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर में शामिल करने की योजना है। हालांकि भारतीय नौसेना ने पहले से कुछ जहाजों, जैसे आईएनएस विशाखापट्टनम (प्रोजेक्ट 15B डिस्ट्रॉयर), में कुछ हद तक इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल शुरू किया है, लेकिन पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वॉरशिप अभी भारीतय नौसेना के बेड़े के नहीं है।

Fighter Pilot Shivangi Singh: स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह को मिला क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर बैज, पहली बार किसी महिला फाइटर पायलट को मिला यह सम्मान

IAF Woman Fighter Pilot Shivangi Singh: India’s First Female Fighter Pilot to Earn Qualified Flying Instructor Badge
IAF Woman Fighter Pilot Shivangi Singh: India’s First Female Fighter Pilot to Earn Qualified Flying Instructor Badge

Fighter Pilot Shivangi Singh: भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह ने इतिहास रच दिया है। वे भारत की पहली महिला फाइटर पायलट बनी हैं जिन्हें प्रतिष्ठित क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर बैज प्रदान किया गया है। भारतीय वायुसेना के 93 वर्षों के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी महिला को फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर बैज मिला है।

IAF Flying Instructor School Tambaram: भारतीय वायुसेना के 59 अधिकारियों को मिला प्रतिष्ठित क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर बैज

शिवांगी सिंह ने तांबरम (तमिलनाडु) स्थित भारतीय वायुसेना के फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर स्कूल में छह महीने के कठिन ट्रेनिंग कोर्स को पूरा करने के बाद हासिल किया है। इस उपलब्धि की घोषणा वायुसेना ने 9 अक्टूबर को एयर फोर्स स्टेशन तांबरम में आयोजित 159वें कोर्स के विदाई समारोह में की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एयर मार्शल तेजबीर सिंह थे, जो ट्रेनिंग कमांड के सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर हैं।

इस कोर्स में भारतीय वायुसेना, थलसेना, नौसेना और मित्र देशों के कुल 59 अधिकारी शामिल हुए थे। सभी को ‘क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर बैज’ प्रदान किया गया। लेकिन शिवांगी सिंह को यह सम्मान मिलना इसलिए ऐतिहासिक रहा क्योंकि वे भारत की पहली महिला फाइटर पायलट हैं जिन्हें यह प्रतिष्ठित बैज मिला।

शिवांगी सिंह उत्तर प्रदेश के वाराणसी की रहने वाली हैं। उन्होंने दो वर्ष पहले राफेल फाइटर जेट उड़ाने वाली भारत की पहली महिला पायलट के रूप में भी पहचान बनाई थी। वहीं अब इंस्ट्रक्टर बैज मिलने के बाद अब वे दूसरे फाइटर पायलटों को ट्रेनिंग देंगी। वायुसेना के अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले कुछ महिला हेलीकॉप्टर पायलटों को यह बैज मिल चुका है लेकिन किसी महिला फाइटर पायलट को अभी तक नहीं मिला था।

30 वर्षीय स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी ने 2017 में भारतीय वायुसेना में कमीशन प्राप्त किया था। उन्होंने शुरुआती दिनों में मिग-21 बाइसन विमान उड़ाया, जो दशकों तक भारत की एयर पॉवर का प्रतीक रहा। सितंबर 2025 में वायुसेना ने मिग-21 फाइटर जेट्स को विदाई दी, जिसके बाद शिवांगी सिंह जैसी नई पीढ़ी की पायलटें अब आधुनिक राफेल और सुखोई-30 जैसे फाइटर जेट्स उड़ा रही हैं।

भारतीय वायुसेना में महिलाओं को पहली बार 2015 में फाइटर स्ट्रीम में शामिल किया गया था। तब यह एक “एक्सपेरिमेंटल स्कीम” थी, लेकिन अब इसे परमानेंट कर दिया गया है। आज भारतीय वायुसेना में लगभग 20 महिला फाइटर पायलट हैं, जो मिग-29, सुखोई-30 और हल्के युद्धक विमान एलसीए तेजस उड़ाती हैं।

शिवांगी सिंह ने अपनी ट्रेनिंग के दौरान अनुशासन, साहस और तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन किया। कोर्स में 22 हफ्तों का कठोर प्रशिक्षण शामिल था, जिसमें फ्लाइंग प्रैक्टिस और ग्राउंड ट्रेनिंग दोनों शामिल रहे। इंस्ट्रक्टर ने बताया कि इस कोर्स में फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर बनने के लिए हाई-लेवल डेसिजन-मेकिंग, लीडरशिप, नेतृत्व और सिक्युरिटी अवेयरनेस की परीक्षा होती है।

भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने बताया कि फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर स्कूल की स्थापना 1948 में अंबाला में की गई थी और 1954 में इसे तांबरम ट्रांसफर किया गया। यह स्कूल भारतीय वायुसेना का ट्रेनिंग सेंटर है, जो पायलटों को फ्लाइट इंस्ट्रक्टर बनने के लिए तैयार करता है। अब तक इस संस्थान ने सैकड़ों भारतीय और विदेशी अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है।

समारोह के दौरान एयर मार्शल तेजबीर सिंह ने शिवांगी सिंह और अन्य अधिकारियों को बैज प्रदान करते हुए कहा कि भारतीय वायुसेना के पायलट विश्व स्तरीय क्षमता रखते हैं और इनका प्रशिक्षण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है। उन्होंने महिला अधिकारियों के बढ़ते योगदान की भी सराहना की।

बता दें कि भारतीय सेना में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। तीनों सेनाओं में महिलाएं अब फाइटर एयरक्राफ्ट से लेकर जहाजों और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी तक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। भारतीय नौसेना में भी महिलाएं अब वॉरशिप्स पर तैनात हैं, जबकि थलसेना में भी महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन और अग्रिम मोर्चों पर जिम्मेदारी दी जा रही है।

भारतीय सैन्य इतिहास में महिलाओं का सफर आसान नहीं रहा। 1990 के दशक में महिलाओं को शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत शामिल किया गया था। धीरे-धीरे उन्होंने अपने कौशल और समर्पण से हर क्षेत्र में अपनी जगह बनाई। आज महिलाएं युद्धक विमान उड़ा रही हैं, मिसाइल सिस्टम चला रही हैं और जमीनी अभियानों में भी नेतृत्व कर रही हैं।

वायुसेना में महिलाओं की सफलता की एक और मिसाल 2021 में देखने को मिली थी, जब स्क्वाड्रन लीडर आश्रिता वी. ओलेटी फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर के रूप में ग्रेजुएट होने वाली पहली महिला बनीं। अब शिवांगी सिंह ने फाइटर इंस्ट्रक्टर बनकर एक नई मिसाल कायम की है।

IAF Flying Instructor School Tambaram: भारतीय वायुसेना के 59 अधिकारियों को मिला प्रतिष्ठित क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर बैज

IAF Flying Instructor School Tambaram: 159th Qualified Flying Instructor Course Concludes with Ceremony
IAF Flying Instructor School Tambaram: 159th Qualified Flying Instructor Course Concludes with Ceremony

IAF Flying Instructor School Tambaram: भारतीय वायुसेना के फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर स्कूल में 159वें क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर कोर्स का विदाई समारोह पूरे सम्मान और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। यह समारोह 9 अक्टूबर को एयर फोर्स स्टेशन ताम्बरम में हुआ, जहां मुख्य अतिथि के तौर पर एयर मार्शल तेजबीर सिंह उपस्थित रहे। वे ट्रेनिंग कमांड के सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर हैं।

IAF Day 2025 पर ऑपरेशन सिंदूर के लिए गोल्डन एरोज, S-400 और ब्रह्मोस स्क्वॉड्रन को मिला यूनिट साइटेशन

इस कोर्स में भारतीय वायुसेना, थलसेना, नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और मित्र देशों के कुल 59 अधिकारियों ने भाग लिया। सभी अधिकारियों को ‘क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर बैज’ प्रदान किया गया। यह बैज पायलटों के लिए अत्यंत सम्मानजनक माना जाता है और उनके करियर में एक अहम उपलब्धि के तौर पर देखा जाता है।

फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर स्कूल की स्थापना वर्ष 1948 में अंबाला में हुई थी और वर्ष 1954 से यह ताम्बरम में ऑपरेट हो रहा है। इस संस्थान का मुख्य उद्देश्य युवा पायलटों को फ्लाइट ट्रेनिंग देना और ऑपरेशनल पायलटों को हाई लेवल ट्रेनर के रूप में तैयार करना है। मौजूदा 22-सप्ताह के कोर्स में दस चरणों की फ्लाइट ट्रेनिंग और 200 घंटे से अधिक की ग्राउंड ट्रेनिंग शामिल रही। इसमें अधिकारियों को पिलाटस पीसी-7 मार्क टू बेसिक ट्रेनर, किरण मार्क-1 और मार्क-2 विमान के साथ-साथ एचएएल चीता और चेतक हेलीकॉप्टर पर ट्रेनिंग दी गई।

समारोह के दौरान एयर मार्शल तेजबीर सिंह ने सभी अधिकारियों को बैज लगा कर सम्मानित किए और उनके ट्रेनिंग परफॉर्मेंस की तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह कोर्स भारतीय वायुसेना की इंस्ट्रक्टर कैपेसिटी और प्रोफेशनल एक्सलेंस का उदाहरण है।

फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर स्कूल ने अब तक सैकड़ों भारतीय और विदेशी सैन्य पायलटों को ट्रेनिंग दी है, जो वर्तमान में विभिन्न देशों की वायु सेनाओं में सेवा दे रहे हैं। यह संस्थान वायुसेना के ट्रेनिंग कमांड के तहत संचालित होता है और देश की हवाई सुरक्षा को मजबूत करने में लगातार योगदान दे रहा है।

Amir Khan Muttaqi India Visit: बगराम एयरबेस पर बोले मुत्ताकी- अफगानिस्तान में किसी विदेशी सैनिक की जगह नहीं, भारत भेजेंगे राजनयिक

Amir Khan Muttaqi India Visit: Kabul to Send Diplomats, Calls for Open Trade Routes and Peace in Region
FM Muttaqi During Press Conference

Amir Khan Muttaqi India Visit: भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मावलवी आमिर खान मुत्ताकी ने शुक्रवार को भारत में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ऐलान किया कि काबुल अब अपने राजनयिकों को नई दिल्ली भेजेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत ने हाल ही में अपनी तकनीकी मिशन को अपग्रेड कर काबुल में पूर्ण दूतावास बहाल करने का एलान किया है।

Jaishankar-Muttaqi meeting: भारत ने फिर खोला काबुल में दूतावास, तालिबान सरकार के साथ पूर्ण राजनयिक रिश्ते बहाल

मुत्ताकी की यह भारत यात्रा 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद किसी वरिष्ठ अफगान नेता की पहली आधिकारिक यात्रा है। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक रिश्तों का संकेत माना जा रहा है।

Amir Khan Muttaqi India Visit: भारत-अफगान रिश्तों में नई शुरुआत

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुत्ताकी ने कहा, “भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते पिछले चार सालों में धीरे-धीरे बेहतर हुए हैं। यह मेरी भारत की पहली यात्रा है। आज तय हुआ है कि भारत भी अपने राजनयिकों को काबुल भेजेगा और हम भी अपने राजनयिकों को नई दिल्ली भेजेंगे।” उन्होंने कहा कि भारत और अफगानिस्तान के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं और अब ये रिश्ते नए स्तर पर पहुंच रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत और अफगानिस्तान दोनों के बीच व्यापारिक, मानवीय और विकास से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनी है। मुत्ताकी ने बताया कि उनकी भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत बेहद सकारात्मक रही, जिसमें स्वास्थ्य, व्यापार और शिक्षा जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग को लेकर चर्चा हुई।

Amir Khan Muttaqi India Visit: देवबंद दौरे पर कही ये बात

मुत्ताकी ने अपनी यात्रा के कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के देवबंद का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “देवबंद इस्लामी दुनिया का एक बड़ा केंद्र है। अफगानिस्तान का देवबंद से आध्यात्मिक रिश्ता जुड़ा हुआ है। हम चाहते हैं कि हमारे धार्मिक छात्र यहां आकर पढ़ाई करें और दोनों देशों के बीच इस रिश्ते को और मजबूत करें।”

उन्होंने इसे एक “आध्यात्मिक संबंध” बताया जो अफगानिस्तान और भारत के बीच ऐतिहासिक रूप से कायम रहा है। मुत्ताकी शनिवार को देवबंद के उलेमाओं से मुलाकात करेंगे।

Amir Khan Muttaqi India Visit: बगराम एयरबेस पर दिया कड़ा बयान

जब उनसे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर सवाल किया गया जिसमें उन्होंने अफगानिस्तान का बगराम एयरबेस दोबारा लेने की बात कही थी, तो मुत्ताकी ने कड़े शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने कहा, “अफगानिस्तान के लोगों ने कभी किसी विदेशी सेना को स्वीकार नहीं किया, और आगे भी नहीं करेंगे। हमारी धरती पर किसी विदेशी सैनिक के लिए कोई जगह नहीं है। अगर कोई देश हमसे रिश्ते रखना चाहता है, तो वह राजनयिक रास्ते से रखे, लेकिन सैन्य वर्दी में नहीं। यह हमारे लिए बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।”

Amir Khan Muttaqi India Visit: चाबहार बंदरगाह पर बोले मुत्ताकी

व्यापार और कनेक्टिविटी पर बोलते हुए मुत्ताकी ने कहा कि भारत और अफगानिस्तान को मिलकर चाबहार पोर्ट के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा, “चाबहार एक रणनीतिक मार्ग है। अमेरिका ने कुछ प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन भारत और अफगानिस्तान को संयुक्त रूप से इस मुद्दे पर अमेरिका से बातचीत करनी चाहिए। यह हमारे दोनों देशों की जरूरत है।”

मुत्ताकी ने आगे कहा कि अफगानिस्तान व्यापार के लिए वाघा बॉर्डर को भी खुला देखना चाहता है। उन्होंने पाकिस्तान और भारत से अपील की, “हम अनुरोध करते हैं कि पाकिस्तान और भारत वाघा बॉर्डर बंद न करें, इससे भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार आसान होगा। व्यापार और राजनीति को अलग रखा जाना चाहिए।”

Amir Khan Muttaqi India Visit: पाकिस्तान और आतंकवाद पर सख्त रुख

जब उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तान अफगान जमीन का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने के लिए कर सकता है, तो मुत्ताकी ने साफ कहा, “यह कभी नहीं हो सकता। अफगानिस्तान की जमीन पर अफगान हुकूमत का पूरा नियंत्रण है। हमारी सरकार मजबूत है और किसी को भी हमारी जमीन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि अफगानिस्तान ने पिछले चार सालों में शांति हासिल की है। मुत्ताकी के अनुसार, “हमारी जमीन का एक इंच भी किसी के कब्जे में नहीं है। पिछले आठ महीनों में अफगानिस्तान में कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ। अगर हर देश अपने घर में शांति लाए, तो पूरी दुनिया में अमन होगा।”

पाकिस्तान हमलों पर दी प्रतिक्रिया

मुत्ताकी ने हाल ही में काबुल और अन्य इलाकों में हुई कुछ धमाकों पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि, “हां, मुझे यह जानकारी मिली है कि काबुल में एक विस्फोट की आवाज सुनी गई, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। सीमा क्षेत्रों में कुछ हमले हुए हैं, जिन्हें हम निंदा करते हैं। हम बातचीत और कूटनीति के लिए दरवाजे खुले रखे हुए हैं।”

उन्होंने पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष संदेश देते हुए कहा, “ऐसे कदम ताकत से नहीं सुलझाए जा सकते। इतिहास में जिसने भी अफगानिस्तान से टकराने की कोशिश की, चाहे वह ब्रिटेन हो, रूस या अमेरिका, उसे पछताना पड़ा है।”

महिला अधिकारों पर दी सफाई

जब उनसे महिलाओं की स्थिति पर सवाल पूछा गया तो मुत्ताकी ने कहा कि अफगानिस्तान में अब शांति है, लोग सुरक्षित हैं और महिलाओं के अधिकार सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा, “15 अगस्त 2021 से पहले हर दिन 200–400 लोग मारे जा रहे थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। शांति का माहौल है। जो लोग अफगानिस्तान को लेकर गलत प्रचार करते हैं, वे गलत हैं। हर देश की अपनी परंपराएं और नियम होते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि हम अधिकारों से इनकार करते हैं।”

स्वास्थ्य और निवेश पर जोर

मुत्ताकी ने भारत के निवेश और सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान चाहता है कि भारतीय कंपनियां वहां अस्पताल, बिजली और खनन जैसे क्षेत्रों में निवेश करें। उन्होंने कहा, “हम भारत के कारोबारियों का स्वागत करते हैं। हमें अस्पतालों, बिजली, खदानों और निर्माण में काम करने वाले लोगों की जरूरत है।”

मुत्ताकी ने कहा कि अफगानिस्तान किसी भी देश के खिलाफ नहीं है और सभी देशों के साथ शांति और सम्मान के साथ रिश्ते चाहता है। उन्होंने कहा, “हमारा भूगोल हमें व्यापार और संपर्क का अवसर देता है। हम भारत के साथ भी अच्छे रिश्ते चाहते हैं और पाकिस्तान के साथ भी। लेकिन यह अकेले हमारे हाथ में नहीं है, इसके लिए सभी पक्षों को आगे आना होगा।”

AFMS PG सीट आवंटन मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस, पूर्व सैन्य डॉक्टरों को दी बड़ी राहत

Delhi High Court Issues Notice and Grants Interim Relief to Ex-Servicemen Doctors in AFMS PG Seat Allocation Case
Delhi High Court Issues Notice and Grants Interim Relief to Ex-Servicemen Doctors in AFMS PG Seat Allocation Case

AFMS PG: दिल्ली हाईकोर्ट ने आर्मेड फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज (एएफएमएस) में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल सीटों के आवंटन को लेकर चल रहे विवाद में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने रिट याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत दी है।

यह मामला एएफएमएस संस्थानों में मेडिकल पीजी सीटों (AFMS PG) के असमान आवंटन से जुड़ा है, जिसमें पूर्व सैन्य अधिकारी डॉक्टरों ने भेदभाव का आरोप लगाया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से इस मामले की पैरवी एडवोकेट सत्यम सिंह राजपूत कर रहे हैं।

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एडवोकेट सत्यम सिंह ने बताया कि यह याचिका एएफएमएस के अंतर्गत 2025–28 सत्र की एमडी/एमएस/डीएनबी पीजी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर दायर की गई है। याचिका में कहा गया कि एएफएमएस द्वारा जारी सीट मैट्रिक्स में पहली प्राथमिकता (सेवारत अधिकारी) के लिए 210 सीटें आरक्षित रखी गईं, जबकि बाकी 207 सीटें सभी अन्य श्रेणियों (प्राथमिकता 2, 3, 4, 5) के लिए खुली छोड़ दी गईं।

इससे पूर्व सैन्य अधिकारी (प्राथमिकता 4) डॉक्टरों को उनके हक की सीटें नहीं मिल रहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की व्यवस्था से लंबे समय तक देश की सेवा करने वाले डॉक्टरों के साथ सिस्टमेटिक भेदभाव हुआ है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में अधिकांश क्लिनिकल सीटें प्राथमिकता 3 और प्राथमिकता 5 उम्मीदवारों को जा रही हैं, जिससे योग्य और अनुभवी पूर्व सैनिकों के अवसर कम हो रहे हैं।

मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति विकास महाजन की बेंच ने याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए गंभीर मुद्दों पर ध्यान देते हुए केंद्र सरकार और एएफएमएस अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए उनकी इंटरिम प्रेयर को स्वीकार कर लिया।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि फिलहाल सीट आवंटन प्रक्रिया (AFMS PG) में कोई अंतिम निर्णय न लिया जाए, ताकि पूर्व सैन्य डॉक्टरों के हित सुरक्षित रह सकें। मामले की अगली सुनवाई 7 नवंबर 2025 को तय की गई है। उस दिन अदालत इस मुद्दे पर विस्तृत सुनवाई करेगी और यह तय करेगी कि एएफएमएस की मौजूदा सीट वितरण प्रणाली संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 के मुताबिक है या नहीं।

याचिकाकर्ताओं की दलील है कि पीजी सीटों (AFMS PG) का आवंटन मनमाने और भेदभावपूर्ण तरीके से किया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्राथमिकता -1 कैटेगरी के कुछ अधिकारियों को परीक्षा के बाद प्राथमिकता -4 (एक्स सर्विसमेन) में ट्रांसफर कर दिया गया, जो नियमों का उल्लंघन है।

जानकारी के अनुसार, यह तब हुआ जब कुछ अधिकारियों को नीट-पीजी 2025 परीक्षा (3 अगस्त 2025) के बाद एनओसी मिली। उनका कहना है कि यह कदम सूचना बुलेटिन के क्लॉज 24(ए) का उल्लंघन है, जिसमें स्पष्ट प्रावधान है कि परीक्षा के बाद जारी एनओसी को प्राथमिकता 4 पात्रता के लिए स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए सरकार से पूछा है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह भी अपील की कि सभी रिलीज ऑडर्स और एनओसी की जांच की जाए जो 1 अगस्त 2025 के बाद जारी किए गए हैं, ताकि परीक्षा परिणाम के बाद हेराफेरी को रोका जा सके। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि एएफएमएस संस्थानों में समान अवसर का सिद्धांत लागू होना चाहिए और पूर्व सैनिकों के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता 4 में आने वाले डॉक्टरों ने कठिन इलाकों में सेवा की है और उन्हें भी पीजी सीट आवंटन (AFMS PG) में समान हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।

Jaishankar-Muttaqi meeting: भारत ने फिर खोला काबुल में दूतावास, तालिबान सरकार के साथ पूर्ण राजनयिक रिश्ते बहाल

Jaishankar-Muttaqi meeting: India reopens Kabul Embassy, restores full diplomatic ties with Taliban-led Afghanistan

Jaishankar-Muttaqi meeting: भारत और अफगानिस्तान के बीच राजनयिक संबंधों में शुक्रवार को जबरदस्त पुश देखने को मिला। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने घोषणा की कि भारत ने काबुल में अपने तकनीकी मिशन को अपग्रेड कर अब उसे पूर्ण दूतावास का दर्जा दे दिया है। यह फैसला तालिबान सरकार के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी के साथ हुई मुलाकात के बाद लिया गया।

Amir Khan Muttaqi India visit: मुत्ताकी की भारत यात्रा में झंडे को लेकर क्यों टेंशन में है भारत? देवबंद और आगरा भी जाएंगे

यह पहली बार है जब अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद किसी वरिष्ठ अफगान नेता ने भारत की यात्रा की और दोनों देशों के बीच आधिकारिक स्तर पर उच्चस्तरीय वार्ता हुई।

Jaishankar-Muttaqi meeting: दोनों के बीच रिश्तों की नई शुरुआत

नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने विकास, व्यापार, स्वास्थ्य, शिक्षा और मानवीय सहयोग जैसे विषयों पर बातचीत की। जयशंकर ने कहा, “भारत अफगानिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता का पूर्ण सम्मान करता है। हमें यह घोषणा करते हुए खुशी है कि अब भारत का तकनीकी मिशन काबुल में ‘भारत के दूतावास’ के रूप में कार्य करेगा।”

उन्होंने आगे कहा कि भारत एक पड़ोसी और अफगान जनता का शुभचिंतक होने के नाते अफगानिस्तान के विकास और स्थिरता में गहरी रुचि रखता है।

जयशंकर ने मुलाकात में छह नए विकास परियोजनाओं की भी घोषणा की और कहा कि भारत स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी प्रबंधन और मानवीय सहायता के क्षेत्रों में अफगानिस्तान का सहयोग जारी रखेगा।

Jaishankar-Muttaqi meeting: India reopens Kabul Embassy, restores full diplomatic ties with Taliban-led Afghanistan

जयशंकर ने मुत्ताकी को जानकारी दी कि भारत अफगानिस्तान में छह नई परियोजनाएं शुरू करेगा, जिनका विवरण दोनों देशों के बीच तकनीकी चर्चाओं के बाद जारी किया जाएगा। इसके अलावा भारत ने अफगानिस्तान को 20 एम्बुलेंसें उपहार में देने की घोषणा की, जिनमें से पांच एम्बुलेंसें जयशंकर ने प्रतीकात्मक रूप से मुत्ताकी को सौंपीं।

भारत जल्द ही एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनें भी अफगान अस्पतालों को उपलब्ध कराएगा। साथ ही, भारत अफगानिस्तान को कैंसर दवाएं और वैक्सीन भी भेजेगा ताकि स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती मिल सके। जयशंकर ने बताया कि भारत ने हाल ही में यूनाइटेड नेशंस आफिस ओन ड्रग्स एंड क्राइम के माध्यम से ड्रग पुनर्वास सामग्री भेजी थी और आगे भी ऐसा करना जारी रखेगा।

Jaishankar-Muttaqi meeting: शरणार्थियों और आपदा पीड़ितों के लिए भारत की मदद

जयशंकर ने बताया कि भारत अफगानिस्तान में हाल ही में आए भूकंप के बाद राहत सामग्री लेकर “फर्स्ट रेस्पॉन्डर” के रूप में सबसे पहले पहुंचा था। भारत अब भूकंप प्रभावित इलाकों में घरों के पुनर्निर्माण में मदद करेगा।

इसके साथ ही, पाकिस्तान से जबरन निकाले गए अफगान शरणार्थियों की स्थिति पर चिंता जताते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत उनकी आवास और पुनर्वास के लिए भी सहयोग देगा।

Jaishankar-Muttaqi meeting: India reopens Kabul Embassy, restores full diplomatic ties with Taliban-led Afghanistan
India handed over 5 Ambulances to FM Muttaqi

उन्होंने कहा, “अफगान शरणार्थियों की गरिमा और आजीविका हमारे लिए महत्वपूर्ण है। भारत उनकी मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है।” जयशंकर ने बैठक में कहा, “हमारा विकास सहयोग कभी भी किसी सरकार से नहीं, बल्कि अफगान जनता से जुड़ा रहा है।”

भारत पिछले दो दशकों में अफगानिस्तान का सबसे बड़ा विकास सहयोगी रहा है। भारत ने सलमा डैम, अफगान संसद भवन, दिल्ली-काबुल बस सेवा, और चाबहार-कंधार कॉरिडोर जैसी कई परियोजनाएं पूरी की हैं। तालिबान के आने के बाद भी भारत ने अफगान जनता के लिए खाद्यान्न, दवाइयां, और राहत सामग्री भेजना जारी रखा। 2022 से अब तक भारत ने अफगानिस्तान को 50,000 टन गेहूं और 200 टन दवाइयां भेजी हैं।

Jaishankar-Muttaqi meeting: पानी और व्यापार पर सहयोग

भारत और अफगानिस्तान के बीच पानी प्रबंधन और सिंचाई के क्षेत्र में पहले से सहयोग रहा है। जयशंकर ने कहा कि भारत अफगानिस्तान के सस्टेनेबल वाटर मैनेजमेंट में मदद करने के लिए तैयार है।

मुत्ताकी ने भी भारतीय कंपनियों को अफगानिस्तान में खनन क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया। दोनों देशों ने व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देने पर भी सहमति जताई। जयशंकर ने बताया कि भारत और अफगानिस्तान के बीच नई हवाई सेवाएं भी शुरू की जा रही हैं ताकि लोगों के बीच संपर्क बढ़े।

काबुल में भारत की वापसी: चार साल बाद दूतावास फिर खुला

अगस्त 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता में आने के बाद भारत ने काबुल में अपना दूतावास और सभी वाणिज्य दूतावास बंद कर दिए थे। भारत ने तब अपने राजनयिकों को सुरक्षित निकाल लिया था। 2022 में भारत ने काबुल में एक तकनीकी मिशन शुरू किया था, जो मानवीय सहायता और विकास परियोजनाओं की निगरानी करता था।

अब, काबुल में भारतीय दूतावास का पुनः उद्घाटन इस बात का संकेत है कि भारत धीरे-धीरे अफगानिस्तान के साथ अपने संबंधों को सामान्य कर रहा है, भले ही उसने तालिबान सरकार को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है।

आमिर खान मुत्ताकी की पहली भारत यात्रा

तालिबान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी की यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक रही। वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के बाद अस्थायी यात्रा छूट मिलने पर भारत पहुंचे हैं। मुत्ताकी ने इससे पहले रूस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय अफगानिस्तान सम्मेलन में हिस्सा लिया था, जिसमें भारत, चीन, पाकिस्तान और मध्य एशियाई देशों के प्रतिनिधि शामिल थे।

भारत की यह पहल ऐसे समय में आई है जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हैं। इस्लामाबाद द्वारा हजारों अफगान शरणार्थियों को जबरन निष्कासित करने के बाद दोनों देशों के बीच विवाद बढ़ गया है। भारत का यह कदम उस क्षेत्रीय परिदृश्य में अहम माना जा रहा है, जहाँ नई दिल्ली तालिबान के साथ सीमित सहयोग बढ़ाकर पाकिस्तान और चीन के प्रभाव को संतुलित करना चाहती है।

भारत की नई अफगान नीति

भारत की अफगान नीति में यह बदलाव धीरे-धीरे 2022 से शुरू हुआ था, जब नई दिल्ली ने तालिबान के साथ “प्रायोगिक संपर्क” की नीति अपनाई। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जनवरी 2025 में मुत्ताकी से दुबई में मुलाकात की थी, जबकि भारत के विशेष दूत ने अप्रैल में काबुल का दौरा किया था। विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत अब तालिबान के साथ सीमित संवाद रखकर अफगानिस्तान में अपनी राजनयिक मौजूदगी बनाए रखना चाहता है। इसका उद्देश्य चीन और पाकिस्तान के प्रभाव को सीमित रखना है।

भारत और तालिबान का रिश्ता हमेशा जटिल रहा है। 1990 के दशक में जब तालिबान पहली बार सत्ता में आया, तब भारत ने उसे मान्यता नहीं दी थी। 1999 में कंधार विमान अपहरण के दौरान भारतीय यात्रियों की रिहाई के लिए तालिबान की मध्यस्थता हुई थी। उस घटना ने भारत की सुरक्षा नीति को गहराई से प्रभावित किया था। लेकिन अब, जब क्षेत्रीय हालात बदल रहे हैं, भारत ने तालिबान से बातचीत शुरू की है ताकि वह किसी भी संभावित सुरक्षा खतरे से पहले ही निपट सके।

भारत की (Jaishankar-Muttaqi meeting) इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस कदम पर हैं। चीन, रूस और यूएई पहले ही तालिबान से राजनयिक संपर्क रख रहे हैं। रूस ने जुलाई 2025 में तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता भी दी थी। भारत का यह कदम तालिबान के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बड़ा संकेत माना जा रहा है, हालांकि नई दिल्ली ने यह स्पष्ट किया है कि यह मान्यता नहीं बल्कि “साझेदारी का विस्तार” है।

Exercise Konkan 2025: INS विक्रांत और HMS प्रिंस ऑफ वेल्स ने दिखाया दम, हिंद महासागर में भारत-ब्रिटेन के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप पहली बार आए साथ

Exercise Konkan 2025: INS Vikrant and HMS Prince of Wales Showcase Naval Power in High-Intensity Indo-UK Maritime Exercise

Exercise Konkan 2025: भारत और ब्रिटेन की नौसेनाओं के बीच आयोजित कोंकण 2025 अभ्यास सफलतापूर्वक समाप्त हो गया। यह अभ्यास भारत के पश्चिमी तट पर आयोजित किया गया था और जिसमें आईएनएस विक्रांत और ब्रिटेन का विमानवाहक पोत एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स शामिल थे।

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इस अभ्यास का सी फेज 5 से 8 अक्टूबर तक चला, जिसमें दोनों देशों की नौसेनाओं ने कई कॉम्प्लेक्स एंड हाई-लेवल मैरीटाइम आपरेशंस में हिस्सा लिया। इस दौरान युद्धपोतों, पनडुब्बियों, फाइटर जेट्स और समुद्री निगरानी विमानों ने एक साथ कई मिशन पूरे किए।

एक्सरसाइज कोंकण (Exercise Konkan 2025) भारत और ब्रिटेन के बीच एक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी। यह अभ्यास हर दो साल में आयोजित किया जाता है और अब यह भारत-यूके के बीच सबसे प्रमुख सैन्य सहयोग कार्यक्रमों में से एक बन चुका है।

2025 का संस्करण अब तक का सबसे बड़ा कोंकण अभ्यास माना जा रहा है। इसका उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच इंटरओपरेबिलिटी और स्ट्रेटेजिक कोआपरेशन और समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करना था।

इस बार का अभ्यास खास इसलिए भी था क्योंकि इसमें पहली बार दोनों देशों के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स ने भाग लिया। भारत की ओर से स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत और उसके साथ युद्धपोत, पनडुब्बियां और मिग-29के लड़ाकू विमान शामिल थे। वहीं, ब्रिटेन की ओर से एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स के नेतृत्व में यूके कैरियर स्ट्राइक ग्रुप ने भाग लिया, जिसमें नॉर्वे और जापान की नौसेना इकाइयां भी शामिल थीं।

अभ्यास दो चरणों में आयोजित हुआ पहला हार्बर फेज, और दूसरा सी फेज। पहले चरण में दोनों देशों के नौसैनिक अधिकारियों ने आपसी संवाद, तकनीकी बैठकें और पेशेवर विचार-विमर्श किया। इसमें जॉइंट वर्किंग ग्रुप और सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट सेशन आयोजित किए गए, जिनमें दोनों नौसेनाओं के विशेषज्ञों ने मिलकर अनुभव साझा किए।

हार्बर फेज में खेल प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जहाजों के परस्पर दौरे भी हुए, जिससे दोनों सेनाओं के बीच दोस्ती और सहयोग का माहौल मजबूत हुआ।

वहीं इस अभ्यास (Exercise Konkan 2025) का दूसरा चरण यानी सी फेज 5 अक्टूबर से शुरू हुआ और 8 अक्टूबर तक चला। इस दौरान दोनों नौसेनाओं ने कई जटिल समुद्री अभियानों का अभ्यास किया। इनमें एंटी-एयर, एंटी-सर्फेस और एंटी-सबमरीन वारफेयर जैसे ऑपरेशन्स शामिल थे।

भारतीय नौसेना के मिग-29के फाइटर जेट्स और ब्रिटेन के एफ-35बी स्टेल्थ फाइटर्स ने संयुक्त रूप से एयर कॉम्बैट और बियोंड विजुअल रेंज मुकाबले का प्रदर्शन किया। दोनों देशों के एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग हेलीकॉप्टर और मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट ने हवाई निगरानी और दुश्मन के लक्ष्यों को ट्रैक करने का अभ्यास किया।

इसके अलावा, समुद्र में जहाजों को ईंधन और सामग्री की आपूर्ति, सरफेस गनरी ड्रिल्स, और एंटी-सबमरीन वारफेयर जैसी गतिविधियां भी हुईं। इस दौरान भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों ने ब्रिटिश जहाजों के साथ समन्वित युद्धाभ्यास किया।

सी फेज (Exercise Konkan 2025) के दौरान ऑपरेशन्स इतने जबरदस्त थे कि इसे हाई ऑपरेशनल टेंपो कहा गया। यह अभ्यास बताता है कि भारतीय और ब्रिटिश नौसेनाएं अब किसी भी मल्टी डोमेन वॉर सिनारियो में मिलकर कार्य कर सकती हैं। दोनों सेनाओं के बीच संचार और सहयोग इतना सहज था कि इसे सीमलेस इंटरओपरेबिलिटी कहा गया। अभ्यास के अंतिम दिन एक औपचारिक स्टीमपास्ट सेरेमनी आयोजित की गई, जिसमें सभी जहाजों ने समुद्र में एक-दूसरे का पारंपरिक नौसैनिक अभिवादन किया। इसके बाद जहाज अपने-अपने बंदरगाहों की ओर रवाना हुए, जहां हार्बर फेज के कार्यक्रम आयोजित किए गए।

यूके कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स के नेतृत्व में भारत पहुंचा था, अभ्यास (Exercise Konkan 2025) समाप्त होने के बाद 12 अक्टूबर तक भारत में रहेगा। इसके बाद 14 अक्टूबर को यह समूह भारतीय वायुसेना के साथ एक दिवसीय संयुक्त हवाई अभ्यास करेगा। इससे वायु और नौसेना के बीच संयुक्त ऑपरेशनों की क्षमता और मजबूत होगी।

Pakistan AIM-120 AMRAAM Deal: अमेरिका ने तोड़ी चुप्पी, कहा- पाकिस्तान को नहीं दी नई मिसाइलें, सिर्फ पुरानी के रखरखाव की मंजूरी

Pakistan AIM-120 AMRAAM Deal

Pakistan AIM-120 AMRAAM Deal: अमेरिकी युद्ध विभाग यानी डिपार्टमेंट ऑफ वॉर ने पाकिस्तान को एडवांस्ड मीडियम-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलें मिलने की खबरों पर बड़ा बयान जारी किया है। विभाग ने साफ कहा है कि पाकिस्तान को कोई नई मिसाइलें नहीं दी जा रहीं। यह सौदा सिर्फ पुरानी मिसाइलों के रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स से जुड़ा है।

AIM-120 Missiles: अगर पाकिस्तान ने भारतीय फाइटर जेट्स पर दागीं ये मिसाइलें, तो कैसे भारत का ये घातक सिस्टम देगा मुंहतोड़ जवाब?

अमेरिका ने यह बयान तब जारी किया जब सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि पाकिस्तान को नई AIM-120C8 और AIM-120D3 मिसाइलें मिल रही हैं। जिसके बाद भारत समेत कई देशों में चर्चा छिड़ गई थी, क्योंकि इसी मिसाइल का इस्तेमाल पाकिस्तान ने 2019 के बालाकोट हमले के बाद मिग-21 बाइसन पर अटैक करने में किया था।

30 सितंबर 2025 को अमेरिकी युद्ध विभाग ने एक आधिकारिक प्रेस नोट जारी किया था। इसमें कहा गया कि एरिजोना की रेथियन कंपनी को एक कॉन्ट्रैक्ट में संशोधन दिया गया है। यह कॉन्ट्रैक्ट नंबर एफA8675-23-सी-0037 एआईएम-120 मिसाइलों के उत्पादन और रखरखाव से जुड़ा है, जिसकी कुल राशि अब 2.51 अरब डॉलर (करीब 21,000 करोड़ रुपये) हो गई है।

इस सूची में लगभग 35 देश शामिल हैं जिनमें जर्मनी, पोलैंड, ताइवान, इजराइल, जापान, सऊदी अरब, कतर, फिनलैंड, स्वीडन, और पाकिस्तान का नाम भी था। जिसके बाद भ्रम फैल गया कि अमेरिका ने पाकिस्तान को नई मिसाइलें बेची हैं।

Pakistan AIM-120 AMRAAM Deal: क्या है एआईएम-120 मिसाइल

एआईएम-120 मिसाइल अमेरिका की सबसे एडवांस हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। यह मिसाइल वियोंड विजुअल रेंज क्षमता वाली हैं, यानी यह 100 किलोमीटर से अधिक दूरी पर उड़ते दुश्मन के विमान को गिरा सकती है। इसमें एक्टिव रडार गाइडेंस सिस्टम लगा है, जो इसे अपने टारगेट तक खुद पहुंचने की क्षमता देता है।

AIM-120 AMRAAM: ऑपरेशन सिंदूर में जेएफ-17 और एफ-16 खोने से घबराया हुआ है पाकिस्तान, जानता है भारत के अस्त्र और गांडीव से बचना है बेहद मुश्किल, इसलिए की ये डील

यह मिसाइल एफ-16, एफ-15, और एएफ/ए-18 जैसे लड़ाकू विमानों पर लगाई जा सकती है। इसका निर्माण अमेरिकी कंपनी रेथियन करती है। पाकिस्तान ने 2006 में अपने एफ-16 ब्लॉक-52 जेट्स के साथ एआईएम-120सी5 वेरिएंट खरीदा था। 2019 में बालाकोट के बाद हुई हवाई मुठभेड़ में पाकिस्तान ने इसी मिसाइल का इस्तेमाल किया था।

Pakistan AIM-120 AMRAAM Deal: कैसे फैला भ्रम

कॉन्ट्रैक्ट की घोषणा में जब पाकिस्तान का नाम आया, तो अंतरराष्ट्रीय मीडिया की कई रिपोर्ट्स में लिखा गया कि यह “पाकिस्तान एयर फोर्स के एफ-16 जेट्स के लिए नई एआईएम-120डी मिसाइलें” हैं। इसे अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में सुधार का संकेत बताया, तो भारत की सुरक्षा के लिए खतरा करार दिया।

हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि यह फॉरेन मिलिट्री सेल्स कार्यक्रम का सामान्य हिस्सा है, जिसमें पहले से हथियार रखने वाले देशों को मेंटेनेंस सर्विस दी जाती है।

क्या है यह “सस्टेनमेंट कॉन्ट्रैक्ट”

डिफेंस इंडस्ट्री में “सस्टेनमेंट” शब्द का मतलब किसी मौजूदा सिस्टम या हथियार की मरम्मत, रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति और तकनीकी मदद से होता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी देश ने 10 साल पहले मिसाइलें खरीदी थीं, तो उसे नियमित रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स की जरूरत होगी। इसी सेवा के लिए अमेरिका समय-समय पर कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाता रहता है।

यह नई डिलीवरी नहीं बल्कि पुराने स्टॉक को चालू रखने की प्रक्रिया होती है। इस सौदे के तहत रेथॉन कंपनी को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह विभिन्न देशों की वायुसेनाओं को आवश्यक पार्ट्स, सॉफ्टवेयर अपडेट और सपोर्ट सेवाएं देती रहे। ऐसे कॉन्ट्रैक्ट हर साल या दो साल में संशोधित किए जाते हैं, ताकि पुराने उपकरणों की लाइफलाइन बढ़ाई जा सके। और यह 30 मई 2030 तक एरिजोना स्थित रेथॉन के मुख्यालय में पूरा किया जाएगा। बता दें कि रेथॉन वही कंपनी है जो अमराम, पैट्रियट मिसाइल सिस्टम और नासमस बनाती है।

क्या कहा अमेरिका ने

10 अक्टूबर 2025 को अमेरिकी युद्ध विभाग ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि झूठी मीडिया रिपोर्ट्स के विपरीत, यह कॉन्ट्रैक्ट पाकिस्तान को नई मिसाइलों की डिलीवरी से संबंधित नहीं है। यह केवल मौजूदा स्टॉक के रखरखाव से जुड़ा है, किसी अपग्रेड से संबंधित नहीं है। इसके बाद नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी नई दिल्ली में यही बयान दोहराया कि “यह अनुबंध केवल मौजूदा हथियारों की सर्विस और रिपेयर से जुड़ा है।”

पाकिस्तान के लिए क्या है इसका मतलब

पाकिस्तान के पास फिलहाल ऐसी लगभग 500 एआईएम-120 सी5 मिसाइलें हैं जो उसके एफ-16 ब्लॉक-52 फाइटर जेट्स में लगाई जाती हैं। यह जेट्स 2006-2007 में खरीदे गए थे और आज भी पाकिस्तान वायुसेना के लिए सबसे सक्षम प्लेटफॉर्म हैं। इस कॉन्ट्रैक्ट से पाकिस्तान को सिर्फ इतना लाभ होगा कि वह अपनी पुरानी मिसाइलों की मरम्मत और रखरखाव जारी रख सकेगा। किसी भी नई मिसाइल खरीद के लिए अमेरिकी कांग्रेस से अनुमोदन जरूरी होता है, जो इस मामले में नहीं हुआ।