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Transgender Navy officer Case: ट्रांसजेंडर नौसेना अफसर के मामले पर हाईकोर्ट ने रक्षा मंत्रालय से मांगा जवाब

Transgender Navy officer Case

Transgender Navy officer Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर नौसेना अफसर की सेवा से बर्खास्तगी के मामले में रक्षा मंत्रालय से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। अदालत ने पूछा है कि क्या आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल को केवल अपने अधिनियम, यानी आर्मेड फोर्सेस ट्रिब्यूनल एक्ट, 2007 तक सीमित रहकर सुनवाई करनी चाहिए या वह अन्य कानूनों की संवैधानिक वैधता की भी जांच कर सकता है।

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इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय, न्यायमूर्ति सी हरि शंकर और न्यायमूर्ति ओपी शुक्ला की तीन सदस्यीय पीठ कर रही है। अदालत ने कहा कि यह मुद्दा केवल नौसेना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर थलसेना और वायुसेना के कर्मियों पर भी पड़ सकता है। इसलिए रक्षा मंत्रालय की ओर से सचिव या उनके द्वारा नामित किसी वरिष्ठ अधिकारी को इस पर विस्तृत जवाब देना होगा।

पीठ ने स्पष्ट किया कि यह मामला पूरे सशस्त्र बलों पर असर डाल सकता है, इसलिए मंत्रालय की आधिकारिक स्थिति अदालत के सामने पेश की जानी चाहिए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 28 नवंबर तय की है।

नौसेना अफसर ने ट्रांसजेंडर पहचान के बाद दायर की थी याचिका

यह मामला एक पूर्व नौसेना अफसर से जुड़ा है, जिन्होंने सेवा के दौरान खुद को महिला के रूप में पहचानना शुरू किया और जेंडर रिएसाइनमेंट सर्जरी कराई। इसके बाद, अफसर ने आरोप लगाया कि सर्जरी की जानकारी मिलने पर नौसेना ने उन्हें पांच महीने तक मनोचिकित्सा वार्ड में रखा और बार-बार चिकित्सकीय जांच कराई।

अफसर ने अदालत में याचिका दायर करते हुए कहा कि नेवी एक्ट की धारा 9 और कुछ नियम ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान को नहीं मानते। इसलिए उन्हें असंवैधानिक घोषित किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने अपनी सेवा में बहाली और बकाया वेतन की मांग भी की है।

केंद्र सरकार ने दाखिल किया जवाब

केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने दलील दी कि याचिका सुनने का अधिकार केवल एएफटी को है, क्योंकि यह मामला सेवा नियमों और बर्खास्तगी से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि अधिकारी को अनुशासनहीनता और नियमों के उल्लंघन के कारण हटाया गया।

सरकार ने दावा किया कि अधिकारी को बार-बार लंबे बाल रखने, नेल पॉलिश लगाने, और आईब्रो ट्रिम कराने जैसी वजहों से कई बार चेतावनी दी गई थी। इसके अलावा, बिना अनुमति जेंडर रिएसाइनमेंट सर्जरी कराने को भी सेवा आचरण के खिलाफ बताया गया।

अदालत में उठे तीन मुख्य सवाल

इस मामले में अदालत को तीन अहम कानूनी सवालों पर फैसला करना है। पहला, क्या AFT को अपने अधिनियम के अलावा अन्य कानूनों जैसे नौसेना अधिनियम की धाराओं की संवैधानिक वैधता पर विचार करने का अधिकार है? दूसरा, क्या पहले दिए गए नीलम चहर केस के फैसले से एएफटी को ऐसे मामलों में फैसले देने का अधिकार मिला है? तीसरा, क्या इस तरह की व्याख्या उन सभी ट्रिब्यूनलों पर लागू होती है जो संविधान के अनुच्छेद 323ए और 323बी के तहत स्थापित नहीं किए गए हैं?

अदालत ने कहा- मुद्दा पूरी फोर्स से जुड़ा

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे सशस्त्र बलों में समानता और अधिकारों के से जुड़ा है। अदालत ने सीनियर एडवोकेट गौतम नारायण को एमिकस क्यूरिया नियुक्त किया है, जो इस मामले में अदालत की मदद करेंगे।

अदालत ने कहा कि इस मामले के जो भी परिणाम आएगें, उसका सेना, नौसेना और वायुसेना में सेवा कर रहे सभी कर्मियों पर असर पड़ सकता है। इसलिए इस पर केंद्र सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 28 नवंबर को निर्धारित की गई है, जब रक्षा मंत्रालय की ओर से आधिकारिक जवाब अदालत के सामने पेश किया जाएगा।

Trump-Xi meeting: अमेरिका और चीन की यह बैठक भारत के लिए बड़ा सबक, एक्सपर्ट बोले- आखिर हम क्यों बनना चाहते हैं सुपरपावर?

Trump Xi meeting

Trump-Xi meeting: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गुरुवार को दक्षिण कोरिया के बुसान में हुई बैठक में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और फेंटानिल जैसे अहम मुद्दों पर कई समझौतों पर सहमति जताई। ट्रंप ने बैठक को “ट्रूली ग्रेट मीटिंग” बताते हुए कहा कि यह बातचीत दोनों देशों के बीच “आपसी सम्मान और भरोसे” को और मजबूत करेगी। वहीं, इस बैठक पर विशेषज्ञों का कहना है कि जी2 यानी अमेरिका और चीन का यह द्विपक्षीय शक्ति-समीकरण भारत के लिए एक बड़ा सबक है। चीन ने चुपचाप अपनी ताकत बढ़ाई और अब वह अमेरिका को उसी के स्तर पर चुनौती दे रहा है।

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हालांकि ट्रंप और शी जिनपिंग की यह बैठक करीब 1 घंटे 40 मिनट तक चली। बैठक का आयोजन गिम्हे इंटरनेशनल एयरपोर्ट के एक विशेष हॉल में हुआ। दोनों नेताओं के बीच बातचीत का मुख्य विषय टैरिफ, ऊर्जा व्यापार और अवैध ड्रग फेंटानिल की तस्करी था।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “ट्रुथ सोशल” पर लिखा, “मेरी राष्ट्रपति शी के साथ बहुत शानदार मुलाकात हुई। हमारे देशों के बीच गहरा सम्मान है और यह मुलाकात उसे और मजबूत करेगी। हमने कई मुद्दों पर सहमति बनाई है और कुछ बाकी मुद्दों पर जल्द प्रगति होगी।”

उन्होंने बताया कि चीन अब अमेरिका से “बड़े पैमाने पर कृषि उत्पाद” खरीदेगा, जिसमें सोयाबीन और ज्वार शामिल हैं। ट्रंप ने इसे अमेरिकी किसानों के लिए बहुत बड़ी राहत बताया। उन्होंने कहा, “हमारे किसान बहुत खुश होंगे। मैंने पहले भी कहा था, उन्हें अब और जमीन और ट्रैक्टर खरीदने चाहिए।”

Trump-Xi meeting: चीन पर लगे टैरिफ में की कमी

ट्रंप ने एलान किया कि अमेरिका और चीन के बीच एक साल का नया व्यापार समझौता हुआ है, जिसके तहत चीनी वस्तुओं पर लगने वाले टैरिफ को 57 फीसदी से घटाकर 45 फीसदी किया जाएगा (जो कि भारत पर लगे 50 फीसदी ट्रैरिफ से कम है)। उन्होंने कहा कि हर साल यह समझौता फिर से समीक्षा के लिए लाया जाएगा, लेकिन उम्मीद है कि यह लंबे समय तक चलेगा।

Trump Xi meeting

उन्होंने बताया कि यह टैरिफ कटौती चीन की तरफ से फेंटानिल की अवैध तस्करी पर कड़े कदम उठाने के वादे के बदले में दी गई है। ट्रंप ने कहा, “चीन ने फेंटानिल पर सख्त कार्रवाई शुरू की है, इसी वजह से हमने शुल्क घटाने का फैसला लिया। हमें इस दिशा में पहले से कार्रवाई दिख रही है।” फेंटानिल नामक सिंथेटिक ड्रग अमेरिका में एक बड़ी समस्या बनी हुई है, जिससे हर साल हजारों लोगों की जान जाती है। ट्रंप ने कहा कि चीन अब इस ड्रग के केमिकल इंग्रीडिएंट्स के अवैध निर्यात को रोकने के लिए ठोस कदम उठा रहा है।

चीन ने साथ ही यह भी सहमति जताई कि वह अमेरिका से ऊर्जा उत्पादों तेल और गैस की बड़ी मात्रा में खरीद करेगा। ट्रंप ने बताया कि अलास्का सहित कई अमेरिकी राज्यों से तेल और प्राकृतिक गैस की बिक्री पर काम शुरू हो गया है।

क्या कहा चीन के राष्ट्रपति ने

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा, “आंधी, लहरों और चुनौतियों के बीच भी, चीन-अमेरिका संबंधों की नाव को हमें सही दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए। आप और मैं, इन संबंधों के स्टीयरिंग पर हैं, इसलिए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह विशाल जहाज स्थिरता और समझदारी के साथ आगे बढ़ता रहे।

उन्होंने कहा, मैं हमेशा मानता हूं कि चीन का विकास आपकी ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ की सोच के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकता है। हमारे दोनों देश एक-दूसरे की मदद करके एक साथ सफलता और समृद्धि प्राप्त करने की पूरी क्षमता रखते हैं। शी जिनपिंग ने कहा कि सालों से मैं सार्वजनिक मंचों पर बार-बार यह बात कहता आया हूं कि चीन और अमेरिका को साझेदार और मित्र बनकर रहना चाहिए। यही इतिहास ने हमें सिखाया है…।”

रेयर अर्थ मिनरल्स पर सहमति

बैठक में दोनों नेताओं ने रेयर अर्थ मिनरल्स के मुद्दे पर भी समाधान निकाल लिया। व्हाइट हाउस के अनुसार, यह मुद्दा अब “पूरी तरह सुलझा लिया गया” है। ये मिनरल्स मॉडर्न इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस इक्विपमेंट्स और एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी के लिए जरूरी होते हैं।

ट्रंप ने कहा, “रेयर अर्थ मिनरल्स पर सालभर का समझौता हुआ है और यह हर साल रिन्यू किया जाएगा। यह पूरी दुनिया के लिए अहम कदम है।”

बैठक में एक-दूसरे की तारीफ

ट्रंप और शी के बीच मुलाकात बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। शुरुआत में ट्रंप ने शी को अपना “पुराना दोस्त” बताया और कहा, “यह मेरे लिए सम्मान की बात है कि मैं इतने समय बाद अपने एक दोस्त से मिल रहा हूं। हमें कई मुद्दों पर पहले से ही सहमति है और बाकी बातों पर अभी प्रगति करेंगे।”

शी जिनपिंग ने भी ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा कि “आपसे दोबारा मिलकर बहुत खुशी हुई। हमने आपके दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद कई बार फोन पर बात की। चीन और अमेरिका को सहयोगी और मित्र बने रहना चाहिए।”

दोनों नेताओं ने माना कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन संवाद जारी रहना चाहिए। शी ने कहा कि चीन और अमेरिका दोनों देशों का एक साथ आगे बढ़ना “विकास और समृद्धि” के लिए जरूरी है।

यूक्रेन और गाजा संघर्ष पर बातचीत

इसके अलावा, ट्रंप ने बताया कि दोनों देशों के बीच एक बड़ा ऊर्जा समझौता होने वाला है। इसमें अमेरिकी कंपनियों द्वारा चीन को तेल, गैस और रेयर मटेरियल्स की आपूर्ति शामिल है। ऊर्जा क्षेत्र के अधिकारी दोनों देशों में जल्द बैठक करेंगे।

ट्रंप ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में संघर्ष विराम पर भी चर्चा हुई। यूक्रेन पर हमने लंबी बातचीत की। हम दोनों चाहते हैं कि इस संघर्ष को खत्म करने के रास्ते तलाशे जाएं। चीन इसमें मदद करने के लिए तैयार है। शी जिनपिंग ने ट्रंप के गाजा युद्धविराम समझौते में भूमिका की सराहना की और कहा कि चीन भी “अपने तरीके से” कंबोडिया-थाईलैंड सीमा विवाद सुलझाने में मदद कर रहा है।

ट्रंप-शी बैठक को 10 में से 12 अंक

बातचीत के बाद ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि यह बैठक “असाधारण रूप से सफल” रही। उन्होंने इसे 10 में से 12 अंक दिए और कहा, “यह हमारी दोनों देशों के बीच नए अध्याय की शुरुआत है। हमने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रगति की है और भविष्य में इसे और आगे बढ़ाएंगे।” ट्रंप ने यह भी एलान किया कि वह अगले साल अप्रैल में चीन का दौरा करेंगे, जबकि शी जिनपिंग उसके बाद अमेरिका आएंगे।

भारत क्यों ‘सुपरपावर’ बनना चाहता है

वहीं, इस मामले में अंतराष्ट्रीय मामलों के जानकार सुशांत सरीन का कहना है, “जी2 यानी अमेरिका और चीन का मिलना भारत के लिए एक बड़ा सबक है। चीन ने चुपचाप अपनी ताकत बढ़ाई और अब वह अमेरिका को उसी के स्तर पर चुनौती दे रहा है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि चीन अब भी खुद को एक ‘विकासशील देश’ कहता है। दूसरी ओर हम हैं, जो एक ‘मिडल पावर’ होने के बावजूद खुद को ‘सुपरपावर’ साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि हमारे पास न तो उतनी आर्थिक क्षमता है, न ही सैन्य ताकत, जो किसी ‘महाशक्ति’ के पास होती है।”

सरीन ने सवाल उठाया, “आखिर हम सुपरपावर बनना क्यों चाहते हैं? अगर मान भी लें कि हम सुपरपावर बन जाएं, तो हमारी ‘ग्रैंड स्ट्रैटेजी’ क्या होगी? उस ताकत के साथ हम क्या करेंगे? जब हम आज अपनी मौजूदा ताकत का उपयोग ही नहीं कर पा रहे, तो सुपरपावर बनने की बातें करना सिर्फ सेल्फ-डिसेप्शन है।”

हकीकत स्वीकार करे भारत

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत को अब हकीकत स्वीकार करनी चाहिए, “सच का सामना करो। शांत रहो। डींगे हांकना बंद करो। पहले अपनी अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत को मजबूत करो। दूसरों से टेक्नोलॉजी मांगना बंद करो, कोई तुम्हें मुफ्त में नहीं देगा। या तो पुरानी तकनीक खरीदो, या अपनी खुद की तकनीक विकसित करो, या फिर दूसरों की तरह ‘सीखो और कॉपी करो’। दुनिया में किसी को भी टेक्नोलॉजी चांदी की थाली में नहीं मिली है।”

अंत में उन्होंने भारत की नीतिगत व्यवस्था पर प्रहार करते हुए कहा, “अर्थव्यवस्था में सुधार करो। गवर्नेंस में सुधार लाओ। नौकरशाही के शिकंजे को तोड़ो। वरना तुम पीछे रह जाओगे।”

कमजोरों पर दबाव डालते हैं ट्रंप

अंतराष्ट्रीय मामलों के एक्सपर्ट डॉ. ब्रह्मा चेल्लानी कहते हैं कि ट्रंप और शी जिनपिंग ने आपसी सहमति से ट्रेड वॉर में एक साल की राहत मिली है। लेकिन उनकी इस मुलाकात से अमेरिका और चीन के बीच चल रहे गहरे तनावों में कोई खास राहत नहीं मिली। इसके बावजूद ट्रंप ने तुरंत अधिकांश चीनी सामानों पर लगने वाले टैरिफ को घटाकर 45 प्रतिशत कर दिया, जो भारत और ब्राजील पर लगाए गए 50 फीसदी शुल्क से कम है।

डॉ. चेल्लानी कहते हैं कि ट्रंप का अब तक का कार्यकाल एक बात साफ करता है कि वह ताकत और आक्रामकता का सम्मान करते हैं, लेकिन कमजोरों पर दबाव डालते हैं। शी जिनपिंग के साथ तथाकथित जी2 बैठक का उनका उल्लेख भी इसी पैटर्न को दर्शाता है, जैसे कि वे अक्सर नरम और झुकने वाले नेताओं से बड़े समझौते या रियायतें हासिल करने की कोशिश करते हैं।

ट्रंप ने चीन के साथ व्यापार युद्ध में विराम की कोशिश की, लेकिन दूसरी ओर उन्होंने भारत जैसे रणनीतिक सहयोगी देश पर सख्त आर्थिक दबाव बनाए रखा। चीन के प्रति उनका “कभी नरम, कभी कठोर” रवैया और भारत पर आर्थिक दबाव यह दिखाता है कि उनकी विदेश नीति दीर्घकालिक रणनीति के बजाय अल्पकालिक आर्थिक लाभ और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं से प्रेरित है।

China Moon Mission: चीन के मून मिशन में पाकिस्तान को मिली जगह, 2030 तक मानव को चांद पर भेजने की तैयारी

China Moon Mission

China Moon Mission: चीन ने अपने आगामी अंतरिक्ष कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान के एक अंतरिक्ष यात्री को अपने स्पेस मिशन में शामिल करने की घोषणा की है। चाइना मैन्ड स्पेस एजेंसी ने बताया कि दो पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्री चीन के साथ ट्रेनिंग लेंगे, जिनमें से एक को शॉर्ट-ड्यूरेशन स्पेस फ्लाइट मिशन पर भेजा जाएगा। यह पहली बार है जब पाकिस्तान का कोई अंतरिक्ष यात्री किसी दूसरे देश के मानवयुक्त मिशन का हिस्सा बनेगा।

India-China Talks: 23वीं कोर कमांडर बैठक को लेकर भारत-चीन की तरफ से जारी बयानों के क्या हैं मायने, क्या है ड्रैगन का गेम प्लान?

चाइना मैन्ड स्पेस एजेंसी के प्रवक्ता झांग जिंगबो ने कहा कि दोनों देशों के बीच यह सहयोग विज्ञान और तकनीकी साझेदारी का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्री मिशन में “पेलोड स्पेशलिस्ट” के रूप में काम करेगा। यह कार्यक्रम चीन के मौजूदा अंतरिक्ष स्टेशन “तियांगोंग” का हिस्सा है।

चीन ने साथ ही यह भी पुष्टि की है कि उसका “मैंड मून मिशन” 2030 तक तय समय पर पूरा होगा। चाइना मैन्ड स्पेस एजेंसी ने कहा कि वह अगले कुछ वर्षों में चांद पर मानव भेजने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। एजेंसी के अनुसार, इस मिशन के लिए कई अहम ट्रायल्स चल रहे हैं, जिनमें “थर्मल टेस्टिंग”, “लान्यू लूनर लैंडर”, और “लॉन्ग मार्च-10 रॉकेट” की टेस्टिंग शामिल है।

चाइना मैन्ड स्पेस एजेंसी के प्रवक्ता झांग जिंगबो ने बताया कि “मंगझोउ” नामक मानवयुक्त अंतरिक्ष यान और मून लैंडिंग सूट्स पर भी तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य 2030 तक चीन के अंतरिक्ष यात्रियों को चांद की सतह पर उतारने का है और यह योजना सही दिशा में आगे बढ़ रही है।”

चीन के “तियांगोंग” स्पेस स्टेशन पर भी गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। यहां छह-छह महीने की अवधि के लिए अंतरिक्ष यात्री रहते हैं और वैज्ञानिक प्रयोगों के साथ-साथ तकनीकी रखरखाव भी करते हैं। चाइना मैन्ड स्पेस एजेंसी ने गुरुवार को नए अंतरिक्ष दल की घोषणा की, जिसमें झांग लू, वू फेई और झांग होंगझांग शामिल हैं। यह टीम शुक्रवार रात 11:44 बजे जियूक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से उड़ान भरेगी। झांग लू पहले शेनझोउ-15 मिशन का हिस्सा रह चुके हैं, जबकि बाकी दो अंतरिक्ष यात्री पहली बार अंतरिक्ष में जाएंगे।

इस मिशन के तहत चार चूहों को भी अंतरिक्ष में भेजा जाएगा, ताकि यह अध्ययन किया जा सके कि शून्य गुरुत्वाकर्षण और अकेलेपन का जीवों पर क्या असर पड़ता है।

चीन ने अपने “तियांगोंग” स्पेस स्टेशन बनाने का काम 2011 में शुरू किया था, जब उसे अमेरिकी सुरक्षा चिंताओं के चलते इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया था। आज “तियांगोंग” चीन का पूरी तरह से डेवलपप्ड ऑर्बिटल स्टेशन है, जहां से वह चांद और अन्य ग्रहों के लिए भविष्य की उड़ानों की तैयारी कर रहा है।

चाइना मैन्ड स्पेस एजेंसी ने कहा कि “मैन्ड मून प्रोग्राम” चीन के लिए राष्ट्रीय गौरव का विषय है और यह पूरी तरह घरेलू तकनीक से ऑपरेट होगा। आने वाले महीनों में लॉन्ग मार्च-10 रॉकेट की तकनीकी उड़ानें और परीक्षण जारी रहेंगे। इस एलान के साथ ही चीन ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अंतरिक्ष क्षेत्र में अमेरिका और रूस जैसे देशों की बराबरी करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।

Pravaig Veer: भारतीय सेना के लिए तैयार किया देश का पहला बुलेटप्रूफ इलेक्ट्रिक ऑल-टेरेन व्हीकल ‘वीर’, रेंज है 500 किमी

Pravaig Veer Electric Military Vehicle

Pravaig Veer: बेंगलुरु स्थित भारतीय कंपनी प्रावैग डायनामिक्स ने भारतीय सेनााओं के लिए देश का पहला बुलेटप्रूफ इलेक्ट्रिक ऑल-टेरेन वाहन तैयार किया है। इस व्हीकल का नाम वीर रखा गया है। यह व्हीकल पूरी तरह भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है और इसे खास तौर पर मिलिट्री इस्तेमाल के लिए बनाया गया है।

ATOR N1200: बेहद खास है भारतीय सेना का ये बाहुबली, इसके टायरों के दाम सुन कर जाएंगे चौंक, इतनी कीमत में आ जाएंगी चार हैचबैक कारें

‘वीर’ (Pravaig Veer) एक 4×4 इलेक्ट्रिक टैक्टिकल ऑल-टेरेन व्हीकल है, जो ऊबड़-खाबड़ इलाकों, रेगिस्तान, पहाड़ और सीमा क्षेत्रों में ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह से बुलेटप्रूफ, साइलेंट और स्टेल्थ टेक्नोलॉजी से लैस है, जिससे दुश्मन का सर्विलांस सिस्टम आसानी से पकड़ नहीं पता।

Pravaig Veer Electric Military Vehicle

प्रावैग (Pravaig Veer) कंपनी के मुताबिक, ‘वीर’ को 2025 में लद्दाख में आयोजित आर्मी फील्ड ट्रायल्स में परखा गया, जहां इसने बर्फीले इलाकों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस व्हीकल के हीट और साउंड सिग्नेचर बहुत कम है, जो सामान्य व्हीकल्स से बेहद कम हैं और ज्यादा सुरक्षित है।

भारतीय रक्षा मंत्रालय के आईडेक्स कार्यक्रम के तहत इस प्रोजेक्ट को विशेष पुरस्कार भी दिया गया है। यह सम्मान उन इनोवेशन को दिया जाता है जो सेना की क्षमता और ऑपरेशन कैपेबिलिटी को बढ़ाने के लिए बनाए जाते हैं।

Pravaig Veer Electric Military Vehicle

‘वीर’ (Pravaig Veer) में ड्यूल मोटर ऑल-व्हील ड्राइव सिस्टम लगाया गया है जो 620 न्यूटन मीटर टॉर्क देता है। यह 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार मात्र 6 सेकंड में पकड़ लेता है। इसकी अधिकतम रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा है।

इसमें लगी 90.9 किलो वॉट ऑवर की एलपीएफ बैटरी एक बार चार्ज होने पर 500 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है। इसके फास्ट चार्जिंग सिस्टम से बैटरी को सिर्फ 30 मिनट में 80 फीसदी तक चार्ज किया जा सकता है।

‘वीर’ (Pravaig Veer) की ग्राउंड क्लीयरेंस 233.6 मिलीमीटर है और यह 900 मिलीमीटर गहराई वाले पानी में भी चल सकता है। इसका कुल वजन लगभग 2060 किलोग्राम है और यह 850 किलोग्राम तक का भार ढो सकता है। इसमें 18 इंच के रन-फ्लैट टायर और डिस्क ब्रेक्स लगाए गए हैं।

Pravaig Veer Electric Military Vehicle

वीर में ड्रोन बे, सैटकॉम कम्युनिकेशन सिस्टम, टरेट माउंट, और थर्मल कैमरा सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। यह न केवल वॉर मिशन बल्कि सीमा निगरानी, आपदा राहत के लिए भी उपयोगी है।

‘वीर’ (Pravaig Veer) का केबिन पूरी तरह डिजिटल है। इसमें दो डिस्प्ले लगे हैं, एक कंट्रोल और नेविगेशन के लिए और दूसरा सर्विलांस फीड्स के लिए, जिसमें ड्रोन और थर्मल कैमरा की लाइव इमेजरी दिखाई देती है।

प्रावैग डायनामिक्स का दावा है कि ‘वीर’ को पूरी तरह भारत में तैयार किया गया है और इसके डेटा सिस्टम में किसी विदेशी डिपेंडेंसी नहीं है। इसका मतलब है कि वाहन से जुड़ी हर जानकारी और डेटा भारत में रहता है।

कंपनी के अनुसार, वीर (Pravaig Veer) को बिल्ट इन इंडिया, फॉर इंडिया के सिद्धांत पर तैयार किया गया है और इसे भारतीय सेना की खास जरूरतों के अनुसार डिजाइन किया गया है। वहीं, ‘वीर’ का तीसरा वर्जन ट्रायल फेज में है।

India-China Talks: 23वीं कोर कमांडर बैठक को लेकर भारत-चीन की तरफ से जारी बयानों के क्या हैं मायने, क्या है ड्रैगन का गेम प्लान?

India-China Talks

India-China Talks: भारत और चीन के बीच 23वीं कोर कमांडर स्तर की बैठक 25 अक्टूबर 2025 को लद्दाख के चुशुल-मोल्डो बॉर्डर पॉइंट पर आयोजित की गई। इस बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने एक बार फिर एलएसी पर शांति और स्थिरता बनाए रखने को लेकर बातचीत की। बैठक के चार दिन बाद, 29 अक्टूबर को भारत और चीन दोनों ने अपने-अपने आधिकारिक बयान जारी किए। दोनों ही देशों ने यह कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति बनी हुई है और बातचीत की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।

India-China Sweets Exchange: एलएसी पर भारतीय और चीनी सैनिकों ने दीपावली पर बांटी मिठाइयां, चीनी दूतावास ने दी जानकारी

India-China Talks: क्या कहा भारतीय विदेश मंत्रालय ने

भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में बताया कि यह बैठक “मित्रवत और सौहार्दपूर्ण माहौल” में हुई। मंत्रालय ने कहा कि यह पश्चिमी सेक्टर में जनरल लेवल मैकेनिज्म की पहली बैठक थी, जो 19 अगस्त 2025 को हुई 24वीं स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव बातचीत के बाद आयोजित की गई। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह बैठक भारतीय पक्ष के चुशुल-मोल्डो बॉर्डर पॉइंट पर हुई थी।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, बातचीत में अक्टूबर 2024 में हुई 22वीं कोर कमांडर बैठक के बाद हुई प्रगति की समीक्षा की गई। मंत्रालय ने कहा कि पिछले एक वर्ष में एलएसी पर शांति और स्थिरता बनी रही है। भारत ने आगे भी मौजूदा मैकेनिज्म जैसे वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन और कोर कमांडर स्तर की बैठकों के जरिए किसी भी स्थानीय मुद्दे को सुलझाने पर जोर दिया।

बयान में भारत का रुख स्पष्ट था कि शांति और स्थिरता के लिए स्ट्रक्चर्ड तरीके से वार्ता प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए। विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से सीमा क्षेत्रों में बातचीत के मौजूदा तरीकों का पालन करने पर जोर दिया।

India-China Talks

India-China Talks: क्या कहा गया चीन की तरफ से

वहीं चीन की ओर से जारी बयान चाइना मिलिट्री ऑनलाइन और चीनी रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता यू जिंग के जरिए आया। चीन ने बैठक को “मोल्डो-चुशुल” कहते हुए लिखा कि यह वार्ता भारत की तरफ हुई यानी चुशुल में हुई। चीन ने बैठक को “सक्रिय और गहन बातचीत” बताया और कहा कि दोनों देशों ने बॉर्डर मैनेजमेंट के पश्चिमी हिस्से (वेस्टर्न सेक्शन) पर विचार-विमर्श किया।

चीन के बयान में यह भी कहा गया कि बैठक दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी “महत्वपूर्ण आम सहमति” के तहत हुई। चीन ने यह जोड़ा कि भविष्य में सैन्य और कूटनीतिक चैनलों के जरिए बातचीत जारी रखी जाएगी ताकि सीमा पर शांति और स्थिरता बनी रहे।

India-China Talks: क्या नहीं कहा चीन ने

दिलचस्प बात यह रही कि चीन ने अपने बयान में न तो 22वीं बैठक का जिक्र किया और न ही 24वीं स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव बातचीत के बाारे में कुछ लिखा। भारत ने जहां बातचीत की निरंतरता पर जोर दिया, वहीं चीन ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात का अप्रत्यक्ष संदर्भ देते हुए नेतृत्व स्तर की सहमति को प्राथमिकता दी।

India-China Talks: क्या है दोनों देशों के संदेशों का मतलब

विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बयान लगभग एक जैसे संदेश देते हैं, यानी “शांति बनी रहे, बातचीत जारी रहे”। लेकिन उनके शब्दों और प्राथमिकताओं में अंतर है। भारत का रुख पूरी तरह से प्रक्रिया-केंद्रित है, यानी भारत एक तय प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है, जबकि चीन नेतृत्व-केंद्रित दृष्टिकोण अपना रहा है।

भारत यह दिखाना चाहता है कि गलवान घाटी संघर्ष (2020) के बाद जो बातचीत की प्रक्रिया शुरू हुई है, उससे दोनों देशों के बीच रिश्तों में काफी प्रगति हुई है। डिसएंगेजमेंट, बफर जोन और नियमित बातचीत जैसे उठाए गए कदमों ने हालात को स्थिर बनाए रखा है। वहीं चीन यह संकेत दे रहा है कि उसकी टॉप लीडरशिप की “समझदारी” से सीमा पर शांति बनी हुई है।

India-China Talks: क्यों अहम है यह बैठक

यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि सर्दियों के मौसम की शुरुआत के बावजूद दोनों देशों के लगभग 50 हजार जवान की सेनाएं अभी भी एलएसी पर तैनात हैं। हालांकि, इस बैठक में सैनिकों की संख्या घटाने या नए डिसएंगेजमेंट पॉइंट्स पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई।

अगस्त 2025 की स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव वार्ता के बाद यह पहली बार था जब दोनों देशों ने सैन्य स्तर पर इतनी व्यापक चर्चा की। उस बैठक में एक नए वर्किंग ग्रुप के गठन पर सहमति बनी थी, जो सीमा प्रबंधन और पेट्रोलिंग बहाली जैसे मुद्दों पर काम करेगा।

विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, भारत और चीन दोनों ही एलएसी पर शांति को सबसे बड़ी प्राथमिकता मानते हैं। भारत का कहना है कि सीमाओं पर कोई नई गतिविधि नहीं होनी चाहिए जो हालात को बिगाड़े। चीन ने भी कहा कि “दोनों देशों के बीच सहमति के अनुसार, सीमा क्षेत्रों में टकराव से बचा जाएगा और शांति को बरकरार रखा जाएगा।”

यह बैठक 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से जारी बातचीत प्रक्रिया का हिस्सा है। उस संघर्ष के बाद से दोनों देशों के कॉर्प्स कमांडरों के बीच कुल 23 बैठकें हो चुकी हैं, जिनका उद्देश्य एलएसी पर तनाव कम करना और पारस्परिक विश्वास बहाली करना है।

भविष्य में बढ़ सकता है सैन्य गतिरोध

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार डॉ. ब्रह्मा चेलाने कहते हैं, “दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अभी भी कुछ महत्वपूर्ण अनसुलझे इलाकों पर बातचीत होनी है। पूर्वी लद्दाख में दोनों तरफ लगभग 50,000 से 60,000 सैनिक तैनात हैं, जो बताते हैं, हालात अभी भी नाजुक हैं। वहीं, चीन पूरे हिमालयी मोर्चे पर नए परमानेंट स्ट्रक्चर बना कर, और अग्रिम मोर्चों पर तैनाती करके सिस्टेमेटिक तरीके से मिलिटराइजेशन कर रहा है, जिससे भविष्य में सैन्य गतिरोध और बढ़ने की संभावना है।”

फिलहाल, 23वीं बैठक से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि भारत और चीन दोनों शांति और आपकी बातचीत को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं। जबकि कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ है, लेकिन मौजूदा स्थिति को स्थिर रखना दोनों की प्राथमिकता बनी हुई है।

Indian Army Ram Mandir flag: सेना की मदद से राम मंदिर के शिखर पर फहराया जाएगा ध्वज, 25 नवंबर को पीएम रहेंगे मौजूद

Indian Army Ram Mandir flag
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Indian Army Ram Mandir flag: अयोध्या में श्रीराम मंदिर के शिखर पर ध्वज भारतीय सेना की देखरेख में फहराया जाएगा। इस आयोजन की रिहर्सल में भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। सेना के विशेषज्ञ अधिकारियों ने ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के साथ मिलकर पूरे समारोह का पूर्वाभ्यास किया। यह कार्यक्रम 25 नवंबर को आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे।

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राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि मंदिर ट्रस्ट ने ध्वज फहराने की तकनीकी प्रक्रिया को पूरी तरह सटीक और सुरक्षित तरीके से पूरा करने के लिए भारतीय सेना से सहयोग मांगा था। उन्होंने कहा कि सेना के अधिकारियों ने झंडा फहराने की प्रक्रिया, ऊंचाई पर उपकरणों लगाने और सुरक्षा उपायों को लेकर विस्तार से जानकारी दी।

राम मंदिर के ध्वज का वजन 11 किलोग्राम है, जबकि इसका दंड 11 फीट ऊंचा और चौड़ाई 22 फीट होगी। समारोह को बिना किसी बाधा के संपन्न कराने के लिए सेना की देखरेख में लगातार रिहर्सल की जा रही है। उन्होंने कहा कि सेना की विशेषज्ञता के चलते यह आयोजन विश्व स्तर पर गौरव का प्रतीक बनेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि समारोह में करीब आठ हजार लोगों को आमंत्रित किया गया है। हालांकि, सुरक्षा कारणों से 25 नवंबर को आम श्रद्धालुओं को रामलला के दर्शन की अनुमति नहीं होगी। इस अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य, सेना अधिकारी और मंदिर निर्माण से जुड़े इंजीनियर मौजूद रहे।

Tejas MK1A Delivery Delay: बिना तेजस की डिलीवरी के सूनी रही IAF की दीपावली, HAL ने फिर तोड़ा वादा, ये है वजह

Tejas MK1A Delivery Delay

Tejas MK1A Delivery Delay: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड एक बार फिर अपने वादे से चूक गई है। देश का पहला स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस बना रही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल को इस अक्टूबर तक वायुसेना को पहले दो तेजस एमके1ए एयरक्राफ्ट की डिलीवरी करनी थी। लेकिन अक्टूबर महीना भी बीतने वाला है और पहले 83 ऑर्डर में से एक भी तेजस एमके 1ए की डिलीवरी सुनिश्चित नहीं हो पाई है। ये हालात तब हैं कि जब एचएएल को जीई से अभी तक चार एफ-404 इंजनों की डिलीवरी हो चुकी है।

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सूत्रों का कहना है कि तेजस एमके1ए की डिलीवरी में अभी और देरी हो सकती है, और भारतीय वायुसेना को अगले साल तक ही यह एयरक्राफ्ट सौंपे जा सकते हैं। उनका कहना है कि यह हाल तब है कि जब वायुसेना अपनी स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ को लेकर सबसे न्यूनतम स्तर पर है और पश्चिमी मोर्चे पर तनाव अभी भी जारी है।

Tejas MK1A Delivery Delay: ‘दीपावली’ पर नहीं मिली खुशखबरी

एचएएल बार-बार अपने किए वादे पर खरा नहीं उतर रहा है। सितंबर महीने की शुरुआत में एक मुलाकात के दौरान एचएएल के चेयरमैन डीके सुनील ने खुद रक्षा समाचार डॉट कॉम को ‘दीपावली’ पर खुशखबरी देने की बात कही थी। उन्होंने पूरे भरोसे के साथ कहा था कि अक्टूबर महीने में पहले दो तेजस एमके 1ए भारतीय वायुसेना को डिलीवर कर दिए जाएंगे। उन्होंने बताया था कि सितंबर से तेजस एमके 1ए पर फायरिंग टेस्ट शुरू हो जाएंगे, जो अक्तूबर तक चलेंगे, जिसके बाद अक्टूबर के आखिर तक सौंप दिए जाएंगे। इन फायरिंग टेस्ट में देश में बने बियोन्ड विजुअल रेंज मिसाइल अस्त्र, शॉर्ट रेंज एयर टू एयर मिसाइल, ब्रह्मोस एनजी और लेजर-गाइडेड बम का फायरिंग टेस्ट किया जाना था।

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Tejas MK1A Delivery Delay: आ चुके हैं चार इंजन

हालांकि अमेरिकी कंपनी जीई की तरफ से एफ-404 इंजन की सप्लाई में एक साल से ज्यादा की देरी हुई है। लेकिन अभी तक एचएएल को जीई की तरफ से चार इंजन सौंपे जा चुके हैं। पहला इंजन अप्रैल में, दूसरा इंजन जुलाई में, तीसरा इंजन सितंबर में और चौथा इंजन पहली अक्टूबर को भारत पहुंच गया था। एचएएल का कहना है कि चालू वित्त वर्ष के आखिर तक उसे 12 इंजन मिल जाएंगे। इसके बाद अगले वित्त वर्ष में सप्लाई सुचारू हो जाएगी। 2026–27 तक एचएएल का लक्ष्य हर साल 30 तेजस एमके1ए विमान तैयार करना है। इसमें निजी और सरकारी साझेदार कंपनियों को भी शामिल किया जाएगा।

एयरक्राफ्ट में इंजन फिटिंग में लगने वाले समय को लेकर एचएएल का कहना था कि इसमें दो दिन से लेकर एक हफ्ते तक का समय लगता है। जब फ्यूजलेज तैयार होते हैं तो इंजन फिटिंग में ज्यादा समय नहीं लगता। लेकिन इसके बावजूद पहले दो इंजन आए हुए 5-6 महीने का वक्त बीत चुका है।

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एचएएल ने बताया था कि पहले दो तेजस एमके1ए विमान भारतीय वायुसेना को सौंपने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा कम से कम 10 अतिरिक्त यूनिट्स भी एचएएल ने असेंबल कर ली हैं और वे सिर्फ इंजनों का इंतजार कर रही हैं।

17 अक्टूबर को पहले एमके1ए प्रोटोटाइप की उड़ान

हालांकि इस महीने 17 अक्टूबर को एचएएल की नासिक फैसिलिटी में पहले तेजस एमके1ए प्रोटोटाइप (LA-5043) ने अपनी पहली सफल उड़ान भरी थी। खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी उस समारोह में मौजूद थे। उन्होंने नासिक में एचएएल की तीसरी उत्पादन लाइन का उद्घाटन भी किया था। जिसके बाद एचएएल का दावा है कि तेजस की कुल उत्पादन क्षमता प्रतिवर्ष अब 24 विमान तक पहुंच गई है।

विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि तेजस एमके 1ए की फाइनल डिलीवरी से पहले अभी बहुत से काम किए जाने बाकी हैं। मूल कॉन्ट्रैक्ट के तहत 83 विमानों की डिलीवरी 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन अब लगता है कि अब यह अगले साल तक शिफ्ट हो गई है। इन 83 विमानों का ऑर्डर फरवरी 2021 में जारी किया गया था, जिनमें 73 एमके 1ए सिंगल-सीट फाइटर्स और 10 एमके 1ए ट्रेनर्स जेट शामिल हैं।

Tejas MK1A Delivery Delay: तेजस एमके 1 के ऑर्डर भी पेंडिंग

सूत्रों का कहना है कि तेजस एमके 1ए के अलावा पुराने तेजस एमके 1 का ऑर्डर भी अभी पेंडिंग है। उनका कहना है कि जनवरी 2006 और मार्च 2010 में कुल 40 एमके 1 के ऑर्डर जारी किए थे, जिनमें से केवल 38 ही डिलीवर हुए हैं, बाकी दो डबल सीट ट्रेनर एयरक्राफ्ट की डिलीवरी भी अभी बाकी है।

वहीं, एचएएल डिलीवरी की नई तारीखों को लेकर चुप्पी साधे हुए है और उनकी तरफ से कोई आधिकारी बयान भी जारी नहीं किया गया है।

Tejas MK1A Delivery Delay: उत्तम रडार की जगह इजरायली रडार

सूत्रों का कहना है कि एयर स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स (ASQR) में भी बदलाव किए गए हैं। भारतीय वायुसेना द्वारा निर्धारित न्यूनतम प्रदर्शन मानदंड (ASQR) में पहले तेजस एमके1ए में उत्तम एईएसए रडार लगाया जाना था, लेकिन अब उसकी जगह इजरायली ELTA कंपनी का बना EL/M-2052 रडार लगाया जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि इससे तेजस में इंडिजिनियस कंटेंट कम हुआ है। उत्तम रडार को न लगाने की वजह सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थिनेस एंड सर्टिफिकेशन (CEMILAC) में देरी है। अप्रैल 2025 में CEMILAC सर्टिफिकेशन के लिए A2A, A2G मोड्स में चार फ्लाइट ट्रायल भी हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अभी तक सर्टिफिकेशन नहीं मिल पाया है। बता दें कि उत्तम एईएसए रडार को डीआरडीओ और एलआरडीई ने मिल कर बनाया है, जिसकी परफॉरमेंस रेंज और ट्रैकिंग में EL/M-2052 के मुकाबले 25 फीसदी बेहतर है।

वहीं, सर्टिफिकेशन में देरी के चलते एचएएल एमके 1ए के शुरुआती बैच (पहले 73-83 विमान) बिना उत्तम एईएसए रडार के डिलीवर किए जाएंगे। बाद के बैचों (41वें विमान से) या 2028 के बाद अपग्रेड में उत्तम को इंटीग्रेट किया जाएगा। बता दें कि उत्तम ने 250+ घंटे फ्लाइट टेस्टिंग पूरी की है।

Tejas MK1A Delivery Delay: स्वदेशी स्वयं रक्षा कवच का इंटीग्रेशन नहीं

सूत्रों का कहना है कि उत्तम रडार के अलावा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट स्वयं रक्षा कवच भी देरी की वजह बन रहा है। यह रडार वार्निंग रिसीवर और एडवांस्ड सेल्फ-प्रोटेक्शन जैमर पॉड से बना है। यह 360 डिग्री कवरेज, डिजिटल रेडियो फ्रीक्वेंसी मेमोरी (DRFM) टेक्नोलॉजी और 1 मिलियन पल्स/सेकंड प्रोसेसिंग देता है। डीआरएफएम इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीक है जो दुश्मन के रडार सिग्नल को कॉपी, मॉडिफाई और दोबारा भेजती है। इससे दुश्मन रडार को फर्जी टारगेट
दिखते हैं और विमान ट्रेक होने से बच जाता है।

सूत्रों का कहना है कि ईडब्ल्यू सूट के सर्टिफिकेशन और इंटीग्रेशन में देरी के चलते पहले 83 एमके 1ए विमानों में इजरायली स्कॉर्पियस-एसपीजे (ईएल/एल-8222एसबी) लगाया जा रहा है। वहीं दूसरे बैच में (97 विमान) में 2028 से स्वयं रक्षा कवच का इंटीग्रेशन किया जाएगा।

सूत्रों ने बताया कि तेजस एमके 1ए के रडार-इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट इंटरफेस और अस्त्र एमके 1 मिसाइल इंटीग्रेशन में सॉफ्टवेयर ग्लिच है, जिसके चलते सर्टिफिकेशन में देरी हो रही है। अस्त्र मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और मिसाइल गाइडेंस का सॉफ्टवेयर इंटरफेस टेस्टिंग अभी भी पेंडिंग है। हालांकि रडार 100 टारगेट ट्रैक कर सकता है, लेकिन रीयल-टाइम इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर अटैक में वैलिडेशन अभी भी बाकी है।

मार्च 2026 तक ही डिलीवरी

उनका कहना है कि अगर एयरक्राप्ट पूरी तरह से तैयार भी हो जाए तो भी इंटीग्रेशन की चुनौतियां काफी ज्यादा है। अकेले सर्टिफिकेशन में ही 3 से 6 महीने का लग सकता है। उनका कहना है कि अगर सब कुछ ठीकठाक रहा तो भारतीय वायुसेना को तेजस की डिलीवरी अगले साल मार्च 2026 तक ही संभव हो सकती है।

हर साल 30 से 40 विमान चाहिए

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह कई बार सार्वजनिक तौर पर तेजस की डिलीवरी को लेकर चिंता जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने कहा था, “भूखे मुंह तैयार हैं, हम सिर्फ भोजन का इंतजार कर रहे हैं।” उनका इशारा तेजस विमानों के जल्दी प्रोडक्शन और डिलीवरी की तरफ था। उन्होंने कहा था कि वायुसेना की क्षमता बनाए रखने के लिए हर साल 30 से 40 विमान तैयार होने चाहिए, यानी दो स्क्वाड्रन हर साल तैयार होनी चाहिए।

भारतीय वायुसेना प्रमुख ने 3 अक्टूबर को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी कहा था कि तेजस एमके-1ए के मामले में वायुसेना की उम्मीदें वही हैं जो पहले दी गई क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स में तय की गई थीं। उन्होंने कहा कि ये जरूरतें कुछ साल पहले तय हुई थीं और आज भी वही बनी हुई हैं।

वायुसेना प्रमुख ने कहा, “हमें जानकारी मिली है कि इंजन डिलीवरी शुरू हो चुकी है और कुछ प्रगति भी हो रही है। लेकिन अभी कुछ रिसर्च एंड डेवलपमेंट से जुड़ा काम बाकी है, जिस पर काम जारी है। जैसे ही यह विमान तय मानकों के अनुसार सर्टिफाई हो जाएगा, वायुसेना उसे शामिल करने के लिए तैयार है।”

“आधा-अधूरा, दिखावे का विमान मत दो”

इस साल फरवरी 2025 में एरो इंडिया और मई 2025 में सीआईआई समिट में उन्होंने एचएएल को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा था, “टाइमलाइन बड़ा मुद्दा है”। उन्होंने कहा था, विमान सिर्फ़ उड़ने लायक नहीं, लड़ने लायक होना चाहिए।” हमें “आधा-अधूरा, दिखावे का विमान मत दो। पूरा, युद्ध के लिए तैयार विमान दो, जिसे हम तुरंत बॉर्डर पर तैनात कर सकें।”

एरो इंडिया में उनकी एचएएल सीएमडी के साथ एक बातचीत बड़ी वायरल हुई थी, जिसमें वे कहते सुने गए थे कि जिस विमान को आप एमके1ए कहकर उड़ा रहे हैं, वो एमके1ए नहीं है। सिर्फ सॉफ्टवेयर बदलने या दिखावे से एमके1ए नहीं बन जाता। जब हथियार और क्षमताएं आएंगी, तभी ये एमके1ए होगा।”

Soldier War Injury status: अदालत का आदेश- जवान को मिलेगा वॉर इंजरी स्टेटस, केंद्र सरकार ने कर दिया था इनकार

Soldier war injury status
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Soldier War Injury status: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने भारतीय सेना के एक जवान को वॉर इंजरी स्टेटस देने का आदेश दिया है। यह फैसला उस मामले में आया है, जिसमें जवान आतंकियों की तलाश के दौरान पनार नाला में गिरकर घायल हो गया था। अदालत ने कहा कि ऑपरेशनल एरिया में ड्यूटी के दौरान हुई कोई भी दुर्घटना बैटल कैजुअल्टी मानी जाएगी।

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अदालत के इस फैसलले से सेना के हजारों जवानों को राहत मिली है, जो आतंकवाद-रोधी अभियानों में ड्यूटी के दौरान घायल हुए हैं, लेकिन उन्हें अब तक सामान्य चोट का दर्जा देकर सीमित लाभ दिए जाते थे।

मामला हवलदार संजीब कुमार का है, जो जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन रक्षक के तहत आतंकवाद-रोधी अभियान में तैनात थे। ड्यूटी के दौरान जब वे आतंकियों की तलाश कर रहे थे, तो पनार नाला में गिरकर घायल हो गए। उन्हें फ्रैक्चर (डिस्टल रेडियस) हुआ और बाद में उन्हें लो मेडिकल कैटेगरी में डाल दिया गया।

सेना ने उन्हें डिसएबिलिटी पेंशन तो दी, लेकिन वार इंजरी पेंशन देने से इनकार कर दिया। इसके बाद हवलदार संजीब कुमार ने आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया। 22 नवंबर 2023 को आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल चंडीगढ़ बेंच ने उनके पक्ष में फैसला दिया और वार इंजरी पेंशन देने का आदेश जारी किया।

इस फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार हाईकोर्ट पहुंच गई। लेकिन अब पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने भी सैनिकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सरकार की याचिका खारिज कर दी।

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में शामिल जस्टिस हरसिमरन सिंह और जस्टिस विकास सूरी ने कहा कि सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित किए गए ऑपरेशनों को कैटेगरी ई के तहत बैटल कैजुअल्टी माना गया है।

अदालत ने कहा, “केंद्र सरकार यह साबित नहीं कर पाई कि सैनिक उस समय ऑपरेशनल ड्यूटी पर नहीं था। वह नियंत्रण रेखा पर तैनात था और ऑपरेशन रक्षक के दौरान आतंकियों की खोज में निकला था। इसलिए यह चोट ड्यूटी से जुड़ी हुई है और ऑपरेशनल एरिया में हुई दुर्घटना है, जिसे वॉर इंजरी माना जाएगा।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि काउंटर-इंसर्जेंसी अभियानों में हुई कोई भी दुर्घटना, चाहे वह गोलीबारी में हो या दुर्घटनावश, उसे वॉर कैजुअल्टी के समान माना जाएगा।

वहीं, इस फैसले के बाद हवलदार संजीब कुमार को वॉर इंजरी पेंशन दी जाएगी। इस पेंशन में सामान्य डिसएबिलिटी पेंशन से अधिक फायदे मिलते हैं। इसमें पूर्ण वेतन का प्रतिशत, लाइफटाइम मेडिकल सुविधा, और परिवार को स्थायी लाभ शामिल हैं।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला ऐसे सभी मामलों पर लागू होगा, जहां सैनिक ऑपरेशनल क्षेत्र में दुर्घटना का शिकार हुए हों और उन्हें “नॉन-बैटल इंजरी” कहकर फायदे देने से वंचित किया गया हो।

President In Rafale: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 700 किमी प्रति घंटे की स्पीड पर राफेल में भरी उड़ान, दो बार फाइटर जेट में बैठने वाली बनीं दूसरी प्रेसिडेंट

President In Rafale
President Droupadi Murmu Rafale flight: First Indian President to fly in Rafale fighter jet from Ambala Airbase

President In Rafale: भारत की राष्ट्रपति और तीनों सेनाओं की सुप्रीम कमांडर इन चीफ द्रौपदी मुर्मू ने आज हरियाणा के अंबाला एयरबेस से फ्रेंच मूल के राफेल फाइटर जेट में 30 मिनट की सुपरसोनिक उड़ान भरी। यह पहली बार है जब किसी भारतीय राष्ट्रपति ने राफेल विमान में उड़ान भरी है। इससे पहले वे 2023 में असम के तेजपुर एयरबेस से सुखोई-30 में उड़ान भर चुकी हैं। इस तरह द्रौपदी मुर्मू भारत की एकमात्र राष्ट्रपति बन गई हैं जिन्होंने दो अलग-अलग फाइटर जेट्स में सॉर्टी की है। वहीं, उसके साथ दूसरे जहाज में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भी उड़ान भरी।

Rafale 114 Fighter Deal: सरकार बोली- नए राफेल में हो 75 फीसदी तक स्वदेशी कंटेंट! जबकि तेजस में है केवल 65 फीसदी, क्या डील पर लगेगा ब्रेक?

सुबह करीब 9:45 बजे राष्ट्रपति मुर्मू अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं। भारतीय वायुसेना की 17 स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज’ के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन अमित गहनी ने उनका स्वागत करते हुए उन्हें राफेल के दो-सीटर ट्रेनर वेरिएंट आरबी-008 में बिठाया।

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President Droupadi Murmu Rafale flight: First Indian President to fly in Rafale fighter jet from Ambala Airbase

उड़ान से पहले राष्ट्रपति को वायुसेना के स्टैंडर्ड सेफ्टी ट्रेनिंग और जी-सूट, ऑक्सीजन मास्क, हेलमेट पहनाया गया। टेकऑफ सुबह 10:12 बजे हुआ और उड़ान लगभग 15,000 फीट की ऊंचाई तक गई।

उड़ान के दौरान राफेल ने 700 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ान भरी। इस दौरान उन्होंने 200 किमी का एरिया कवर किया। राष्ट्रपति ने इस दौरान लो-लेवल फ्लाइट, हाई-जी टर्न्स और सुपरसोनिक ब्रेक्स को महसूस किया। फ्लाइंग एरिया पंजाब-हरियाणा की सीमा के ऊपर सीमित एयरस्पेस में था। लगभग 10:42 बजे राफेल विमान ने सुरक्षित रूप से लैंडिंग की।

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President Droupadi Murmu Rafale flight: First Indian President to fly in Rafale fighter jet from Ambala Airbase

President In Rafale: राष्ट्रपति ने क्या कहा

लैंडिंग के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि यह अनुभव उनके जीवन का अविस्मरणीय क्षण है। उन्होंने कहा, “मैंने हमारे वायु योद्धाओं का साहस और कुशलता करीब से देखी। राफेल हमारी वायुसेना की ताकत और गौरव का प्रतीक है।”

वहीं, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह उनके साथ फॉर्मेशन फ्लाइट में दूसरे राफेल में उड़ान भर रहे थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने इस सॉर्टी के दौरान 9G मैन्यूवर्स भी किए, जो बेहद मुश्किल होता है। उन्होंने कहा कि यह हमारे पायलटों की उत्कृष्ट ट्रेनिंग का प्रमाण है।

President In Rafale: 2006 में शुरू हुआ सिलसिला

26 जून 2006 में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम पहले राष्ट्रपति थे, जिन्होंने 74 साल की उम्र में फाइटर जेट में उड़ान भरी थी। उन्होंने पुणे से सुखोई-30 में 1.8 मैक की स्पीड पर उड़ान भरी थी। इसके बाद 25 नवंबर 2009 में प्रतिभा पाटिल ने सुखोई में उड़ान भरकर ऐसा करने वाली दुनिया की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं। वहीं, 8 अप्रैल 2023 में द्रौपदी मुर्मू ने असम के तेजपुर से चीन सीमा के करीब सुखोई-30 में 1.5 मैक की स्पीड पर उड़ान भरी थी और अब 2025 में उन्होंने राफेल में उड़ान भरकर इतिहास दोहराया है।

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President Droupadi Murmu Rafale flight: First Indian President to fly in Rafale fighter jet from Ambala Airbase

President In Rafale: ग्रुप कैप्टन अमित गहनी थे पायलट

आज की उड़ान में राष्ट्रपति के साथ पायलट रहे ग्रुप कैप्टन अमित गहनी भारतीय वायुसेना की 17 स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज’ के कमांडिंग ऑफिसर हैं। उनके पास राफेल उड़ाने का 2000 घंटे से अधिक का अनुभव है। इसी स्क्वाड्रन ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया था।

वायुसेना की ओर से बताया गया कि राष्ट्रपति की उड़ान के दौरान पूरे समय लाइव मॉनिटरिंग, अवॉक्स कवर और मौसम की रीयल-टाइम निगरानी रखी गई।

सोशल मीडिया पर छाया राष्ट्रपति का राफेल मिशन

राष्ट्रपति की उड़ान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर #PresidentInRafale तेजी से ट्रेंड करने लगा। दो घंटे के भीतर इस हैशटैग के तहत पांच लाख से अधिक पोस्ट किए गए। भारतीय वायुसेना ने अपने आधिकारिक अकाउंट से लिखा, “महामहिम राष्ट्रपति ने आसमान को छुआ, हमारा गर्व बढ़ाया।”

लोगों ने राष्ट्रपति की तस्वीरों और वीडियो पर गर्व और खुशी जताई। कई यूजर्स ने लिखा कि राष्ट्रपति मुर्मू ने न सिर्फ इतिहास रचा बल्कि हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा किया।

Jamat-ul-Mominat: सामने आया जैश सरगना मसूद अजहर का नया ऑडियो, महिलाओं को आतंकी ट्रेनिंग देने साजिश हुई बेनकाब

Jamat-ul-Mominat

Jamat-ul-Mominat: पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर की एक नई ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आई है, जिसमें वह महिलाओं को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल करने की योजना का खुलासा करता है। लगभग 21 मिनट की यह रिकॉर्डिंग पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित मार्कज उसमान ओ अली में दिए गए एक भाषण की बताई जा रही है। इसमें अजहर “जमात-उल-मोमिनात” नाम से एक नई महिला युनिट शुरू करने की बात करता है।

Jaish Online Jihadi Course: पाकिस्तान में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने महिलाओं के लिए शुरू किया ऑनलाइन जिहादी कोर्स, देना होगा 500 रुपये चंदा

ऑडियो में अजहर इस नई युनिट को जैश-ए-मोहम्मद की महिलाओं की ब्रिगेड बताता है और दावा करता है कि अब महिलाएं भी आतंकी ट्रेनिंग लेंगी। वह कहता है कि जैसे पुरुषों के लिए 15 दिन का “दौरा-ए-तर्बियत” नाम का प्रशिक्षण कार्यक्रम चलता है, वैसे ही महिलाओं के लिए “दौरा-ए-तसकिया” नाम का नया कोर्स शुरू किया जाएगा। यह ट्रेनिंग बहावलपुर में ही दी जाएगी, जो जैश का पुराना अड्डा है। ऑडियो में अजहर कहता है कि इस कोर्स के बाद महिला आतंकियों को “दौरा-आयात-उल-निसा” का कोर्स कराया जाएगा, जिसमें महिलाओं को धार्मिक ग्रंथों के जरिए जिहाद करना सिखाया जाएगा।

ऑडियो में मसूद अजहर कहता है कि जो भी महिला जमात-उल-मोमिनात (Jamat-ul-Mominat) से जुड़ेगी, उसकी शहादत के बाद सीधे जन्नत जाने का वादा है। उन्होंने यह भी कहा कि जमात के पुरुष मुजाहिद उनके साथ खड़े रहेंगे और यह महिला आतंकी संगठन “इस्लाम को दुनिया भर में फैलाएगा।” ऑडियो में अजहर यह भी कहता है कि जैश के विरोधियों ने हिंदू महिलाओं को सेना में शामिल कर लिया है और महिला पत्रकारों को भी उसके खिलाफ खड़ा कर दिया गया है, इसलिए वह भी महिलाओं का आतंकी संगठन बना रहा है।

वह कहता है कि “जमात-उल-मोमिनात” (Jamat-ul-Mominat) की महिलाएं कथित तौर पर “इस्लाम को फैलाने” के मिशन में शामिल होंगी। ऑडियो मे आतंकी मसूद अजहर कह रहा है कि जमात-उल-मोमिनात की शाखाएं पाकिस्तान के हर जिले में बनाई जाएंगी। हर जिले की शाखा की अगुवाई के लिए एक जिला मुंतजिमा तय की जाएगी जो महिलाओं की भर्ती और संचालन का काम करेगी। अजहर ने महिलाओं से यह भी कहा है कि ब्रिगेड में शामिल महिलाएं किसी अनजान पुरुष से फोन या मैसेंजर पर बात नहीं करेंगी, केवल अपने पति या नजदीकी परिवार से बात करने की इजाजत होगी।

रक्षा समाचार डॉट कॉम ने पहले अपनी रिपोर्ट में बताया था कि आतंकी मसूद अजहर ने अपनी बहन सादिया अजहर को महिला ब्रिगेड (Jamat-ul-Mominat) का प्रमुख नियुक्त किया है। उनकी दूसरी बहन समैरा अजहर और पुलवामा हमले के जिम्मे उमर फारूक की विधवा आफिरा फारूक को भी नेतृत्व में जगह दी गई है। इन महिलाओं को ऑनलाइन सेशंस करवाने की जिम्मेदारी दी गई है ताकि वे नई ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को आतंकी संगठन में शामिल होने के लिए प्रेरित कर सकें।

Jamat-ul-Mominat

जैश ए मोहम्मद के एक नए पोस्टर में उम्मे मसूद (असल नाम समैरा अजहर) को ऑनलाइन क्लासेज की ट्रेनर बताया गया है। ये क्लासेज 25 अक्टूबर से हफ्ते में पांच दिन आयोजित की जा रही हैं। ऑडियो में अजहर कहता है कि इस संगठन (Jamat-ul-Mominat) में कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जिनके पति या भाई भारतीय सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे। इन महिलाओं का इस्तेमाल नए सदस्यों को उकसाने और भर्ती बढ़ाने के लिए किया जाएगा। और उन्हें “शोबा-ए-दावत” कैंपेन के तहत इस्तेमाल किया जाएगा। मसूद अजहर महिलाओं से अपनी लिखी किताब “ए मुसलमान बहना” पढ़ने को भी कह रहा है, ताकि वे कट्टर जिहादी बन सकें।

ऑडियो में वह यह भी दावा करता है कि “ऑपरेशन सिंदूर” में उसके कई रिश्तेदार मारे गए, जिनमें यूसुफ अजहर, जमील अहमद, हमजा जमील और हुजैफा अजहर शामिल हैं। ऑडियो में वह अपनी बहन हवा बीबी की मौत का हवाला देता है और कहता है कि महिला ब्रिगेड (Jamat-ul-Mominat) की योजना उसने उन्हीं के साथ मिलकर बनाई थी।

इस रिकॉर्डिंग से यह साफ होता है कि पाकिस्तान में प्रतिबंधित संगठन खुले तौर पर आईएसआई के इशारे पर नई भर्ती और प्रशिक्षण गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। पाकिस्तान सरकार आधिकारिक रूप से ऐसे संगठनों पर पाबंदी की बात करती है, लेकिन जमीन पर इन्हें सुरक्षा एजेंसियों की आंखों के सामने काम करने की छूट मिली हुई है।