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OROP Supreme Court: सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- इन रिटायर्ड कर्मियों को OROP के तहत नहीं मिलेगी बढ़ी हुई पेंशन!

Rehabilitation Of Disabled Officer Cadets Supreme Court

OROP Supreme Court: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि उसने भारतीय सेना के रिटायर नियमित कैप्टन (Captains) के लिए वन रैंक वन पेंशन (OROP) योजना के तहत पेंशन में 10 प्रतिशत की वृद्धि की सिफारिशों को स्वीकार नहीं करने का फैसला लिया है। सरकार का यह फैसला तब सामने आया जब गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा था।

OROP Supreme Court: Government Declines Pension Hike for Retired Captains, Informs Apex Court

इस मामले में सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि सरकार ने पेंशन में बढ़ोतरी की सिफारिशों को नहीं स्वीकार किया है। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला भारतीय सेना के रिटायर कप्तानों की पेंशन को लेकर आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) के एक आदेश के खिलाफ दाखिल की गई अपील पर सुनवाई के दौरान लाया गया था।

AFT ने 7 दिसंबर 2021 को सरकार को निर्देश दिया था कि वह रिटायर नियमित कप्तानों को मिलने वाली पेंशन पर एक फैसला ले। इसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि उसने इस सिफारिश को मंजूरी नहीं दी है।

OROP Supreme Court: क्या था मामला?

सुप्रीम कोर्ट में जब सरकार की ओर से जवाब दिया गया, तो अदालत ने रिटायर सेना कप्तानों के वकीलों से कहा कि यदि वे सरकार के इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे इस फैसले को चुनौती दे सकते हैं, क्योंकि इस प्रकार के मामलों में समय की बहुत अहमियत होती है। इसके बाद वकीलों ने कुछ समय लेने की अनुमति मांगी, जिस पर अदालत ने 12 दिसंबर 2024 को मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय की।

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मामले में कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने केंद्र को यह कहते हुए आलोचना की थी कि पिछले कई सालों से रिटायर कप्तानों की पेंशन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया था। कोर्ट ने केंद्र पर 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

OROP योजना और विवाद की जड़ें

इस विवाद की जड़ वन रैंक वन पेंशन (OROP) योजना से जुड़ी है, जिसे केंद्र सरकार ने 2015 में लागू किया था। OROP योजना के तहत, जिन सैनिकों की सेवानिवृत्ति पहले हो चुकी है, उनकी पेंशन को वर्तमान सेवानिवृत्त सैनिकों के समान देने की बात कही गई थी।

लेकिन इस योजना के लागू होने के बाद कुछ विसंगतियां सामने आईं, खासकर सेना के कप्तान और मेजर रैंक के अफसरों की पेंशन में। पेंशन टेबल में सही डेटा की कमी के कारण यह विसंगतियां आईं। केंद्र सरकार ने इन विसंगतियों को सुलझाने के लिए एक न्यायिक समिति का गठन किया था।

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि कोच्चि स्थित AFT की पीठ ने 6 विसंगतियों की पहचान की थी, जिन्हें सही किया जाना था, लेकिन अभी तक सरकार ने इस पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया था।

अदालत ने कहा था कि फैसला लिया जाए

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि वह रिटायर कप्तानों के मामले में जल्द से जल्द फैसला ले। कोर्ट ने यह भी कहा था कि अगर कोई फैसला नहीं लिया गया तो वह 10 फीसदी की पेंशन वृद्धि को लागू करने का आदेश दे देगा।

अदालत ने केंद्र को आखिरी मौका दिया था कि वह इस मामले में आवश्यक सुधार कर ले। इसके बाद भी अगर सरकार कोई फैसला नहीं करती, तो अदालत खुद से पेंशन वृद्धि का आदेश दे सकती है।

सेना और सरकार के बीच बढ़ती बहस

इस मामले में विवाद का मुख्य कारण यह है कि रिटायर कप्तानों की पेंशन बढ़ाने की सिफारिशें पिछले कुछ समय से लंबित पड़ी हुई थीं। इस मुद्दे पर सेना के अधिकारी और रिटायर सैनिक लगातार सरकार से न्याय की उम्मीद लगाए हुए थे। उन्हें उम्मीद थी कि सरकार OROP योजना के तहत उनके हक को मान्यता देगी और उन्हें वित्तीय फायदे देगी।

अब यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इस निर्णय को क्यों वापस लेती है और क्या अदालत इस फैसले को चुनौती देने का कोई रास्ता खोलती है। सेना के रिटायर कप्तान अपनी पेंशन में वृद्धि की उम्मीद लगाए हुए हैं, और यदि सरकार द्वारा किए गए फैसले को अदालत चुनौती देती है, तो यह मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ आ सकता है।

Nyoma Airbase: पूर्वी लद्दाख में चीन से सटे इस एडवांस लैंडिंग ग्राउंड से जल्द उड़ान भरेंगे फाइटर जेट, पहली टेस्ट फ्लाइट की हो रही तैयारी

Nyoma Airbase: Fighter Jets to Take Off from This Advanced Landing Ground in Eastern Ladakh Near China, First Test Flight Preparations Underway

Nyoma Airbase: लद्दाख के पूर्वी क्षेत्र में स्थित न्योमा एयरबेस इस महीने अपनी पहली आधिकारिक परीक्षण उड़ान भरने के लिए तैयार है। यह एयरबेस वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास चीनी सीमा से 31 किमी पहले स्थित है और इसे भारतीय वायु सेना (IAF) के लड़ाकू विमानों और परिवहन विमानों के ऑपरेशंस के लिए तैयार किया गया है।

Nyoma Airbase: Fighter Jets to Take Off from This Advanced Landing Ground in Eastern Ladakh Near China, First Test Flight Preparations Underway

न्योमा एयरबेस की स्थिति समुद्र तल से 13,000 फीट की ऊंचाई पर है, और यहां के उन्नत ढांचे में हाल ही में कई सुधार किए गए हैं ताकि यह अत्याधुनिक विमान संचालन के लिए तैयार हो सके। खासकर भारत की उत्तरी सीमा पर मौजूद यह एयरबेस भारतीय वायु सेना के लिए एक रणनीतिक महत्व रखता है। एक बार यह एयरबेस पूरी तरह से चालू हो जाने के बाद, यह दुनिया के सबसे ऊंचाई वाले एयरबेस में से एक बन जाएगा, जो सुखोई Su-30 MKI और राफेल जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों के साथ-साथ C-130J सुपर हरक्यूलिस जैसे भारी-भरकम परिवहन विमानों को भी संभालने में सक्षम होगा।

परीक्षण उड़ान का महत्व

न्योमा एयरबेस की परीक्षण उड़ान भारतीय वायु सेना के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। यह परीक्षण एयरबेस की तैयारियों का आकलन करेगा, जिसमें नई बनाई गई रनवे, उन्नत नेविगेशन प्रणाली और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की जांच की जाएगी। इस विकास को LAC के आस-पास बढ़ते तनाव के संदर्भ में एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। यह एयरबेस वायु सेना को क्षेत्र में तेजी से तैनाती और समर्थन प्रदान करने में मदद करेगा, जिससे इसे एक महत्वपूर्ण सामरिक लाभ मिलेगा।

न्योमा एयरबेस ने पहले ही सीमा क्षेत्रों में आपूर्ति और कर्मियों को एयरलिफ्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और इसके उन्नयन से भारत की सीमा सुरक्षा को और अधिक मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परीक्षण उड़ान के बाद, यह एयरबेस भारतीय रक्षा बलों के लिए एक महत्वपूर्ण ठिकाना बन जाएगा।

बनाया 3 किलोमीटर लंबा रनवे

न्योमा एयरबेस में 3 किलोमीटर लंबे रनवे का निर्माण किया गया है, जिसे आपातकालीन संचालन के लिए डिजाइन किया गया है। यह एयरबेस LAC के नजदीक स्थित सबसे करीबी एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (ALG) है, और किसी भी आपातकालीन हालात में इसे तुरंत एक्टिव किया जा सकता है। यहां से भारतीय वायु सेना को दुर्गम पहाड़ी इलाकों में स्थित सीमा क्षेत्रों तक सीधा पहुंचने का मौका मिलेगा, जहां पारंपरिक सड़क परिवहन अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है।

वहीं हाल में चीन के साथ हुए डिसइंगेजमेंट और पेट्रोलिंग समझौते के बाद न्योमा एयरबेस की महत्ता और भी बढ़ गई है, जिनमें भारत और चीन के बीच डेमचोक और देपसांग प्लेन्स में सैनिकों के पीछे हटने का फैसला लिया गया था। इन समझौतों के बाद विवादित जगहों पर गश्त फिर से शुरू हो गई है।

इंफ्रास्ट्रक्चर में विकास और सीमा सुरक्षा

भारत सरकार द्वारा सीमा क्षेत्रों में तेजी से किए जा रहे बुनियादी ढांचे के विकास को राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा सकता है। विशेष रूप से लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सड़कें, सुरंगें और पुलों का निर्माण इस क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिक्रिया क्षमता और रसद समर्थन को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है।

न्योमा एयरबेस के विकास को एक व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है, जिसका उद्देश्य भारत की उत्तरी सीमाओं पर रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना है। इस एयरबेस के पास उच्च तकनीकी विमान और भारी-भरकम परिवहन विमानों को संभालने की क्षमता होगी, जो वायु सेना की संचालन लचीलापन और प्रतिक्रिया समय में सुधार करेगा। LAC पर बढ़ते तनाव और किसी भी स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया की आवश्यकता को देखते हुए, यह विकास भारतीय रक्षा प्रणाली को और अधिक सक्षम बनाएगा।

न्योमा एयरबेस का क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में योगदान

न्योमा एयरबेस का महत्व केवल सैन्य दृष्टिकोण से नहीं बल्कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और रसद समर्थन में भी है। यह एयरबेस न केवल सीमा सुरक्षा को बढ़ावा देगा, बल्कि यह लद्दाख जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में नागरिकों के लिए भी महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। एयरबेस का उन्नयन क्षेत्र में आपातकालीन सेवाओं के लिए एक नया आयाम पेश करेगा, और यह क्षेत्रीय विकास के लिए भी अहम साबित होगा।

न्योमा एयरबेस का परीक्षण उड़ान भारतीय वायु सेना और भारत की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय सेना की बढ़ती क्षमताओं और सीमाओं की रक्षा के लिए एक मजबूत संदेश भी है। इस एयरबेस का निर्माण और विकास भारत की रक्षा सुरक्षा के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगा, जिससे देश अपनी सीमाओं पर कहीं से भी प्रभावी तरीके से प्रतिक्रिया दे सकेगा।

World Masters Racketlon: भारतीय सेना के ब्रिगेडियर नवनीत नारायण ने वर्ल्ड मास्टर्स रैकेटलॉन में किया देश का नाम रोशन

World Masters Racketlon: Brigadier Navneet Narain of Indian Army Brings Glory to India with Stellar Performance

World Masters Racketlon: भारतीय सेना के अधिकारी ब्रिगेडियर नवनीत नारायण ने वर्ल्ड मास्टर्स रैकेटलॉन टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन किया है। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट मुंबई के विलिंगडन स्पोर्ट्स क्लब में आयोजित हुआ था, जहां उन्होंने सिंगल्स और डबल्स दोनों श्रेणियों में उपविजेता का स्थान हासिल किया।

World Masters Racketlon: Brigadier Navneet Narain of Indian Army Brings Glory to India with Stellar Performance

दिल्ली में सेना मुख्यालय में तैनात ब्रिगेडियर नवनीत नारायण ने अपनी प्रतिभा, दृढ़ संकल्प और मेहनत से यह उपलब्धि हासिल की है। उनके इस उत्कृष्ट प्रदर्शन ने न केवल सेना बल्कि पूरे देश को गर्व से भर दिया है।

क्या है World Masters Racketlon और इसकी विशेषता?

वर्ल्ड मास्टर्स रैकेटलॉन को रैकेट खेलों का “आयरनमैन” भी कहा जाता है। इसमें चार अलग-अलग रैकेट खेल शामिल होते हैं – टेबल टेनिस, बैडमिंटन, स्क्वैश और लॉन टेनिस। इस टूर्नामेंट में खिलाड़ी की हर खेल में क्षमता और कौशल का परीक्षण होता है।

ब्रिगेडियर नारायण ने इस चुनौतीपूर्ण प्रतियोगिता में भाग लेकर यह साबित कर दिया कि भारतीय खिलाड़ी किसी भी खेल में विश्व स्तर पर अपनी जगह बना सकते हैं।

खेलों में ब्रिगेडियर नवनीत नारायण का सफर

ब्रिगेडियर नवनीत नारायण का खेलों में सफर प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत स्क्वैश से की थी और 2000 में एशियन स्क्वैश चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। अपने स्क्वैश के अनुभव और कौशल को उन्होंने रैकेटलॉन में भी बेहतरीन तरीके से लागू किया।

अक्टूबर 2024 में, उन्होंने मुंबई में आयोजित ऑल इंडिया रैकेटलॉन चैंपियनशिप में ओवर-50 सिंगल्स और डबल्स श्रेणियों में खिताब जीता था। यह उनकी कड़ी मेहनत और खेल के प्रति समर्पण का प्रमाण है।

World Masters Racketlon: Brigadier Navneet Narain of Indian Army Brings Glory to India with Stellar Performance

उनकी यह उपलब्धि इस बात का सबूत है कि उन्होंने हर कदम पर अपने खेल को बेहतर बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के लिए मेहनत की है।

ब्रिगेडियर नारायण ने सेना में अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए खेलों में अपनी पहचान बनाई है। सेना में रहकर अनुशासन और फिटनेस के प्रति उनके समर्पण ने उन्हें खेलों में भी उत्कृष्ट बनने में मदद की।

उनके इस सफर के बारे में एक अधिकारी ने कहा, “ब्रिगेडियर नवनीत नारायण ने यह साबित किया है कि मेहनत और लगन से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय सेना को भी गर्व महसूस कराया है।”

भारत के लिए गर्व का क्षण

वर्ल्ड मास्टर्स रैकेटलॉन जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट में भारतीय खिलाड़ी का उपविजेता बनना देश के लिए गर्व की बात है। ब्रिगेडियर नारायण ने दिखा दिया कि भारतीय खिलाड़ी न केवल किसी एक खेल में बल्कि बहु-खेलों में भी अपना दबदबा बना सकते हैं।

उनकी इस उपलब्धि पर सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और खेल प्रेमियों ने उन्हें बधाई दी है। यह जीत युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा देने के साथ-साथ खेलों में भारत की बढ़ती पहचान का प्रतीक है।

ब्रिगेडियर नवनीत नारायण की यह सफलता न केवल उनके लिए बल्कि उन सभी के लिए प्रेरणा है जो खेलों में अपना भविष्य देख रहे हैं। यह दिखाता है कि उम्र केवल एक संख्या है और यदि आप अपने सपनों के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, तो हर लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

उनकी यह उपलब्धि भारत में रैकेटलॉन जैसे बहु-खेलों को भी बढ़ावा देगी और युवा खिलाड़ियों को इस क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के लिए प्रेरित करेगी।

ब्रिगेडियर नारायण के लिए बधाई संदेश

ब्रिगेडियर नारायण के शानदार प्रदर्शन पर पूरे देश से बधाई संदेश आ रहे हैं। उनकी इस सफलता ने भारतीय सेना और देश के खिलाड़ियों की काबिलियत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर साबित किया है।

उनकी यह उपलब्धि भारतीय सेना के आदर्शों, अनुशासन और खेलों के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक है। भारतीय सेना ने हमेशा अपने जवानों को खेलों में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया है, और ब्रिगेडियर नारायण इसकी जीवंत मिसाल हैं।

INNOYODHA 2024: भारतीय सेना ने ‘इननो-योद्धा 2024-25’ में प्रस्तुत किए नए इनोवेशन, स्वदेशी तकनीक को मिला बढ़ावा

INNOYODHA 2024: General Upendra Dwivedi, COAS witnessed Inno योद्धा 2024, an Idea & Innovation Competition cum Seminar, at Manekshaw Centre, New Delhi

INNOYODHA 2024: भारतीय सेना ने अपनी वार्षिक आइडिया और इनोवेशन प्रतियोगिता ‘इननो-योद्धा 2024-25’ का आयोजन किया। यह कार्यक्रम मानेकशॉ सेंटर, नई दिल्ली में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की उपस्थिति में संपन्न हुआ। ‘इननो-योद्धा’ भारतीय सेना की एक अनूठी पहल है, जिसका उद्देश्य सेना की क्षमताओं को बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए स्वदेशी इनोवेशन को बढ़ावा देना है।

INNOYODHA 2024: General Upendra Dwivedi, COAS witnessed Inno योद्धा 2024, an Idea & Innovation Competition cum Seminar, at Manekshaw Centre, New Delhi

INNOYODHA 2024: कार्यक्रम का उद्देश्य

भारतीय सेना जिन चुनौतियों का सामना करती है, वे बेहद जटिल और विविधतापूर्ण हैं। चाहे वह दुर्गम इलाकों में तैनाती हो, प्रतिकूल मौसम की स्थिति हो, या दुश्मन से मुकाबला हो—हर चुनौती सेना की कार्यक्षमता की परीक्षा लेती है। ‘इननो-योद्धा’ का उद्देश्य इन चुनौतियों से निपटने के लिए सैनिकों के अनुभव और तकनीकी दक्षता का उपयोग करना है। यह प्रतियोगिता सेना के जवानों को नई सोच और रचनात्मकता से समस्याओं का समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित करती है।

इस प्रतियोगिता के माध्यम से चुने गए इनोवेशन को रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D), डिजाइन और डेवलपमेंट (D&D) और आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड (ATB) की मदद से और बेहतर बनाया जाता है। इनोवेशन का औद्योगिक उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए उन्हें उद्योगों को स्थानांतरित किया जाता है। यह पहल भारतीय सेना की आत्मनिर्भर भारत अभियान में योगदान की दिशा में एक बड़ा कदम है।

इस वर्ष, 75 इनोवेशन पूरे देश की भारतीय सेना की विभिन्न इकाइयों से चुने गए। इन सभी में से 22 सर्वश्रेष्ठ इनोवेशन को कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित किया गया। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इन इनोवेशन की सराहना करते हुए सैनिकों को उनकी रचनात्मकता के लिए सम्मानित किया। इन नवाचारों को अब आर्मी डिज़ाइन ब्यूरो के तहत उत्पादन के लिए आगे बढ़ाया जाएगा।

सेना प्रमुख का संदेश

सेना प्रमुख ने सैनिकों की रचनात्मक सोच और उनकी समस्याओं के समाधान में तकनीकी दृष्टिकोण की प्रशंसा की। उन्होंने कहा,

“हाल के संघर्षों ने साबित किया है कि इनोवेशन केवल एक शब्द नहीं है, यह एक मानसिकता है। यह वही चिंगारी है जो प्रगति को आगे बढ़ाती है और भविष्य का निर्माण करती है।”

उन्होंने प्रतिभागियों की मेहनत और उनके विचारों को इस प्रतियोगिता तक पहुंचाने के प्रयासों को भी सराहा। उनके अनुसार, प्रत्येक इनोवेशन के पीछे गहन शोध और परीक्षण की अनगिनत घंटे की मेहनत होती है।

पिछले चार वर्षों में ‘इननो-योद्धा’ ने 26 पेटेंट फाइल किए हैं और 21 इनोवेशन को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इनमें से तीन प्रमुख इनोवेशन—

  1. एक्सप्लोडर (एफसी टेक द्वारा निर्मित)
  2. अग्नियास्त्र (रेड काइट डिजिटल टेक द्वारा निर्मित)
  3. विद्युत रक्षक (आईएस ट्रेडिंग कंपनी को स्थानांतरित)

इनमें से ‘एक्सप्लोडर’ को जून 2024 में लॉन्च किया गया था, जबकि ‘अग्नियास्त्र’ को हाल ही में सेना प्रमुख ने 12 अक्टूबर 2024 को सेना कमांडर्स सम्मेलन में प्रदर्शित किया। ये सभी इनोवेशन सेना की क्षमताओं को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।

इननो-योद्धा 2024-25 की खासियतें

यह आयोजन न केवल सैनिकों के अनुभव और विशेषज्ञता को उपयोग में लाता है, बल्कि भारतीय सेना को अत्याधुनिक तकनीकों के साथ आधुनिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाता है। यह पहल जवानों के अंदर रचनात्मकता और नवाचार के प्रति रुचि जगाती है।

इस कार्यक्रम के जरिए भारतीय सेना न केवल अपनी परिचालन क्षमताओं में सुधार कर रही है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी आगे बढ़ा रही है। इन इनोवेशन को निजी उद्योगों को स्थानांतरित करना सेना और उद्योगों के बीच सहयोग को मजबूत बनाता है।

‘इननो-योद्धा’ के तहत भारतीय सेना हर साल नए इनोवेशन को बढ़ावा देती रहेगी। इस साल की सफलता ने यह साबित किया है कि देश के सैनिक न केवल युद्ध के मैदान में अद्भुत काम करते हैं, बल्कि तकनीकी नवाचार में भी दुनिया को पीछे छोड़ सकते हैं। सेना का यह कदम न केवल सुरक्षा में सुधार करेगा, बल्कि देश को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में भी मदद करेगा।

INNOYODHA 2024: भारतीय सेना ने लॉन्च किया इनोवेशन ‘एक्सप्लोडर’; आतंक विरोधी अभियानों और आपदा प्रबंधन में मिलेगी मदद

INNOYODHA 2024: Indian Army Launches Innovation 'Xploder'; Aiding Counter-Terrorism Operations and Disaster Management

INNOYODHA 2024: भारतीय सेना ने 5 दिसंबर 2024 को आधुनिक तकनीक और इनोवेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ‘इनॉयोधा 2024’ (INNOYODHA 2024) के वार्षिक इनोवेशन कार्यक्रम के दौरान ‘एक्सप्लोडर – रूम इंटरवेंशन और आईईडी डिस्पोजल आरओवी’ को लॉन्च और सेना में शामिल किया। यह इनोवेशन मेजर राजप्रसाद आरएस, 7 इंजीनियर रेजिमेंट, कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स, द्वारा विकसित किया गया है।

INNOYODHA 2024: Indian Army Launches Innovation 'Xploder'; Aiding Counter-Terrorism Operations and Disaster Management

INNOYODHA 2024: क्या है ‘एक्सप्लोडर’?

‘एक्सप्लोडर’ एक रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) है, जिसे सभी प्रकार के इलाकों में काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह कई प्रकार के सैन्य अभियानों में उपयोगी है:

  1. बिना मानव हस्तक्षेप के निगरानी और जासूसी: दुर्गम क्षेत्रों में दुश्मन की गतिविधियों का पता लगाने के लिए।
  2. आईईडी को निष्क्रिय करना: बम और अन्य विस्फोटक उपकरणों को सुरक्षित तरीके से हटाना।
  3. आतंकवादियों के ठिकानों को नष्ट करना: छिपे हुए दुश्मनों पर हमला करने के लिए।
  4. आपदा प्रबंधन: प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्यों में मदद करना।

तकनीकी क्षमताएं

‘एक्सप्लोडर’ में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह न केवल आतंकवाद विरोधी अभियानों में बल्कि पारंपरिक युद्ध अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह वाहन ‘कामिकेज’ मोड में भी काम कर सकता है, जहां इसे सीधे दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

सेना में शामिल होने की प्रक्रिया

‘एक्सप्लोडर’ को सेना में शामिल करने से पहले कई फील्ड परीक्षण किए गए। इस इनोवेशन को फील्ड आर्मी ने व्यापक रूप से परखा और सेना डिजाइन ब्यूरो (Army Design Bureau) ने इसकी आवश्यकताओं को पूरा करते हुए इसे आगे बढ़ाया। इस इनोवेशन का टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) अगस्त 2024 में सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजासुब्रमण्यम की मौजूदगी में प्रोडक्शन के लिए निजी कंपनियों को सौंपा गया।

IIT दिल्ली के FITT फाउंडेशन ने इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसका उद्देश्य जल्द से जल्द ‘एक्सप्लोडर’ का उत्पादन कर फील्ड आर्मी में इसका उपयोग शुरू करना है।

INNOYODHA 2024: Indian Army Launches Innovation 'Xploder'; Aiding Counter-Terrorism Operations and Disaster Management

मेजर राजप्रसाद का योगदान

‘एक्सप्लोडर’ का इनोवेशन मेजर राजप्रसाद आरएस ने किया है। सेना प्रमुख ने उनकी मेहनत और कड़ी लगन की सराहना की। इससे पहले भी, मेजर राजप्रसाद द्वारा विकसित ‘विद्युत रक्षक’ (IoT सक्षम जनरेटर मॉनिटरिंग सिस्टम) और ‘अग्निअस्त्र’ (मल्टी-टारगेट पोर्टेबल डिटोनेशन सिस्टम) को भारतीय सेना में शामिल किया गया था।

मेजर राजप्रसाद को 2020 में एयरो इंडिया के दौरान रक्षा मंत्री द्वारा ‘iDEX4Fauji’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा, 2023 में एनएसजी के महानिदेशक द्वारा उन्हें ‘एनएसजी काउंटर आईईडी इनोवेटर अवार्ड’ दिया गया।

‘एक्सप्लोडर’ को शामिल करना भारतीय सेना के लिए केवल एक नई तकनीक को अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेना के आधुनिकीकरण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। ‘Year of Tech Absorption’ के तहत यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

आतंकवाद और आपदा प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव

‘एक्सप्लोडर’ का इस्तेमाल न केवल आतंकवाद विरोधी अभियानों में बल्कि आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता में भी किया जाएगा। यह उपकरण सेना को बेहतर रणनीतिक और तकनीकी बढ़त प्रदान करेगा।

भारतीय सेना इस तरह के इनोवेशनों के माध्यम से अपनी ताकत और क्षमता में लगातार वृद्धि कर रही है। सेना डिज़ाइन ब्यूरो ने मेजर राजप्रसाद जैसे सेवा इनोवेटर्स के माध्यम से नवाचारों को बढ़ावा देने का सफल प्रयास किया है।

‘एक्सप्लोडर’ का सेना में शामिल होना न केवल आतंकवाद और युद्ध अभियानों में मदद करेगा, बल्कि यह भारतीय सेना को एक आधुनिक, तकनीकी रूप से उन्नत और परिवर्तनकारी बल के रूप में भी स्थापित करेगा

1971 War: सेलिना जेटली ने साझा की 1971 युद्ध की अनसुनी कहानी, बताया कैसे उनके 21 साल के पिता और 17 कुमाऊं रेजिमेंट ने पाकिस्तान को चटाई थी धूल

1971 War: Celina Jaitly Shares Untold Story of Her 21-Year-Old Father and 17 Kumaon Regiment’s Valor Against Pakistan

1971 War: भारतीय सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री सेलिना जेटली ने आज अपने पिता, कर्नल विक्रम कुमार जेटली (सेना मेडल) की 1971 के भारत-पाक युद्ध में वीरता और बलिदान की कहानी साझा की। यह कहानी न केवल उनके पिता के साहस को सम्मानित करती है, बल्कि उन हजारों सैनिकों की याद दिलाती है जिन्होंने देश की आज़ादी और संप्रभुता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

1971 War: Celina Jaitly Shares Untold Story of Her 21-Year-Old Father and 17 Kumaon Regiment’s Valor Against Pakistan

1971 War: युद्ध का आरंभ

सेलिना ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “3 दिसंबर 1971। यह वह दिन है जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हुआ। मेरे 21 वर्षीय पिता लेफ्टिनेंट विक्रम कुमार जेटली को अपनी पहली तैनाती के आदेश मिले। उस समय उन्हें और उनकी 17 कुमाऊं रेजिमेंट के साथियों को इस बात का अंदाजा नहीं था कि वे इतिहास में अपना नाम दर्ज कराने जा रहे हैं। उनकी बटालियन ने भदौरिया की लड़ाई में अद्भुत साहस दिखाया, लेकिन इस दौरान उन्हें भीषण नुकसान का सामना करना पड़ा।”

21 साल का जवान और युद्ध की चुनौती

सेलिना ने अपने पिता के शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए बताया कि वे केवल 21 साल के थे, जब उन्होंने युद्ध के मैदान में कदम रखा। उन्होंने लिखा, “मैं अक्सर सोचती हूं कि उस वक्त मेरे पिता के दिमाग में क्या चल रहा होगा। क्या वे जान पाए थे कि उन्हें गंभीर चोटें लगेंगी और वे गोलियों और बम के टुकड़ों के घाव जीवनभर के लिए अपने साथ लेकर चलेंगे?”

युद्ध के दौरान उनके पिता को गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी वीरता दिखाने के लिए दो “वाउंड मेडल” और बाद में “सेना मेडल” से सम्मानित किया गया। ये मेडल सिर्फ शारीरिक बलिदान की नहीं, बल्कि उनकी अदम्य मानसिक शक्ति की गवाही देते हैं।

कुमाऊं रेजिमेंट का साहस और गर्व

कुमाऊं रेजिमेंट का युद्धघोष “कालिका माता की जय” आज भी वीरता और बलिदान का प्रतीक है। सेलिना ने बताया कि उनके पिता हमेशा कहा करते थे, “एक कुमाऊंनी सैनिक का हिस्सा बनना, ‘क्रीड ऑफ द मैन-ईटर्स’ का हिस्सा बनना है।” उनके पिता ने अपनी बटालियन के आदर्श वाक्य “पराक्रमो विजयते” (पराक्रम ही विजय दिलाता है) को अपनी ज़िंदगी का मूल मंत्र बनाया।

1971 युद्ध और देश का गौरव

सेलिना ने अपनी पोस्ट में 1971 के युद्ध की अहमियत को भी रेखांकित किया। इस युद्ध में भारत ने लगभग 3,000 सैनिक खोए और 12,000 घायल हुए। उन्होंने लिखा, “यह युद्ध केवल भारत-पाक का नहीं था, यह हमारे सैनिकों की अदम्य साहस और बलिदान की गाथा है। यह देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए किया गया प्रयास था, जिसने 16 दिसंबर 1971 को बांग्लादेश के निर्माण की ऐतिहासिक घटना को जन्म दिया।”

पिता की वीरता का सम्मान

सेलिना ने अपने पिता और उनके साथियों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “आज मैं अपने पिता कर्नल विक्रम कुमार जेटली (सेना मेडल) और 17 कुमाऊं के वीर जवानों, एनसीओ और अधिकारियों को सम्मानित करती हूं। उनका साहस और त्याग हमारे सशस्त्र बलों की वीरता की मिसाल है।”

बलिदान और प्रेरणा

सेलिना ने यह भी लिखा कि बचपन में वह अपने पिता को उनकी वर्दी और उस पर लगे मेडल्स के साथ देखा करती थीं। लेकिन आज, उनके बलिदान का वास्तविक महत्व समझ में आता है। उन्होंने कहा, “इन मेडल्स के पीछे की कहानियां और उनके बलिदान की गहराई को अब जाकर पूरी तरह से महसूस कर पा रही हूं।”

देशभक्ति और सेना का योगदान

सेलिना ने अपने पोस्ट के अंत में लिखा, “हम कभी भी उन बलिदानों को नहीं भूल सकते जो हमारे देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता के लिए दिए गए। आज, हम अपने सशस्त्र बलों को सलाम करते हैं जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी ताकि हम शांति और स्वतंत्रता में जी सकें।”

1971 के नायक: एक प्रेरणा

सेलिना जेटली ने अपने पिता के साहस और बलिदान को साझा करते हुए 1971 युद्ध के सभी वीर सैनिकों को नमन किया। उनका यह पोस्ट हर भारतीय को देश के प्रति अपने कर्तव्य और सैनिकों के बलिदान को याद करने की प्रेरणा देता है।

General’s Jottings: क्यों खतरे में हैं चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद? वेस्टर्न कमांड के पूर्व प्रमुख ले. जन. केजे सिंह ने क्यों जताई इनकी सुरक्षा को लेकर चिंता?

india-china disengagement: uttarakhand could be next border flashpoint former Lt general warns

General’s Jottings: भारतीय सेना के पश्चिमी कमान के पूर्व प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) के जे सिंह का कहहना है कि भारत के आर्थिक केंद्र, जैसे चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद, न केवल विकास के प्रतीक हैं बल्कि हमारी सुरक्षा रणनीति के अहम हिस्से होने चाहिए। हाल ही में दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में देश के आर्थिक और सुरक्षा संतुलन पर उन्होंने अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत के दक्षिणी हिस्से में मौजूद आर्थिक केंद्र अब वैश्विक व्यापार और निवेश का केंद्र बन चुके हैं। इन शहरों की बढ़ती आर्थिक महत्ता को देखते हुए, इनके लिए एक विशेष सुरक्षा ढांचा तैयार करना बेहद ज़रूरी है।

General’s Jottings: Why Are Chennai, Bengaluru, and Hyderabad at Risk? Former Western Command Chief Lt. Gen. KJ Singh Raises Concerns Over Their Security

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) के जे सिंह ने कहा कि चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहर सिर्फ आर्थिक हब ही नहीं हैं, बल्कि हमारी सुरक्षा प्राथमिकताओं का केंद्र भी बनने चाहिए। जनरल सिंह ने कहा, “पारंपरिक रूप से हमारी सेना पश्चिमी और पूर्वी सीमाओं पर खतरों के लिए तैयार रही हैं। लेकिन अब वक्त आ गया है कि इन आर्थिक केंद्रों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए।”

समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय निवेश का प्रमुख केंद्र

उन्होंने कहा कि चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहर न केवल भारत की आर्थिक रीढ़ बन चुके हैं, बल्कि साइबर सुरक्षा, बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, और आतंकी खतरों के मद्देनज़र इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण हो गया है। सिंह ने बताया कि यह क्षेत्र समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय निवेश का प्रमुख केंद्र है।

उन्होंने सुझाव दिया कि इन क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए “विशिष्ट रणनीतिक योजना और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था” होनी चाहिए। उनके अनुसार, “आर्थिक सुरक्षा अब सिर्फ अर्थव्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक मामलों का अहम हिस्सा बन चुकी है।”

थिंक टैंक की जरूरत

जनरल सिंह ने भारतीय सशस्त्र बलों में थिंक टैंक की स्थापना पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को सुरक्षा के मुद्दों पर एक पेशेवर दृष्टिकोण अपनाने की ज़रूरत है। उन्होंने आगाह किया कि थिंक टैंक की स्थापना में दोहराव और संसाधनों की बर्बादी से बचना चाहिए।

सिंह ने सेना के कमांड स्तर पर थिंक टैंकों की ज़रूरत को स्पष्ट करते हुए कहा, “हमें न केवल मौजूदा मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए, बल्कि भविष्य के खतरों के लिए भी रणनीति बनानी चाहिए।”

सीमाओं पर नई चुनौतियां और समाधान

सिक्किम कॉर्प्स के पूर्व प्रमुख के रूप में जनरल सिंह ने कहा कि पूर्वी सीमा पर नई चुनौतियां उभर रही हैं। उन्होंने सशस्त्र बलों के पुनर्गठन और केंद्रीय सशस्त्र बलों को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

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‘General’s Jottings’: आर्मी चीफ को की भेंट

इस कार्यक्रम में जनरल सिंह ने अपनी पुस्तक ‘जनरल्स जॉटिंग्स: नेशनल सिक्योरिटी, कॉन्फ्लिक्ट्स एंड स्ट्रेटेजीज’ भी प्रस्तुत की। उन्होंने सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी को यह पुस्तक भेंट की।

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पुस्तक में उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य का भी विश्लेषण किया है। उन्होंने लिखा, “यूक्रेन के सैनिकों में थकान और पश्चिमी सहयोगियों की निष्क्रियता ने संघर्ष को और मुश्किल बना दिया है।”

जनरल सिंह ने बताया कि “रूस-यूक्रेन युद्ध तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है, और इसमें निर्णायक परिणाम की संभावना कम होती दिख रही है।”

कैसे होंगी भविष्य की लड़ाईयां

सिंह ने भविष्य में संभावित वैश्विक संघर्षों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि दुनिया अब ‘कॉरिडोर के संघर्ष’ की ओर बढ़ रही है। चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर (आईएमईसी) के बीच प्रतिस्पर्धा इसे और बढ़ा सकती है।

उन्होंने कहा, “भू-अर्थशास्त्र का उपयोग अब प्रतिबंधों के माध्यम से किया जा रहा है, विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में। बीआरआई और आईएमईसी के बीच यह संघर्ष भविष्य की रणनीतिक दिशा तय करेगा।”

जनरल सिंह का कहना है कि भारत को अपनी सुरक्षा रणनीतियों को न केवल पारंपरिक दृष्टिकोण से बल्कि आधुनिक और व्यापक दृष्टिकोण से विकसित करना होगा। “आर्थिक सुरक्षा के बिना भारत का विकास अधूरा है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे आर्थिक हब वैश्विक खतरों से सुरक्षित रहें,” उन्होंने कहा।

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MiG-21: 1971 की जंग में अहम भूमिका निभाने वाले “उड़ते ताबूत” को मिली लाइफलाइन! वायुसेना अब क्यों नहीं करना चाहती रिटायर

Tejas Mk1 Fighters: IAF Deploys Tejas on Western Border, MiG-21 Out

MiG-21: “उड़ता ताबूत” या Flying Coffin के नाम से मशहूर भारतीय वायुसेना (IAF) का मिग-21 बायसन एक बार फिर से चर्चा में है। 1960 के दशक से भारत के आसमान पर राज करने वाला मिग-21 बायसन पिछले कुछ दशकों से हो रहे हादसों के चलते भारतीय वायुसेना से फेज आउट होने की प्रक्रिया में है, जो पिछले कुछ समय से चरणबद्ध तरीके से वायुसेना से बाहर किया जा रहा है। मिग-21 बायसन को 2025 तक पूरी तरह से वापस लिए जाने की डेडलाइन तय की गई है। लेकिन अब यह डेडलाइन और आगे खिसक सकती है।

MiG-21: The Iconic 'Flying Coffin' of 1971 Gets a Lifeline! Tejas Jet Production Challenges Force IAF to Extend Service

MiG-21: तेजस एमके1ए में देरी बनी वजह

भारतीय वायु सेना के सूत्रों ने बताया कि स्वदेशी तेजस एमके1ए फाइटर जेट्स के उत्पादन में देरी के चलते मिग-21 बायसन की फेज आउट करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित तेजस एमके1ए, जो अत्याधुनिक तकनीक और मल्टीरोल क्षमताओं से लैस है, मिग-21 का स्थान लेने के लिए तैयार है। परंतु इंजन सप्लाई की समस्या के कारण इसका उत्पादन समयसीमा से पीछे चल रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, राजस्थान के बीकानेर स्थित नल एयरबेस, जहां वर्तमान में मिग-21 की आखिरी ऑपरेशन स्क्वाड्रन तैनात है, उसे जुलाई 2024 में पहले तेजस स्क्वाड्रन बनाया जाना था। परंतु तेजस की आपूर्ति में देरी ने इस योजना की राह में रोड़े अटका दिए हैं।

1964 में भारत के पहले सुपरसोनिक फाइटर जेट के रूप में शामिल किए गए मिग-21 ने दक्षिण एशिया में हवाई युद्ध के तौर-तरीकों को बदल दिया। 1971 के भारत-पाक युद्ध में इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बांग्लादेश के गठन में योगदान दिया। 1999 के कारगिल युद्ध और 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक में इसकी मौजूदगी ने इसे भारत के सैन्य इतिहास का अभिन्न हिस्सा बना दिया।

हालांकि, मिग-21 का इतिहास विवादों से भी अछूता नहीं रहा। इसे “फ्लाइंग कॉफिन” का नाम इसलिए दिया गया क्योंकि इसके फ्लाइट ऑपरेशन के दौरान 400 से अधिक दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें कई पायलटों ने अपनी जान गंवाई। बावजूद इसके, मिग-21 की क्षमता और इसकी रणनीतिक उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता।

वायुसेना की मौजूदा जरूरत

वर्तमान में भारतीय वायुसेना में मिग-21 बायसन के दो स्क्वाड्रन हैं, जिनमें कुल 31 विमान शामिल हैं। जबकि वायुसेना को कुल 42 स्क्वाड्रन जरूरत है, लेकिन फिलहाल यह आंकड़ा केवल 30 के करीब है। ऐसे में तेजस एमके1ए जैसे अत्याधुनिक विमानों की तैनाती बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

मिग-21 बायसन को सेवा विस्तार देने का मतलब यह है कि भारतीय वायुसेना को अपनी ऑपरेशनल कैपेबिलिटी बनाए रखने के लिए अभी भी पुराने विमानों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

तेजस एमके1ए, में Active Electronically Scanned Array (AESA) रडार, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और ज्यादा क्षमता वाले हथियार ले जाने की क्षमता है। लेकिन उत्पादन में देरी के चलते न केवल वायुसेना के ऑपरेशंस प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

एक रक्षा विशेषज्ञ ने बताया, “मिग-21 का सेवा विस्तार भारतीय वायुसेना की क्षमताओं को बनाए रखने के लिए एक रणनीतिक कदम है, लेकिन यह भी जरूरी है कि तेजस जैसे स्वदेशी विमानों का उत्पादन जल्द से जल्द शुरू हो।”

भारतीय वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “मिग-21 ने वर्षों तक हमारी वायुसेना की रीढ़ की हड्डी के रूप में काम किया है। हालांकि अब समय आ गया है कि इसे आराम दिया जाए और अत्याधुनिक विमानों को उसकी जगह दी जाए।”

मिग-21 बायसन, जिसने अपनी उपयोगिता और इतिहास के माध्यम से भारतीय वायुसेना को परिभाषित किया है, अब अपने अंतिम दिनों की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, तेजस एमके1ए के आने से भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल कैपेबिलिटी को मजबूती मिलेगी।

China Drone: चीन की यह ‘बदनाम’ ड्रोन कंपनी मणिपुर और नागालैंड में रच रही बड़ी साजिश! पंजाब को भी तबाह करने में है इसका हाथ

China Drone: This Controversial Chinese DJI Drone Company Fuels Conspiracy in Manipur and Nagaland, Threatens Punjab's Security!

China Drone: चीन की ड्रोन निर्माता कंपनी DJI विवादों में है। खबरों के मुताबिक, यह कंपनी म्यांमार में भारतीय सीमा के पास और रूस को युद्ध के लिए घातक उपकरण जैसे बमवर्षक हेक्साकॉप्टर और 60 मिमी मोर्टार शेल्स सप्लाई कर रही है। म्यांमार में ये उपकरण उत्तर-पूर्वी राज्यों मणिपुर और नागालैंड के नजदीक इस्तेमाल हो रहे हैं। वहीं, रूस में इन्हें यूक्रेन के खिलाफ संघर्ष में इस्तेमाल किया जा रहा है।

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म्यांमार में China Drone का इस्तेमाल

म्यांमार में इन ड्रोन का उपयोग उन इलाकों में किया जा रहा है जो भारत की सीमा के नजदीक हैं। इन इलाकों में हथियारबंद समूह सक्रिय हैं, और इनका भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए खतरा बढ़ गया है। हेक्साकॉप्टर, एक प्रकार का ड्रोन जो भारी भार उठाने और सटीक हमले करने में सक्षम है, म्यांमार के हथियारबंद समूहों द्वारा मोर्टार शेल्स गिराने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

भारतीय सीमा के करीब इस प्रकार की गतिविधियां भारत के लिए सुरक्षा चिंता का विषय हैं। म्यांमार के कई क्षेत्रों में लंबे समय से सशस्त्र संघर्ष चल रहा है, और इस संघर्ष में एडवांस तकनीक के उपकरणों का इस्तेमाल हालात को और मुश्किल बना सकते हैं।

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रूस-यूक्रेन संघर्ष में ड्रोन का इस्तेमाल

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष में भी DJI के ड्रोन और मोर्टार शेल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। खबरों के अनुसार, रूस ने युद्ध में अपने मिशनों को और प्रभावी बनाने के लिए इन ड्रोन का बड़े पैमाने पर उपयोग किया है।

यूक्रेन के खिलाफ इन ड्रोन का इस्तेमाल रूस को रणनीतिक बढ़त देने के लिए किया जा रहा है। हेक्साकॉप्टर ड्रोन का उपयोग न केवल निगरानी के लिए बल्कि बम गिराने के लिए भी किया जा रहा है।

DJI को लेकर पहले भी विवाद उठ चुके हैं। कंपनी पर आरोप है कि वह अपनी ए़डवांस तकनीक को ऐसे जगहों में बेच रही है जहां यह मानवाधिकारों का उल्लंघन करने के लिए इस्तेमाल हो सकती है।

डीजेआई का कहना है कि वह सिर्फ व्यावसायिक उपयोग के लिए उपकरण बेचती है और सैन्य उद्देश्यों के लिए उनका उपयोग करना उनकी नीति के खिलाफ है। हालांकि, इस मामले में कंपनी की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

पंजाब में ड्रग्स तस्करी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। हालिया घटनाओं ने यह खुलासा किया है कि पाकिस्तान सीमा पार से ड्रग्स पहुंचाने के लिए चीन निर्मित DJI ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। पाकिस्तान की तरफ से तस्कर इन ड्रोन के जरिए सीमावर्ती इलाकों में ड्रग्स, हथियार, और नकली करेंसी गिरा रहे हैं। ये ड्रोन रात के अंधेरे में उड़ान भरते हैं और GPS तकनीक का इस्तेमाल कर सटीक स्थान पर ड्रग्स गिराने में सक्षम हैं। पंजाब के अमृतसर और फिरोजपुर जिलों में सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने हाल के महीनों में कई ड्रोन पकड़े हैं।

भारतीय सीमा सुरक्षा बल और पंजाब पुलिस इस बढ़ती समस्या को रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। BSF ने ड्रोन गतिविधियों को ट्रैक करने और उन्हें नष्ट करने के लिए एडवांस तकनीकों का सहारा लेना शुरू कर दिया है।

हाल में पकड़े गए ड्रोन के जरिए यह भी पता चला कि पाकिस्तान इन पर बड़ी रकम खर्च कर रहा है। एक ड्रोन की कीमत लाखों रुपये तक बैठती है।

पंजाब के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर में भी DJI ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ रहा है। वहां यह देखा गया है कि ड्रोन का उपयोग न केवल ड्रग्स बल्कि आतंकवादी गतिविधियों के लिए हथियार भेजने के लिए भी हो रहा है।

भारत के लिए चुनौती

भारत के लिए यह मामला न केवल सुरक्षा बल्कि कूटनीति से जुड़ा है। मणिपुर और नागालैंड जैसे राज्यों के पास ड्रोन का यह इस्तेमाल भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है। भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियों को इस मामले में सतर्क रहना होगा और इन क्षेत्रों में निगरानी बढ़ानी होगी।

भारत ने पहले भी म्यांमार के साथ मिलकर हथियारबंद समूहों के खिलाफ कार्रवाई की है। लेकिन अब, ड्रोन जैसे उन्नत तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।

MH-60R Seahawk Helicopters: अमेरिका ने MH-60R हेलिकॉप्टर के सपोर्ट सिस्टम की बिक्री के लिए दी मंजूरी, भारत की समुद्री सुरक्षा को मिलेगी मजबूती

MH-60R Seahawk Helicopters: US Approves Sale of Support Systems to Strengthen India's Maritime Security

MH-60R Seahawk Helicopters: भारत और अमेरिका के बढ़ते रक्षा संबंधों को और मजबूती देते हुए अमेरिकी सरकार ने MH-60R मल्टी-रोल हेलिकॉप्टरों के लिए सर्पोर्ट सिस्टम और इक्विपमेंट्स की बिक्री को मंजूरी दी है। यह सौदा $1.17 बिलियन का है, जो अमेरिकी विदेश सैन्य बिक्री कार्यक्रम के तहत किया जाएगा।

MH-60R Seahawk Helicopters: US Approves Sale of Support Systems to Strengthen India's Maritime Security

MH-60R Seahawk Helicopters: भारत की रक्षा क्षमताओं में बड़ा कदम

भारत ने फरवरी 2020 में $2.2 बिलियन के अनुबंध के तहत 24 MH-60R हेलिकॉप्टरों का ऑर्डर दिया था। इनमें से नौ हेलिकॉप्टर पहले ही भारतीय नौसेना में शामिल हो चुके हैं। यह हेलिकॉप्टर विशेष रूप से पनडुब्बी रोधी युद्ध और समुद्री निगरानी के लिए डिजाइन किए गए हैं।

MH-60R हेलिकॉप्टर अत्याधुनिक उपकरणों से लैस हैं, जिनमें हेलफायर मिसाइल, MK-54 टॉरपीडो, और प्रिसिजन-किल रॉकेट शामिल हैं। इनके साथ मल्टी-मोड रडार और नाइट-विजन डिवाइस जैसी सुविधाएं भी हैं। मार्च 2024 में, भारतीय नौसेना ने कोच्चि स्थित INS गरुड़ा पर इन हेलिकॉप्टरों का पहला स्क्वाड्रन कमीशन किया था।

नई बिक्री में क्या है खास?

अमेरिकी डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने अमेरिकी कांग्रेस को इस बिक्री की जानकारी दी है। भारत ने इस नए सौदे के तहत 30 मल्टीफंक्शनल इंफॉर्मेशन डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम-जॉइंट टैक्टिकल रेडियो सिस्टम, एडवांस डेटा ट्रांसफर सिस्टम, बाहरी फ्यूल टैंक, फॉरवर्ड-लुकिंग इन्फ्रारेड सिस्टम, और पहचानने व मित्र/दुश्मन को अलग करने वाले उपकरण (Identification Friend or Foe) मांगे हैं।

इसके अलावा, अन्य उपकरणों और सेवाओं में शामिल हैं:

  • स्पेयर और रिपेयर पार्ट्स
  • सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और मिशन प्लानिंग सिस्टम
  • संचार उपकरण
  • तकनीकी और लॉजिस्टिक्स सहायता सेवाएं
  • प्रशिक्षण और प्रशिक्षण उपकरण

रक्षा क्षमताओं में वृद्धि

अमेरिकी सरकार ने कहा कि यह प्रस्तावित बिक्री भारत की वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने की क्षमता को बढ़ाएगी। खासतौर पर पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं को एडवांस करने में यह उपकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। भारत की नौसेना के लिए यह सौदा न केवल रणनीतिक रूप से बल्कि तकनीकी दृष्टि से भी बड़ा कदम है।

बाइडन प्रशासन ने इस सौदे को अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों के लिए जरूरी बताया। अमेरिका का कहना है कि यह सौदा भारत को एक प्रमुख रक्षा साझेदार के रूप में मजबूत करेगा, जो हिंद-प्रशांत और दक्षिण एशिया क्षेत्र में स्थिरता, शांति और आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है।

भारत और अमेरिका पिछले कुछ सालों से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के खिलाफ मिलकर काम कर रहे हैं। इस तरह के उन्नत उपकरण भारत को अपने समुद्री क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा के लिए एक मजबूत रणनीतिक बढ़त प्रदान करेंगे।

आने वाले सालों में और हेलिकॉप्टर शामिल होंगे

2025 तक, भारत सभी 24 MH-60R हेलिकॉप्टरों को नौसेना में शामिल कर लेगा। ये हेलिकॉप्टर समुद्री क्षेत्रों में गश्त, निगरानी, और पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए बेहद उपयोगी होंगे।