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Indian Army: सेना प्रमुख के दफ्तर की दीवार से ‘गायब’ हुई यह एतिहासिक फोटो, पूर्व अफसर बोले- क्या भारतीय सेना की गौरवमयी जीत की अनदेखी कर रही सरकार?

Indian Army: Historic Photo Disappears from Army Chief's Office Wall, Former Officers Question if Government is Overlooking Indian Army's Glorious Victory

Indian Army: हाल ही में भारतीय सेना के प्रमुख जनरल की ऑफिस के बैकग्राउंड से एक ऐतिहासिक तस्वीर जो 1971 की जंग में पाकिस्तान सेना के सरेंडर की थी, उसे हटा लिया गया है। यह तस्वीर भारतीय सेना की एक बड़ी जीत की याद दिलाती रही है, जब एकक लाख से ज्यादा पाकिस्तान सेना ने पूर्वी पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश के ढाका में भारतीय सेना के सामने बिना शर्त समर्पण किया था।

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वहीं, इस फैसले पर अब रक्षा विशेषज्ञों ने गहरी चिंता जताई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इस चित्र को हटाने के पीछे कोई विशेष विचारधारा हो सकती है, जो भारतीय सेना के ऐतिहासिक और सैन्य गौरव को नकारने की कोशिश कर रही है। बता दें कि 9 दिसंबर तक यह फोटो सेना प्रमुख के दफ्तर की दीवार पर मौजूद थी, जिसमें वे उस दिन भारतीय मिलिट्री हिस्ट्री पर किताबें लिखने वाले कुछ लेखकों से मिले थे।

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किसने बनाई है नई पेंटिंग

सेना के सूत्रों ने कहा कि नई पेंटिंग, ‘कर्म क्षेत्र– कर्मों का क्षेत्र’, जिसे 28 मद्रास रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट कर्नल थॉमस जैकब ने बनाई है। इस पेंटिंग में सेना को एक “धर्म के रक्षक” के रूप में दर्शाया गया है, जो केवल राष्ट्र का रक्षक नहीं बल्कि न्याय की रक्षा और देश के मूल्यों की सुरक्षा के लिए लड़ती है। यह पेंटिंग बताती है कि सेना तकनीकी रूप से कितनी एडवांस हो गई है। पेंटिंग बर्फ से ढकी पहाड़ियां पृष्ठभूमि में दिख रही हैं, दाएं ओर पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग त्सो झील और बाएं ओर गरुड़ा और श्री कृष्ण की रथ, साथ ही चाणक्य और आधुनिक उपकरण जैसे टैंक, ऑल-टेरेन व्हीकल्स, इन्फैंट्री व्हीकल्स, पेट्रोल बोट्स, स्वदेशी लाइट कॉम्बेट हेलीकॉप्टर्स और एच-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर्स दिखाए गए हैं।

Indian Army: आधिकारिक चित्र हटाने की वजह

इस घटना ने सभी का ध्यान उस समय खींचा, जब सेना प्रमुख समेत तीनों सेनाओं के प्रमुख नेपाली सेना के आर्मी चीफ से मिले, जो इन दिनों 14 दिसंबर तक भारत दौरे पर हैं। उस समय यह तस्वीर दीवार से नादारद दिखी और उसके जगह एक दूसरे फोटो लगी थी। यह चित्र 16 दिसंबर 1971 को ढाका में पाकिस्तान की सेना के समर्पण के दौरान लिया गया था, जो भारतीय सेना की सबसे बड़ी जीतों में से एक मानी जाती है। वरिष्ठ रक्षा पत्रकार मान अमन सिंह चिन्ना ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, यह कदम भारत की सैन्य विजय को सार्वजनिक रूप से नकारने की कोशिश के समान है। उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम विशेष रूप से उन लोगों के लिए अपमानजनक है जिन्होंने 1971 के युद्ध में भाग लिया और अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि पहले च्यूवोडे क्रीडो (Chewode Credo) को हटाया गया और अब 1971 की जंग की पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण वाली फोटो हटा दी गई।

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क्या है च्यूवोडे क्रीडो (Chewode Credo)

च्यूवोडे क्रीडो (Chewode Credo) भारतीय सेना का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है, जिसे फील्ड मार्शल कीथ च्यूवोडे ने पेश किया था। यह क्रीडो सेना के अफसरों और जवानों को उनके कर्तव्यों और नैतिकता के बारे में मार्गदर्शन करता है। इसका मुख्य उद्देश्य कर्म, समर्पण, वफादारी, ईमानदारी, सहनशीलता और धैर्य को बढ़ावा देना है। यह अफसरों को अपने सैनिकों के प्रति जिम्मेदारी, नेतृत्व और समानता की भावना को प्रोत्साहित करता है। च्यूवोडे क्रीडो भारतीय सेना के लिए एक जीवन दर्शन है, जो सैन्य नेतृत्व और कर्तव्य की भावना को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है।

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1971 युद्ध की अहमियत

दूसरी तरफ, एयर वाइस मार्शल (रिटायर्ड) मनमोहन बहादुर ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि 1971 का युद्ध भारत के रक्षा इतिहास में सबसे बड़ी जीत थी। उन्होंने यह भी कहा कि यह युद्ध भारत के एकीकृत राष्ट्र के रूप में पहली सैन्य विजय का प्रतीक है, और इस चित्र को हटाना भारतीय सेना की इस महान उपलब्धि को नजरअंदाज करना है। उनका कहना था कि यह चित्र कई देशों के सैन्य प्रमुखों और गणमान्य व्यक्तियों के लिए भारत की सामरिक ताकत और उसकी सफलता का प्रतीक था।

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सांस्कृतिक और राजनीतिक विमर्श

वहीं, रक्षा विशेषज्ञ संदीप मुखर्जी का मानना ​​है कि भारतीय सरकार की नीतियां अब भारतीय इतिहास और संस्कृति के मध्यकालीन दृष्टिकोण को महत्व देती हैं, जबकि 1971 की जीत आधुनिक, धर्मनिरपेक्ष और संविधानिक भारत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कोशिशें इतिहास से जुड़ी वास्तविकताओं को नकारने की ओर इशारा करती हैं और वर्तमान सरकार अपनी नीतियों को सांस्कृतिक प्रतीकों और मिथक के आधार पर स्थापित करना चाहती है, जो भारत के आधुनिक और लोकतांत्रिक मूल्य से मेल नहीं खाता।

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1971 की समर्पण तस्वीर का महत्व

भारतीय सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एच एस पांग ने कहा कि यह चित्र पिछले 1000 सालों में भारत की पहली बड़ी सैन्य विजय का प्रतीक था। यह न केवल सैन्य दृष्टिकोण से बल्कि भारतीय एकता और शक्ति का प्रतीक भी था। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग इस चित्र को हटाने का कारण बने हैं, वे भारतीय सेना के गौरव को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं, और इस कदम के पीछे एक विशेष विचारधारा काम कर रही है जो भारत के प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास को बढ़ावा देती है।

बताया- बदलाव समय की जरूरत

इस मुद्दे पर रिटायर्ड पश्चिमी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल कमलजीत सिंह ने भी अपनी राय दी। उनका कहना था कि बिना पूरे हालात को देखे इस चित्र पर टिप्पणी करना सही नहीं होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि बदलाव समय की जरूरत है और आने वाली पीढ़ियों को इसे समझने और उनका दृष्टिकोण बदलने का अवसर देना चाहिए। उनका यह भी मानना ​​है कि यह मामला राजनीतिक और सांस्कृतिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है और इससे आगे बढ़ने की जरूरत है।

वहीं, इस मामले को लेकर भारतीय जनता और सेना के परिवारों के बीच मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे एक राजनीतिक कदम मानते हुए भारतीय सेना की ऐतिहासिक जीत के महत्व को कम करने की कोशिशों के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ अन्य इसे केवल एक परिवर्तनात्मक कदम मानते हैं, जो शायद समय के साथ उचित हो सकता है।

हालांकि इस मुद्दे पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि भारतीय सेना की 1971 की जीत को अनदेखा करने की कोशिशों से भारतीय जनता और सैन्य समुदाय में नाराजगी फैल रही है। यह चित्र न केवल भारतीय सेना की वीरता का प्रतीक था, बल्कि भारत की एकता और सामरिक ताकत का भी प्रतीक था। जो लोग इस चित्र को हटाने के पीछे हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि यह सिर्फ एक चित्र नहीं, बल्कि भारतीय सेना की संकल्प और शौर्य का प्रतीक है।

Zorawar Light Tank: लद्दाख में भारतीय लाइट टैंक ने सटीक फायरिंग कर रचा इतिहास! IAF के IL-76 से पहुंचाया था न्योमा

Zorawar Light Tank: Indian Light Tank Makes History with Accurate Firing in Ladakh! Airlift Nyoma via IAF IL-76 plane

Zorawar Light Tank: भारतीय सेना के स्वदेशी लाइट टैंक (ILT) ने 4200 मीटर से अधिक ऊंचाई पर अपने दमखम का प्रदर्शन कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस टैंक ने विभिन्न रेंज पर गोले दागे और हर बार सटीक निशाना साधा। इससे पहले सितंबर 2024 में राजस्थान के भीषण गर्मी वाले रेगिस्तानी इलाकों में पहले फेज की टेस्टिंग की गई थी।

Zorawar Light Tank: Indian Light Tank Makes History with Accurate Firing in Ladakh! Airlift Nyoma via IAF IL-76 plane

Zorawar Light Tank: डिजाइन और डेवलपमेंट में किया कमाल

इस लाइट टैंक को चेन्नई स्थित डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन) की लैब कॉम्बैट व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (CVRDE) द्वारा डिज़ाइन और विकसित किया गया है। इसे भारतीय सेना की अस्थायी स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स (PSQR) के आधार पर बनाया गया है। उत्पादन की ज़िम्मेदारी लार्सन एंड टूब्रो (L&T) प्रिसीशन इंजीनियरिंग एंड सिस्टम्स को दी गई है।

यह टैंक 25 टन वर्ग का एक बख्तरबंद लड़ाकू वाहन है, जिसे ऊंचाई वाले इलाकों में सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। तीन वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद इसे तैयार कर उच्च पर्वतीय इलाकों में परीक्षण के लिए प्रस्तुत किया गया।

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IL-76 से किया एयरलिफ्ट

भारतीय वायुसेना ने इस टैंक को एयरलिफ्ट कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। इस टैंक को सड़क या रेल मार्ग से दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचाना आसान नहीं है, लेकिन वायुसेना की मदद से इसे दूरस्थ इलाकों में तेजी से तैनात किया जा सकता है। यह सुविधा खासतौर पर लद्दाख जैसे दुर्गम इलाकों में बेहद महत्वपूर्ण है। सूत्रों ने बताया कि  भारतीय वायुसेना के IL-76 विमान के जरिए इसे ले जाया गया, जिससे इसकी एयरलिफ्ट क्षमता का पता चला। IL-76, जो भारी भार उठाने में सक्षम है, ने 25 टन वजनी ज़ोरावर को परीक्षण स्थल तक सफलतापूर्वक पहुंचाया।

Zorawar Light Tank: Indian Light Tank Makes History with Accurate Firing in Ladakh! Airlift Nyoma via IAF IL-76 plane

लद्दाख में ज़ोरावर टैंक का परीक्षण

इसी बीच, लद्दाख के न्योमा क्षेत्र में स्वदेशी ज़ोरावर लाइट टैंक के परीक्षण जारी हैं। इस टैंक को फायरिंग, मोबिलिटी और प्रोटेक्शन जैसे मानकों पर परखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, परीक्षणों के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद इसे अगले साल भारतीय सेना को सौंपा जाएगा।

ज़ोरावर लाइट टैंक को सेना की लद्दाख सेक्टर में मोबिलिटी और मैन्युवरिंग क्षमताओं को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह परियोजना रक्षा अधिग्रहण परिषद द्वारा हाल ही में स्वीकृत की गई है।

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चीन की चुनौती का जवाब

लद्दाख क्षेत्र में बड़ी संख्या में चीनी लाइट टैंकों की तैनाती को देखते हुए भारतीय सेना ने भी समान क्षमताओं के विकास पर जोर दिया है। स्वदेशी ज़ोरावर लाइट टैंक, चीनी टैंकों का मुकाबला करने के लिए सेना की रणनीतिक क्षमताओं को और मजबूती देगा।

स्वदेशी टैंक की प्रमुख विशेषताएं

ज़ोरावर टैंक को एलएंडटी और डीआरडीओ की साझेदारी में “मेक इन इंडिया” पहल के तहत तैयार किया गया है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताओं में सक्रिय सुरक्षा प्रणाली (Active Protection System) शामिल है, जो इसे एंटी-टैंक मिसाइलों और अन्य प्रोजेक्टाइल से बचाने में सक्षम बनाती है।

इसके अलावा, यह टैंक अम्फीबियस (पानी और जमीन दोनों पर चलने योग्य) होगा, जो इसे पैंगोंग झील जैसे नदी क्षेत्रों में भी तैनात करने में मदद करेगा। यह सुविधा सेना को बहुस्तरीय लड़ाई के लिए बेहतर तैयारी देगी।

रक्षा मंत्री और डीआरडीओ प्रमुख ने दी बधाई

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता पर डीआरडीओ, भारतीय सेना, वायुसेना और एलएंडटी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत ने भी लाइट टैंक टीम और एलएंडटी को इस सफलता के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस टैंक की डिजाइनिंग और निर्माण स्वदेशी क्षमताओं की साक्षी है।

स्वदेशी तकनीक से तैयार यह टैंक भारतीय सेना की युद्ध रणनीति को नया आयाम देगा। लद्दाख और अन्य दुर्गम इलाकों में दुश्मन के खिलाफ तेजी से कार्रवाई करने की जरूरत को यह टैंक पूरा करेगा।

भारतीय सेना, वायुसेना और डीआरडीओ के बीच समन्वय इस टैंक की सफलता का प्रमुख कारण है। यह टैंक न केवल भारतीय सेना की ताकत को बढ़ाएगा, बल्कि स्वदेशी तकनीक के क्षेत्र में भी भारत को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

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Zorawar Light Tank: Trials of Indigenous Tank in Ladakh's High Altitudes Show Success, Completion Expected by Month-End

Zorawar Light Tank: लद्दाख के दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाकों में भारत के स्वदेशी ज़ोरावर लाइट टैंक के परीक्षण चल रहे हैं। ये परीक्षण भारतीय सेना की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने और पड़ोसी चीन की सैन्य रणनीतियों का मुकाबला करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ज़ोरावर टैंक का फायरिंग परीक्षण सफल रहा है, और पूरी प्रक्रिया इस महीने के अंत तक खत्म होने की उम्मीद है।

Zorawar Light Tank: Trials of Indigenous Tank in Ladakh's High Altitudes Show Success, Completion Expected by Month-End

Zorawar Light Tank: लद्दाख के न्योमा में टेस्टिंग

सूत्रों के अनुसार, ज़ोरावर टैंक की टेस्टिंग चीन सीमे से 30 किमी दूर लद्दाख के न्योमा इलाके में हो रही है। इन परीक्षणों में टैंक को तीन प्रमुख मानदंडों पर परखा गया—फायरपावर, मोबिलिटी और सुरक्षा। परीक्षण पूरे होने के बाद इसे अगले साल भारतीय सेना के लिए उपयोगकर्ता परीक्षण (यूजर ट्रायल) के लिए सौंप दिया जाएगा।

चीन के मुकाबले रणनीतिक तैयारी

लद्दाख में चीन के हल्के टैंकों की तैनाती को देखते हुए भारतीय सेना को भी समान क्षमताओं की आवश्यकता महसूस हुई। इसी उद्देश्य से रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council) ने इस परियोजना को मंजूरी दी।

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ज़ोरावर टैंक, 59 टैंकों के उस ऑर्डर का हिस्सा है, जिसे DRDO और उसके निजी क्षेत्र के साझेदारों के साथ मिलकर विकसित किया जा रहा है। यह हल्का टैंक विशेष रूप से दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में तेजी से मूवमेंट और संचालन के लिए डिज़ाइन किया गया है।

स्वदेशी निर्माण: मेक इन इंडिया की पहल

इस परियोजना के तहत DRDO और भारत की प्रमुख निजी कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अंतर्गत मिलकर काम किया। 25 टन वजन वाला यह टैंक न केवल ऊंचाई वाले इलाकों में तेजी से मूवमेंट करने में सक्षम है, बल्कि इसमें कई अत्याधुनिक तकनीकों का भी शामिल किया गया है।

टैंक की कुछ खास विशेषताएं:

  1. फायरपावर: दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमले की क्षमता।
  2. मोबिलिटी: कठिन से कठिन इलाकों में भी तेजी से मूवमेंट करने की ताकत।
  3. सुरक्षा: टैंक को एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल और प्रोजेक्टाइल से बचाने के लिए एक सक्रिय सुरक्षा प्रणाली (Active Protection System) का उपयोग।

अम्फीबियस क्षमता और रणनीतिक महत्व

ज़ोरावर टैंक की एक अनोखी विशेषता उसकी अम्फीबियस (जल और जमीन दोनों पर चलने की) क्षमता है। यह विशेषता उसे लद्दाख के पेंगोंग त्सो झील जैसे क्षेत्रों में तैनात करने में उपयोगी बनाती है, जहां भारतीय सेना ने पहले भी चीनी हल्के टैंकों का सामना किया है।

अम्फीबियस क्षमता होने के कारण, ज़ोरावर न केवल पहाड़ी क्षेत्रों में बल्कि नदी और झील जैसे क्षेत्रों में भी तैनाती के लिए उपयुक्त है। इससे भारतीय सेना को सीमावर्ती इलाकों में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त मिलती है।

भारतीय सेना के लिए भविष्य की राह

भारतीय सेना की यह पहल सिर्फ सैन्य शक्ति को मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। स्वदेशी टैंक का विकास भारतीय उद्योगों और वैज्ञानिकों के सामर्थ्य को दर्शाता है।

लद्दाख और पूर्वी सीमाओं पर मौजूदा चुनौतियों के बीच ज़ोरावर जैसे हल्के और गतिशील टैंक भारतीय सेना के लिए गेमचेंजर साबित हो सकते हैं। इन टैंकों का उपयोग न केवल निगरानी और सुरक्षा के लिए किया जा सकेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर दुश्मन को त्वरित और प्रभावी जवाब देने में भी सहायक होगा।

Zorawar Light Tank is a indigenous tank developed by India, which is currently undergoing testing in the vicinity of the China border in eastern Ladakh. This tank holds significant importance for India, with its anticipated deployment set for 2025.

Indian Army ATV: LAC पर सेना का हाईटेक कदम; बर्फीले इलाकों में पेट्रोलिंग के लिए तैनात की ATV, चीन पर कड़ी नजर

Indian Army ATV Deploys at LAC in Eastern Ladakh, Snow-Covered Terrains to Counter China

Indian Army ATV: भारतीय सेना ने लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर सर्दियों के लिए अपनी तैयारियों को पुख्ता कर लिया है। बर्फीले और दुर्गम इलाकों में पेट्रोलिंग और निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए सेना अब ऑल-टरेन व्हीकल्स (ATV) का इस्तेमाल करेगी। हाल ही में, सेना के फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने इन वाहनों का एक वीडियो अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर साझा किया, जिसमें ये गाड़ियां दुर्गम इलाकों में अपनी ताकत और उपयोगिता दिखाती नजर आ रही हैं।

Indian Army ATV Deploys at LAC in Eastern Ladakh, Snow-Covered Terrains to Counter China

Indian Army ATV: क्या हैं ये ATV और कैसे काम करती हैं?

ऑल-टरेन व्हीकल्स (ATV) को किसी भी प्रकार के कठिन और चुनौतीपूर्ण इलाकों में चलने के लिए डिज़ाइन किया गया है। भारतीय सेना द्वारा उपयोग किए जाने वाले एटीवी में Polaris Sportsman, Polaris RZR, और JSW-Gecko ATOR शामिल हैं। ये वाहन पथरीले रास्तों, खड़ी चढ़ाई, ढलान और बर्फीली सतहों पर भी आसानी से चल सकते हैं।

इन गाड़ियों का उपयोग केवल लद्दाख ही नहीं, बल्कि देश के अन्य दुर्गम इलाकों जैसे गुजरात के कच्छ क्षेत्र में भी किया जा रहा है। एटीवी का हल्का वजन और उच्च गतिशीलता उन्हें मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों में तैनात करने के लिए उपयुक्त बनाता है।

LAC के पास सर्दियों में चुनौतीपूर्ण हालात

लद्दाख का LAC क्षेत्र बर्फ से ढके पहाड़ों और कठोर जलवायु का इलाका है। यहां पर पेट्रोलिंग और निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकी उपकरण और वाहन बेहद जरूरी हैं। भारतीय सेना के पास इन दुर्गम इलाकों में निगरानी और सुरक्षा के लिए बेहतर साधनों का होना जरूरी है ताकि वे हर परिस्थिति में मुस्तैद रह सकें।

“Mastering New Mobility
Platform”

Blazing through frozen
battlegrounds, Treading icy sheets and cragging pathways. Amidst
winters, Forever in Operations Division all set to conquer ferocious
blizzards and impassable zones.#Onpathtotransformation#Techinfusion@adgpi
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@firefurycorps_IA (@firefurycorps) December
8, 2024

एटीवी के उपयोग से भारतीय सैनिकों की गश्त और निगरानी पहले से अधिक कुशल और तेज़ हो गई है। इन गाड़ियों का डिज़ाइन ऐसा है कि वे किसी भी मौसम और इलाके में आसानी से चलाई जा सकती हैं। इनकी मैन्यूवरिंग इतनी सरल है कि सैनिक इसे दुर्गम पहाड़ी इलाकों में भी आसानी से चला सकते हैं।

देपसांग और देमचोक में पेट्रोलिंग की बहाली

भारत और चीन के बीच लंबे समय से विवादित देपसांग के मैदान और देमचोक क्षेत्र में, हाल ही में दोनों देशों की सेनाओं के पीछे हटने के बाद, भारतीय सेना ने इन इलाकों में पेट्रोलिंग को फिर से शुरू किया है। इस नई पेट्रोलिंग व्यवस्था के तहत एटीवी का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे गश्त अधिक दूरी तक और अधिक प्रभावी हो रही है।

एटीवी की मदद से सैनिक खतरनाक और चुनौतीपूर्ण मार्गों पर भी आसानी से जा सकते हैं। ये वाहन दूर-दराज के इलाकों में स्थित सैनिकों को तेजी से जरूरी मदद पहुंचाने में भी कारगर साबित हो रहे हैं।

सेना ने क्यों चुने एटीवी?

भारतीय सेना का मानना है कि एटीवी की तैनाती से न केवल पेट्रोलिंग आसान हुई है, बल्कि निगरानी और आपात स्थिति में प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी बढ़ी है। इन वाहनों के जरिए सैनिक किसी भी मौसम में रणनीतिक स्थानों और बेस तक आसानी से पहुंच सकते हैं।

सेना ने बयान जारी करते हुए कहा, “एटीवी हमारे जवानों के लिए बेहद जरूरी साबित हो रहे हैं। इनसे निगरानी में तेजी आई है और जरूरत पड़ने पर हम अपने सैनिकों को सही स्थान पर तैनात कर सकते हैं।” इन वाहनों की मदद से सेना को दुर्गम इलाकों में ऑपरेशन करने में बड़ी मदद मिल रही है।

बर्फीले इलाकों में एटीवी की खासियत

लद्दाख जैसे इलाकों में जहां तापमान शून्य से नीचे चला जाता है और बर्फबारी के कारण रास्ते अवरुद्ध हो जाते हैं, वहां एटीवी का उपयोग गेम चेंजर साबित हो सकता है। ये वाहन न केवल सैनिकों को तेजी से गंतव्य तक पहुंचाने में सक्षम हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करते हैं कि दुर्गम इलाकों में आपूर्ति और अन्य महत्वपूर्ण कार्य बाधित न हों।

सुरक्षा के लिए नई रणनीति

भारतीय सेना ने LAC पर अपनी तैयारी को नए आयाम दिए हैं। एटीवी की मदद से निगरानी और गश्त के काम को पहले से ज्यादा कुशल बनाया गया है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में इन वाहनों की तैनाती से यह सुनिश्चित हुआ है कि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में सेना तुरंत प्रतिक्रिया दे सके।

ये एटीवी सेना की रणनीतिक ताकत को और मजबूत बनाते हैं और LAC पर सुरक्षा सुनिश्चित करने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। भारतीय सेना द्वारा इस तरह की आधुनिक तकनीकों का उपयोग न केवल सैनिकों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है, बल्कि देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित करता है।

Nepal Army chief India visit: नेपाल सेना प्रमुख का भारत दौरा; गोरखा भर्ती और रक्षा सहयोग पर रहेगा जोर

Nepal Army Chief India Visit: Focus on Gorkha Recruitment and Defence Cooperation

Nepal Army chief India visit: नेपाल सेना के प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल 11 से 14 दिसंबर के बीच भारत के आधिकारिक दौरे पर होंगे। यह दौरा भारत-नेपाल के रक्षा संबंधों को मजबूती देने और गोरखा भर्ती प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की संभावनाओं पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी भी नेपाल दौरे पर गए थे।

Nepal Army Chief India Visit: Focus on Gorkha Recruitment and Defence Cooperation

 

Nepal Army chief India visit: गोरखा भर्ती पर चर्चा

गोरखा सैनिक भारतीय सेना की रीढ़ माने जाते हैं। लंबे समय से भारतीय सेना में गोरखा सैनिकों की भूमिका न केवल सामरिक बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण रही है। हालांकि, अग्निवीर योजना के लागू होने के बाद, नेपाल ने इस भर्ती प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगा दी थी। नेपाल सरकार ने इस योजना की कुछ शर्तों पर अपनी चिंताओं का ज़िक्र किया था।

जनरल सिग्देल का यह दौरा गोरखा भर्ती को फिर से शुरू करने के लिए दोनों देशों के बीच संवाद का एक अहम मौका प्रदान करेगा। यदि यह प्रक्रिया पुनः शुरू होती है, तो यह न केवल दोनों देशों के बीच के रिश्तों को मजबूत बनाएगी, बल्कि नेपाल को आर्थिक लाभ भी पहुंचाएगी।

Nepal Army Chief India Visit: Focus on Gorkha Recruitment and Defence Cooperation

रक्षा सहयोग में नई संभावनाएं

जनरल सिग्देल की भारत यात्रा के दौरान कई उच्चस्तरीय बैठकों का आयोजन होगा। वे भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा, वे देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में कैडेट्स की पासिंग आउट परेड में निरीक्षण अधिकारी के रूप में भी शामिल होंगे।

यह भी पढ़ें: Indian Army Chief Nepal Visit: क्या नेपाली गोरखा भारतीय सेना में होंगे शामिल? जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नेपाल में पूर्व गोरखा सैनिकों से की मुलाकात

भारत के राष्ट्रपति द्वारा जनरल सिग्देल को भारतीय सेना के मानद जनरल की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा। यह परंपरा भारत और नेपाल के बीच 1950 से चली आ रही है, जिसमें दोनों देशों के सेना प्रमुखों को एक-दूसरे की सेना का मानद जनरल नियुक्त किया जाता है।

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दौरे का रणनीतिक महत्व

यह दौरा तब हो रहा है, जब भारत और नेपाल दोनों ही अपने रणनीतिक और रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। नवंबर 2024 में भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नेपाल का दौरा किया था। उनके दौरे के दौरान, प्रशिक्षण कार्यक्रम, संयुक्त अभ्यास और गोरखा भर्ती से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई थी।

नेपाल और भारत की सेनाओं के बीच मजबूत संबंध गोरखा रेजिमेंट के माध्यम से और गहरे हुए हैं। वर्तमान में, भारतीय सेना में 30,000 से अधिक गोरखा सैनिक सेवा दे रहे हैं। यह रिश्ता न केवल सैन्य स्तर पर बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच भी एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव है।

नेपाल-भारत के मजबूत संबंधों का प्रतीक

भारत और नेपाल के बीच सैन्य संबंधों को ऐतिहासिक रूप से मजबूत बनाने में कई परंपराओं और उच्चस्तरीय दौरों का बड़ा योगदान है। भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ जनरल केएम करिअप्पा को 1950 में नेपाली सेना के मानद जनरल का खिताब दिया गया था। यह परंपरा दोनों देशों के बीच विश्वास और सम्मान का प्रतीक है।

जनरल सिग्देल का यह दौरा दोनों देशों के नेतृत्व को एक बार फिर अपने रक्षा संबंधों की समीक्षा करने और भविष्य की रणनीतियों पर विचार करने का मौका देगा।

द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा

नेपाल और भारत के बीच नियमित उच्चस्तरीय बैठकों और आदान-प्रदान से द्विपक्षीय साझेदारी को नई गति मिली है। सेना प्रमुखों के दौरे न केवल औपचारिकता हैं, बल्कि वे रक्षा सहयोग को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण जरिया भी हैं।

इस दौरे के दौरान, रक्षा तकनीकों और संयुक्त अभ्यासों पर भी चर्चा की संभावना है, जो क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने में मदद करेंगे।

Indian Army: सैनिकों ने निभाया साथी होने का फर्ज; बेटी की शादी में पिता की कमी पूरी कर कायम की मिसाल

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Indian Army: भारतीय सेना के 20 जाट रेजिमेंट के सूबेदार देवेंद्र सिंह अपनी बेटी की शादी की तैयारियों में जुटे थे, लेकिन उनकी अचानक मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। देवेंद्र सिंह ने शादी से सिर्फ एक महीने पहले वीआरएस लिया था, और शादी से दो दिन पहले एक सड़क दुर्घटना में चल बसे। उनकी मौत से जहां शादी के घर में खुशियों का माहौल मातम में बदल गया, वहीं सेना के साथियों ने इस मुश्किल घड़ी में अपने भाईचारे की मिसाल पेश की।

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Indian Army: सदमे में आई बेटी, पिता के साथियों ने संभाला

गुरुवार को 48 वर्षीय देवेंद्र सिंह मथुरा के मांट-राया रोड पर शादी की तैयारियों के सिलसिले में जा रहे थे। रास्ते में उनकी कार एक खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई, जिसमें उनकी और उनके चचेरे भाई उदयवीर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे से शादी का घर मातम में बदल गया। देवेंद्र की बेटी ज्योति, जिसकी शादी होने वाली थी, सदमे में आ गई और उसने शादी करने से इनकार कर दिया।

भाईचारे की झलक

जब देवेंद्र सिंह के पूर्व कमांडिंग अधिकारी कर्नल चंद्रकांत शर्मा को इस दुखद घटना के बारे में पता चला, तो उन्होंने तुरंत कदम उठाया। पंजाब से उनकी बटालियन के पांच जवान—सूबेदार सोनवीर सिंह और मुकेश कुमार, हवलदार प्रेमवीर, और सिपाही विनोद व बेटाल सिंह—मथुरा पहुंचे। इन सैनिकों ने देवेंद्र सिंह के परिवार को इस कठिन समय में सहारा दिया और शादी को संपन्न कराने का जिम्मा उठाया।

जवानों ने संभाली जिम्मेदारी

सैनिकों ने ना केवल शादी की तैयारियों को संभाला, बल्कि पूरे खर्च का भार भी उठाया। उन्होंने मेहमानों की मेजबानी की, ज्योति को समझाया और पिता की भूमिका निभाते हुए ‘कन्यादान’ भी किया। यह रस्म जो आमतौर पर पिता द्वारा निभाई जाती है, इन सैनिकों के लिए अपने साथी के प्रति सम्मान और समर्पण की अद्भुत मिसाल बन गई।

दूल्हा भी सेना में जवान

दूल्हा, सौरभ सिंह, इन दिनों मणिपुर में तैनात है, वह अपनी बारात लेकर हाथरस के धनौती बुर्ज गांव से मंत पहुंचा। सौरभ के पिता, हवलदार सत्यवीर, भी देवेंद्र सिंह के साथ सेना में सेवाएं दे चुके थे। दोनों परिवारों के बीच वर्षों से बना यह रिश्ता इस मुश्किल समय में और मजबूत हो गया।

परिवार को मिली नई ताकत

सैनिकों की इस अद्भुत पहल ने परिवार को ना केवल संभाला, बल्कि शादी को भी गरिमा और सम्मान के साथ संपन्न किया। ज्योति के चाचा नरेंद्र सिंह ने कहा, “परिवार पूरी तरह टूट चुका था, लेकिन सैनिकों ने कदम बढ़ाया और पूरे माहौल को बदल दिया।”

गांव वालों ने की सराहना

शादी में मौजूद रिश्तेदार और गांववाले सैनिकों की इस पहल से भावुक हो उठे। आकाश सिंह, जो ज्योति के चचेरे भाई हैं, ने बताया, “इन सैनिकों की उपस्थिति ने सब कुछ बदल दिया। यहां तक कि कमांडिंग ऑफिसर ने भी परिवार से बात कर उन्हें सांत्वना दी।”

पिता का सपना हुआ पूरा

ज्योति के लिए यह पल बेहद मुश्किल था, लेकिन सैनिकों के हौसले और समर्थन ने उसे अपने पिता का सपना पूरा करने की ताकत दी। सैनिकों ने यह सुनिश्चित किया कि देवेंद्र सिंह की अनुपस्थिति में भी शादी उनके सपनों के मुताबिक हो।

यह घटना भारतीय सेना के भाईचारे और मानवता की एक बेहतरीन मिसाल है। सैनिकों ने यह दिखा दिया कि वे ना केवल देश की रक्षा में बल्कि अपने साथियों के परिवारों के प्रति भी गहरी संवेदनशीलता रखते हैं।

देवेंद्र सिंह के साथियों की यह पहल केवल एक शादी को सफल बनाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह एक संदेश भी थी कि सेना में रिश्ते खून के नहीं, बल्कि कर्तव्य और सम्मान के होते हैं।

सेना के प्रति सम्मान बढ़ा

गांववालों और रिश्तेदारों ने सैनिकों के इस अद्वितीय समर्पण को देखकर सेना के प्रति अपना सम्मान और प्यार जाहिर किया। उन्होंने इसे एक ऐसी घटना बताया, जो जीवनभर उनके दिलों में बसी रहेगी।

Battle of Rezang La: आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी को भेंट की ‘मेजर शैतान सिंह, PVC (P): द मैन इन हाफ लाइट’ पुस्तक

Battle of Rezang La: Army Chief General Upendra Dwivedi Presented with 'Major Shaitan Singh, PVC (P): The Man in Half Light' Book

Battle of Rezang La: Major Shaitan Singh, PVC (P): The Man in Half Light: देश के वीर सैनिकों की शहादत और उनकी बहादुरी की कहानियाँ हमेशा प्रेरणा का स्रोत रही हैं। मेजर शैतान सिंह की वीरता पर आधारित पुस्तक ‘मेजर शैतान सिंह, PVC (P): द मैन इन हाफ लाइट’ एक ऐसी ही प्रेरणादायक गाथा है, जिसने मेजर शैतान सिंह के अदम्य साहस और रेजांग ला के ऐतिहासिक युद्ध को जीवित रखा है। इस पुस्तक का विमोचन पहले ही हो चुका था, और अब युवा लेखक जय समोटा ने इसे भारतीय सेना के प्रमुख, जनरल उपेंद्र द्विवेदी को सम्मान स्वरूप भेंट किया।

Battle of Rezang La: Army Chief General Upendra Dwivedi Presented with 'Major Shaitan Singh, PVC (P): The Man in Half Light' Book

Battle of Rezang La: किताब में क्या है खास

जय समोटा द्वारा लिखी गई यह पुस्तक मेजर शैतान सिंह के जीवन पर आधारित है, जिनका नाम भारतीय सेना के इतिहास में रेजांग ला युद्ध के नायक के रूप में अंकित है। पुस्तक में मेजर शैतान सिंह की वीरता के साथ-साथ उनकी जीवन यात्रा को भी समर्पित किया गया है।

पुस्तक में 100 से अधिक दुर्लभ और ऐतिहासिक तस्वीरें हैं, जो मेजर शैतान सिंह की वीरता, संघर्ष और शहादत को बखूबी प्रदर्शित करती हैं। इन चित्रों के माध्यम से पाठकों को उस समय की परिस्थितियों और युद्ध के माहौल का अहसास होता है। इन तस्वीरों से यह स्पष्ट होता है कि मेजर शैतान सिंह ने किस प्रकार अपने सैनिकों के साथ मिलकर चीनी सेना के खौफनाक हमले का सामना किया।

ब्रिगेडियर आरवी जाटार की भूमिका

इस पुस्तक में एक महत्वपूर्ण योगदान ब्रिगेडियर आरवी जाटार का भी है, जो मेजर शैतान सिंह के साथ रेजांग ला में लड़े थे। पुस्तक की भूमिका में उन्होंने मेजर शैतान सिंह के साहस और नेतृत्व को याद किया है। उन्होंने लिखा है, “मेजर शैतान सिंह का नेतृत्व भारतीय सेना के लिए एक उदाहरण है। उनके हौसले और समर्पण ने न केवल उनकी टुकड़ी को प्रेरित किया, बल्कि पूरी सेना को एक नई दिशा दी।”

ब्रिगेडियर जाटार ने यह भी कहा कि मेजर शैतान सिंह का शौर्य और समर्पण भारतीय सेना के लिए एक प्रेरणा बना रहेगा, और उनकी वीरता को हमेशा याद किया जाएगा।

आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी को भेंट

जय समोटा ने सोमवार को ‘मेजर शैतान सिंह, PVC (P): द मैन इन हाफ लाइट’ पुस्तक को भारतीय सेना के प्रमुख, जनरल उपेंद्र द्विवेदी को भेंट की। जनरल द्विवेदी ने इस मौके पर कहा कि यह भारतीय सेना के वीर सपूतों की यादों को संरक्षित रखने का एक उत्कृष्ट प्रयास है। उन्होंने कहा, “मेजर शैतान सिंह की वीरता भारतीय सेना के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है, और यह पुस्तक उनके बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।”

जनरल द्विवेदी ने इस पुस्तक को भारतीय सेना के लिए एक अमूल्य धरोहर बताया और कहा कि यह पुस्तक न केवल मेजर शैतान सिंह की गाथा को जीवित रखेगी, बल्कि हमारे जवानों के साहस और समर्पण को भी सम्मानित करेगी।

रेजांग ला का युद्ध: एक स्वर्णिम अध्याय

रेजांग ला का युद्ध भारतीय सेना के इतिहास में न भूलने वाली जंग रही है, जिसमें मेजर शैतान सिंह की कमांड में भारतीय सैनिकों ने चीन के 5,000 सैनिकों का बहादुरी से मुकाबला किया था। इस युद्ध में भारतीय सैनिकों की संख्या महज 120 थी, जबकि चीनी सेना के पास भारी संख्या में सैनिक थे। फिर भी, मेजर शैतान सिंह और उनके सैनिकों ने न केवल चीनी हमले का मुकाबला किया, बल्कि उन्हें भारी नुकसान भी पहुंचाया।

यह युद्ध भारतीय सेना के शौर्य और वीरता का प्रतीक बन चुका है। पुस्तक में इस युद्ध के हर पहलू को विस्तार से बताया गया है, जिससे यह समझने में मदद मिलती है कि कैसे एक छोटे से युद्ध क्षेत्र में अद्वितीय साहस और नेतृत्व ने चीनियों के हौसले पस्त कर दिया थे।

‘मेजर शैतान सिंह, PVC (P): द मैन इन हाफ लाइट’ पुस्तक न केवल मेजर शैतान सिंह की शहादत को बयां करती है, बल्कि भारतीय सेना के प्रत्येक जवान के साहस, बलिदान और देशप्रेम की गाथा भी है। यह पुस्तक हर भारतीय को अपने देश के वीरों को याद करने और उनके योगदान को समझने का अवसर देती है।

CSD Card Controversy: मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन संस्थान (MP-IDSA) के डीजी के पास मिला अनधिकृत कैंटीन स्मार्ट कार्ड, रक्षा मंत्रालय बोला- ‘भूलवश’ हुआ जारी

CSD Card Controversy: MP-IDSA DG Found with Unauthorized Canteen Smart Card, MoD Calls It an 'Error'

CSD Card Controversy: देश के प्रमुख थिंक टैंक मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन और विश्लेषण संस्थान (MP-IDSA) के महानिदेशक सुजान आर. चिनॉय के पास एक कैंटीन स्मार्ट कार्ड (CSD) होने का मामला सामने आया है, जबकि वे और संस्थान के अन्य कर्मचारी इस सुविधा के पात्र नहीं हैं।

CSD Card Controversy: MP-IDSA DG Found with Unauthorized Canteen Smart Card, MoD Calls It an 'Error'

रक्षा मंत्रालय (MoD) ने इस विषय पर दायर एक सूचना के अधिकार (RTI) के जवाब में स्पष्ट किया कि यह कार्ड “भूलवश” जारी किया गया था। जवाब में कहा गया, “सुजान चिनॉय कैंटीन सुविधाओं के लिए पात्र नहीं हैं। यह कार्ड त्रुटिपूर्ण तरीके से बनाया गया है।”

CSD Card Controversy: RTI में क्या हुआ खुलासा?

यह जानकारी 22 अक्टूबर, 2024 को दिए गए एक जवाब में सामने आई। रक्षा मंत्रालय (सेना) में केंद्रीय जन सूचना अधिकारी ब्रिगेडियर तमोजीत बिस्वास, ने केरल स्थित ‘द पॉलिटी’ नामक एक पब्लिकेशन की आऱटीआई में इस बात की जानकारी दी।

CSD कार्ड पाने के लिए पात्रता के तहत आवेदक को एक गारंटी पत्र पर हस्ताक्षर करना होता है, जिसे एक निर्धारित अधिकारी द्वारा अनुमोदित किया जाना आवश्यक है। आवेदन के साथ वेतन पर्ची, पैन कार्ड, और 165 रुपये शुल्क जमा करना होता है। हालांकि, DG सुजान चिनॉय ने इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

CSD कार्ड कैसे मिला?

संस्थान के कर्मचारियों ने बताया कि महानिदेशक के नाम पर यह कार्ड 2022 में जारी किया गया था और इसे जनवरी 2023 में रिन्यू भी किया गया। कुछ कर्मचारियों ने यह भी बताया कि इस कार्ड का उपयोग करके उन्हें फोर व्हीलर और दूसरी चीजें भी खरीदी हैं।

नीतियों के अनुसार, केवल अधिकृत कार्डधारक ही यूनिट रन कैंटीन (URC) से सामान खरीद सकते हैं। अन्य किसी व्यक्ति को वहां प्रवेश की अनुमति नहीं है।

RTI के जवाब में बताया गया कि कार्ड का आवेदन 90 दिनों तक रखा जाता है, लेकिन DG के मामले में यह आवेदन लगभग एक साल नौ महीने पुराना होने के कारण उपलब्ध नहीं है।

क्या कार्रवाई होगी?

जब इस मामले में आगे की कार्रवाई के बारे में पूछा गया, तो सूत्र स्पष्ट जवाब देने में असमर्थ रहे। हालांकि, यह स्पष्ट है कि कार्ड को “हॉटलिस्ट” कर दिया गया है, जिसका मतलब है कि इसे रद्द कर दिया गया है।

क्या है MP-IDSA

1965 में स्थापित MP-IDSA, रक्षा मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित एक स्वायत्त निकाय है, जिसे सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत किया गया है। आमतौर पर रक्षा मंत्री संस्थान के अध्यक्ष होते हैं, हालांकि कुछ अपवाद भी रहे हैं, जैसे कि प्रणब मुखर्जी, जिन्होंने विदेश मंत्री रहते हुए इस पद को संभाला।

2020 में, संस्थान का नाम दिवंगत रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के सम्मान में बदला गया। संस्थान की नीतियों को लागू करने की जिम्मेदारी इसकी कार्यकारी परिषद (EC) पर है, जिसमें रक्षा और विदेश सचिव जैसे पदेन सदस्य शामिल होते हैं।

कर्मचारियों का विरोध और COVID-19 का मामला

2021 में, संस्थान के 19 कर्मचारियों ने इसके खिलाफ एक कानूनी मामला दायर किया, जो इसके 59 वर्षों के इतिहास में पहली बार हुआ। अदालत ने यह माना कि MP-IDSA के प्रशासन पर रक्षा मंत्रालय का “गहरा और व्यापक नियंत्रण” है, जिससे यह राज्य का एक उपकरण बनता है और इसे संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में लाता है।

COVID-19 महामारी के दौरान, संस्थान में सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी के कारण संक्रमण फैलने के आरोप भी लगे। DG ने अप्रैल 2020 से संस्थान को 100 प्रतिशत क्षमता के साथ चालू रखने पर जोर दिया, जबकि उस समय केवल आवश्यक सेवाओं को अनुमति दी गई थी।

क्या है CSD कार्ड का महत्व?

CSD कार्ड भारतीय सशस्त्र बलों के कर्मियों और रक्षा मंत्रालय के पात्र कर्मचारियों को सुविधाजनक मूल्य पर उत्पाद और सेवाएं उपलब्ध कराने का एक साधन है। यह कार्ड विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो रक्षा सेवाओं से जुड़े हैं।

यह मामला न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं की खामियों को उजागर करता है, बल्कि इसे ठीक करने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

INS Tushil: भारतीय नौसेना में शामिल हुआ नया मल्टी-रोल स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट

INS Tushil: New Multi-Role Stealth Guided Missile Frigate Joins the Indian Navy

INS Tushil: भारतीय नौसेना का नवीनतम मल्टी-रोल स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट, आईएनएस तुशील (F 70), आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में रूस के कैलिनिनग्राद स्थित यांतर शिपयार्ड में कमीशन किया गया। इस ऐतिहासिक मौके पर रक्षा मंत्री ने इसे भारत की बढ़ती समुद्री ताकत और भारत-रूस के दीर्घकालिक संबंधों में एक नया मील का पत्थर करार दिया।

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समुद्री शक्ति में बढ़ोतरी का प्रतीक है INS Tushil

राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर कहा, “आईएनएस तुशील भारत की समुद्री शक्ति में बढ़ोतरी का प्रतीक है। यह जहाज भारत और रूस की गहरी मित्रता, साझे मूल्यों और आपसी विश्वास का प्रमाण है।” उन्होंने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ा कदम बताते हुए कहा कि इसमें ‘मेड इन इंडिया’ के तहत कई महत्वपूर्ण तकनीकों को शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा कि यह जहाज भारतीय और रूसी उद्योगों की संयुक्त क्षमता का प्रतीक है और भारत के तकनीकी उत्कृष्टता की यात्रा को दर्शाता है।

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सुरक्षा और विकास के लिए प्रतिबद्धता (SAGAR)

राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण ‘SAGAR’ (Security and Growth for All in the Region) का उल्लेख करते हुए इसे भारत की समुद्री नीति की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा, “SAGAR भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जो सामूहिक सुरक्षा, समुद्री सहयोग और सतत विकास को बढ़ावा देता है। इस प्रयास में हमें हमेशा रूस का समर्थन मिला है।”

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हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की भूमिका

राजनाथ सिंह ने बताया कि भारतीय नौसेना ने हमेशा हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में शांति और स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, “हमारी नौसेना ने विभिन्न समुद्री मार्गों पर समुद्री डकैती, हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी, और गैर-राज्यीय गतिविधियों को विफल किया है।”

रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय नौसेना क्षेत्र के मित्र देशों को मानवीय सहायता और आपदा राहत प्रदान करने में हमेशा आगे रही है।

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आईएनएस तुशील की खासियतें

आईएनएस तुशील, क्रिवाक III क्लास का अपग्रेडेड फ्रिगेट है। यह नौसैनिक युद्ध के चारों आयामों – वायु, सतह, पानी के नीचे और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम में कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

एडवाांस वेपन सिस्टम

  • ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें: भारत-रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित।
  • सतह से हवा में मार करने वाली श्तिल मिसाइलें
  • एंटी-सबमरीन टॉरपीडो और रॉकेट्स
  • इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और संचार की उन्नत प्रणाली

हेलीकॉप्टर क्षमता

यह जहाज कामोव 28 एंटी-सबमरीन हेलीकॉप्टर और कामोव 31 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग हेलीकॉप्टर को ले जाने में सक्षम है, जो इसकी ताकत को और बढ़ाते हैं।

स्पीड और स्टील्थ तकनीक

  • जहाज 30 नॉट्स से अधिक गति प्राप्त करने में सक्षम है।
  • उन्नत स्टील्थ विशेषताएं इसे दुश्मनों से छिपने में मदद करती हैं।

यह जहाज अत्याधुनिक गैस टरबाइन प्रणोदन प्रणाली से लैस है, जो उच्च स्तर की स्वचालन क्षमता प्रदान करती है।

निर्माण और परीक्षण

  • कील बिछाई गई: 12 जुलाई, 2013
  • लॉन्च: अक्टूबर 2021
  • पहला समुद्री परीक्षण: 25 जनवरी, 2024
  • सभी परीक्षण पूरे: सितंबर 2024

यह जहाज सभी रूसी हथियार प्रणालियों के परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा कर चुका है और युद्ध-तैयार स्थिति में जल्द ही भारत पहुंचेगा।

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इस कार्यक्रम में रूसी रक्षा उपमंत्री अलेक्जेंडर वासिलयेविच फोमिन, कैलिनिनग्राद के गवर्नर एलेक्सी बेजप्रोज़्वान्याख, रूसी नौसेना के कमांडर-इन-चीफ एडमिरल अलेक्जेंडर मोइसेव, और भारत के रूस में राजदूत विनय कुमार सहित कई विशिष्ट अतिथि मौजूद थे।

मजबूत होंगे भारत-रूस रिश्ते

रक्षा मंत्री ने भारत-रूस के सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का आह्वान करते हुए कहा कि दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान, और आतंकवाद विरोधी अभियान जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे।

INNOYODHA 2024: भारतीय सेना के टेक्नोलॉजी इवेंट में अग्निवीर ने गाड़े झंडे! आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हथियार बनाने में निभाई अहम भूमिका

INNOYODHA 2024: Agniveers Make Mark at Indian Army's Technology Event, Play Key Role in Developing AI-Enabled Weapon Systems

INNOYODHA 2024: भारतीय सेना ने हाल ही में नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में ‘इननो-योद्धा’ कार्यक्रम का आयोजन किया था, जिसमें सेना के जवानों की तरफ से तैयार किए गए 75 नए इनोवेशंस पेश किए गए थे। इन कार्यक्रम का उद्देश्य मॉर्डन वारफेयर की चुनौतियों का सामना करना और भारतीय सेना को और अधिक मजबूत बनाना है।

INNOYODHA 2024: Agniveers Make Mark at Indian Army's Technology Event, Play Key Role in Developing AI-Enabled Weapon Systems

इस कार्यक्रम का आयोजन सेना डिजाइन ब्यूरो ने किया था, जो भविष्य की युद्ध नीति के लिए टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट पर जोर देती है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इस पहल के बारे में बात करते हुए कहा, “हाल के युद्धों ने यह सिद्ध कर दिया है कि इनोवेशन केवल एक शब्द नहीं है, यह एक मानसिकता है। यह वह चिंगारी है जो प्रगति को प्रेरित करती है और भविष्य को आकार देती है।”

इस आयोजन में कुल 75 इनोवेशन दिखाए गए थे, जिनमें से 22 को सम्मानित किया गया। इन इनोवेशंस में ड्रोन से लेकर साइबर रक्षा उपकरण तक शामिल थे। इन परियोजनाओं को ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत आगे और विकसित किया जाएगा और फिर बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए निजी उद्योग को सौंपा जाएगा।

INNOYODHA 2024: अग्निवीर ने बनाया AI प्रोजेक्ट

इस आयोजन में खास बात यह थी कि इसमें अग्निवीर गारे प्रतीक (Gare Pratik) ने बी अपना प्रोजेक्ट पेश किया था। वे पहले बैच के अग्निवीरों में से एक हैं। उन्होंने सेना के उत्तरी कमांड के तहत विकसित किए गए Ten AI-Enabled Weapon System (TAIWS) में अहम भूमिका निभाई। गारे प्रतीक ने अनुभवी अधिकारियों के साथ मिलकर इस सिस्टम के AI एल्गोरिदम को बेहतर बनाने और यूजर इंटरफेस को डिज़ाइन करने में मदद की।

गारे प्रतीक ने कहा, “इस तरह के इनोवेशन का हिस्सा बनना मेरे जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव रहा है। इसने मुझे यह दिखाया कि कैसे तकनीक और टीमवर्क हमारे राष्ट्रीय रक्षा दृष्टिकोण को नया रूप दे सकते हैं।”

TAIWS एक अत्याधुनिक प्रणाली है, जो AI आधारित निर्णय लेने और मल्टी-सेंसर फ्यूजन का उपयोग करती है, जिससे युद्ध के मैदान में स्थिति की समझ और ऑपरेशनल प्रभावशीलता को बढ़ावा मिलता है। लेफ्टिनेंट कर्नल प्रशांत अग्रवाल ने इसे कम दृश्यता वाले इलाकों के लिए एक गेम-चेंजर बताया। उन्होंने कहा, “प्रयोगों, मजबूतकरण और उचित प्रक्रिया के बाद इस बिना चालक वाले हथियार को सेना में शामिल किया जा सकता है।”

INNOYODHA 2024 की सफलता और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

इननो-योद्धा कार्यक्रम में कुछ इनोवेशंस को भी सम्मानित किया गया, जिनमें ‘एक्सप्लोडर’, ‘अग्निास्त्र’ और ‘विद्युत रक्षक’ जैसी परियोजनाएं शामिल हैं, जो अब निजी उद्योग को सौंप दी गई हैं। इस पहल के चार वर्षों में 26 बौद्धिक संपदा अधिकार (IPRs) भारतीय सेना को मिले हैं, जो भारतीय सेना के आत्मनिर्भर बनने के प्रयासों को मजबूत करते हैं।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, “इन इनोवेशन ने हमें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम उठाने में मदद की है। हमें विश्वास है कि यह प्रयास भविष्य में हमारी रक्षा क्षमता को और बेहतर बनाएगा।”

INNOYODHA 2024 के आयोजन से साबित होता है कि भारतीय सेना समय के साथ तकनीकी इनोवेशंस और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दे रही है। लैंड वारफेयर में आने वाली नई चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए इनोवेशन की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा महसूस हो रही है। विशेषकर साइबर सुरक्षा, ड्रोन तकनीकी और आर्टिफिशियल इटेंलिजेंस जैसे क्षेत्रों में विकास की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

इन तकनीकी नवाचारों से न केवल भारतीय सेना की लड़ाई की क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि इससे भारतीय रक्षा क्षेत्र को भी वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी। ‘इननो-योद्धा’ जैसी पहल भारत को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में और भी मजबूत करेगी, और यह साबित करेगा कि भारतीय सेना को केवल ताकतवर लड़ाकू बल ही नहीं, बल्कि तकनीकी दृष्टिकोण से भी दुनिया में सबसे अग्रणी माना जाएगा।