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LCA Tejas Mk1A को लेकर IAF प्रमुख ने सुनाई फिर खरी-खरी, HAL से क्यों नाखुश है वायुसेना? आप भी सुनें

Tejas Mk1A Order: Indian Air Force Halts New Procurement Amid Delivery Delays and Production Challenges

LCA Tejas Mk1A: भारतीय वायुसेना (IAF) के प्रमुख एयर चीफ मार्शल (ACM) अमर प्रीत सिंह ने हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के प्रति अपनी नाराज़गी खुलकर जताई है। बेंगलुरु में एरो इंडिया शो के दौरान उन्होंने HAL के चेयरमैन डी.के. सुनील से सीधे सवाल करते हुए तेजस Mk1A जेट्स की देरी पर नाराजगी जाहिर की। वायुसेना प्रमुख ने जिस तरह से खुल कर अपनी नाराजगी जाहिर की है, उनके शब्द शायद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के अधिकारियों की नींद उड़ाने के लिए काफी होंगे।

IAF Chief Slams HAL Over LCA Tejas Mk1A Delays – Why Is the Air Force Unhappy?

LCA Tejas Mk1A: बोले- मुझे HAL पर कोई भरोसा नहीं

हाल ही में एरो इंडिया में एक कार्यक्रम के दौरान, एयर चीफ मार्शल सिंह ने HAL के चेयरमैन डीके सुनील के सामने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा, “मैं आपको केवल यह बता सकता हूं कि हमारी जरूरतें और चिंताएं क्या हैं। आपको हमारी चिंताओं को दूर करना होगा और हमें भरोसा दिलाना होगा। फिलहाल, मुझे HAL पर कोई भरोसा नहीं है, और यह बहुत ही गलत है।”

उन्होंने यह बातें उस वक्त कहीं, जब एयर चीफ मार्शल सिंह HJT-36 यशस के कॉकपिट में बैठे ब्रीफिंग ले रहे थे। यह पूरी बातचीत एक वीडियो में कैद हो गई, जिसे डिफेंस न्यूज़ पोर्टल ने अपने यूट्यूब चैनल पर साझा किया है। इस छह मिनट के वीडियो में ACM सिंह के चेहरे पर नाराजगी साफ झलक रही थी।

IAF Chief Slams HAL Over LCA Tejas Mk1A Delays – Why Is the Air Force Unhappy?

LCA Tejas Mk1A: फरवरी तक 11 तेजस Mk1A जेट्स देने का किया था वादा

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि उन्हें फरवरी तक 11 तेजस Mk1A जेट्स तैयार होने का वादा किया गया था, लेकिन “एक भी विमान तैयार नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि HAL का काम करने का तरीका मिशन मोड में नहीं है, जो इस प्रोजेक्ट में देरी की सबसे बड़ी वजह है।

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सबसे गंभीर बात यह रही कि वायुसेना प्रमुख ने आरोप लगाया कि Aero India 2025 शो में पेश किए गए तेजस Mk1A जेट्स वास्तव में Mk1A नहीं हैं। “आपने जो विमान उड़ाया और उसे Mk1A कहा, वह Mk1A नहीं है। केवल सॉफ्टवेयर बदलने या लुक्स में बदलाव करने से यह Mk1A नहीं बन जाता। जब हथियार और क्षमताएं बढ़ेंगी, तभी इसे Mk1A कहा जा सकता है।”

वायुसेना प्रमुख की यह नाराजगी ऐसे समय पर सामने आई है, जब एक दिन पहले ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने HAL के तेजस Mk1A जेट्स के उत्पादन संयंत्र का दौरा किया था। उसके ठीक बाद Aero India शो में चार Mk1A जेट्स ने पहली बार सार्वजनिक उड़ान भी भरी थी।

वायुसेना प्रमुख बोले- जादू की छड़ी की जरूरत है

जब HAL की लीडरशिप एंड टेस्टिंग टीम ने आईएएफ चीफ सिंह की बातों को “ध्यानपूर्वक नोट करने” और सुधार करने का भरोसा दिया, तो उन्होंने जवाब दिया, “अगर मैं गलत साबित हुआ तो मैं सबसे खुश व्यक्ति होऊंगा। मुझे लगता है कि केवल कुछ लोग ही मेहनत कर रहे हैं, या फिर सभी बिना बड़ी तस्वीर को देखे अपने-अपने क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। कुछ बदलना होगा, कोई बड़ा बदलाव। यह सब ठीक करने के लिए किसी जादू की छड़ी की जरूरत है। अब समय आ गया है।”

मीडिया कवरेज पर भी जताई नाराज़गी

अपने पिछले बयानों की मीडिया में निगेटिव कवरेज को लेकर आईएएफ चीफ ने कहा, “मुझे यह मजाक लगता है कि जब मैं कुछ कहता हूं तो मीडिया केवल नकारात्मक हिस्से को ही उठाता है। मैं केवल एक मुद्दा उठाने की कोशिश कर रहा हूं। मैं किसी पर उंगली नहीं उठा सकता, क्योंकि तीन उंगलियां मेरी ओर भी इशारा कर रही होती हैं।”

IAF Chief Slams HAL Over LCA Tejas Mk1A Delays – Why Is the Air Force Unhappy?

पहले भी कई बार एचएएल पर उठा चुके हैं सवाल

हालांकि यह पहली बार नहीं जब वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने तेजस की डिलीवरी को लेकर सवाल उठाए हों। वे इससे पहले ही कई बार एचएएल को कठघरे में खड़ा कर चुके हैं। पिछले महीने 9 जनवरी को भी 21वें सुब्रतो मुखर्जी सेमिनार में ‘वायुक्षेत्र में आत्मनिर्भरता’ पर बोलते हुए उन्होंने तेजस लड़ाकू विमानों के अधिग्रहण में हो रही देरी पर गहरी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था जहां एक ओर चीन छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का परीक्षण कर रहा है, वहीं भारत अभी भी स्वदेशी तेजस विमानों के अधिग्रहण का इंतजार कर रहा है। एयर चीफ मार्शल सिंह ने स्पष्ट किया था कि रक्षा क्षेत्र में समय का पालन बेहद जरूरी है, क्योंकि तकनीक समय के साथ अप्रासंगिक हो जाती है।

उन्होंने कहा था कि तेजस परियोजना की शुरुआत 1984 में हुई थी और 17 साल बाद इसका पहला विमान उड़ान भर सका। 2016 में तेजस को वायुसेना में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन 2025 तक भी पहले 40 विमानों की डिलीवरी पूरी नहीं हो सकी है। उन्होंने इसे देश की उत्पादन क्षमता की कमजोरी बताया था।

एयर चीफ मार्शल सिंह ने सुझाव दिया था कि रक्षा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, ताकि कंपनियों को यह एहसास हो कि ऑर्डर छिन भी सकते हैं। सिंह ने अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश बढ़ाने की जरूरत पर भी बल देते हुए कहा था फिलहाल रक्षा बजट का केवल 5% अनुसंधान पर खर्च किया जा रहा है, जबकि इसे 15% तक बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने चेताया कि अगर तकनीक समय पर विकसित नहीं हुई, तो उसका कोई फायदा नहीं होगा।

Archer-NG UAV: भारत का स्वदेशी आर्म्ड ड्रोन ‘आर्चर-NG’ जल्द उड़ान भरने को तैयार, 34 घंटे तक लगातार भर सकता है उड़ान

Archer-NG UAV: India Indigenous Armed Drone Ready for Takeoff, First Sortie Next Month!

Archer-NG UAV: मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस ड्रोन अर्चर एनजी (Archer NG) को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। स्वदेश में ही बने अनमैंड एरियल व्हीकल (UAV) अर्चर एनजी को न केवल सर्विलांस बल्कि स्ट्राइक मिशनों के लिए तैयार किया गया है। वहीं, इसे जल्द ही भारतीय सेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा। एरो इंडिया 2025 के दौरान इस लेटेस्ट ड्रोन की क्षमताओं और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई।

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Archer-NG UAV के फीचर्स 

यह UAV मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (MALE) श्रेणी में आता है, जिसका मुख्य कार्य इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनसेंस (ISR) है। हालांकि, यह केवल निगरानी तक सीमित नहीं है; अर्चर एनजी स्ट्राइक मिशन भी अंजाम दे सकता है। यह UAV 300 किलोग्राम तक हथियार ले जाने में सक्षम है।

यह ड्रोन सिंगल इंजन ट्विन बूम कॉन्फ़िगरेशन में तैयार किया गया है, जिससे यह वजन में हल्का और बढ़िया परफॉरमेंस भी देता है। इस UAV में कई तरह के पेलोड्स लगाए जा सकते हैं, जिनमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिक सेंसर, रडार पेलोड और सिचुएशनल अवेयरनेस इक्विपमेंट्स शामिल हैं। यह दिन और रात दोनों समय, किसी भी मौसम में मिशन को अंजाम देने में सक्षम है।

Archer-NG UAV: नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध के लिए तैयार

अर्चर एनजी को आधुनिक नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह मैन-यून्मैन्ड टीमिंग (MUM-T) के तहत काम कर सकता है, जिसमें मानव संचालित लड़ाकू विमानों के साथ मिलकर मिशन को अंजाम दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, यह UAV डीप पेनेट्रेशन (Deep Penetration) मिशन में भी कारगर है, जिससे यह दुश्मन के इलाके में जाकर सटीक हमले कर सकता है।

Archer-NG UAV: कितनी है इसकी रेंज

अर्चर एनजी की उड़ान चौंकाने वाली है। इसकी रेंज 1,000 किलोमीटर से अधिक हो सकती है, बशर्ते सेटेलाइट कम्युनिकेशन (Satcom) कवरेज उपलब्ध हो। इसकी ऑपरेशनल ऊंचाई 30,000 फीट तक है और यह 34 घंटे तक लगातार उड़ान भरने में सक्षम है। सामान्यत: यह 24 घंटे तक इलेक्ट्रो-ऑप्टिक पेलोड के साथ उड़ान भरता है।

अर्चर एनजी अपने डेवलपमेंट के एडवांस फेज में है। इसके टैक्सी ट्रायल (जमीन पर दौड़ने के ट्रायल) पहले ही शुरू हो चुके हैं, और पहला फ्लाइट ट्रायल जल्द ही अगले महीने तक शुरू होने की उम्मीद है। वर्तमान में, सर्टिफिकेशन की मंजरी मिलने का इंतजार किया जा रहा है। वहीं, इसका पूर्ण रूप से हथियार ढोने वाले वर्जन अगले तीन सालों में बन कर तैयार हो जाएगा।

तपस या RUSTOM-II से ज्यादा एडवांस

अर्चर एनजी को भारत के मौजूदा UAVs, जैसे कि तपस या RUSTOM-II से ज्यादा एडवांस माना जा रहा है, क्योंकि इसमें हथियार ले जाने की क्षमता है। जबकि दुनियाभर में मशहूर Hermes 900 UAV की टक्कर का यूएवी है। हालांकि, MQ-9 Reaper जैसे UAVs High Altitude Long Endurance (HALE) श्रेणी में आते हैं, जो अर्चर एनजी से अलग हैं।

अर्चर एनजी में डीजल इंजन का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि अन्य हाई कैटेगरी के UAVs में गैस टर्बाइन इंजन लगाए जाते हैं। इस वजह से यह एक सस्ता विकल्प है।

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भारतीय सेना और वायुसेना अर्चर एनजी के डेवलपमेंट में सक्रिय भागीदारी रही है। वे लगातार जरूरतों के अनुसार सुझाव दे रही हैं और ट्रायल्स में भी हिस्सा ले रही हैं। सेना के सूत्रों को कहना है कि यह ड्रोन रियल-टाइम सर्विलांस, लॉजिस्टिक सपोर्ट और सटीक हमलों के लिए बेहद कारगर है।

मिग-21 और जगुआर जैसे पुराने लड़ाकू विमानों के रिटायर होने के बाद सेना को ऐसे प्लेटफार्मों की जरूरत है, जिन्हें कम लागत में तेजी से डिप्लॉय किया जा सके। आर्चर-NG इन सभी जरूरतों  को पूरा करता है।

आर्चर-NG जैसे ताकतवर यूएवी बनाने के बाद भारत अब उन देशों की सूची में शामिल हो गया है, जो अपने आर्म्ड ड्रोन का प्रोजक्शन और डिप्लॉयमेंट खुद कर सकते हैं।

MANPADS: भारतीय सेना को यूके से मिलेगा नया एयर डिफेंस सिस्टम, जानें STARStreak मिसाइल के बारे में, जो रूसी Igla-S की लेगी जगह

MANPADS Deal: Indian Army to Get UK’s STARStreak Missiles, Replacing Russian Igla-S Systems

MANPADS: एरो इंडिया 2025 में जहां दुनिया की कंपनियां अपने मिलिट्री प्रोडक्ट्स को पेश कर रही हैं, तो दूसरी तरफ वे नए साझेदार भी तलाश रही हैं। भारतीय सेना ने भी एक नया पार्टनर तलाशा है। ब्रिटेन ने भारतीय सेना को मैन पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम्स (MANPADS) की सप्लाई के लिए एक बड़ी डिफेंस डील की है। इसके साथ ही, यूके ने भारत के साथ रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए डिफेंस पार्टनरशिप–इंडिया (DP-I) की भी औपचारिक शुरुआत की है।

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इस साल के अंत तक मिलेगी MANPADS की पहली खेप

ब्रिटेन के रक्षा मंत्री लॉर्ड वर्नोन कोकर ने यूके-इंडिया डिफेंस पार्टनरशिप पवेलियन का उद्घाटन करते हुए इस साझेदारी का एलान किया। इस मौके पर उन्होंने बताया कि यूके के रक्षा मंत्रालय में एक विशेष प्रोग्राम ऑफिस स्थापित किया गया है, जो भारत के साथ रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम के तौर पर काम करेगा।

ब्रिटेन और भारत के बीच हुए इस समझौते के तहत थेल्स यूके (Thales UK) और भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) के बीच नेक्स्ट जनरेशन हथियारों पर सहयोग बढ़ाने का फैसला लिया गया है। इसके तहत लेजर बीम राइडिंग MANPADS (LBRMs) की सप्लाई के लिए एक समझौते हुआ है। इस सौदे के तहत हाई वेलोसिटी मिसाइल्स (StarStreak) और लॉन्चर्स की पहली खेप इस साल के अंत तक भारत को सौंप दी जाएगी।

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गौरतलब है कि BDL पहले ही भारतीय सेना से आपातकालीन खरीद (इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट) के तहत ऐसे ही एक कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत कर चुकी है। डिफेंस सोर्सेज का कहना कि इस सौदे का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना के मौजूदा पुराने रूसी Igla-S सिस्टम्स को बदलना है।

इस प्रारंभिक LBRM कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत के बाद, थेल्स यूके और BDL भविष्य में लाइटवेट मल्टीरोल मिसाइल्स (LMM) के प्रोडक्शन में भी सहयोग करेंगे।

हैदराबाद में ASRAAM असेंबली और टेस्ट फैसिलिटी

थेल्स यूके के साथ इस सौदे के अलावा, BDL ब्रिटेन की MBDA यूके के साथ भी काम कर रहा है। हैदराबाद में एडवांस्ड शॉर्ट-रेंज एयर टू एयर मिसाइल (ASRAAM) की असेंबली और टेस्ट फैसिलिटी बनाने की प्रक्रिया चल रही है।

नई पीढ़ी के नेवी प्लेटफॉर्म्स के लिए सहयोग

ब्रिटेन और भारत ने भारत के अगली पीढ़ी के लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक (LPD) बेड़े के लिए इंटीग्रेटेड फुल इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (IFEP) सिस्टम के डिजाइन और डेवलपमेंट के लिए एक स्टेटमेंट ऑफ इंटेंट पर भी दस्तखत किए हैं।

इसके अगले चरण के तहत, GE वर्नोवा और BHEL भारत की पहली मैरीटाइम लैंड बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी का डेवलपमेंट करेंगे। यह कदम भारतीय नौसेना के भविष्य के प्लेटफॉर्म्स के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

क्या हैं STARStreak मिसाइल्स?

स्टारस्ट्रीक (STARStreak) हाई वेलोसिटी मिसाइल (HVM) एक लेटेस्ट एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे पारंपरिक हवाई खतरों जैसे फिक्स्ड-विंग फाइटर जेट्स और हेलिकॉप्टर के खिलाफ नजदीकी सुरक्षा यानी क्लोज एयर डिफेंस देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस मिसाइल को थेल्स कंपनी ने बनाया है।

STARStreak मिसाइल की खूबियां

  • इस मिसाइल से पारंपरिक हवाई खतरों जैसे लड़ाकू विमानों और हेलिकॉप्टरों के खिलाफ नजदीकी सुरक्षा मिलती है।
  • 7 किलोमीटर से अधिक की रेंज के साथ यह छोटे और तेजी से उड़ने वाले टारगेट्स के खिलाफ भी प्रभावी है।
  • यह मिसाइल कम समय में तेजी से निशाना बनाने में सक्षम है, जिससे अचानक सामने आए हवाई खतरों से निपटना आसान होता है।
  • इसका लेजर बीम राइडिंग गाइडेंस सिस्टम छोटे लक्ष्यों पर भी सटीकता से निशाना साधता है, जिन्हें पारंपरिक मिसाइलों से भेदना कठिन होता है।
  • फ्लाइट के दौरान मिसाइल में ऑटोमैटिक कट-ऑफ की सुविधा है, जिससे फ्रैट्रिसाइड (गलती से अपने ही सैनिकों को नुकसान) से बचा जा सकता है।
  • इस मिसाइल की कोई सर्विसिंग आवश्यकता नहीं होती, जिससे मेंटेनेंस लागत में कमी आती है।
  • इसका वजन केवल 14 किलोग्राम, जिससे इसे आसानी से तैनात किया जा सकता है।
  • मैक 3+ की हाई स्पीड, जिससे यह तेज़ी से लक्ष्य तक पहुंचती है।
  • इसकी रेंज 7000 मीटर से ज्यादा है।

कैसे काम करती है स्टारस्ट्रीक मिसाइल?

स्टारस्ट्रीक मिसाइल के अंदर तीन डार्ट्स (तीरनुमा हिटाइल्स) होते हैं जो टारगेट को तुरंत निशाना बना सकते हैं। जैसे ही कोई एरियल टारगेट रडार पर दिखाई देता है, ऑपरेटर तुरंत ट्रिगर दबाता है और मिसाइल लॉन्च हो जाती है। इसका रॉकेट मोटर मिसाइल को मैक 3 की से भी ज्यादा रफ्तार देता है।

जब मिसाइल लक्ष्य के पास पहुंचती है, तो यह तीन डार्ट्स छोड़ती है जो तेजी से टारगेट में घुसते हैं और विस्फोट करते हैं। ये डार्ट्स काइनेटिक एनर्जी और एक्सप्लोसिव एनर्जी के जरिए जबरदस्त नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे भारी ऑर्मर्ड और लाइट एरियल टार्गेट्स भी इसके सामने ठहर नहीं पाते।

Aero India 2025: पुराने तेजस से कहीं ज्यादा घातक है LCA Mk2, इस साल के आखिर तक आएगा प्रोटोटाइप, 2026 में भरेगा पहली उड़ान

Tejas Mk1A delivery delay

Aero India 2025: डीआरडीओ यानी Defence Research and Development Organisation (DRDO) ने एलान किया है कि Light Combat Aircraft (LCA) Mk2 का प्रोटोटाइप 2025 के अंत तक पेश किया जाएगा। इसके बाद, 2026 की पहली तिमाही में इस लड़ाकू विमान की पहली उड़ान होगी। यह जानकारी Aeronautical Development Agency (ADA) के महानिदेशक जितेंद्र जे. जाधव ने दी।

Aero India 2025: LCA Mk2 Prototype to Debut by Year-End, First Flight in 2026 – More Lethal Than Original Tejas!

 

Aero India 2025: भारतीय वायुसेना के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा LCA Mk2

जाधव ने बातचीत में बताया, “हम इस साल के अंत तक LCA Mk2 का पहला प्रोटोटाइप पेश करेंगे और 2026 की पहली तिमाही में इसकी पहली उड़ान होगी।” उन्होंने आगे कहा, “LCA Mk2 का प्रदर्शन बेहद अच्छा है और हमें पूरा भरोसा है कि इसका ऑपरेशन 2028-29 से शुरू हो जाएगा।” यानि कि वायुसेना में इसका इंडक्शन 2028-29 तक शुरू हो जाएगा।

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जाधव ने यह भी स्पष्ट किया कि LCA Mk2 में सभी सिस्टम स्वदेशी होंगे, जो इसे भारतीय वायुसेना के लिए एक ताकतवर और घातक प्लेटफॉर्म बनाएंगी। यह विमान न केवल भारत की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाएगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को भी मजबूत करेगा।

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Aero India 2025: AMCA और LCA Mk2

जाधव ने आगे बताया कि Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) और LCA Mk2 के बीच काफी समानताएं हैं। इनमें सबसे खास एवियोनिक्स और सेंसर सिस्टम हैं। बता दें कि AMCA की पहली प्रोटोटाइप उड़ान 2026-27 तक पेश होने की उम्मीद है, और इसी प्रक्रिया में LCA Mk2 के कई सिस्टम अपग्रेड किए जा रहे हैं।

LCA Mk2 न केवल वायुसेना के बेड़े में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, बल्कि वायुसेना के मॉडर्नाइजेशन प्लान्स का भी अहम हिस्सा है। वर्तमान में वायुसेना के कई फाइटर स्क्वाड्रन रिटायर होने के कगार पर हैं, और LCA Mk2 इनकी जगह लेगा।

Aero India 2025: पुराने विमानों की जगह लेगा LCA Mk2

वायुसेना की मौजूदा योजना के अनुसार, LCA Mk2 पुराने रूसी मूल के MiG-21 (Bison), MiG-26 और Jaguar फाइटर जेट्स को रिप्लेस करेगा। योजना के मुताबिक अनुसार, 2025 से शुरू होकर 2032 तक Jaguar फाइटर जेट्स के छह स्क्वाड्रन कई चरणों में सेवा से बाहर किए जाएंगे। इसके बाद अगले दशक के अंत तक Mirage 2000 और MiG-29 के तीन-तीन स्क्वाड्रन को भी रिटायर किया जाएगा।

यह अनुमान लगाया गया है कि 2035 तक लगभग 15 फाइटर स्क्वाड्रन सेवा से बाहर हो जाएंगे। ऐसे में LCA Mk2 भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन गैप को भरने में मदद करेगा और देश की हवाई रक्षा क्षमताओं को मजबूत बनाएगा।

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LCA Mk2 के एडवांस फीचर्स

जहां पुरानी पीढ़ी के LCA Mk1 में सात हार्ड पॉइंट्स थे, वहीं Mk2 में 11 हार्ड पॉइंट्स होंगे, जिसके बाद यह 6.5 टन तक हथियार भी ले जा सकेगा। वहीं, इसके मुकाबले Mk1 केवल 3.5 टन हथियार ले सकता था। इसके अलावा, Mk2 में फ्यूल कैपेसिटी भी बढ़ाई गई है।

जाधव ने बताया, “Mk1 में 2,450 किलोग्राम (लीटर) इंटरनल फ्यूल ले जाने की क्षमता थी, जबकि Mk2 में 3,320 किलोग्राम ईंधन स्टोरेज होगा। साथ ही, यह बाहरी टैंक में 4,700 किलोग्राम ईंधन भी ले सकता है।” इस अतिरिक्त ईंधन क्षमता के चलते इसकी रेंज 3,000 किलोमीटर तक बढ़ाई जा सकेगी, जिससे यह लंबे समय तक किसी भी मिशन को अंजाम दे सकेगा।

LCA Mk2 का पहला प्रोटोटाइप 2023 में पेश किया जाना था, लेकिन कुछ वजहों से इसकी डेडलाइन बढ़ा दी गई। अब यह विमान 2025 के अंत तक पेश किया जाएगा और 2026 की शुरुआत में इसकी पहली उड़ान भरेगा।

हालांकि इस देरी का असर वायुसेना के मॉर्डनाइजेशन प्लान पर भी पड़ा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फाइटर जेट भारतीय वायुसेना के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। LCA Mk2 न केवल टेक्नीकली एडवांस है, बल्कि यह वायुसेना की बदलती जरूरतों के अनुरूप भी होगा। क्योंकि भारतीय वायुसेना लंबे समय से अपने पुराने फाइटर जेट्स को बदलने की योजना पर काम कर रही है। MiG-21 और Jaguar जैसे विमान पुराने हो चुके हैं। ऐसे में LCA Mk2 वायुसेना के बेड़े में एक नई जान फूंकेगा।

Aero India 2025: बेंगलुरु के आसमान में आमने-सामने रूस और अमेरिका के स्टील्थ फाइटर्स, भारत किस पर लगाएगा दांव, 2028 तक आएगा AMCA

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Aero India 2025: बेंगलुरु के आसमान में इन दिनों एक ऐतिहासिक नजारा देखने को मिल रहा है। बेंगलुरू में चल रहे एरो इंडिया 2025 में पहली बार दो एकदूसरे के धुरविरोधी देश रूस और अमेरिका अपने-अपने स्टील्थ फाइटर जेट्स के साथ आमने-सामने हैं। जहां एक ओर रूस ने अपने Su-57 फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट को पेश किया है, तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने अपने F-35 लाइटनिंग II के जरिए पूरी दुनिया को अपनी ताकत दिखा रहा है।

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Aero India 2025: एक ही एयरस्पेस पर F-35 लाइटनिंग II और रूसी Su-57 फेलॉन

अभी तक, अमेरिका और रूस के इन दो स्टील्थ फाइटर्स को एक ही एयर शो में कभी नहीं देखा गया है। पहली बार, अमेरिकी F-35 लाइटनिंग II और रूसी Su-57 फेलॉन स्टील्थ फाइटर्स ने एक ही एयरस्पेस साझा किया है। दोनों देशों के बीच दशकों से चले आ रहे तनाव के चलते यह अभी तक असंभव था। लेकिन एयरो इंडिया 2025 में .यह संभव हुआ और दोनों यहां अपने लेटेस्ट फाइटर जेट्स के साथ यहां आए हुए हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों की मार झेल रहा रूस भारत को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। पिछले 20 सालों में भारत और रूस के बीच 50 अरब डॉलर के रक्षा सौदे हुए हैं, और इस साझेदारी को और मजबूत करने के मकसद से रूस Aero India में इस बार बड़ी भागीदारी कर रहा है।

Aero India 2025: रूस का भारत को बड़ा ऑफर

इस शो में रूस ने अपने पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट Su-57 के को-प्रोडक्शन का भारत को ऑफर दिया है। Rosoboronexport के निदेशक अलेक्जेंडर मिखेयेव ने कहा, “एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत रूस का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। पिछले 20 वर्षों में ही हमने भारत के साथ 50 अरब डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट किए हैं, और कुल मिलाकर 80 अरब डॉलर के रूसी मिलिट्री प्रोडक्ट्स भारत को सप्लाई किए गए हैं।”

Aero India 2025: अमेरिकी F-35 स्टील्थ फाइटर या रूसी SU-57 फेलॉन! कौन होगा भारत की पहली पसंद? दोनों हैं एयरो इंडिया 2025 में

वहीं, अमेरिका भी भारत को अपने F-35 और F-21 जैसे फाइटर जेट्स की पेशकश कर रहा है। हालांकि, अमेरिका इन इन सौदों में कई शर्तें और ऑपरेशनल प्रतिबंध भी जोड़ रहा है, जो भारत को नामंजूर हैं। दूसरी ओर, रूस के साथ लंबे समय से चली आ रही रक्षा साझेदारी और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर जैसे विकल्प भी दे रहा है।

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भारत के पास स्वदेशी AMCA का भी है विकल्प

वहीं भारत के पाास तीसरा विकल्प भी है। भारत अपना पांचवी पीढ़ी का स्वदेशी Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है। यह पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है, जिसे डीआरडीओ के तहत Aeronautical Development Agency (ADA) बना रहा है। AMCA का फुल-स्केल मॉकअप एरो इंडिया 2025 में पहली बार पेश किया गया है।

AMCA की पहली उड़ान 2028 तक

एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट AMCA प्रोजेक्ट के डायरेक्टर कृष्णा राजेंद्र नीली ने बताया “AMCA का पहला प्रोटोटाइप 2028 तक तैयार हो जाएगा, जबकि 11 साल बाद यानी 2035-36 तक इसकी डिलीवरी शुरू होने की उम्मीद है। अब तक इसका डिज़ाइन और निर्माण 100% स्वदेशी है। इस विमान में GE 414 इंजन का उपयोग किया जाएगा, और भारत पहले ही इन इंजनों के घरेलू उत्पादन के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर चुका है।”

हालांकि, यह समय सीमा भारतीय वायुसेना के लिए एक चुनौती है, क्योंकि चीन पहले ही अपने स्टेल्थ फाइटर्स J-20 और J-31 को तैनात कर चुका है और पाकिस्तान भी जल्द ही इन्हें हासिल करने की कोशिशों में जुटा है।

F-35 और Su-57के मुकाबले AMCA हल्का

खास बात यह है कि F-35 और Su-57 दोनों ही स्टील्थ फाइटर जेट हेवी वेट कटैगरी हैं, यानी कि ये 30 टन वाले पांचवीं जनरेशन एयरक्राफ्ट है। वहीं AMCA की बात करें तो यह मिडियम कैटेगरी का, औऱ यह 25 टन क्लास का फिफ्थ जनरेशन का फाइटर एयरक्राफ्ट है। AMCAमें हथियार अंदर की तरफ होते हैं, जो बाहर से दिखाई नहीं देते। इसलिए यह बाकी एयरक्राफ्ट के मुकाबले लंबा होता है।

लेकिन अब भारतीय वायुसेना के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा है, क्या हमें केवल स्वदेशी AMCA पर भरोसा करना चाहिए, या फिर तात्कालीक उपाय के तौर पर विदेश से स्टील्थ फाइटर्स की खरीद करनी चाहिए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने संकेत दिया है कि भारत सभी विकल्प खुले रखेगा।

Aero India 2025 में रूस का दबदबा

एरो इंडिया में रूस ने न केवल फाइटर जेट्स बल्कि हेलीकॉप्टर, इंजन और एयर डिफेंस सिस्टम भी पेश किए हैं। 10 से अधिक प्रमुख रूसी रक्षा कंपनियां अपने अत्याधुनिक विमान, हेलिकॉप्टर, इंजन और एयर डिफेंस सिस्टम के साथ इस शो में पधारी हैं। कुल मिलाकर 500 से अधिक रूसी प्रोडक्ट्स इस शो में पेश किए गए हैं।

इसके अलावा रूस ने अपने IL-78MK-90A रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट को भी प्रदर्शित किया है, जिसे जरूरत के अनुसार ट्रांसपोर्ट, मेडिकल और फायरफाइटिंग वर्जन में बदला जा सकता है। इसके अलावा United Engine Corporation ने अपने Item 177S इंजन को पेश किया है, जो फिफ्थ जनरेशन मल्टीरोल फाइटर्स के लिए डिजाइन किया गया है।

साथ ही, रूस ने अपने एडवांस एयर-लॉन्च मिसाइलों का भी पेश किया है, जो चौथी और पांचवीं पीढ़ी के फाइटर्स के में लगाई जा सकती हैं। इन मिसाइलों में RVV-MD2 और RVV-B (हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए), Kh-35UE (युद्धपोतों को नष्ट करने के लिए), Kh-38MLE (जमीनी लक्ष्यों पर सटीक हमले के लिए), Kh-58UShKE (एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम के रडार को नष्ट करने के लिए), और नई पीढ़ी की स्टील्थ क्रूज मिसाइल Kh-69 शामिल हैं।

एयर डिफेंस सेक्टर में रूस की Almaz-Antey Air and Space Defense Corporation ने लंबी, मध्यम और छोटी दूरी की मिसाइलों को पेश किया है, जो बैलिस्टिक मिसाइलों से लेकर छोटे UAVs तक को को निशाना बना सकती हैं।

38TH National Games: भारतीय सेना ने 38वें नेशनल गेम्स में दिखाया दमखम, जीते कई स्वर्ण पदक

38th National Games: Indian Army Shines with Multiple Gold Medals

38TH National Games: उत्तराखंड में आयोजित 38वें नेशनल गेम्स में भारतीय सेना की टीम ने एक बार फिर अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाया है। सेना के लिए खेलों में हिस्सा लेने वाले इन खिलाड़ियों को पुणे स्थित आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग दी गई थी। उनकी शानदार परफॉर्मेंस ने खेलों के मैदान पर सेना का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है।

38th National Games: Indian Army Shines with Multiple Gold Medals

डाइविंग कंपटीशन में भारतीय सेना की टीम ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए कुल सात पदक अपने नाम किए। इनमें तीन स्वर्ण, तीन रजत और एक कांस्य पदक शामिल हैं। डाइविंग में उनके तकनीकी कौशल और कॉन्टिनुइटी ने दर्शकों और निर्णायकों को काफी प्रभावित किया।

वहीं, वेट लिफ्टिंग में भी सेना के खिलाड़ियों ने अपनी ताकत और दृढ़ संकल्प का शानदार प्रदर्शन किया। टीम ने कुल नौ पदक जीते, जिनमें दो स्वर्ण, चार रजत और तीन कांस्य पदक शामिल हैं। यह खेल शारीरिक ताकत की परीक्षा होता है, और सेना के खिलाड़ियों ने दिखा दिया कि वे इस चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार थे। उनके जज्बे और मेहनत की झलक हर मुकाबले में साफ दिखाई दी।

वहीं, भारतीय सेना की तीरंदाजी टीम ने भी एक्यूरेसी एंड कंसंट्रेशन का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कुल चार पदक जीते, जिनमें एक स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदक शामिल हैं। तीरंदाजी जैसे खेल में मेन्टल स्टेबिलिटी और फोकस जरूरी होता है, और सेना के निशानेबाजों ने दिखा दिया कि वे इस कला में भी माहिर हैं।

38th National Games: Indian Army Shines with Multiple Gold Medals

इसके अलावा मुक्केबाजी यानी बॉक्सिंग के मुकाबलों में भारतीय सेना की टीम ने चार स्वर्ण पदकों के साथ कुल छह पदक हासिल किए। इस प्रदर्शन ने उन्हें नेशनल गेम्स की सबसे दमदार टीमों में से एक बना दिया है।

खेलों के अभी और मुकाबले बाकी हैं, और सेना अपनी टीम से उम्मीद की जा रही है कि वे अन्य खेलों में भी शानदार प्रदर्शन कर और पदक जीतकर अपने विजयी पताका लहराना जारी रखेंगे। सेना के खिलाड़ियों की यह उपलब्धियां न केवल उनकी मेहनत और प्रतिभा का सबूत हैं, बल्कि यह आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में दी जाने वाली मुश्किल और अनुशासित ट्रेनिंग की भी मिसाल हैं।

Yashas: नए नाम और नई ताकत के साथ लौटा HAL का HJT-36 जेट ट्रेनर, शानदार खूबियों ने विदेशियों को भी किया हैरान!

Yashas: HAL’s Upgraded HJT-36 Jet Trainer Unveiled, Set to Revolutionize Modern Military Training

Yashas: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के प्रमुख जेट ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट हिंदुस्तान जेट ट्रेनर (HJT-36) को अब ‘यशस’ के नाम से जाना जाएगा। इस विमान में व्यापक सुधार और तकनीकी बदलाव किए गए हैं ताकि इसकी उड़ान को और बेहतर बनाया जा सके। ये सुधार मॉडर्न मिलिट्री ट्रेनिंग को देखते हुए किए गए हैं।

Yashas: HAL’s Upgraded HJT-36 Jet Trainer Unveiled, Set to Revolutionize Modern Military Training

एयरो इंडिया 2025 के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने इस नए नाम का एलान किया। इस मौके पर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. डी. के. सुनील भी मौजूद थे। डॉ. डी. के. सुनील ने कहा, “HJT-36 में बड़े स्तर पर किए गए तकनीकी सुधारों से इसकी क्षमताओं में शानदार बदलाव हुए हैं। इन सुधारों के चलते इसे एक नया नाम दिया जाना उचित था। उन्होंने उम्मीद जताई कि यशस से मॉडर्न मिलिट्री ट्रेनिंग में जबरदस्त सुधार देखने को मिलेगा।

बेंगलुरु के येलहंका एयर फोर्स स्टेशन पर आयोजित एरो इंडिया 2025 में यशस (Yashas) को लेकर लोगों की खास दिलचस्पी दिखी। देश और विदेश से आए डिफेंस एक्सपर्ट्स और रिप्रेंजेंटेटिव्स ने इस विमान की एडवांस टेक्नोलॉजी और ट्रेनिंग कैपेबिलिटीज की जमकर सराहना की।

Yashas: HAL’s Upgraded HJT-36 Jet Trainer Unveiled, Set to Revolutionize Modern Military Trainingआधुनिक तकनीकों से लैस ‘Yashas’

HAL के बनाए इस विमान Yashas को अब ए़डवांस एवियोनिक्स और अल्ट्रा-मॉडर्न कॉकपिट के साथ अपग्रेड किया गया है। इन सुधारों से न केवल ट्रेनिंग में फायदा मिलेगा, बल्कि ऑपरेटिंग एफिशिएंसी में भी बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा, विमान के वजन में कमी की गई है और विदेशी उपकरणों के स्थान पर भारतीय उपकरण लगाए गए हैं। अब इसमें भारतीय Line Replaceable Units (LRUs) का उपयोग किया गया है, जिसे स्वदेश में ही बनाया गया है।

Yashas: HAL’s Upgraded HJT-36 Jet Trainer Unveiled, Set to Revolutionize Modern Military Training

यशस् को अब स्टेज II पायलट ट्रेनिंग, काउंटर इंसर्जेंसी और काउंटर सरफेस फोर्स ऑपरेशंस, आर्मामेंट ट्रेनिंग और एरोबेटिक्स के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें FADEC कंट्रोल्ड  AL55I जेट इंजन का उपयोग किया गया है, जो इसे बेहतरीन थ्रस्ट-टू-वेट रेशियो देता है। यशस में सिंगल पॉइंट ग्राउंड रिफ्यूलिंग और डीफ्यूलिंग की सुविधा है, जिससे इसे जल्दी से रेडी किया जा सकता है। इसके अलावा यशस् में एरोबेटिक्स (हवाई करतब) और वेपन्स ट्रेनिंग की भी सुविधा है। यह विमान 1000 किलोग्राम तक के हथियार ले जाने में सक्षम है।

Yashas: HAL’s Upgraded HJT-36 Jet Trainer Unveiled, Set to Revolutionize Modern Military Training

इस विमान के डिजाइन में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसका ड्रूप नोज डिजाइन और एडवांस ग्लास कॉकपिट (जिसमें मल्टी-फंक्शन डिस्प्ले और हेड-अप डिस्प्ले शामिल हैं) से पायलट को बेहतर विजिबिलिटी मिलती है। State-of-the-Art Glass Cockpit में Multi-Function Displays (MFDs) और Head-Up Display (HUD) की सुविधा भी जोड़ी गई है, जिससे पायलट की situational awareness और भी बेहतर हो गई है।

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इस विमान के सेवा में शामिल होने से भारतीय वायुसेना के ट्रेनिंग फ़्रेमवर्क्स को नई मजबूती मिलेगी। HAL का मानना है कि ‘यशस्’ न केवल ट्रेनिंग में बल्कि रियल टाइम कॉम्बैट सिचुएशन्स में भी अपनी उपयोगिता साबित करेगा।

Agniveervayu Sports Intake: भारतीय वायुसेना में स्पोर्ट्स कोटे से भर्ती का शानदार मौका, अविवाहित पुरुष उम्मीदवार जल्द करें आवेदन!

Agniveervayu Sports Intake: Indian Air Force Opens Recruitment for Unmarried Male Athletes – Apply Now!

भारतीय वायुसेना (IAF) ने अविवाहित भारतीय पुरुष उम्मीदवारों के लिए अग्निवीर वायु (स्पोर्ट्स) इनटेक 02/2025 के तहत भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। यह भर्तियां ‘अग्निपथ योजना’ के तहत की जा रही हैं। यह भर्ती प्रक्रिया 10 से 12 मार्च 2025 तक आयोजित की जाएगी और इसके लिए ऑनलाइन आवेदन 13 फरवरी से 22 फरवरी 2025 तक भरे जा सकते हैं।

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Agniveervayu Sports Intake: कौन कर सकता है आवेदन? 

इन भर्तियों के लिए केवल अविवाहित भारतीय पुरुष उम्मीदवार ही पात्र होंगे। आवेदकों की आयु 3 जुलाई 2004 से 3 जनवरी 2008 के बीच होनी चाहिए। चयन प्रक्रिया के सभी चरणों को पास करने के बाद, भर्ती के समय उम्मीदवार की आयु 21 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। चयनित उम्मीदवारों को चार साल के लिए भारतीय वायुसेना में सेवा देनी होगी, इस दौरान वे विवाह नहीं कर सकेंगे।

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया

ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 13 फरवरी 2025 से शुरू होकर 22 फरवरी 2025 तक चलेगी। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। उम्मीदवार https://agnipathvayu.cdac.in/casbspm पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। भर्ती ट्रायल्स 10 से 12 मार्च 2025 तक आयोजित किए जाएंगे।

आवेदन शुल्क 100 रुपये है, जिसे डेबिट/क्रेडिट कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से भरा जा सकता है।

किन खेलों में हो रही है भर्ती? 

भारतीय वायुसेना विभिन्न खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की भर्ती कर रही है। इन खेलों में एथलेटिक्स, क्रिकेट, बॉक्सिंग, बास्केटबॉल, फुटबॉल, हॉकी, स्विमिंग, कबड्डी, शूटिंग, वॉलीबॉल, रेसलिंग, और वुशू आदि शामिल हैं। हर खेल के लिए विशेष कैटेगरी और पोजिशन तय की गई हैं, जैसे क्रिकेट में स्पिन बॉलर, मिडिल ऑर्डर बैटर, ऑल-राउंडर, और कबड्डी में रेडर, राइट कॉर्नर, आदि।

खेल उपलब्धियां

उम्मीदवारों ने अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया हो। जैसे कि जूनियर/सीनियर (U-19, रणजी आदि) अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व किया हो या राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष पांच स्थान प्राप्त किए हों। क्रिकेट के लिए विशेष रूप से बीसीसीआई ट्रॉफीज जैसे रणजी ट्रॉफी, दिलीप ट्रॉफी में भागीदारी होनी जरूरी है।

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Agniveervayu Sports Intake: आयु सीमा और योग्यता 

शैक्षणिक योग्यता में विज्ञान विषयों के लिए 10+2 या समकक्ष परीक्षा में गणित, भौतिकी और अंग्रेजी में 50 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। अन्य विषयों के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 50 फीसदी अंकों के साथ 12वीं पास होना आवश्यक है।

शारीरिक और चिकित्सा मानक

उम्मीदवारों की न्यूनतम ऊंचाई 152 सेमी होनी चाहिए और वजन उम्र और ऊंचाई के अनुसार अनुपात में होना चाहिए। सीने का माप न्यूनतम 77 सेमी होना चाहिए और 5 सेमी का फुलाव आवश्यक है। उम्मीदवारों की आंखें, दांत स्वास्थ्य और सामान्य स्वास्थ्य के लिए भी विशेष मानक निर्धारित किए गए हैं।

फिजिकल फिटनेस टेस्ट (PFT) में 1.6 किमी दौड़ (7 मिनट में पूरी करनी होगी), 10 पुश-अप्स, 10 सिट-अप्स, और 20 स्क्वाट्स शामिल हैं।

आवेदन प्रक्रिया में जरूरी दस्तावेज

  • दस लेटेस्ट पासपोर्ट साइज फोटो
  • मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र और अंकपत्र
  • 10+2 या समकक्ष परीक्षा के प्रमाणपत्र और अंकपत्र
  • खेल उपलब्धियों के प्रमाणपत्र
  • चरित्र प्रमाणपत्र
  • यदि उम्मीदवार किसी सरकारी संगठन से सेवा में है या सेवा से मुक्त हो चुका है, तो उसे डिस्चार्ज प्रमाणपत्र और NOC पेश करना होगा।

वेतन और भत्ते

अग्निवीरवायु (स्पोर्ट्स) को प्रति माह 30,000 रुपये का पैकेज दिया जाएगा, जो हर साल बढ़ेगा। इसके अलावा जोखिम और कठिनाई भत्ता, ड्रेस और यात्रा भत्ता भी प्रदान किए जाएंगे। सेवा समाप्ति के बाद ‘सेवा निधि’ पैकेज के तहत लगभग 10.04 लाख रुपये दिए जाएंगे।

Agniveervayu Sports Intake: बीमा और अन्य लाभ

अग्निवीरवायु (स्पोर्ट्स) को 48 लाख रुपये का गैर-अंशदायी जीवन बीमा कवर मिलेगा। चार वर्षों की सेवा के बाद उन्हें एक स्किल सेट प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाएगा। हालांकि, वे एक्स-सर्विसमैन का दर्जा प्राप्त नहीं कर पाएंगे।

Agniveervayu Sports Intake: महत्वपूर्ण निर्देश

  • भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और मेरिट आधारित है। किसी भी स्तर पर रिश्वत देने की आवश्यकता नहीं है
  • उम्मीदवारों को किसी भी फर्जी एजेंट या दलाल से सावधान रहना चाहिए।
  • चयन प्रक्रिया के दौरान अनुचित साधनों का उपयोग करने वाले उम्मीदवारों को स्थायी रूप से अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।

Scorpene Submarines: समंदर में बढ़ेगी भारतीय नौसेना की ताकत, मिलेंगी तीन और स्कॉर्पीन पनडुब्बियां, 36,000 करोड़ रुपये की डील को दी मंजूरी

India Submarine Plan: Indian Navy to Get 9 New Submarines under Project 75 and Project 75i

Scorpene Submarines: भारतीय नौसेना ने सरकारी कंपनी मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड (MDL) के साथ तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की खरीद के लिए 36,000 करोड़ रुपये से अधिक का सौदा अंतिम रूप दे दिया है। इस सौदे पर इस वित्तीय वर्ष के आखिर तक, 31 मार्च से पहले रक्षा मंत्रालय और एमडीएल के बीत दस्तखत किए जाने की उम्मीद है।

Scorpene Submarines: Indian Navy to Get 3 More Scorpene Subs in Rs 36,000 Cr Deal

यह डील ऐसे समय में फाइनल की गई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सप्ताह फ्रांस के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट में हिस्सा लेने के लिए रवाना हो रहे हैं।

डिफेंस सूत्रों के मुताबिक, 36,000 करोड़ रुपये से अधिक की इस डील (Scorpene Submarines) में एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम की लागत शामिल नहीं है। AIP सिस्टम से पनडुब्बियों की पानी के नीचे रहने की क्षमता बढ़ जाती है, जिससे मिलिट्री ऑपरेशंस के दौरान पानी के नीचे लंबे समय तक रहने में मदद मिलती है।

नौसेना से जुड़े सूत्रों ने बताया कि नई स्कॉर्पीन पनडुब्बियों (Scorpene Submarines) में 60 प्रतिशत स्वदेशी में बने प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल किया जाएगा, जो पहले से निर्मित छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के मुकाबले दोगुना है। पहले ये पनडुब्बियां फ्रांसीसी रक्षा कंपनी नेवल ग्रुप के सहयोग से बनाई गई थीं। इसके अलावा, इन तीन नई पनडुब्बियों के डिजाइन में भी कुछ बदलाव किए जाएंगे और ये ब्राजीलियन नेवी को सप्लाई की जा रहीं स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के समान होंगी, जिसके चलते इनका साइज भी पहले की छह पनडुब्बियों से थोड़ा बड़ा होगा।

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यह पूछने पर कि इन तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियों (Scorpene Submarines) की कीमत इतनी ज्यादा क्यों है, तो सूत्रों ने बताया कि यह सबसे अच्छा सौदा है जो बातचीत के बाद तय किया गया। इनमें अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा, जिससे उत्पादन लागत बढ़ी है। पहले छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की कुल लागत लगभग 36,000 करोड़ रुपये है, जिसमें लागत में बढ़ोतरी (cost escalation) भी शामिल है। मूल रूप से यह सौदा 21,000 करोड़ रुपये में तय हुआ था।

सूत्रों के मुताबिक, तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के लिए एमडीएल द्वारा दी गई शुरुआती कीमत इतनी अधिक थी कि भारतीय नौसेना को प्रस्ताव वापस भेजना पड़ा। हालांकि, दूसरी बार दी गई कीमत भी नौसेना की उम्मीद से ज्यादा थी, लेकिन बातचीत के बाद इसे मौजूदा राशि तक घटाया गया।

दरअसल, भारतीय नौसेना के पास शुरुआत में तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियों को खरीदने की कोई योजना नहीं थी। लेकिन प्रोजेक्ट-75 इंडिया में देरी के चलते इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया गया। इस प्रोजेक्ट के तहत नौसेना को AIP सिस्टम वाली छह नई पनडुब्बियां मिलनी थीं।

वहीं, परंपरागत डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के अलावा भारतीय नौसेना की योजना 2036-37 तक अपनी पहली पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन वाली न्यूक्लियर अटैक पनडुब्बी (SSN) को कमीशन करने की है, जबकि दूसरी न्यूक्लियर अटैक पनडुब्बी इसके दो साल बाद तैयार होगी।

हालांकि भारत के पास परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों (SSBN) के लिए अलग कार्यक्रम है। इन पनडुब्बियों के लिए फंडिंग भी अलग व्यवस्था के तहत होती है और ये स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड (Strategic Forces Command – SFC) के तहत ऑपरेट होती हैं।

जहां चीन और पाकिस्तान अपनी पनडुब्बी और नौसेना ताकत को तेजी से बढ़ा रहे हैं, वहीं भारत भी अपनी नौसैनिक शक्ति को मजबूती देने के लिए लगातार प्रयासरत है। तीन नई स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के जुड़ने से भारतीय नौसेना की पनडुब्बी बेड़े की ताकत में खासा इजाफा होगा। इस डील से खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत की समुद्री रणनीति को और मजबूत मिलेगी।

Explainer: क्या है भारत का नया CATS Warrior ड्रोन? एरो इंडिया 2025 में हुई धमाकेदार एंट्री, जमकर हो रही चर्चा

Explainer: What is India’s New CATS Warrior Drone? Makes a Powerful Debut at Aero India 2025

CATS Warrior: भारत के डिफेंस सेक्टर में पिछले कई दिनों से एक चौंकाने वाले नाम CATS Warrior की जमकर चर्चा हो रही है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) का बनाया यह अत्याधुनिक स्टील्थ ड्रोन एरो इंडिया 2025 में सभी के लिए आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है। बेंगलुरु के येलहंका एयर फोर्स स्टेशन पर 10 से 14 फरवरी के बीच आयोजित हो रहे एशिया के सबसे बड़े एयरोस्पेस शो में CATS Warrior का फुल-स्केल डेमोंस्ट्रेटर पहली बार आम जनता के सामने पेश किया जाएगा।

Explainer: What is India’s New CATS Warrior Drone? Makes a Powerful Debut at Aero India 2025

क्या है CATS Warrior?

दरअसल CATS Warrior (Combat Air Teaming System) एक अत्याधुनिक स्वदेशी स्टील्थ ड्रोन है, जिसे भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट्स के साथ मिलकर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। इस ड्रोन को स्टील्थ तकनीक से लैस किया गया है, जिससे दुश्मन के रडार इसे आसानी से नहीं पकड़ सकेंगे। इसे “लॉयल विंगमैन” के रूप में जाना जाता है, जिसका मतलब है कि यह वायुसेना के पायलट ऑपरेटेड फाइटर जेट्स के साथ मिशनों में हिस्सा लेगा, जैसे कि रिपोर्टिंग, स्ट्राइक मिशन, इलेक्ट्रॉनिक अटैक आदि। इस ड्रोन की सबसे खास बात यह है कि यह खतरनाक मिशनों को अंजाम देगा, जिससे वायुसेना के पायलटों पर खतरा कम होगा।

एरो इंडिया 2025 में क्या होगा खास?

CATS Warrior की पहली उड़ान इस साल के अंत तक होनी है। लेकिन इससे पहले इसका फुल-स्केल डेमोंस्ट्रेटर एरो इंडिया 2025 में पेश किया गया है। इस ड्रोन को भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन के तहत पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनाया गया है। इसका डिजाइन और क्षमता अमेरिका के Boeing MQ-28 Ghost Bat और चीन के Feihong FH-97 जैसे लेटेस्ट ड्रोन के समान है। इसमें HAL के PTAE-W टर्बोजेट इंजन का इस्तेमाल किया गया है, जो पहले से ही भारत के टारगेट ड्रोन ‘लक्ष्य’ में अपनी क्षमता दिखा चुका है। हाल ही में HAL ने CATS Warrior का सफल इंजन ग्राउंड रन पूरा किया था।

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अब अगले चरण में CATS Warrior के टैक्सी ट्रायल शुरू किए जाएंगे, जिसमें ग्राउंड हैंडलिंग, कंट्रोल सिस्टम्स और सिस्टम इंटीग्रेशन की जांच की जाएगी। इन ट्रायल्स के सफल होने के बाद इस ड्रोन की पहली उड़ान के लिए हरी झंडी मिलने की उम्मीद है।

CATS Warrior केवल एक ड्रोन नहीं है, बल्कि यह HAL के Combat Air Teaming System (CATS) प्रोग्राम का एक प्रमुख हिस्सा है। इस प्रोग्राम के तहत एक क्रूज मिसाइल, क्लोज कॉम्बैट मिसाइल, स्वार्म ड्रोन और एक प्स्योडो सैटेलाइट नेटवर्क भी डेवलप किया जा रहा है, जो तेजस और भविष्य में आने वाले AMCA फाइटर जेट्स के साथ नेटवर्क में काम करेगा।

भारतीय वायुसेना के लिए क्यों जरूरी CATS Warrior?

भारतीय वायुसेना के पास लड़ाकू विमान स्क्वाड्रन कमी है। 42 स्क्वाड्रनों के मुकाबले फिलहाल सिर्फ 31 स्क्वाड्रन ही एक्टिव हैं। ऐसे में वायुसेना को अपनी ताकत बढ़ाने के लिए नए तरीकों की जरूरत है। तेजस Mk1A जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमानों के उत्पादन के साथ-साथ CATS Warrior जैसे अनमैंड कॉम्बैट एयरक्राफ्ट भविष्य में इस कमी को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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यह ड्रोन गहराई तक स्ट्राइक मिशन, दुश्मन की हवाई सुरक्षा को निष्क्रिय करने और निगरानी जैसी भूमिकाएं निभा सकता है। भारत निर्मित Smart Anti-Airfield Weapons (SAAWs) के साथ यह ड्रोन दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला भी कर सकेगा। इसके अलावा, यह ड्रोन युद्ध के दौरान रियल-टाइम बैटलफील्ड अवेयरनेस की भूमिका निभाएगा।

CATS Warrior की पहली उड़ान इस साल के अंत तक होनी है। अमेरिका, चीन और रूस पहले से ही अपने-अपने AI-अनेबल्ड UCAVs पर काम कर रहे हैं, जिनमें Boeing MQ-28 Ghost Bat और चीन का Feihong FH-97 प्रमुख हैं। इस ड्रोन के साथ-साथ HAL और अन्य प्राइवेट कंपनियां जैसे NewSpace Research and Technologies (NRT) भी AI-ऑपरेटेड ड्रोन्स पर काम कर रही हैं। NRT का Abhimanyu नामक ड्रोन भी जल्द ही पेश किया जाएगा।