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Sunday, August 31, 2025
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Trump Meets Al-Shara: सामने आया अमेरिका और ट्रंप का दोगलापन, ‘पूर्व वांटेड आतंकी’ से की मुलाकात, रखा था 85 करोड़ का इनाम

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अमेरिका ने अल-शरा को उनकी आतंकवादी गतिविधियों के लिए मोस्ट वांटेड सूची में शामिल किया था और उनके सिर पर 10 मिलियन डॉलर का इनाम रखा था। इराक में उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी, लेकिन बाद में वे रिहा हो गए और सीरियाई गृहयुद्ध में एक प्रमुख चेहरा बन गए। दिसंबर 2024 में, HTS के नेतृत्व में विद्रोही समूहों ने दमिश्क पर कब्जा कर लिया और बशर अल-असद के 54 साल पुराने शासन का अंत कर दिया...
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📍नई दिल्ली | 14 May, 2025, 7:20 PM

Trump Meets Al-Shara: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से मुलाकात की। यह मुलाकात इसलिए भी सुर्खियों में है क्योंकि अल-शरा वही शख्स हैं, जिन पर कुछ साल पहले अमेरिका ने 10 मिलियन डॉलर (लगभग 85 करोड़ रुपये) का इनाम रखा था और उन्हें आतंकवादी घोषित किया था। इस मुलाकात ने न केवल पूरी दुनिया को चौंकाया है, बल्कि इससे अमेरिका और ट्रंप का दोहरा चेहरा भी सामने आ गया है।

Trump Meets Al-Shara: कौन है अल-शरा?

अहमद अल-शरा (Trump Meets Al-Shara) को पहले अबू मोहम्मद अल-जुलानी के नाम से जाना जाता था। जो एक समय अल-कायदा से जुड़े रहे थे। 2003 में अमेरिका के नेतृत्व में इराक पर हुए हमले के बाद वे वहां अमेरिकी सेना के खिलाफ लड़ने वाले विद्रोहियों में शामिल हो गए थे। बाद में, उन्होंने सीरिया में नुसरा फ्रंट की स्थापना की, जो अल-कायदा की सीरियाई शाखा थी। इस संगठन को बाद में हयात तहरीर अल-शाम (HTS) के रूप में पुनर्गठित किया गया, जो कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित है।

अमेरिका ने अल-शरा (Trump Meets Al-Shara) को उनकी आतंकवादी गतिविधियों के लिए मोस्ट वांटेड सूची में शामिल किया था और उनके सिर पर 10 मिलियन डॉलर का इनाम रखा था। इराक में उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी, लेकिन बाद में वे रिहा हो गए और सीरियाई गृहयुद्ध में एक प्रमुख चेहरा बन गए। दिसंबर 2024 में, HTS के नेतृत्व में विद्रोही समूहों ने दमिश्क पर कब्जा कर लिया और बशर अल-असद के 54 साल पुराने शासन का अंत कर दिया। जनवरी 2025 में अल-शरा को सीरिया का अंतरिम राष्ट्रपति घोषित किया गया।

ट्रंप का यू-टर्न

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Trump Meets Al-Shara) ने मंगलवार, 13 मई 2025 को सऊदी अरब में एक इनवेस्टमेंट समिट को संबोधित करते हुए सीरिया पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाने की घोषणा की। यह घोषणा अपने आप में एक बड़ा कूटनीतिक कदम थी, क्योंकि ये प्रतिबंध बशर अल-असद के शासन के दौरान लगाए गए थे ताकि सीरियाई सरकार पर आर्थिक और राजनयिक दबाव बनाया जा सके। ट्रंप ने कहा, “सीरिया में एक नई सरकार है, और हम उन्हें शांति और पुनर्निर्माण का मौका देना चाहते हैं। मैं सभी प्रतिबंध हटाने का आदेश देता हूं। सीरिया, हमें कुछ विशेष दिखाएं।”

इस घोषणा के ठीक एक दिन बाद, ट्रंप ने अल-शरा (Trump Meets Al-Shara) से मुलाकात की। यह 25 वर्षों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति और सीरियाई नेता की पहली मुलाकात थी। इससे पहले 2000 में, तत्कालीन सीरियाई राष्ट्रपति हाफिज अल-असद ने जिनेवा में अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से मुलाकात की थी। ट्रंप और अल-शरा की यह मुलाकात सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की मौजूदगी में हुई, और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन भी फोन कॉल के जरिए इस चर्चा में शामिल रहे।

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मुलाकात का क्या है कूटनीतिक महत्व

यह मुलाकात कई मायनों में महत्वपूर्ण है। सबसे पहले, यह अमेरिका की सीरिया नीति में एक बड़े बदलाव का प्रतीक है। जहां एक समय अल-शरा को अमेरिका आतंकवादी (Trump Meets Al-Shara) मानता था, वहीं अब ट्रंप प्रशासन ने उनके साथ संबंध सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। ट्रंप ने इस मुलाकात को क्षेत्रीय स्थिरता और ईरान के प्रभाव को कम करने की रणनीति का हिस्सा बताया। सऊदी अरब और तुर्की जैसे क्षेत्रीय शक्तियों ने भी अल-शरा की सरकार को समर्थन दिया है, क्योंकि उनका मानना है कि इससे सीरिया में ईरान का प्रभाव कम होगा, जिसने असद शासन के दौरान वहां अपनी पकड़ मजबूत की थी।

दूसरा, इस मुलाकात ने सीरिया के लिए आर्थिक और कूटनीतिक राहत की संभावनाएं खोली हैं। प्रतिबंधों के हटने से सीरिया को पुनर्निर्माण और आर्थिक सुधार के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता मिलने की उम्मीद है। सीरिया के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के इस फैसले को “सीरियाई लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण” बताया और कहा कि यह देश को युद्ध के दर्दनाक दौर से बाहर निकालने में मदद करेगा।

सीरिया में जश्न का माहौल

ट्रंप की प्रतिबंध हटाने की घोषणा के बाद सीरिया (Trump Meets Al-Shara) की राजधानी दमिश्क में जश्न का माहौल देखा गया। सरकारी समाचार एजेंसी ‘सना’ ने वीडियो और तस्वीरें जारी कीं, जिनमें उमय्यद स्कवायर पर लोग आतिशबाजी करते और नया सीरियाई झंडा लहराते नजर आए। कई लोगों ने अपनी कारों के हॉर्न बजाकर खुशी जाहिर की। यह जश्न इस बात का प्रतीक था कि सीरियाई जनता, जो पिछले 14 वर्षों से गृहयुद्ध और आर्थिक संकट से जूझ रही थी, अब एक नई शुरुआत की उम्मीद कर रही है।

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हालांकि, ट्रंप की इस मुलाकात (Trump Meets Al-Shara) और प्रतिबंध हटाने के फैसले पर विवाद भी खड़ा हुआ है। कई आलोचकों का कहना है कि यह मुलाकात अमेरिका की आतंकवाद विरोधी नीति के खिलाफ है। अल-शरा का संगठन HTS अभी भी अमेरिका और अन्य देशों की आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात सऊदी अरब के दबाव और व्यापारिक हितों के कारण हुई। सऊदी अरब ने हाल ही में अमेरिका में 600 बिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की है, और माना जा रहा है कि ट्रंप ने यह कदम क्षेत्रीय सहयोगियों को खुश करने के लिए उठाया।

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठनों ने अभी तक इस पर कोई ठोस बयान नहीं दिया है, लेकिन कुछ यूरोपीय नेता स्थिरता और प्रवास की नई लहरों को रोकने के लिए सीरिया के साथ आर्थिक जुड़ाव की वकालत कर रहे हैं।

वहीं कुछ विशेषज्ञों ने ट्रंप की इस मुलाकात (Trump Meets Al-Shara) को क्षेत्रीय स्थिरता और ईरान के प्रभाव को कम करने की रणनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, “सीरिया में एक नई सरकार है। हमें उनके साथ काम करने का मौका लेना चाहिए।” यह मुलाकात सऊदी अरब और तुर्की जैसे क्षेत्रीय सहयोगियों के समर्थन से संभव हुई, जो मानते हैं कि अल-शरा की सरकार सीरिया में ईरान की पकड़ को ढीला कर सकती है।

अल-शरा का नया चेहरा

अल-शरा ने हाल के महीनों में खुद को एक उदारवादी नेता के रूप में पेश करने की कोशिश की है। वे पश्चिमी शैली के सूट पहनते हैं और सीरिया के विकास के लिए प्रतिबंध हटाने की वकालत करते हैं। उन्होंने अल-कायदा से अपने संबंध तोड़ लिए हैं और अल्पसंख्यकों व महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की बात की है। हालांकि, कई विश्लेषकों को संदेह है कि क्या वे इन वादों पर लंबे समय तक अमल कर पाएंगे।

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सऊदी अरब में भव्य स्वागत

ट्रंप का सऊदी अरब में शाही अंदाज में स्वागत किया गया। जैसे ही एयर फोर्स वन रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा, सऊदी पायलटों द्वारा उड़ाए गए छह अमेरिकी निर्मित F-15 लड़ाकू विमानों ने उन्हें एस्कॉर्ट किया। ट्रंप ने बैंगनी रंग के कालीन पर कदम रखा, जो सऊदी अरब में रेगिस्तानी जंगली फूलों और आतिथ्य का प्रतीक है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सैकड़ों सैन्य, सरकारी और व्यावसायिक अधिकारियों के साथ उनकी अगवानी की। अमेरिकी और सऊदी झंडों के साथ सफेद अरबी घोड़ों पर सवार सैनिकों ने ट्रंप के काफिले को शाही टर्मिनल तक पहुंचाया, जहां पारंपरिक कॉफी समारोह का आयोजन हुआ। यह भव्य स्वागत 2022 में जो बाइडन के दौरे के विपरीत था, जब खशोगी हत्याकांड के बाद तनावपूर्ण संबंधों के बीच बाइडन का स्वागत बेहद सादा रहा था।

आर्थिक और रक्षा समझौते

ट्रंप की यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना था। यूएस-सऊदी निवेश मंच में 600 बिलियन डॉलर के समझौतों की घोषणा की गई, हालांकि दस्तावेजों से पता चला कि केवल 283 बिलियन डॉलर के समझौते ही पक्के हुए हैं। इनमें सबसे बड़ा था 142 बिलियन डॉलर का रक्षा सौदा, जिसे “इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा बिक्री समझौता” बताया गया। इस सौदे के तहत सऊदी अरब को उन्नत अमेरिकी सैन्य उपकरण, प्रशिक्षण और सहायता मिलेगी।

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सऊदी टेक कंपनी डाटावोल्ट ने अमेरिका में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ऊर्जा बुनियादी ढांचे में 20 बिलियन डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई। एनवीडिया ने सऊदी कंपनी ह्यूमैन को 18,000 से अधिक ब्लैकवेल एआई चिप्स बेचने का समझौता किया। अमेरिकी कंपनियां जैसे जैकब्स और AECOM सऊदी अरब में किंग सलमान अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, किंग सलमान पार्क और किद्दिया सिटी जैसे बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में शामिल हैं।

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हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरीhttp://harendra@rakshasamachar.com
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवादों, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। 📍 Location: New Delhi, in 🎯 Area of Expertise: Defence, Diplomacy, National Security

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