📍नई दिल्ली | 16 Jan, 2026, 9:20 PM
114 Rafale fighter jets: रक्षा मंत्रालय के डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन से 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस बोर्ड की अध्यक्षता रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने की। यह मंजूरी मिलने के बाद अब यह प्रस्ताव रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल के पास जाएगा। इसके बाद अंतिम फैसला कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी लेगी, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते हैं।
सूत्रों के अनुसार, भारत और फ्रांस के बीच इस सौदे को फरवरी में अंतिम रूप दिया जा सकता है। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच बैठक प्रस्तावित है, जिसमें इस डील पर मुहर लग सकती है। (114 Rafale fighter jets)
114 Rafale fighter jets: भारतीय वायुसेना की जरूरतों से जुड़ा है 114 राफेल का फैसला
भारतीय वायुसेना लंबे समय से अपने स्क्वॉड्रन की संख्या बढ़ाने की मांग कर रही है। मौजूदा समय में कई पुराने लड़ाकू विमान धीरे-धीरे सेवा से बाहर हो रहे हैं, जिससे वायुसेना की ताकत पर असर पड़ा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सितंबर 2025 में वायुसेना ने रक्षा मंत्रालय को औपचारिक प्रस्ताव भेजकर 114 नए राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की मांग की थी।
राफेल को चुनने के पीछे कई व्यावहारिक वजहें बताई जा रही हैं। भारतीय वायुसेना पहले से ही 36 राफेल जेट ऑपरेट कर रही है, जबकि भारतीय नौसेना ने भी 26 मरीन वेरिएंट राफेल विमानों का ऑर्डर दिया है। एक ही प्लेटफॉर्म की संख्या बढ़ने से ट्रेनिंग, मेंटेनेंस और स्पेयर पार्ट्स की लागत कम होगी। (114 Rafale fighter jets)
अंबाला एयरबेस में पहले से मौजूद है राफेल इंफ्रास्ट्रक्चर
भारतीय वायुसेना के अंबाला एयरबेस पर राफेल के लिए फ्लाइट ट्रेनिंग और मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (एमआरओ) की सुविधा पहले से चालू है। वायुसेना के पास जरूरी स्पेस, टूलिंग, स्पेयर पार्ट्स और ट्रेंड मैनपावर मौजूद है। इसी वजह से वायुसेना तुरंत दो स्क्वॉड्रन, यानी करीब 36 से 38 राफेल विमानों को शामिल करने की स्थिति में है। (114 Rafale fighter jets)
‘मेक इन इंडिया’ के तहत होगी खरीद
इस बार राफेल की खरीद सिर्फ सीधे आयात तक सीमित नहीं रहेगी। यह सौदा मेक इन इंडिया योजना के तहत किया जाएगा। इसके तहत दसॉ एविएशन किसी भारतीय कंपनी के साथ साझेदारी करेगी और भारत में ही विमानों का निर्माण किया जाएगा।
हाल ही में दसॉ एविएशन ने अपनी भारतीय जॉइंट वेंचर कंपनी दसॉ रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (डीआरएएल) में अपनी हिस्सेदारी 49 फीसदी से बढ़ाकर 51 फीसदी कर ली है। इसके बाद यह कंपनी फ्रांसीसी कंपनी की मेजॉरिटी ओनड सब्सिडियरी बन गई है। इस जॉइंट वेंचर में अनिल अंबानी की रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर भी साझेदार है। (114 Rafale fighter jets)
भारतीय हथियारों से लैस होंगे सभी 114 राफेल
इस सौदे की एक अहम शर्त यह है कि सभी 114 राफेल विमानों में भारतीय हथियार, मिसाइल और एम्युनिशन लगाए जाएंगे। इसके साथ ही दसॉ एविएशन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि राफेल जेट्स भारतीय रडार और सेंसर सिस्टम से डिजिटल रूप से जुड़े हों।
इसके लिए सुरक्षित डेटा लिंक सिस्टम उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे लड़ाकू विमान जमीन पर मौजूद कंट्रोल सिस्टम को रियल टाइम इमेजरी और जानकारी भेज सकें। इससे वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमता और हालात पर तुरंत प्रतिक्रिया देने की ताकत बढ़ेगी। (114 Rafale fighter jets)
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी होगा सौदे का हिस्सा
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस डील में ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (टीओटी) भी शामिल होगा। इसके तहत राफेल के एयरफ्रेम यानी ढांचे के निर्माण की तकनीक भारत को दी जाएगी। इसके अलावा इंजन बनाने वाली कंपनी साफरान और एवियोनिक्स सिस्टम बनाने वाली कंपनी थेल्स भी इस टेक्नोलॉजी ट्रांसफर प्रक्रिया का हिस्सा होंगी।
जब एयरफ्रेम, इंजन और एवियोनिक्स से जुड़ी टेक्नोलॉजी भारत को मिल जाएगी, तो राफेल में स्वदेशी कंटेंट की हिस्सेदारी करीब 55 से 60 फीसदी तक पहुंच सकती है। इससे देश के डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को बड़ा फायदा मिलेगा। (114 Rafale fighter jets)
एएमसीए और तेजस मार्क-2 पर कोई असर नहीं
रक्षा सूत्रों ने साफ किया है कि 114 राफेल की खरीद से भारत की स्वदेशी फाइटर जेट योजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) और लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस मार्क-2 दोनों की योजना, बजट और टाइमलाइन अलग से तय की गई है।
एएमसीए भारत का फिफ्थ जेनरेशन स्टेल्थ फाइटर प्रोजेक्ट है, जबकि तेजस मार्क-2 मौजूदा तेजस मार्क-1ए का एडवांस्ड वर्जन होगा। रक्षा मंत्रालय पहले ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को 180 तेजस मार्क-1ए विमानों का ऑर्डर दे चुका है। (114 Rafale fighter jets)
114 राफेल विमानों की खरीद भारतीय वायुसेना की उस बहुस्तरीय रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत पुराने विमानों की जगह नए और आधुनिक फाइटर जेट शामिल किए जा रहे हैं। एक तरफ स्वदेशी प्लेटफॉर्म विकसित किए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ तुरंत जरूरतों को पूरा करने के लिए आधुनिक विदेशी विमानों को भी शामिल किया जा रहा है।
डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड की मंजूरी के बाद अब यह सौदा तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद है और आने वाले दिनों में रक्षा मंत्री और कैबिनेट स्तर पर इस पर फैसला लिया जाएगा। (114 Rafale fighter jets)


