📍नई दिल्ली | 2 Apr, 2026, 12:29 PM
Army corruption case: भारतीय सेना से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआई, केंद्र सरकार और सीएजी को नोटिस जारी किया है। यह याचिका एक लेफ्टिनेंट कर्नल द्वारा दाखिल की गई है, जिसमें उन्होंने सेना के अंदर कथित भ्रष्टाचार की जांच की मांग की है।
Army corruption case: कोर्ट ने मांगा जवाब, अगली सुनवाई तय
इस मामले की सुनवाई जस्टिस प्रतीक जैन कर रहे हैं। कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों से चार हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होगी। अदालत के आदेश में कहा गया है कि याचिकाकर्ता ने सीबीआई जांच और कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की है।
सेना अधिकारी ने लगाए ये आरोप
याचिका लेफ्टिनेंट कर्नल सुमित श्योराण की तरफ से दाखिल की गई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जब वह नई दिल्ली में तैनात थे, तब उन्होंने खरीद प्रक्रिया में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां देखीं।
उनके मुताबिक, यह मामला “एनुअल कंटिन्जेंट ग्रांट” यानी एसीजी से जुड़ा है, जिसके तहत जरूरी सामान खरीदा जाता है।
याचिका में कहा गया है कि खरीद प्रक्रिया में हेरफेर किया गया, रिकॉर्ड में गलत जानकारी दी गई और सरकारी सामान का गलत इस्तेमाल किया गया। आरोप यह भी है कि कुछ सामान को अधिकारियों के मेस का बताकर दिखाया गया, ताकि जांच से बचा जा सके। (Army corruption case)
शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
लेफ्टिनेंट कर्नल ने दावा किया है कि उन्होंने सितंबर 2024 से लगातार इस मामले में शिकायतें दीं। उन्होंने अपने आरोपों के साथ दस्तावेज भी जमा किए और कुछ अधिकारियों की इस मामले में भूमिका होने की भी जानकारी दी।
इसके बावजूद किसी भी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। याचिका में कहा गया है कि शिकायतों को नजरअंदाज किया गया, जिससे कथित गड़बड़ियां जारी रहीं और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका भी बनी रही।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की गई, वही सिस्टम के अंदर जांच की जिम्मेदारी में थे।
साइबर घुसपैठ का भी दावा
याचिका में अफसर ने एक और गंभीर आरोप लगाया गया है। अधिकारी का कहना है कि उनके कंप्यूटर सिस्टम को बिना अनुमति एक्सेस किया गया। इसे उन्होंने एक तरह की टारगेटेड साइबर घुसपैठ बताया है, जिससे उनके पास मौजूद जानकारी तक पहुंचने की कोशिश की गई।
सीबीआई ने नहीं दर्ज की एफआईआर
लेफ्टिनेंट कर्नल ने जनवरी 2025 में सीबीआई को भी इस मामले की विस्तृत शिकायत दी थी। उनका कहना है कि इतनी गंभीर शिकायत के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसी वजह से उन्होंने अदालत का रुख किया और कोर्ट से जांच की निगरानी करने की मांग की। (Army corruption case)
शिकायत के बाद बनाया दबाव
याचिका में यह भी कहा गया है कि शिकायत करने के बाद उन्हें दबाव का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, उनकी परफॉर्मेंस रिपोर्ट खराब की गई और उनका ट्रांसफर नागपुर कर दिया गया। इसे उन्होंने कार्रवाई से बचने के लिए उठाया गया कदम बताया है।
पेशे से वकील और पूर्व सैन्य अधिकारी कर्नल मुकुल देव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, इस मामले की गहराई से जांच होना बेहद जरूरी है। अधिकारी द्वारा उठाए गए मुद्दे काफी गंभीर हैं और इनकी जांच किसी बाहरी एजेंसी से कराई जानी चाहिए। पहली नजर में ऐसा लगता है कि बड़े स्तर पर गड़बड़ियां हुई हैं, जिनमें वरिष्ठ रैंक के अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने लिखा, सवाल यह उठता है कि जब छोटे अधिकारियों पर छोटी-छोटी बातों पर कोर्ट मार्शल हो जाता है, तो वरिष्ठ अधिकारियों को कानून से बाहर क्यों रखा जाए। जवाबदेही तय होना जरूरी है। उन्होंने आगे लिखा कि शिकायत करने वाले अधिकारी को लगातार परेशान किया जा रहा है और बार-बार उनका तबादला किया जा रहा है, ताकि जांच से बचा जा सके। अब समय आ गया है कि सेना जैसी प्रतिष्ठित संस्था अपने अंदर की कमियों को ठीक करे। (Army corruption case)

