📍नई दिल्ली | 5 Mar, 2026, 8:58 PM
IRIS Dena: हिंद महासागर क्षेत्र में ईरान की नौसेना के युद्धपोत आईआरआईएस देना को निशाना बनाना अमेरिका को भारी पड़ सकता है। देना को अमेरिकी नौसेना की न्यूक्लियर-पावर्ड अटैक सबमरीन ने श्रीलंका के दक्षिणी समुद्री इलाके के पास टारपीडो दाग कर डुबा दिया था। इस घटना के बाद समुद्र में बचाव अभियान चलाया गया, जिसमें लगभग 30 नाविकों को बचाया गया, जबकि 100 से ज्यादा के मारे जाने की खबर है।
इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि यह युद्धपोत हाल ही में भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक कार्यक्रम में हिस्सा लेकर लौट रहा था। (IRIS Dena)
विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि ईरानी युद्धपोत ने घटना के तुरंत बाद संकट संदेश यानी डिस्ट्रेस कॉल भेजा, जिसके बाद श्रीलंका की नौसेना और वायुसेना ने संयुक्त रूप से खोज और बचाव अभियान शुरू किया। बचाए गए नाविकों को श्रीलंका के दक्षिणी हिस्से में स्थित अस्पतालों में पहुंचाया गया।
आईआरआईएस देना ईरानी नौसेना का एक आधुनिक फ्रिगेट था। यह ईरान के मौज-क्लास युद्धपोतों में शामिल माना जाता है। इस जहाज को वर्ष 2021 में नौसेना में शामिल किया गया था और इसका नाम ईरान के माउंट देना के नाम पर रखा गया था। ईरान की दक्षिणी नौसैनिक फ्लीट में इसे महत्वपूर्ण युद्धपोत माना जाता था।
फरवरी 2026 में यह जहाज भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित आईएफआर-मिलन एक्सरसाइज में शामिल हुआ था। यह कार्यक्रम कई देशों की नौसेनाओं के बीच सहयोग और पेशेवर संवाद बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। (IRIS Dena)
IRIS Dena: कैसे हुआ हमला
रिपोर्टों के अनुसार 3 मार्च को जब ईरानी युद्धपोत भारत से लौटकर ईरान की ओर जा रहा था। जहाज श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र से गुजर रहा था।
बताया गया है कि इसी दौरान अमेरिकी नौसेना की एक अटैक सबमरीन ने जहाज पर टॉरपीडो दागा। टॉरपीडो लगने के बाद जहाज को गंभीर नुकसान हुआ और उसने तुरंत डिस्ट्रेस कॉल भेजी। (IRIS Dena)
कुछ समय बाद जहाज समुद्र में डूब गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद श्रीलंका की नौसेना और वायुसेना ने बचाव अभियान शुरू किया। कई नाविक समुद्र में तैरते हुए पाए गए, जिन्हें सुरक्षित निकालकर किनारे लाया गया।
श्रीलंका के अधिकारियों के अनुसार जहाज से संकट संदेश मिलने के बाद तुरंत नौसेना के जहाज और हेलीकॉप्टर भेजे गए। बचाव दल ने समुद्र में तैरते हुए कई नाविकों को बचाया और उन्हें अस्पताल पहुंचाया।
श्रीलंका की नौसेना के प्रवक्ता ने बताया कि यह घटना देश की समुद्री सीमा के बाहर हुई थी, लेकिन यह क्षेत्र श्रीलंका के खोज और बचाव क्षेत्र में आता है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के अनुसार ऐसे मामलों में तत्काल सहायता प्रदान करना आवश्यक होता है।
रिपोर्टों के अनुसार बचाए गए नाविकों को गाले के करापिटिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। बचाव अभियान के दौरान समुद्र में तेल का बड़ा धब्बा भी देखा गया, जिससे संकेत मिला कि जहाज को भारी नुकसान हुआ था। (IRIS Dena)
हमले को लेकर उठे सवाल
इस घटना के बाद कई रणनीतिक और कूटनीतिक सवाल उठे हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध के दौरान भी समुद्र में कुछ मानवीय नियम लागू होते हैं।
युद्ध के कानूनों में शामिल जिनेवा कन्वेंशन के अनुसार यदि कोई जहाज डूबता है, तो जहां तक सैन्य परिस्थितियां अनुमति दें, वहां तक जीवित बचे लोगों की तलाश और बचाव का प्रयास किया जाना चाहिए। कई विशेषज्ञों ने इस मामले में यह सवाल उठाया कि हमले के बाद बचाव अभियान में अमेरिकी नौसेना की भूमिका क्यों नहीं दिखी।
हालांकि यह भी कहा जाता है कि पनडुब्बियां अक्सर अपनी सुरक्षा के कारण हमले के बाद तुरंत क्षेत्र छोड़ देती हैं। इस कारण बचाव कार्य अन्य नौसेनाओं द्वारा किया जाता है। (IRIS Dena)
अमेरिकी पनडुब्बी रख रही थी अभ्यास पर नजर
भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने कहा कि इस तरह की घटना समुद्री सहयोग के माहौल पर सवाल खड़े करती है। सिबल ने कहा कि मिलन एक्सरसाइज का उद्देश्य विभिन्न देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी समझ, भरोसा और पेशेवर सहयोग को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि इस अभ्यास का मकसद समुद्री क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि जिस ईरानी फ्रिगेट को बाद में निशाना बनाया गया, वह भारतीय नौसेना के निमंत्रण पर इस अभ्यास में शामिल हुआ था। उनका कहना था कि अमेरिकी पनडुब्बी इस पूरे अभ्यास पर नजर रख रही थी और जब यह जहाज भारत से वापस ईरान जा रहा था, तब श्रीलंका के पास उस पर टॉरपीडो से हमला किया गया। उनके अनुसार इस कार्रवाई से मिलान अभ्यास की भावना को ठेस पहुंची है और यह स्थिति किसी के लिए भी सकारात्मक नहीं कही जा सकती। (IRIS Dena)
A distress call from the Iranian warship IRIS Dena was received by MRCC Colombo early on 4 March 2026, according to the Sri Lankan Navy. The vessel was operating about 20 nautical miles west of Galle within Sri Lanka’s Search and Rescue (SAR) region.
Following the alert, the… pic.twitter.com/slNutKMjq7— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) March 5, 2026
मेजबान देश के प्रति असम्मान
रणनीतिक मामलों के विश्लेषक ब्रह्मा चेलानी ने भी इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी बहुराष्ट्रीय अभ्यास से लौट रहे जहाज पर हमला होना समुद्री कूटनीति के लिहाज से संवेदनशील मामला है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा और विश्वास से जुड़े सवाल पैदा करती हैं।
चेलानी के अनुसार इस घटना से ऐसा लगता है कि भारत के समुद्री पड़ोस को एक तरह से युद्ध क्षेत्र में बदल दिया गया है। कूटनीतिक दृष्टि से यह कदम नौसैनिक मेजबानी से जुड़े एक अनलिखे नियम का उल्लंघन माना जा सकता है। आम तौर पर यह माना जाता है कि यदि कोई जहाज किसी देश के आमंत्रण पर उसके सैन्य अभ्यास में शामिल हुआ हो, तो उसके वहां से निकलने के तुरंत बाद उस पर हमला करना उस मेजबान देश के प्रति असम्मान माना जाता है। उनका कहना था कि इस घटना से अन्य देशों की नौसेनाओं के सामने यह संदेश जा सकता है कि भारत में होने वाले नौसैनिक अभ्यासों में भाग लेने के बाद भी उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं है। (IRIS Dena)
क्या कहते हैं समुद्री कानून और अंतरराष्ट्रीय नियम
समुद्र से जुड़े कई अंतरराष्ट्रीय नियम भी इस घटना के संदर्भ में चर्चा में आए हैं। समुद्र के कानूनों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन यानी UNCLOS समुद्री गतिविधियों के लिए कुछ नियम तय करता है। इन नियमों के तहत अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में जहाजों को नेविगेशन की स्वतंत्रता होती है। हालांकि युद्ध की स्थिति में सैन्य कार्रवाई के अपने अलग नियम भी लागू होते हैं। (IRIS Dena)
कई विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि समुद्र में युद्ध के दौरान भी मानवीय नियमों का पालन किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि बेहतर यही होता कि अमेरिका पहले भारत और ईरान दोनों को यह जानकारी दे देता कि विशाखापत्तनम से लौटते समय देना संभावित लक्ष्य बन सकता है। यदि ऐसा होता, तो जहाज का कप्तान संभवतः किसी तटस्थ बंदरगाह में शरण लेने का फैसला कर सकता था।
जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में जहाजों को आवाजाही की स्वतंत्रता जरूर मिलती है, लेकिन युद्ध की स्थिति में इसका मतलब यह नहीं होता कि उन पर हमला नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि युद्ध के दौरान भी कुछ मानवीय नियम लागू होते हैं। (IRIS Dena)
जिनेवा कन्वेंशन के तहत यदि कोई जहाज डूबने की स्थिति में हो, तो हमलावर पक्ष को जहां तक सैन्य परिस्थितियां अनुमति दें, वहां तक जीवित बचे लोगों की तलाश और बचाव का प्रयास करना चाहिए। इस मामले में रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी पनडुब्बी हमले के बाद तुरंत वहां से निकल गई और बचाव कार्य श्रीलंका की नौसेना को करना पड़ा।
हालांकि यह पहली बार नहीं है कि जब अमेरिकी नौसेना की किसी कार्रवाई ने भारत को असहज स्थिति में डाला हो। वर्ष 2021 में भी अमेरिकी नौसेना ने लक्षद्वीप के आसपास सैन्य अभ्यास किया था।
अमेरिका ने अभी तक UNCLOS की पुष्टि नहीं की है, जबकि भारत इस संधि का हिस्सा है। इस संधि के अनुसार किसी देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन में सैन्य अभ्यास करने के लिए संबंधित देश की सहमति आवश्यक मानी जाती है। (IRIS Dena)
भारतीय नौसेना का खोज और बचाव अभियान
भारतीय नौसेना की तरफ से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक श्रीलंका की नौसेना के अनुसार 4 मार्च की सुबह तड़के देना शिप से एक डिस्ट्रेस कॉल कोलंबो स्थित मैरीटाइम रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी एमआरसीसी को मिला था। उस समय यह जहाज गाले से लगभग 20 नॉटिकल मील पश्चिम में मौजूद था। यह इलाका समुद्री खोज और बचाव क्षेत्र यानी एसएआर रीजन के अंतर्गत आता है, जिसकी जिम्मेदारी श्रीलंका के पास है। (IRIS Dena)
यह जानकारी मिलते ही भारतीय नौसेना ने तुरंत खोज और बचाव अभियान शुरू कर दिया। 4 मार्च को सुबह लगभग 10 बजे भारतीय नौसेना के एक लंबी दूरी के मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट को खोज अभियान में सहायता के लिए भेजा गया। यह विमान श्रीलंका द्वारा शुरू किए गए बचाव अभियान को मजबूत करने के उद्देश्य से तैनात किया गया था। (IRIS Dena)
इसके अलावा एक और विमान को भी तैयार रखा गया, जिसमें हवा से गिराए जा सकने वाले लाइफ राफ्ट मौजूद थे। जरूरत पड़ने पर इस विमान को तुरंत भेजने की व्यवस्था की गई थी ताकि समुद्र में फंसे लोगों को मदद पहुंचाई जा सके।
उस समय आसपास के क्षेत्र में मौजूद भारतीय नौसेना का जहाज आईएनएस तरंगिणी भी बचाव अभियान में मदद के लिए भेजा गया। यह जहाज 4 मार्च को शाम करीब 4 बजे खोज क्षेत्र में पहुंच गया और बचाव प्रयासों में शामिल हो गया। तब तक श्रीलंका की नौसेना और अन्य एजेंसियां समुद्र में खोज और बचाव का काम शुरू कर चुकी थीं। (IRIS Dena)
इसके अलावा भारतीय नौसेना का एक और जहाज आईएनएस इक्क्षक कोच्चि से रवाना किया गया ताकि खोज अभियान को और मजबूत किया जा सके। यह जहाज अब भी उस क्षेत्र में मौजूद है और समुद्र में लापता लोगों की तलाश कर रहा है। यह अभियान मानवीय आधार पर चलाया जा रहा है ताकि जहाज दुर्घटना में फंसे लोगों की सहायता की जा सके।
भारतीय नौसेना और श्रीलंका के अधिकारियों के बीच खोज और बचाव अभियान को लेकर लगातार समन्वय जारी है और दोनों देश मिलकर इस मानवीय अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। (IRIS Dena)
घटना के बाद क्षेत्र में बढ़ी सतर्कता
इस घटना के बाद हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ गई है। कई देशों की नौसेनाएं इस क्षेत्र में सक्रिय हैं और समुद्री गतिविधियों पर नजर रख रही हैं।
जहाज के डूबने की घटना के बाद आसपास के समुद्री मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने भी इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। (IRIS Dena)


