📍नई दिल्ली | 4 Apr, 2026, 3:59 PM
Strait of Hormuz Maritime Threat: 20-29 मार्च के आसपास स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और पर्शियन गल्फ में जहाजों पर हमलों की संख्या अचानक घट गई थी, जिसके बाद यह अनुमान लगाए जा रहे थे कि ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर को लेकर जल्दी ही कोई समझौता हो सकता है।
गुरुग्राम स्थित इंडियन नेवी के सहयोग से काम करने वाले इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) की रिपोर्ट के मुताबिक हाल के दिनों में जो 9 दिन की शांति दिखी थी, वह असल में किसी सीजफायर या कूटनीतिक समझौते का नतीजा नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि 28 फरवरी से शुरू हुई जंग के बाद अरब सागर क्षेत्र, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और गल्फ ऑफ ओमान में समुद्री सुरक्षा हालात बेहद खराब हो चुके हैं और खतरे का स्तर “क्रिटिकल” बना हुआ है। बता दें कि ने IFC-IOR कई देशों के साथ मिलकर समुद्री गतिविधियों की निगरानी करता है।
Strait of Hormuz Maritime Threat: 9 दिन की शांति: क्या थी असली वजह?
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि 9 दिन का जो शांत समय दिखा था, वह किसी भी तरह से युद्ध रुकने का संकेत नहीं था। यह एक “टैक्टिकल पॉज” यानी रणनीतिक ठहराव था।
IFR-IOR की रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान हमला करने वाले पक्ष ने अपनी गतिविधियों को रोकने के बजाय दोबारा हमले की तैयारी की। बाद में एमवी एक्सप्रेस रोम, एमवी अल सल्मी और एमवी एक्वा 1 जैसे जहाजों पर हुए हमलों ने यह साबित कर दिया कि यह सिर्फ एक अंतराल था, अंत नहीं।
इस पैटर्न में पहले तेज हमले होते हैं, फिर कुछ दिन का अंतर आता है और उसके बाद फिर से हमले शुरू हो जाते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादातर हमले दिन के समय या ऐसे समय पर हुए जब उनका सटीक समय तय नहीं किया जा सका। लेकिन जो पैटर्न सामने आया है उससे यह साफ होता है कि हमले मौके का फायदा उठाकर किए गए। खास तौर पर ऐसे जहाजों को निशाना बनाया गया जो समुद्र में अपने तय रास्ते पर आगे बढ़ रहे थे। अधिकतर हमले सुबह या दोपहर के समय देखने को मिले, जब जहाज सामान्य रूप से अपनी यात्रा जारी रखते हैं।
रिपोर्ट बताती है कि अब समुद्री हमले सिर्फ एक जगह तक सीमित नहीं रहे हैं। शुरुआत में हमले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तक सीमित थे, लेकिन अब यह खतरा बढ़कर उत्तरी अरब सागर, यूएई के पानी और प्रमुख बंदरगाहों तक फैल गया है।
हमलों का तरीका भी बदल गया है। अब सिर्फ मिसाइल या पारंपरिक हथियार ही नहीं, बल्कि ड्रोन, बिना चालक वाली नावें और इंटरसेप्शन के दौरान गिरने वाला मलबा भी खतरा बन रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी से 2 अप्रैल तक कुल 29 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 23 जहाज सीधे हमलों का शिकार हुए। पिछले सात दिनों में भी तीन हमले सामने आए हैं, जो लगातार बने खतरे को दिखाते हैं। अरब सागर, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और गल्फ ऑफ ओमान के पूरे क्षेत्र में खतरे का स्तर इस समय ‘क्रिटिकल’ बना हुआ है, यानी स्थिति बेहद गंभीर है। (Strait of Hormuz Maritime Threat)
जीपीएस जामिंग के खतरा बढ़ा
रिपोर्ट में जीपीएस और जीएनएसएस जामिंग पर चिंता जाहिर की गई है। जिसका मतलब है कि जहाजों के नेविगेशन सिस्टम सही काम नहीं कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास, गल्फ ऑफ ओमान और अरब सागर के इलाके में लगातार जीपीएस और जीएनएसएस सिस्टम में दिक्कत आ रही है। इसकी वजह से जहाजों को सही दिशा और लोकेशन का पता लगाने में परेशानी हो रही है। एआईएस सिस्टम, जिससे जहाजों की पहचान और ट्रैकिंग होती है, वह भी प्रभावित हो रहा है।
यह खतरा अचानक सामने आ सकता है और किसी भी जहाज को निशाना बना सकता है, चाहे वह किसी भी देश का हो, किस कंपनी का हो या उसमें क्या सामान हो। खास तौर पर वे जहाज ज्यादा जोखिम में हैं जो एक जगह खड़े होते हैं, आदेश का इंतजार कर रहे होते हैं या किसी अहम समुद्री रास्ते के पास काम कर रहे होते हैं, क्योंकि ऐसे समय में उनके पास तेजी से दिशा बदलने की क्षमता कम होती है।
इस वजह से जहाजों को सही दिशा का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है और समुद्र में उनकी स्थिति को समझना भी कठिन हो जाता है। यह खतरा इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि यह बिना किसी चेतावनी के सामने आता है और किसी भी जहाज को प्रभावित कर सकता है, चाहे उसका झंडा, मालिक या माल कुछ भी हो। (Strait of Hormuz Maritime Threat)
कब और कैसे हो रहे हैं हमले
रिपोर्ट के अनुसार, हमले अब पूरी तरह अनिश्चित हो चुके हैं। ये हमले चलते हुए जहाजों पर भी हो रहे हैं और बंदरगाह के पास खड़े जहाजों पर भी। कई मामलों में जहाज जब एंकर पर खड़े होते हैं या एक जहाज से दूसरे जहाज में माल ट्रांसफर कर रहे होते हैं, तब भी उन्हें निशाना बनाया गया है।
हमलों में खासतौर पर जहाज के इंजन रूम या पानी की सतह के ऊपर के हिस्से को निशाना बनाया जाता है, जिससे आग लगने या विस्फोट होने की संभावना बढ़ जाती है। इससे कई बार जहाज छोड़कर भागना पड़ता है या जहाज डूब भी सकता है। ये हमले मिसाइलों, ड्रोन, यूएसवी से भी किए जा रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि इस समय कोई भी जहाज पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। हमलों में कच्चा तेल ले जाने वाले टैंकर, कंटेनर जहाज, बल्क कैरियर और सपोर्ट जहाज सभी निशाने पर रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से हर दिन करीब 2.1 करोड़ बैरल तेल गुजरता है। इस रास्ते के प्रभावित होने का मतलब है कि वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और व्यापार दोनों पर असर पड़ना।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा हालात आधुनिक समय में अभूतपूर्व हैं और इसका असर दुनिया भर में महसूस किया जा रहा है। (Strait of Hormuz Maritime Threat)
नए रास्तों का कर रहे इस्तेमाल
रिपोर्ट के मुताबिक समुद्री क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए शिपिंग इंडस्ट्री ने अपने तरीके बदलने शुरू कर दिए हैं।
कई जहाज अब केप ऑफ गुड होप के रास्ते जा रहे हैं, क्योंकि यह फिलहाल सबसे सुरक्षित माना जा रहा है। हालांकि लंबा रास्ता है और लागत बढ़ जाती है, साथ ही, वहां के बंदरगाहों पर ईंधन भरने की व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
इसके साथ ही इस पूरे इलाके के लिए वॉर रिस्क प्रीमियम यानी बीमा की लागत काफी बढ़ गई है और बीमा कंपनियां भी अब ज्यादा सख्त रुख अपना रही हैं।
कुछ तेल शिपमेंट को सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए यनबू पोर्ट तक भेजा जा रहा है, जहां से आगे उन्हें लोड किया जाता है। इससे फिलहाल थोड़ी राहत मिली है, लेकिन यह भी एक सीमित रास्ता है और यमन के गैर-सरकारी समूहों से खतरे में बना रहता है।
वहीं, ओमान के डुक्म पोर्ट को भी कुछ ऑपरेटर्स एक वैकल्पिक ट्रांसशिपमेंट हब के तौर पर देख रहे हैं, क्योंकि यह सीधे खतरे वाले इलाके से थोड़ा बाहर स्थित है, लेकिन यह भी पूरी तरह जोखिम से मुक्त नहीं माना जा रहा। (Strait of Hormuz Maritime Threat)
यमन के समूहों की एंट्री से बढ़ी चिंता
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यमन के हूथी समूहों ने इस अभियान के साथ जुड़ने का ऐलान किया है। हालांकि इस चरण में उनके द्वारा कोई सीधा समुद्री हमला दर्ज नहीं हुआ है, लेकिन उनकी क्षमता और इरादे को देखते हुए खतरा बढ़ सकता है। इससे रेड सी, बाब-अल-मंदेब और गल्फ ऑफ एडन जैसे इलाकों में भी जोखिम बढ़ने की आशंका जताई गई है। (Strait of Hormuz Maritime Threat)
होर्मुज में लगभग ठप हुआ ट्रैफिक
रिपोर्ट के बताया गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई है। जहां पहले हर दिन करीब 130 से 140 जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर सिर्फ 4 से 5 जहाज प्रतिदिन रह गई है। कुछ दिनों में तो यह संख्या लगभग शून्य तक पहुंच गई।
यह बदलाव इसलिए हुआ क्योंकि जहाज संचालकों ने जोखिम से बचने के लिए इस रास्ते से गुजरना लगभग बंद कर दिया है। वहीं, खतरे से बचने के लिए कई जहाज अब ईरान के क्षेत्रीय जल के करीब से गुजरने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि इससे जोखिम कम होगा, लेकिन इससे नई समस्याएं पैदा हो रही हैं।
इसमें कानूनी, राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़ी अड़चनें शामिल हैं। इसके बावजूद यह रास्ता पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा रहा। (Strait of Hormuz Maritime Threat)


