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Rafale M India Navy: 2029 से नौसेना को मिलेंगे पहले चार राफेल-एम, एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत पर होंगे तैनात

राफेल-एम को बोइंग F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट के विकल्प के तौर पर चुना गया था, जो मल्टी-रोल कैरियर बॉर्न फाइटर्स (MRCBF) प्रोग्राम के तहत इवैल्यूएशन के बाद फाइनल किया गया था...

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📍नई दिल्ली | 2 Dec, 2025, 8:58 PM

Rafale M India Navy: भारतीय नौसेना के लिए आने वाले साल बेहद अहम साबित होने वाले हैं। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने बताया कि भारत को राफेल-एम (Rafale-Marine) फाइटर जेट की पहली खेप साल 2029 से मिलने लगेगी। उन्होंने यह बाात नौसेना दिवस 2025 से पहले आयोजित सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही। इस घोषणा के बाद भारत की कैरियर-बेस्ड एयर पावर को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं, क्योंकि नौसेना लंबे समय से एक आधुनिक मल्टी-रोल नेवी फाइटर जेट का इंतजार कर रही थी।

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एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि फ्रांस के साथ हुई इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट के तहत नौसेना को कुल 26 राफेल-एम मिलेंगे। इनमें 22 सिंगल-सीटर और 4 ट्विन-सीटर शामिल हैं। यह सौदा लगभग 64,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें ट्रेनिंग, सिम्युलेटर, एडवांस्ड वेपंस पैकेज, मेंटेनेंस सपोर्ट और परफॉर्मेंस-बेस्ड लॉजिस्टिक्स जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं। नौसेना प्रमुख ने कहा कि “हम उम्मीद करते हैं कि 2029 तक चार राफेल-एम हमारे बेड़े का हिस्सा बन जाएंगे।” (Rafale M India Navy)

राफेल-एम के आने से भारत के दोनों एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत पर अब पूरी क्षमता के साथ आधुनिक फाइटर तैनात किए जा सकेंगे। नौसेना वर्तमान में मिग-29के फाइटर का इस्तेमाल करती है, लेकिन यह बेड़ा धीरे-धीरे अपनी उम्र और तकनीकी सीमाओं को पार कर चुका है। मिग-29के की तुलना में राफेल-एम अधिक आधुनिक, भरोसेमंद और मल्टीफंक्शनल कैपेबिलिटीज वाला जेट है। (Rafale M India Navy)

राफेल-एम को बोइंग F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट के विकल्प के तौर पर चुना गया था, जो मल्टी-रोल कैरियर बॉर्न फाइटर्स (MRCBF) प्रोग्राम के तहत इवैल्यूएशन के बाद फाइनल किया गया था। राफेल-एम नेवल वेरिएंट में मजबूत अंडरकैरिज और एक्सटेंडेड नोज है, जो कैरियर ऑपरेशंस के लिए डिजाइन किया गया है। भारतीय वायुसेना में पहले से ही 36 राफेल जेट्स इस्तेमाल हो रहे हैं औऱ राफेल मरीन में 80 फीसदी से अधिक समानताएं हैं, जिससे इसके मेंटेनेंस में आसानी होगी। (Rafale M India Navy)

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एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि राफेल-एम इसलिए भी खरीदे गए हैं क्योंकि स्वदेशी ट्विन-इंजन डेक-बेस्ड फाइटर (TEDBF) अभी डेवलपमेंट के चरण में है। उम्मीद है कि यह विमान 2032 या 2033 तक सेवा में आएगा। इसलिए TEDBF आने तक राफेल-एम नौसेना के फाइटर डेक को मजबूत बनाए रखेगा और समुद्री अभियानों में निरंतर मारक क्षमता को सुनिश्चित करेगा। (Rafale M India Navy)

राफेल-एम एक ऐसा फाइटर जेट है, जिसे विशेष रूप से समुद्री परिस्थितियों में ऑपरेट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें एईएसए रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट, बियोंड विजुअल रेंज मिसाइलें, कैरियर-लैंडिंग हुक सिस्टम, और हाई-थ्रस्ट इंजन जैसी क्षमताएं हैं। इससे यह विमान लंबी दूरी तक टारगेट पर हमला कर सकता है और खराब मौसम में भी बेहतर काम करता है। फ्रांस की नौसेना इसका इस्तेमाल लंबे समय से कर रही है। (Rafale M India Navy)

राफेल-एम के आने से नौसेना की स्ट्राइक कैपेबिलिटी, सर्वाइवेबिलिटी, और रिएक्शन टाइम में बड़ा सुधार होगा। दो एयरक्राफ्ट कैरियर पर राफेल-एम की तैनाती से भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में किसी भी चुनौती का तेजी से सामना कर सकेगी। चीन के बढ़ते नौसैनिक प्रभाव और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। (Rafale M India Navy)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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