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INS Vaghsheer Sortie: सबमरीन की सॉर्टी लेने वाली देश की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं द्रौपदी मुर्मू, सुखोई-30 और राफेल में भी भरी है उड़ान

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📍नई दिल्ली/कारवार | 28 Dec, 2025, 7:28 PM

INS Vaghsheer Sortie: भारतीय नौसेना के लिए आज का दिन बेहद यादगार रहा। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय नौसेना की स्वदेशी कलवरी-क्लास सबमरीन आईएनएस वाघशीर पर सॉर्टी लेकर इतिहास रच दिया। वह देश की पहली महिला राष्ट्रपति और ऐसी दूसरी राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने सबमरीन की सॉर्टी ली है। कर्नाटक के कारवार स्थित कडंबा नेवल बेस से उन्होंने इस पनडुब्बी पर सवार होकर समुद्र के भीतर डाइव की और करीब दो घंटे से ज्यादा समय तक सबमरीन के ऑपरेशनल डेमॉन्स्ट्रेशन देखे। इस दौरान राष्ट्रपति के साथ नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी भी मौजूद रहे।

यह अवसर इसलिए भी खास रहा क्योंकि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू किसी सबमरीन पर सॉर्टी लेने वाली देश की दूसरी राष्ट्रपति बनीं। इससे पहले वर्ष 2006 में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने सबमरीन में सॉर्टी ली थी। उन्होंने रूसी मूल की किलो-क्लास सबमरीन आईएनएस सिंधुरक्षक पर सॉर्टी ली थी। वहीं, कलवरी-क्लास की सबमरीन पर किसी राष्ट्रपति की यह पहली सॉर्टी भी मानी जा रही है। (INS Vaghsheer Sortie)

INS Vaghsheer Sortie: क्रू और सेलर्स से की बातचीत

राष्ट्रपति सुबह गोवा एयरपोर्ट से हेलिकॉप्टर द्वारा कारवार के कडंबा नेवल बेस पहुंचीं। वहां नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद वे आईएनएस वाघशीर पर सवार हुईं। सॉर्टी के दौरान सबमरीन ने डाइव की और अलग-अलग ऑपरेशनल डेमॉन्स्ट्रेशन डिस्प्ले किए गए। राष्ट्रपति ने सबमरीन के भीतर मौजूद कंट्रोल रूम, नेविगेशन सिस्टम और क्रू की कैसे काम करता है, उसे नजदीक से देखा।

करीब दो घंटे से अधिक समय तक चली इस सॉर्टी के दौरान उन्होंने अफसरों और सेलर्स से बातचीत की और उनके अनुभवों को जाना। समुद्र के भीतर सीमित जगह, सख्त अनुशासन और उच्च तकनीक के बीच काम कर रहे जवानों को देखकर राष्ट्रपति ने उनके आत्मविश्वास और समर्पण की सराहना की। (INS Vaghsheer Sortie)

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नौसेना हर खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार

सॉर्टी के बाद राष्ट्रपति ने विजिटर्स बुक में अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा कि आईएनएस वाघशीर पर सेलिंग, डाइव और समय बिताना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा। उन्होंने लिखा कि सबमरीन द्वारा की गई कई सफल फायरिंग और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशंस क्रू की बेहतरीन तैयारी और समर्पण को दर्शाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि वाघशीर के क्रू का अनुशासन, आत्मविश्वास और उत्साह यह भरोसा देता है कि भारतीय नौसेना और उसकी सबमरीन किसी भी खतरे और हर परिस्थिति में देश की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। (INS Vaghsheer Sortie)

President Droupadi Murmu INS Vaghsheer Sortie
President Droupadi Murmu INS Vaghsheer Sortie

जवानों के साथ समय बिताने से बढ़ा मनोबल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश की सशस्त्र सेनाओं की सुप्रीम कमांडर हैं। उनका इस तरह से ऑपरेशनल प्लेटफॉर्म पर जाकर जवानों के साथ समय बिताना, सेनाओं के साथ उनके सीधे जुड़ाव को दिखाता है। इससे पहले नवंबर 2024 में वे स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत पर भी नौसेना का ऑपरेशनल डेमॉन्स्ट्रेशन देख चुकी हैं।

नौसेना के अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति की यह सॉर्टी जवानों के लिए मनोबल बढ़ाने वाली रही। इससे यह संदेश भी गया कि देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद सशस्त्र बलों की तैयारियों को लेकर पूरी तरह सजग और भरोसेमंद है। (INS Vaghsheer Sortie)

प्रोजेक्ट–75 के तहत बनी है आईएनएस वाघशीर

आईएनएस वाघशीर प्रोजेक्ट–75 के तहत बनी कलवरी-क्लास की छठी और अंतिम सबमरीन है। इसे जनवरी 2025 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। यह डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन है, जिसे मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने फ्रांस की नेवल ग्रुप के सहयोग से तैयार किया है।

यह सबमरीन एंटी-सर्फेस और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, इंटेलिजेंस जुटाने और समुद्री निगरानी जैसे अहम मिशनों के लिए डिजाइन की गई है। इसकी खासियत है कि यह लंबे समय तक समुद्र के भीतर रहकर चुपचाप ऑपरेशन कर सकती है। वाघशीर का मोटो ‘वीरता वर्चस्व विजय’ है, जो इसकी भूमिका और सोच को दर्शाता है। (INS Vaghsheer Sortie)

आईएनएस वाघशीर पर राष्ट्रपति की सॉर्टी को भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता के प्रतीक के रूप में भी देखा जा रहा है। कलवरी-क्लास सबमरीन प्रोग्राम के जरिए भारत ने पनडुब्बी निर्माण में बड़ी तकनीकी छलांग लगाई है। इस परियोजना से न सिर्फ नौसेना की ताकत बढ़ी है, बल्कि देश के शिपबिल्डिंग और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी मजबूती मिली है।

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नौसेना के अनुसार, इन सबमरीनों के आने से समुद्री सीमाओं की निगरानी और सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा प्रभावी हुई है। खास तौर पर हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों के बीच इन प्लेटफॉर्म्स की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। (INS Vaghsheer Sortie)

INS Vaghsheer Sortie: जवानों के लिए खास दिन

वाघशीर के क्रू के लिए यह दिन खास रहा। राष्ट्रपति से सीधे संवाद और उनकी सराहना ने जवानों का उत्साह बढ़ाया। सेलर्स ने बताया कि सीमित जगह में, लंबे समय तक परिवार से दूर रहकर काम करना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन ऐसे मौकों पर मिलने वाला सम्मान और भरोसा उनकी मेहनत को सार्थक बना देता है।

सु-30 एमकेआई और राफेल पर सॉर्टी

इसके अलावा वे देश की एकमात्र राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने दो अलग-अलग फाइटर जेट सु-30 एमकेआई और राफेल पर सॉर्टी ली है। पहली हवाई सॉर्टी 8 अप्रैल 2023 को हुई थी। उस दिन राष्ट्रपति मुर्मू ने असम के तेजपुर एयर फोर्स स्टेशन से सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट में उड़ान भरी। यह उड़ान करीब 30 मिनट की थी। इस दौरान विमान ने ब्रह्मपुत्र घाटी और हिमालय के पहाड़ी इलाकों के ऊपर उड़ान भरी।

दूसरी हवाई सॉर्टी उन्होंने इसी साल 29 अक्टूबर को ली थी। इस बार राष्ट्रपति मुर्मू ने हरियाणा के अंबाला एयर फोर्स स्टेशन से राफेल फाइटर जेट में उड़ान भरी। यह उड़ान भी लगभग 30 मिनट की रही। इस दौरान राफेल ने करीब 15,000 फीट की ऊंचाई हासिल की और 700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरी। राफेल भारतीय वायुसेना का सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान माना जाता है, इसलिए यह सॉर्टी खास तौर पर महत्वपूर्ण रही। (INS Vaghsheer Sortie)

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बनाए कई रिकॉर्ड

इन दोनों उड़ानों के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी बनाए हैं। वे भारत की पहली राष्ट्रपति हैं जिन्होंने दो अलग-अलग फाइटर जेट सुखोई-30 एमकेआई और राफेल में सॉर्टी ली है। इससे पहले के राष्ट्रपति, जैसे एपीजे अब्दुल कलाम या प्रतिभा पाटिल, केवल सुखोई-30 एमकेआई में ही उड़ान भरी थी।

इतना ही नहीं, राष्ट्रपति मुर्मू राफेल फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली पहली भारतीय राष्ट्रपति भी हैं। साथ ही वे दुनिया की पहली महिला राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने सुखोई-30 एमकेआई और राफेल दोनों में हवाई सॉर्टी ली है। सुखोई-30 एमकेआई की सॉर्टी के मामले में वे कुल मिलाकर तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्रपति थीं, क्योंकि उनसे पहले प्रतिभा पाटिल इस विमान में उड़ान भर चुकी थीं। (INS Vaghsheer Sortie)

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