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MILAN 2026: 74 देशों के बीच रक्षा मंत्री का बड़ा संदेश, समुद्री चुनौतियों से अकेला नहीं निपट सकता कोई देश

नौसेना प्रमुख ने पिछले साल हुए ‘अफ्रीका–इंडिया की मैरीटाइम एंगेजमेंट’ अभ्यास का भी जिक्र किया। इस अभ्यास में पूर्वी अफ्रीका के देशों के साथ मिलकर व्यावहारिक सहयोग किया गया। इससे यह संदेश गया कि अगर इरादा मजबूत हो तो दूरी कोई बाधा नहीं बनती...

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📍विशाखापत्तनम | 19 Feb, 2026, 9:42 PM

MILAN 2026 Maritime Security: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को साफ शब्दों में कहा कि आज समुद्र से जुड़ी चुनौतियां पहले से कहीं ज्यादा जटिल और आपस में जुड़ी हुई हैं। ऐसे समय में दुनिया के देशों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने 74 देशों से आए नौसेना प्रमुखों और प्रतिनिधिमंडलों को संबोधित करते हुए कहा कि समुद्री सुरक्षा अब किसी एक देश का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है।

MILAN 2026 Maritime Security: समुद्री रास्तों पर नियंत्रण को लेकर बढ़ी होड़

विशाखापत्तनम में आयोजित मल्टीलेटरल नेवल एक्सरसाइज मिलन 2026 के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में दुनिया की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री परिवहन में भारी इजाफा हुआ है। इसके साथ ही समुद्री रास्तों, जलडमरूमध्यों और समुद्री चैनलों पर नियंत्रण को लेकर होड़ भी बढ़ी है। कई बार यह तनाव की स्थिति तक पहुंच जाती है। समुद्र के नीचे मौजूद खनिज संपदा, खासकर दुर्लभ खनिजों को लेकर भी दुनिया का ध्यान बढ़ा है, जिससे नई तरह की प्रतिस्पर्धा पैदा हो रही है। (MILAN 2026 Maritime Security)

नौसेनाओं के लिए लगातार बढ़ रही हैं चुनौतियां

उन्होंने चेतावनी दी कि पारंपरिक खतरों के साथ-साथ नए खतरे भी सामने आ रहे हैं। समुद्री डकैती, मैरीटाइम टेररिज्म, अवैध मछली पकड़ना, तस्करी, साइबर हमले और सप्लाई चेन में रुकावट जैसी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदाएं भी ज्यादा बार और ज्यादा तीव्र रूप में आ रही हैं। ऐसे में मानवीय सहायता और आपदा राहत ऑपरेशन भी अधिक जरूरी हो गए हैं।

राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि कोई भी एक नौसेना, चाहे वह कितनी भी मजबूत क्यों न हो, इन सभी चुनौतियों का अकेले सामना नहीं कर सकती। उन्होंने नौसेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाने, सूचना साझा करने और संयुक्त अभ्यास करने की जरूरत पर जोर दिया। (MILAN 2026 Maritime Security)

ग्लोबल नेवल फ्रेमवर्क पर दिया जोर

रक्षा मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि यानी यूएन कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ सीज (यूएनसीएलओएस) का जिक्र करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से जुड़े मामलों के समाधान के लिए यह एक मजबूत लीगल फ्रेमवर्क देता है। लेकिन इसे और प्रभावी बनाने के लिए एक व्यापक ग्लोबल नेवल फ्रेमवर्क की जरूरत है। ऐसा फ्रेमवर्क देशों के बीच भरोसा बढ़ाएगा, संचार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और खुले समुद्र में आतंकवाद व अपराध जैसी गतिविधियों को रोकने में मदद करेगा। (MILAN 2026 Maritime Security)

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मिलन जैसे प्लेटफॉर्म्स की है जरूरत

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज वैश्विक व्यवस्था में बदलाव दिखाई दे रहा है। ऐसे समय में मिलन जैसे प्लेटफॉर्म प्रोफेशनल अनुभव साझा करने, आपसी भरोसा मजबूत करने और मिलकर काम करने की क्षमता बढ़ाने का अवसर देते हैं। जब अलग-अलग देशों के जहाज साथ चलते हैं, नाविक साथ में ट्रेनिंग लेते हैं और कमांडर साथ बैठकर चर्चा करते हैं, तो भौगोलिक और राजनीतिक दूरियां कम हो जाती हैं। (MILAN 2026 Maritime Security)

सागर से महासागर से समुद्री साझेदारी होगी मजबूत

उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से समुद्री सहयोग की जरूरत को समझता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन ‘सागर’ यानी सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन से आगे बढ़कर अब ‘महासागर’ यानी म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजन का विचार सामने आया है। यह दिखाता है कि भारत सिर्फ अपने क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक समुद्री साझेदारी को मजबूत करना चाहता है।

राजनाथ सिंह ने कहाा कि भारत नियमित रूप से मल्टीलेटरल नेवल एक्सरसाइजेज में हिस्सा लेता है। कॉर्डिनेटेड पेट्रोलिंग, एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन की निगरानी, हाइड्रोग्राफिक सहायता और चक्रवात जैसी आपदाओं के दौरान राहत कार्यों में भी भारत सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। उन्होंने कहा कि भारत एक विश्व-मित्र के रूप में क्षेत्र में रचनात्मक और भरोसेमंद भूमिका निभाता रहेगा। (MILAN 2026 Maritime Security)

उन्होंने मिलन 2026 को वैश्विक समुद्री समुदाय के भारत पर भरोसे का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा न्यायपूर्ण समुद्री व्यवस्था स्थापित करना चाहता है जो अंतरराष्ट्रीय कानून और नौवहन की स्वतंत्रता पर आधारित हो। (MILAN 2026 Maritime Security)

नेवी चीफ ने मिलन को बताया समुद्री महाकुंभ

मिलन 2026 उद्घाटन समारोह में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने भी मिलन को एक समुद्री महाकुंभ बताया। उन्होंने कहा कि यह ऐसा मंच है जहां दुनिया भर के मैरीन प्रोफेशनल्स एक साझा उद्देश्य के साथ इकट्ठा होते हैं। उन्होंने दोहराया कि आज की समुद्री चुनौतियां जटिल और सीमाओं से परे हैं, जिनका समाधान सहयोग और साझेदारी से ही संभव है।

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना प्रधानमंत्री के महासागर विजन से प्रेरित है, जो साझेदारी और साझा जिम्मेदारी पर आधारित है। भारतीय नौसेना अपने सभी साझेदार देशों को बराबरी का दर्जा देती है और मानती है कि हर देश अपनी अलग ताकत लेकर आता है। (MILAN 2026 Maritime Security)

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बराबरी और साझेदारी की भावना

नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय नौसेना अपने सभी समुद्री साझेदारों को बराबरी का दर्जा देती है। हर देश की अपनी खास ताकत होती है – चाहे वह अनुभव हो, भौगोलिक स्थिति हो या तकनीकी क्षमता। जब ये ताकतें एक साथ जुड़ती हैं, तो सामूहिक क्षमता बढ़ती है। इससे बदलती समुद्री चुनौतियों का सामना करने की ताकत भी मजबूत होती है। (MILAN 2026 Maritime Security)

तीन स्तरों पर काम करने की रणनीति

नौसेना प्रमुख ने बताया कि भारतीय नौसेना समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तीन स्तरों पर काम करती है।

इनमें वैश्विक स्तर पर भारत अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर समग्र समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देता है। इसमें कानून व्यवस्था, मानवीय सहायता, पर्यावरण संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन शामिल है।

वहीं, क्षेत्रीय स्तर पर भारत यह समझता है कि हर इलाके की जरूरत अलग होती है। इसलिए एक ही तरीका हर जगह काम नहीं करता। सहयोग को स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढालना जरूरी है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पिछले साल भारतीय नौसेना ने ‘इंडियन ओशन शिप सागर’ के रूप में एक जहाज को दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में तैनात किया। इसमें नौ देशों के 44 कर्मियों की मिलीजुली टीम शामिल थी। इसका मकसद अनुभव और जिम्मेदारी साझा करना था। (MILAN 2026 Maritime Security)

अब इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए ‘आईओएस सागर 2.0’ को इस साल अप्रैल में और बड़े स्तर पर तैनात किया जाएगा।

उन्होंने पिछले साल हुए ‘अफ्रीका–इंडिया की मैरीटाइम एंगेजमेंट’ अभ्यास का भी जिक्र किया। इस अभ्यास में पूर्वी अफ्रीका के देशों के साथ मिलकर व्यावहारिक सहयोग किया गया। इससे यह संदेश गया कि अगर इरादा मजबूत हो तो दूरी कोई बाधा नहीं बनती। (MILAN 2026 Maritime Security)

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पड़ोसी देशों के साथ प्राथमिकता

नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ यानी पड़ोसी देशों को प्राथमिकता देने की नीति भी समुद्री सुरक्षा में दिखती है। चाहे समन्वित पेट्रोलिंग हो या संकट के समय मानवीय सहायता, भारत हमेशा क्षेत्र में एक भरोसेमंद ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका निभाता है। (MILAN 2026 Maritime Security)

दो चरणों में होगी मिलन एक्सरसाइज

मिलन 2026 को दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहले चरण यानी हार्बर फेज में प्रोफेशनल डिस्कशंस, अंतरराष्ट्रीय समुद्री सेमिनार, विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श, सांस्कृतिक कार्यक्रम और शहर भ्रमण जैसी गतिविधियां शामिल हैं। इससे देशों के बीच आपसी समझ और संबंध मजबूत होते हैं।

दूसरे चरण यानी सी फेज में समुद्र में संयुक्त अभ्यास होंगे। इनमें एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, एयर डिफेंस, सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन और सामरिक अभ्यास शामिल हैं। इन अभ्यासों का मकसद नौसेनाओं के बीच तालमेल और सामूहिक तैयारी को मजबूत करना है। (MILAN 2026 Maritime Security)

नौ एशियान देशों के नौसेना प्रमुखों से मिले रक्षा मंत्री

मिलन के उदघाटन के दौरान रक्षा मंत्री ने नौ एशियान देशों के नौसेना प्रमुखों से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि एशियान भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति का महत्वपूर्ण स्तंभ है। साझा सुरक्षा ही क्षेत्रीय समृद्धि की नींव है। उन्होंने एशियान देशों को भारत की रक्षा तकनीक और आत्मनिर्भर भारत के तहत विकसित इकोसिस्टम का लाभ उठाने का निमंत्रण दिया।

उन्होंने आईएनएस विक्रांत और विशाखापत्तनम क्लास डिस्ट्रॉयर जैसे जहाजों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अब “बिल्डर नेवी” बन चुका है। यानी भारत अब सिर्फ जहाज खरीदने वाला देश नहीं, बल्कि खुद डिजाइन और निर्माण करने वाला देश है। (MILAN 2026 Maritime Security)

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  • हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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