📍नई दिल्ली | 14 Dec, 2025, 6:02 PM
MH-60R 2nd squadron: भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता को जबरदस्त बूस्ट मिलने वाला है। नौसेना 17 दिसंबर को गोवा स्थित आईएनएस हंसा में अपनी दूसरी एमएच-60आर यानी रोमियो हेलिकॉप्टर स्क्वाड्रन को कमीशन करेगी। इसका पहला स्क्वाड्रन आईएनएएस 334 ‘सीहॉक्स’ पहले कोच्चि के आईएनएस गरूड़ पर मार्च 2024 में कमीशन किया गया था। यह स्क्वाड्रन उस समय बनाया गया था जब शुरु में एमएच-60आर हेलिकॉप्टर्स भारत आए थे।
एमएच-60आर हेलिकॉप्टर की नई स्क्वाड्रन का नाम आईएनएएस 335 ‘ऑस्प्रेज’ रखा गया है। इनकी कमीशनिंग के मौके पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी भी मौजूद रहेंगे। यह कमीशनिंग भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण और ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। (MH-60R 2nd squadron)
The Indian Navy is set to commission INAS 335 (Ospreys), its second MH-60R helicopter squadron, on 17 Dec 2025 at INS Hansa, Goa, in the presence of CNS Adm Dinesh K Tripathi.
Packed with advanced sensors, avionics and weapons, the MH-60R brings a major boost to the Navy’s… pic.twitter.com/IFiqGLMOF7— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) December 14, 2025
इससे पहले नेवी चीफ एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने 4 दिसंबर की नेवी डे प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि दिसंबर 2025 में ही आईएनएस हंसा, गोवा में फुल स्क्वाड्रन कमीशन होगा। नौसेना की योजना तीन स्क्वाड्रन बनाने की है इनमें से दो को वेस्टर्न फ्लीट के लिए, एक ईस्टर्न के लिए तैनात कियाा जाएगा।
वहीं, आईएनएएस 335 स्क्वाड्रन के कमीशन होने से नौसेना की समुद्री निगरानी, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर और सतह पर मौजूद खतरों से निपटने की क्षमता को सीधा फायदा मिलेगा। एमएच-60आर हेलिकॉप्टरों को दुनिया के सबसे आधुनिक मैरीटाइम हेलिकॉप्टरों में गिना जाता है। (MH-60R 2nd squadron)
MH-60R 2nd squadron: एमएच-60आर हेलिकॉप्टर क्यों हैं खास
एमएच-60आर हेलिकॉप्टर को ‘रोमियो’ नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऑल-वेदर मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर है, जिसे खासतौर पर एंटी-सबमरीन वारफेयर यानी पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें आधुनिक सेंसर, एडवांस एवियोनिक्स और ताकतवर विपन सिस्टम लगा है। यही वजह है कि यह हेलिकॉप्टर ट्रेडीशनल एंड एसिमेट्रिकल दोनों तरह के खतरों से निपटने में सक्षम है। (MH-60R 2nd squadron)
ये हेलिकॉप्टर्स शिप्स (जैसे विक्रांत, विक्रमादित्य, डिस्ट्रॉयर्स) से ऑपरेट होते हैं, इसलिए एक स्क्वाड्रन के कुछ हेलिकॉप्टर्स अलग-अलग शिप्स पर एम्बार्क्ड रहते हैं।
भारतीय नौसेना ने साल 2020 में अमेरिका से 24 एमएच-60आर हेलिकॉप्टरों की खरीद का समझौता किया था, जिसकी कुल कीमत लगभग 2.4 अरब डॉलर थी। अब तक इनमें से 15 हेलिकॉप्टर भारत को मिल चुके हैं। सभी की डिलीवरी 2027 तक पूरी हो जाएगी। इनमें से कुछ हेलिकॉप्टर अभी अमेरिका में ही हैं, जहां भारतीय पायलटों और टेक्निकल स्टाफ को ट्रेनिंग दी जा रही है। (MH-60R 2nd squadron)
MH-60R 2nd squadron: पहले भी साबित कर चुके हैं क्षमता
रोमियो हेलिकॉप्टर पहले ही नौसेना के फ्लीट ऑपरेशंस में पूरी तरह इंटीग्रेट हो चुके हैं और कई मौकों पर अपनी उपयोगिता साबित कर चुके हैं। इन हेलिकॉप्टरों को वॉरशिप्स से ऑपरेट किया जा सकता है, जिससे समुद्र के बड़े इलाके में निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ जाती है। (MH-60R 2nd squadron)
इन हेलिकॉप्टरों में डिपिंग सोनार, मल्टी-मोड रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम लगे हैं, जो समुद्र के भीतर मौजूद पनडुब्बियों का पता लगाने में मदद करते हैं। इसके साथ ही ये हेलिकॉप्टर मार्क-54 टॉरपीडो और हेलफायर एयर-टू-सर्फेस मिसाइलों से लैस हैं। (MH-60R 2nd squadron)
MH-60R 2nd squadron: आईएनएस हंसा से मिलेगी पश्चिमी में बढ़त
ऑस्प्रेज स्क्वाड्रन को गोवा स्थित आईएनएस हंसा में तैनात किया जाएगा, जो पश्चिमी समुद्री तट पर नौसेना का प्रमुख एयर बेस है। यहां से अरब सागर और आसपास के समुद्री क्षेत्र में निगरानी और ऑपरेशनल गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। यह इलाका रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जाता है। (MH-60R 2nd squadron)
भारतीय नौसेना पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि वह हिंद महासागर क्षेत्र में हो रही हर गतिविधि पर नजर रखे हुए है। हाल के वर्षों में चीनी नौसैनिक और रिसर्च जहाजों की मौजूदगी इस क्षेत्र में बढ़ी है, ऐसे में रोमियो जैसे आधुनिक हेलिकॉप्टर नौसेना के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगे। (MH-60R 2nd squadron)
MH-60R 2nd squadron: पुराने हेलिकॉप्टरों की जगह ले रहे रोमियो
रोमियो हेलिकॉप्टर भारतीय नौसेना में लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे पुराने सी किंग हेलिकॉप्टरों की जगह ले रहे हैं। सी किंग हेलिकॉप्टर अब अपनी मूल भूमिका की तुलना में ज्यादा ट्रांसपोर्ट कार्यों में इस्तेमाल हो रहे थे। नए हेलिकॉप्टरों के आने से एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमता फिर से मजबूत हो रही है। (MH-60R 2nd squadron)
मेंटेनेंस और सपोर्ट पर भी फोकस
हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच रोमियो हेलिकॉप्टरों (MH-60R 2nd squadron) के लिए लगभग 7,995 करोड़ रुपये का फॉलो-ऑन सपोर्ट समझौता भी हुआ है। इसके तहत अगले पांच वर्षों तक इन हेलिकॉप्टरों के मेंटेनेस, रिपेयर और स्पेयर सपोर्ट की व्यवस्था की जाएगी। भारत में ही इंटरमीडिएट लेवल मेंटेनेंस फैसिलिटी स्थापित की जाएगी, जिससे ऑपरेशनल क्षमता और बढ़ेगी।





