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INS सुनयना बना ‘IOS सागर’, 16 देशों का दल 50 दिनों के मिशन पर, नौसेना प्रमुख बोले- सहयोग ही रास्ता

इस मिशन की खास बात यह है कि इसमें भारत के साथ-साथ 16 मित्र देशों के नौसैनिक भी जहाज पर सवार हैं। सभी देशों के प्रतिनिधि एक साथ मिलकर इस पूरे अभियान में हिस्सा लेंगे...

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📍नई दिल्ली | 2 Apr, 2026, 7:49 PM

IOS Sagar Mission: भारतीय नौसेना का ऑफशोर पेट्रोल वेसल आईएनएस सुनयना अब “आईओएस सागर” के रूप में एक खास अंतरराष्ट्रीय मिशन पर रवाना हो गया है। इस मिशन को मुंबई के नेवल डॉकयार्ड से हरी झंडी दिखाई गई। इस मौके पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने कहा कि दुनिया में बढ़ते तनाव और समुद्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच देशों के बीच सहयोग बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र अब सिर्फ व्यापार का रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा चुनौतियों का केंद्र बनता जा रहा है।

इस मिशन की खास बात यह है कि इसमें भारत के साथ-साथ 16 मित्र देशों के नौसैनिक भी जहाज पर सवार हैं। सभी देशों के प्रतिनिधि एक साथ मिलकर इस पूरे अभियान में हिस्सा लेंगे। (IOS Sagar Mission)

IOS Sagar Mission: आईओएस सागर का दूसरा संस्करण

नौसेना प्रमुख ने कहा कि यह उनके लिए गर्व का क्षण है कि आईओएस सागर के दूसरे संस्करण को हरी झंडी दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत का विजन साफ है, हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना और अपनी क्षमताओं का उपयोग सभी के हित में करना है।

उन्होंने प्रधानमंत्री के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की सोच हमेशा से यह रही है कि क्षेत्र में मिलकर काम किया जाए और साझा समुद्री क्षेत्र को सुरक्षित और स्थिर बनाया जाए। नौसेना प्रमुख ने कहा कि इसी सोच के तहत भारत लगातार क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा दे रहा है और आईओएस सागर उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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“बदल रहे वैश्विक हालात, असर सबसे पहले समुद्र में”

अपने संबोधन में एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि आज दुनिया एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां हालात तेजी से बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन बदलावों का असर सबसे पहले समुद्र में देखने को मिलता है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होरमुज जलडमरूमध्य में आई रुकावटों ने पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है।

नौसेना प्रमुख के अनुसार अब समुद्र में प्रतिस्पर्धा सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं रही। यह अब रेयर अर्थ मिनरल, क्रिटिकल मिनरल, नए फिशिंग एरिया और डेटा जैसे संसाधनों तक फैल चुकी है। (IOS Sagar Mission)

समुद्री अपराध और अवैध गतिविधियां बड़ी चुनौती

नौसेना प्रमुख ने यह भी कहा कि समुद्र में अवैध गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। पायरेसी, हथियारबंद लूट और ड्रग्स तस्करी जैसे खतरे अब ज्यादा जटिल हो गए हैं। नौसेना प्रमुख ने बताया कि पिछले साल हिंद महासागर क्षेत्र में करीब 3700 समुद्री घटनाएं दर्ज की गईं। वहीं 2025 में ड्रग्स की जब्ती एक अरब डॉलर से ज्यादा रही।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक अब नॉन-स्टेट एक्टर्स तक भी पहुंच रही है, जिससे इन खतरों से निपटना और चुनौतीपूर्ण हो गया है।

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि ऐसे समय में 16 देशों का एक साथ आना और इस मिशन में हिस्सा लेना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब अलग-अलग देश अपने संसाधन, अनुभव और क्षमता साझा करते हैं, तो इससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत होती है। यह पहल न सिर्फ हिंद महासागर क्षेत्र बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण है। उन्होंने इसे एक ऐसा मंच बताया जहां सहयोग, विश्वास और साझा उद्देश्य को आगे बढ़ाया जा रहा है।

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एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि इस मिशन में शामिल सभी लोग एक तरह से पूरे क्षेत्र के 2.7 अरब लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मिशन सिर्फ एक नौसैनिक अभियान नहीं है, बल्कि साझा जिम्मेदारी और सहयोग का प्रतीक है, जो हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित और स्थिर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

IOS Sagar Mission

मिशन करीब 50 दिनों तक चलेगा

आईओएस सागर मिशन को हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए शुरू किया गया है। यह मिशन करीब 50 दिनों तक चलेगा और इस दौरान जहाज दक्षिण-पूर्वी हिंद महासागर क्षेत्र के कई देशों का दौरा करेगा। इस जहाज पर अलग-अलग देशों के नौसैनिक मौजूद हैं, जो एक साथ ट्रेनिंग लेंगे और समुद्र में एक्सरसाइज करेंगे। इस दौरान संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण और आपसी संवाद के जरिए देशों के बीच तालमेल बेहतर होगा और एक-दूसरे की कार्यशैली को समझने का मौका मिलेगा। (IOS Sagar Mission)

किन-किन देशों में जाएगा जहाज

आईओएस सागर अपने मिशन के दौरान कई महत्वपूर्ण देशों के बंदरगाहों पर जाएगा। जहाज श्रीलंका के कोलंबो, थाईलैंड के फुकेट, इंडोनेशिया के जकार्ता, सिंगापुर, बांग्लादेश के चटगांव, म्यांमार के यांगून और मालदीव के माले जैसे स्थानों पर पहुंचेगा। इसके बाद यह मिशन कोच्चि में समाप्त होगा। हर पड़ाव पर नौसैनिकों के बीच प्रशिक्षण, चर्चा और अभ्यास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। (IOS Sagar Mission)

कोच्चि में मिली ट्रेनिंग का होगा इस्तेमाल

इस मिशन में शामिल विदेशी नौसैनिकों ने पहले कोच्चि में ट्रेनिंग ली है। अब वे उसी ट्रेनिंग का उपयोग समुद्र में करेंगे। जहाज पर किए जाने वाले अभ्यास से यह समझने में मदद मिलेगी कि अलग-अलग देशों की नौसेनाएं एक साथ कैसे काम कर सकती हैं। इससे भविष्य में संयुक्त ऑपरेशन करना आसान होगा। (IOS Sagar Mission)

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