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ब्रह्मोस से लैस स्टेल्थ वॉरशिप INS तारागिरी नौसेना में होगा शामिल, Project 17A का चौथा युद्धपोत 14 मार्च को होगा कमीशन

प्रोजेक्ट 17ए के तहत कुल 7 स्टेल्थ फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। इनमें से कुछ पहले ही नौसेना में शामिल हो चुके हैं, जबकि बाकी जहाज अलग-अलग चरणों में तैयार हो रहे हैं...

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📍नई दिल्ली/विशाखापत्तनम | 25 Feb, 2026, 12:34 PM

INS Taragiri Commissioning: आईएनएस अंजदीप के बाद भारतीय नौसेना 14 मार्च को अपने बेड़े में एक और आधुनिक वॉरशिप शामिल करने जा रही है। आईएनएस तारागिरी को विशाखापत्तनम में आयोजित समारोह में आधिकारिक रूप से कमीशन किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट 17ए के तहत तैयार नीलगिरी क्लास का चौथा स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे ईस्टर्न नेवल कमांड में शामिल किया जाएगा।

तारागिरी को पूरी तरह भारत में डिजाइन और तैयार किया गया है। इसे मुंबई स्थित मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने बनाया है और पिछले साल 28 नवंबर को नौसेना को सौंपा गया था। इस जहाज को तैयार होने में करीब 81 महीने का समय लगा, जो पहले बने जहाजों की तुलना में कम है। (INS Taragiri Commissioning)

INS Taragiri Commissioning: पुराने नाम को नई पहचान

प्रोजेक्ट 17ए यानी नीलगिरि क्लास के युद्धपोतों के नाम रखने की एक खास परंपरा भारतीय नौसेना में लंबे समय से चली आ रही है। इन जहाजों के नाम भारत की अलग-अलग पर्वत श्रृंखलाओं के नाम पर रखे जाते हैं। यह परंपरा नई नहीं है, बल्कि पुराने नीलगिरि क्लास जहाजों के समय से ही जारी है और आज भी उसी तरह निभाई जा रही है।

इसी वजह से इस क्लास के जहाजों के नाम जैसे नीलगिरि, हिमगिरि, उदयगिरि, द्रोणागिरि, विंध्यगिरि और महेंद्रगिरि रखे गए हैं। ये सभी नाम भारत की अलग-अलग पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं और देश की भौगोलिक पहचान को दर्शाते हैं। (INS Taragiri Commissioning)

इसी परंपरा के तहत नए युद्धपोत का नाम तारागिरी रखा गया है। यह नाम उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय क्षेत्र की एक पर्वत श्रृंखला से लिया गया है। तारागिरी कोई बहुत बड़ी रेंज नहीं है, लेकिन यह हिमालय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है और भारत की प्राकृतिक विरासत का प्रतीक है।

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तारागिरी नाम रखने के पीछे एक और महत्वपूर्ण कारण भी है। यह नया युद्धपोत पुराने आईएनएस तारागिरी का ही एक तरह से “पुनर्जन्म” है। पुराना आईएनएस तारागिरी एक लिअंडर क्लास फ्रिगेट था, जिसने 1980 से 2013 तक करीब 33 साल तक भारतीय नौसेना में सेवा दी थी। वह जहाज भी इसी तारागिरी पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया था।

अब नए युद्धपोत को वही नाम देकर उसकी पुरानी विरासत को आगे बढ़ाया गया है। भारतीय नौसेना में यह परंपरा रही है कि जो नाम पहले सफल और सम्मानित रहे हैं, उन्हें नए और आधुनिक जहाजों को दिया जाता है, ताकि उनकी पहचान और गौरव बना रहे। नया तारागिरी उसी नाम को आगे बढ़ाता है, लेकिन तकनीक और क्षमता के मामले में यह पूरी तरह आधुनिक है। इसे मल्टी-रोल फ्रिगेट के रूप में डिजाइन किया गया है, यानी यह एक साथ कई तरह के ऑपरेशन कर सकता है। (INS Taragiri Commissioning)

वजन लगभग 6,670 टन

यह जहाज करीब 149 मीटर लंबा है और इसका कुल वजन लगभग 6,670 टन है। इसमें करीब 225 से 226 कर्मियों की तैनाती की जा सकती है। जहाज में ऑटोमेशन का ज्यादा इस्तेमाल किया गया है, जिससे कम लोगों में भी यह आसानी से ऑपरेट हो सकता है।

इसकी रफ्तार 28 नॉट्स से ज्यादा है और यह लंबी दूरी तक बिना रुके ऑपरेशन कर सकता है। इसमें दो हेलीकॉप्टर रखने की सुविधा भी है, जिनमें ध्रुव, सी किंग या चेतक जैसे हेलीकॉप्टर शामिल हैं। (INS Taragiri Commissioning)

स्टेल्थ तकनीक की खासियत

आईएनएस तारागिरी में स्टेल्थ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह दुश्मन के रडार पर आसानी से दिखाई नहीं देता। इसकी डिजाइन इस तरह बनाई गई है कि इसका रडार सिग्नेचर कम हो और यह कम शोर पैदा करे। इससे यह समुद्र में दुश्मन की नजर से बचकर काम कर सकता है। तारागिरी को खास तौर पर समुद्र में उभरते खतरों से निपटने के लिए तैयार किया गया है। यह दुश्मन के जहाज, मिसाइल और पनडुब्बियों से लड़ने में सक्षम है। (INS Taragiri Commissioning)

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ताकतवर हथियारों से है लैस

इस युद्धपोत में कई आधुनिक हथियार लगाए गए हैं। इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल लगाई गई है, जो बहुत तेज गति से लंबी दूरी तक हमला कर सकती है। इसके अलावा इसमें एमआर-सैम एयर डिफेंस सिस्टम है, जो हवाई खतरों से सुरक्षा देता है।

जहाज में 76 मिमी की मुख्य तोप लगी है, जो समुद्र और जमीन दोनों पर हमला कर सकती है। इसके अलावा 30 मिमी की गन और 12.7 मिमी मशीन गन भी मौजूद हैं, जो नजदीकी खतरों से सुरक्षा देती हैं। पनडुब्बियों से निपटने के लिए इसमें टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट सिस्टम लगाए गए हैं। (INS Taragiri Commissioning)

आधुनिक रडार और सेंसर सिस्टम भी लगे

तारागिरी में एडवांस रडार और सेंसर सिस्टम लगाए गए हैं। इसमें मल्टी-फंक्शन रडार, सोनार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम शामिल हैं, जो दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। यह सिस्टम दुश्मन के जहाज, मिसाइल और पनडुब्बियों को ट्रैक करने में मदद करते हैं।

यह जहाज नेटवर्क-इनेबल्ड सिस्टम से जुड़ा है, जिससे यह अन्य युद्धपोतों और कमांड सेंटर के साथ रियल टाइम में जानकारी साझा कर सकता है। (INS Taragiri Commissioning)

डीजल इंजन और गैस टरबाइन दोनों

इस जहाज में सीओडीओजी यानी कंबाइंड डीजल ऑर गैस प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है। इसमें डीजल इंजन और गैस टरबाइन दोनों का इस्तेमाल होता है। इससे जहाज को तेज गति और बेहतर ईंधन क्षमता मिलती है। इसके साथ इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है, जो पूरे सिस्टम को कंट्रोल करता है। इसकी स्पीड 28 नॉट्स से ज्यादा है और यह लंबी दूरी तक बिना रुके ऑपरेशन कर सकता है। (INS Taragiri Commissioning)

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कम क्रू, ज्यादा ऑटोमेशन

तारागिरी की एक खास बात यह भी है कि इसमें ऑटोमेशन का ज्यादा इस्तेमाल किया गया है। इसकी वजह से कम क्रू में भी यह जहाज आसानी से ऑपरेट किया जा सकता है। इससे मानव संसाधन की जरूरत कम होती है और काम तेजी से होता है।

75 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी तकनीक

तारागिरी में करीब 75 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इस प्रोजेक्ट में 200 से ज्यादा भारतीय कंपनियों और एमएसएमई ने हिस्सा लिया है। इसके निर्माण से हजारों लोगों को रोजगार भी मिला है।

प्रोजेक्ट 17ए के तहत कुल 7 स्टेल्थ फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। इनमें से कुछ पहले ही नौसेना में शामिल हो चुके हैं, जबकि बाकी जहाज अलग-अलग चरणों में तैयार हो रहे हैं। ये सभी जहाज आधुनिक तकनीक से लैस हैं और भारतीय नौसेना की ताकत को बढ़ाने के लिए तैयार किए गए हैं। तारागिरी को ईस्टर्न फ्लीट में शामिल किया जाएगा, जहां यह अन्य आधुनिक युद्धपोतों के साथ ऑपरेशन करेगा। (INS Taragiri Commissioning)

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