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INS Aravali Commissioned: भारतीय नौसेना को मिला गुरुग्राम में नया नेवल बेस, समंदर की हर हरकत पर रहेगी नजर

गुरुग्राम में INS अरावली के कमिशन होने के साथ भारतीय नौसेना ने समुद्री सुरक्षा और सूचना निगरानी को नई मजबूती दी है। यह बेस हिंद महासागर क्षेत्र की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखेगा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाएगा...

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📍नई दिल्ली | 12 Sep, 2025, 5:30 PM

INS Aravali Commissioned: भारतीय नौसेना ने शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर के गुरुग्राम में नया नेवल बेस INS अरावली कमिशन किया। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी की मौजूदगी में आयोजित इस समारोह ने नौसेना की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को और मजबूत किया। अरावली पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखे गए इस बेस का क्रेस्ट पर्वत और उगते सूरज के प्रतीक से सजा है, जो अटल शक्ति और सतत सतर्कता का प्रतिनिधित्व करता है। इसका ध्येय वाक्य है सामुद्रिकसुरक्षायाः सहयोगं”, यानी सहयोग के माध्यम से समुद्री सुरक्षा।

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हिंद महासागर दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री क्षेत्रों में से एक है। यहां से दुनिया के लगभग एक-तिहाई बड़े कार्गो जहाज, आधे कंटेनर शिप और दो-तिहाई तेल के जहाज गुजरते हैं। इस कारण यह क्षेत्र न केवल व्यापारिक बल्कि सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। INS अरावली इसी रणनीतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

INS Aravali Commissioned: गुरुग्राम से समंदर की निगरानी

गुरुग्राम स्थित इस बेस का मुख्य काम भारतीय नौसेना के विभिन्न इनफॉरमेशन और कम्यूनिकेशंस सेंटर्स को सपोर्ट करना है। यहां से मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (MDA) को बढ़ावा मिलेगा, जो भारत और मित्र देशों की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा है।

इस बेस में दो प्रमुख केंद्र हैं इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट एंड एनालिसिस सेंटर (IMAC) और इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर- इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR)। दोनों मिलकर हिंद महासागर क्षेत्र में गुजरने वाले जहाजों पर निगरानी रखते हैं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पहचान कर कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं।

IFC-IOR: अंतरराष्ट्रीय सहयोग का केंद्र

INS अरावली में मौजूद IFC-IOR की स्थापना 2018 में हुई थी। इसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना और मित्र देशों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान करना है। यहां 25 देशों के 43 मल्टीनैशनल सेंटर की लाइव फीड उपलब्ध होती है। इस सेंटर ने 28 देशों के साथ 76 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संपर्क स्थापित किए हैं। इसमें ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, फ्रांस, जापान और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों के इंटरनेशनल लायजन ऑफिसर्स (ILO) भी शामिल हैं।

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INS Aravali Commissioned: समुद्री सुरक्षा के नए मानक

INS अरावली न केवल भारतीय नौसेना बल्कि पूरी दुनिया के लिए समुद्री सुरक्षा का नया केंद्र बनेगा। यहां से समुद्री डकैती, आतंकवाद, तस्करी, अवैध मछली पकड़ने और मानव तस्करी जैसी चुनौतियों से निपटने में सहयोग मिलेगा।

IFC-IOR का काम है, मित्र देशों को समय रहते चेतावनी देना, सूचनाओं को साझा करना और किसी भी घटना पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना।

INS Aravali Commissioned: IMAC की पैनी नजर

इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट एंड एनालिसिस सेंटर (IMAC) को भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी का नर्व सेंटर माना जाता है। इसके मॉनिटरिंग रूम में लगी विशाल स्क्रीन पर समुद्र में होने वाली हर गतिविधि लाइव दिखाई देती है। यह स्क्रीन केवल जहाजों की आवाजाही ही नहीं, बल्कि संभावित खतरों और असामान्य गतिविधियों का भी तुरंत संकेत देती है।

IMAC में इस्तेमाल हो रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा एनालिसिस तकनीक इसे और भी ताकतवर बनाती है। कुछ ही सेकंड में यह सिस्टम बता देता है कि समुद्र में कितने जहाज मौजूद हैं, वे कहां से आए हैं, कहां जा रहे हैं और उनकी गतिविधियां सामान्य हैं या संदिग्ध। इससे भारतीय नौसेना को समुद्री सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में बड़ी मदद मिलती है।

हर जहाज का रजिस्ट्रेशन नंबर, उसमें मौजूद क्रू की जानकारी और कार्गो का पूरा विवरण इस सिस्टम में तुरंत उपलब्ध हो जाता है। अगर कोई जहाज झूठा सिग्नल भेजकर या स्पूफिंग के जरिए अपनी असली पहचान छिपाने की कोशिश करता है, तो IMAC उसे तुरंत पकड़ लेता है।

भारत की 7,600 किलोमीटर लंबी समुद्री सीमा पर लगभग 90 तटीय रडार स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जो लगातार निगरानी रखते हैं। इसके अलावा, 89 ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम समुद्र के हर हिस्से पर नजर रखते हैं और वास्तविक समय में सूचना उपलब्ध कराते हैं।

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सिर्फ बड़े जहाज ही नहीं, बल्कि 20 मीटर से छोटी नौकाओं को भी ट्रैक करने के लिए ट्रांसपोडर सिस्टम लगाया गया है। देशभर में करीब 2.20 लाख से अधिक मछली पकड़ने वाली छोटी नावें इन ट्रांसपोडर से जुड़ी हुई हैं। इनके जरिए भी लगातार सिग्नल मिलते हैं, जो सैटेलाइट से होकर सीधे IMAC तक पहुंचते हैं।

इस तरह, IMAC के पास मौजूद यह एडवांस तकनीक भारतीय समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा को अभेद्य बनाती है। चाहे तटीय निगरानी हो, जहाजों की मूवमेंट पर नजर रखना हो या किसी भी संदिग्ध गतिविधि का तुरंत पता लगाना हो, यह सेंटर हर पल सक्रिय रहता है।

समुद्री गतिविधियों पर लाइव रिपोर्टिंग

INS अरावली से भारतीय नौसेना अपने चार प्रमुख जॉइंट ऑपरेशन सेंटर मुंबई, कोच्चि, विशाखापट्टनम और पोर्ट ब्लेयर से लगातार जुड़ी रहती है। यहां से हर जहाज और नाव की गतिविधि पर नजर रखी जाती है। खास बात यह है कि अब 20 मीटर से छोटी मछली पकड़ने वाली नावों पर लगाए गए ट्रांसपोडर भी सैटेलाइट के जरिए डेटा भेजेंगे, जिसे IMAC में देखा जा सकेगा।

सूत्रों ने बताया कि INS अरावली की स्थापना भारत के बढ़ते सामरिक महत्व और वैश्विक दृष्टिकोण को भी दर्शाती है। यह सिर्फ एक नेवल बेस नहीं बल्कि भारत की “सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी” का भी हिस्सा है। यहां से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की नौसैनिक क्षमताओं और सहयोग की भावना को मजबूत किया जाएगा।

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