📍नई दिल्ली/चेन्नई | 23 Feb, 2026, 5:58 PM
INS Anjadip Warship: भारतीय नौसेना अपनी ताकत को और मजबूत करने जा रही है। 27 फरवरी को चेन्नई पोर्ट पर एक खास समारोह में ‘अंजदीप’ वॉरशिप को भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। यह जहाज खास तौर पर दुश्मन की पनडुब्बियों यानी सबमरीन से निपटने के लिए बनाया गया है। इस जहाज के शामिल होने से भारत की समुद्री सुरक्षा, खासकर तटीय इलाकों में और ज्यादा मजबूत हो जाएगी।
INS Anjadip Warship: क्या है ‘अंजदीप’ और क्यों है खास
‘अंजदीप’ कोई सामान्य युद्धपोत नहीं है। यह एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट यानी ASW-SWC प्रोजेक्ट का हिस्सा है। आसान भाषा में समझें तो यह ऐसा जहाज है, जिसे खास तौर पर समुद्र के किनारे और उथले पानी में छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजने और खत्म करने के लिए तैयार किया गया है।
आज के समय में समुद्री युद्ध का बड़ा हिस्सा पानी के नीचे होता है। दुश्मन की सबमरीन चुपचाप आकर हमला कर सकती हैं। ऐसे में ‘अंजदीप’ जैसे जहाज बेहद जरूरी हो जाते हैं, जो इन छिपे खतरों को समय रहते पकड़ सकते हैं। (INS Anjadip Warship)
नाम क्यों है खास
इस जहाज का नाम कर्नाटक के कारवार तट के पास स्थित अंजदीप द्वीप के नाम पर रखा गया है। यह नाम भारतीय नौसेना के इतिहास से भी जुड़ा हुआ है, क्योंकि पहले भी आईएनएस अंजदीप नाम का एक जहाज था, जो पेट्या क्लास कोरवेट था और साल 2003 में सेवा से हटा दिया गया था। अब नया अंजदीप उसी नाम और परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नौसेना में शामिल हो रहा है। (INS Anjadip Warship)
क्यों कहा जाता है ‘डॉल्फिन हंटर’
इस जहाज को नौसेना में ‘डॉल्फिन हंटर’ भी कहा जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि यह असली डॉल्फिन का शिकार करता है, बल्कि यह पानी के अंदर तेजी से चलने वाली पनडुब्बियों को खोजने में माहिर है।
यह जहाज दुश्मन की सबमरीन को तीन स्टेप में पकड़ता है, पहले उसे ढूंढता है, फिर उसकी मूवमेंट को ट्रैक करता है और आखिर में उसे खत्म करने की क्षमता रखता है। (INS Anjadip Warship)
पूरी तरह से है स्वदेशी
‘अंजदीप’ को ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन के तहत कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने बनाया है। इसमें ज्यादातर सिस्टम और उपकरण भारत में ही विकसित किए गए हैं।
जो दिखाता है कि अब भारत सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं रहा, बल्कि खुद डिजाइन और निर्माण करने की क्षमता हासिल कर चुका है। (INS Anjadip Warship)
जहाज की क्या हैं खूबियां
यह जहाज करीब 77 मीटर लंबा है और इसका डिजाइन खास तौर पर तटीय इलाकों के लिए बनाया गया है। इसमें हाई-स्पीड वॉटर-जेट प्रोपल्शन सिस्टम लगा है, जिससे यह तेज रफ्तार से चल सकता है और जरूरत पड़ने पर तुरंत प्रतिक्रिया दे सकता है। भारतीय नौसेना का सबसे बड़ा वॉटर-जेट प्रोपेल्ड वारशिप है।
इसकी अधिकतम रफ्तार करीब 25 नॉट्स है, जो इसे तेजी से ऑपरेशन करने में सक्षम बनाती है। यह लंबे समय तक समुद्र में रहकर लगातार निगरानी और ऑपरेशन कर सकता है। वहीं अंजदीप का एंड्यूरेंस 1800 नॉटिकल माइल्स तक है। (INS Anjadip Warship)
Indian #Navy to commission #Anjadip, the third ASW Shallow Water Craft, at #Chennai on 27 Feb 2026. Built by GRSE, the indigenous warship strengthens coastal defence and submarine-hunting capability. #IndianNavy #AatmanirbharBharat #MaritimeSecurity #Defence pic.twitter.com/7Ed9CeKbMU
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) February 23, 2026
कौन-कौन से हथियार और सिस्टम लगे हैं
‘अंजदीप’ में आधुनिक और स्वदेशी हथियारों का मजबूत पैकेज लगाया गया है। इसमें ‘अभय’ नाम का हल माउंटेड सोनार लगा है, जो पानी के अंदर छिपी सबमरीन का पता लगाने में मदद करता है।
इसके अलावा इसमें लाइटवेट टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट्स लगे हैं, जो दुश्मन की पनडुब्बी को निशाना बना सकते हैं। यह जहाज सिर्फ हमला ही नहीं करता, बल्कि निगरानी और बचाव कार्यों में भी काम आता है। (INS Anjadip Warship)
इस जहाज में एडवांस्ड कम्युनिकेशन सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे यह दूसरे जहाजों और कंट्रोल सेंटर से लगातार संपर्क में रह सकता है। यह तटीय इलाकों की निगरानी यानी कोस्टल सर्विलांस करने में सक्षम है, साथ ही कम तीव्रता वाले समुद्री ऑपरेशन्स (LIMO), सर्च एंड रेस्क्यू (SAR) मिशन और जरूरत पड़ने पर समुद्र में माइन बिछाने जैसे काम भी कर सकता है।
यह जहाज खास तौर पर तटीय और उथले पानी वाले क्षेत्रों, यानी लिटोरल कॉम्बैट एनवायरनमेंट में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। ऐसे इलाकों में बड़े युद्धपोतों की तुलना में यह ज्यादा फुर्तीला और प्रभावी साबित होता है, जिससे दुश्मन की पनडुब्बियों पर नजर रखना और उन्हें रोकना आसान हो जाता है। (INS Anjadip Warship)
सिर्फ युद्ध नहीं, कई और काम भी करेगा
यह जहाज सिर्फ लड़ाई के लिए ही नहीं बनाया गया है। यह कोस्टल सर्विलांस यानी तटीय निगरानी, लो इंटेंसिटी मैरिटाइम ऑपरेशन और सर्च एंड रेस्क्यू जैसे काम भी कर सकता है।
अगर समुद्र में कोई दुर्घटना होती है या किसी जहाज को मदद की जरूरत होती है, तो यह जहाज तेजी से वहां पहुंच सकता है।
वहीं, आज के समय में जब भारत के आसपास के समुद्री इलाके काफी संवेदनशील हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में भारत को अपनी अंडरवॉटर सुरक्षा मजबूत करनी जरूरी है। ‘अंजदीप’ जैसे जहाज इस दिशा में बड़ा कदम हैं, जो तटीय इलाकों में सुरक्षा की पहली लाइन बनते हैं। (INS Anjadip Warship)
पूर्वी तट की सुरक्षा होगी मजबूत
अंजदीप को भारतीय नौसेना की पूर्वी नौसेना कमांड में तैनात किया जाएगा। इस समारोह की अध्यक्षता नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी करेंगे। यह जहाज ईस्टर्न नेवल कमांड के तहत काम करेगा, जो भारत के पूर्वी समुद्री इलाके की सुरक्षा संभालती है। इस जहाज के शामिल होने से तमिलनाडु, पुडुचेरी और बंगाल की खाड़ी के आसपास के इलाके की सुरक्षा और मजबूत होगी। यह जहाज खास तौर पर उन क्षेत्रों में काम करेगा जहां दुश्मन की गतिविधियों का खतरा ज्यादा रहता है। (INS Anjadip Warship)
बनाए जाने हैं कुल 16 जहाज
एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) प्रोजेक्ट के तहत कुल 16 जहाज बनाए जा रहे हैं। इनमें से 8 जहाज गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) बना रहा है, जो अर्णाला क्लास के हैं और इन्हें ईस्टर्न फ्लीट के लिए तैनात किया जाएगा। वहीं बाकी 8 जहाज कोचीन शिपयार्ड द्वारा बनाए जा रहे हैं, जो माहे क्लास के हैं और वेस्टर्न फ्लीट की ताकत बढ़ाएंगे।
इस प्रोजेक्ट के तहत गार्डन रीच पहले ही दो जहाज आईएनएस अर्णाला (जनवरी 2025) और आईएनएस अंद्रोथ को नौसेना में शामिल कर चुका है। इसी क्रम में अंजदीप को पिछले साल 22 दिसंबर को चेन्नई में भारतीय नौसेना को सौंपा गया था, जिसे अब औपचारिक रूप से कमीशन किया जा रहा है। (INS Anjadip Warship)
खास बात यह है कि साल 2026 भारतीय नौसेना के लिए बेहद अहम रहने वाला है, क्योंकि इस साल कुल 19 युद्धपोत नौसेना में शामिल किए जाने की योजना है। यह भारतीय नौसेना के इतिहास में एक साल में होने वाला सबसे बड़ा फ्लीट विस्तार माना जा रहा है।
इन नए जहाजों के शामिल होने के साथ ही पुराने अभय क्लास कोरवेट्स को धीरे-धीरे सेवा से हटाया जाएगा, जिससे नौसेना को अधिक आधुनिक और सक्षम प्लेटफॉर्म मिल सकेंगे। (INS Anjadip Warship)

